रश्मि एक सेक्स मशीन compleet

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raj..
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Re: रश्मि एक सेक्स मशीन

Unread post by raj.. » 22 Oct 2014 02:35


वो आसान पर बैठ कर अपनी टाँगें आगे फैला दिए. फिर मुझे अपनी गोद मे आने का इशारा किया. मैने उनके कमर के दोनो ओर अपने पैर रख कर उनकी कमर के उपर बैठने लगी. जब उनके तननाए लंड ने मेरी योनि को ष्पर्श किया तो मैने रुक कर अपने एक हाथ से उनके लिंग को अपनी योनि के उपर सेट किया और दूसरे हाथों की उंगलियों से अपनी योनि की फांकों को अलग किया. फिर मैं उनकी गोद मे बैठ गयी. उनका लंड सरसरता हुया मेरी योनि के अंदर घुस गया. मैने अपनी टाँगें सिकोड कर उनकी कमर के पीछे एक दूसरे के साथ लप्पेट ली.



हम दोनो एक दूरे को चूमने लगे. वो अपने होंठों को मेरे चेहरे पर फिरा रहे थे. मैं भी उन्हे बेतहासा चूम रही थी. उनके हाथ मेरी बगलों से होते हुए मुझे अपने सीने पर जाकड़ रखे थे. मैं अपने निपल्स को उनके बालों भरे सीने पर रगड़ने लगी. मेरे निपल जब उनकी बालों भरी खुरदूरी छाती से रगड़ खाती तो मेरे पूरे बदन के रोए उत्तेजना मे काँटों की तरह खड़े हो जाते.



उन्हों ने मेरी बगलों के नीचे अपनी हथेलिया लगा कर मुझे थोड़ा उठाया. तो उनका लिंग मेरी योनि से बाहर निकलने लगा. जब उनके लिंग का सिर्फ़ टिप ही मेरी योनि के अंदर था तब उन्हों ने वापस मुझे उठाए हुए हाथों को ढीला छ्चोड़ दिया. मैं वापस धम्म से उनके लिंग पर बैठ गयी और उनका लिंग मेरी योनि को चीरता हुया अंदर धँस गया. अगली बार मैने भी अपनी टाँगों पर अपने बदन का कुच्छ वजन डाल कर उनको इस आसान मे चोदने मे मदद करने लगी.



कुच्छ देर तक उनके साथ इस आसान मे चुदाई का मज़ा लेने के बाद उन्हों ने मुझे उठाया और वहीं पर मुझे चौपाया बना कर मेरे पीछे से अपने लिंग को योनि मे ठोक दिया. फिर अगले दस मिनूट तक बड़ी तेज रफ़्तार से मेरी योनि को ठोकते रहे. मैं अपने सिर को झुका कर अपने उच्छलते हुए स्तनो को देख देख कर मज़ा ले रही थी.



मैं एक के बाद एक कई बार झाड़ चुकी थी मगर वो थे कि उनकी रफ़्तार मे किसी तरह की कोई कमी दिखाई नही दे रही थी. लगभग दस मिनिट तक इस तरह चोदने के बाद वो पल भर को रुके. इस मौके का फयडा उठा कर मैने उन्हे आसान पर लिटा दिया और अबकी बार मैं उन पर चढ़ बैठी. वो नीचे लेटे हुए थे और मैं उनकी कमर पर सवार होकर उनके लिंग को अपनी योनि के अंदर बाहर कर रही थी. मैने अपनी योनि के मसल्स से उनके लिंग को बुरी तरह जाकड़ रखा था और उस अवस्था मे मैं उनके लिंग को दूह रही थी. मेरे बाल मेरे चेहरे के उपर बिखरे गुए थे. हम दोनो के बदन पूरी तरह पसीने से लथपथ थे. मैं उन्हे तेज रफ़्तार से चोद रही थी. उनके हाथ मेरे स्तनो को सहला रहे थे. मगर इससे मेरा दिल नही भर रहा था. मैं तो चाह रही थी कि वो मेरे दोनो स्तनो को इतना मसलें की उनके निशान मुझे कम से कम अगले एक हफ्ते उनकी याद दिलाते रहें.



“ म्‍म्म्मम स्वामी…..अया….हा..हा….हा..मस्

लो…आआआहह माआ…..आऔर ज़ोर से मस्लो. नहियीई…..हां हाआँ इतना मस्लो की खून निकल आए…..” मैं स्वामी जी को और जोश दिला रही थी. वो मेरे दिल की बात समझ गये और मेरे स्तनो के साथ बड़ी कठोरता से पेश आए. मेरे दूधिया रंग के स्तन लाल सुर्ख हो गये थे. उन पर नीली नीली धारियाँ दिखाई दे रही थी.

raj..
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Re: रश्मि एक सेक्स मशीन

Unread post by raj.. » 22 Oct 2014 02:36



तभी एक झटके से उन्हों ने मुझे अपनी कमर से उठा कर अलग किया. मैं समझ गयी कि अब उनके लिंग से अमृत की बारिश होने वाली है. मैने झट उनसे अलग हो कर उनके लिंग को अपने मुँह मे भर लिया. कुच्छ ही देर मे उनके लिंग से गाढ़ा गाढ़ा खीर निकल कर मेरे मुँह मे समाने लगा. उनके लिंग से तेज़ी से इतना ज़्यादा वीर्य निकला की मैं उन्हे अपने मुँह मे संहाल नही पाई और वो क पतले सूत के रूप मे मेरे होंठों के कोनों से छलक कर बाहर आने लगे और होंठों के कोनो से चिपक कर झूलने लगे. मैने उनके वीर्य को प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया और उनके सीने पर सिर रख कर लेट गयी. तूफान के गुजर जाने के बाद होने वाली शान्ती वापस कमरे मे फैल गयी. वो बड़े प्यार से मेरे बालों मे अपनी उंगलिया फिरा रहे थे. मैं उनके सीने पर अपने दाँत गाड़ने लगी. मेरे हाथ उनके ढीले पड़े लिंग को टटोल रही थी.



“ बस एक बार? दोबारा नही करोगे?” मैने अपने चेहरे को उठा कर अपनी ठुड्डी को उनके सीने पर रखते हुए पूछा.



“ इतनी भूख भी अच्छि नही है देवी. इससे मनुश्य का मन डोलने लगता है. हर कार्य एक सीमा मे बँध कर रहे तब तक ही ठीक है. जिस्म की भूख भी पेट की भूख की तरह ही होती है रश्मि. जितनी भूख लगे उससे थोड़ी सी कम खाओ. देखना तुम्हारी भूख कभी ख़त्म नही होगी. और जब तुमने ज़रूरत से ज़्यादा खाना शुरू किया तो खाने की इच्च्छा समाप्त होने लगेगी.” उन्हों ने मुझे बड़े प्यार से मना कर दिया. उनकी बोली मे इतनी मिठास रहती है कि उनकी ज़ुबान से निकला हर कथन उनके शिष्यों के लिए आदेश होता है.



मैने चुपचाप सिर झुका कर उनकी बात मान ली. मैने उनका आशीर्वाद लिया और अपना गाउन पहन कर बाहर आ गयी. बाहर दरवाजे पर ही रजनी मेरे घर से पहन कर आए कपड़े थामे मिल गयी. वो मेरी ओर देख कर मुस्कुरा दी.



रजनी ने ही आगे बढ़ कर मुझे मेरे कपड़े पहनाए. मेरा पूरा बदन दुख रहा था और थकान भी हो रही थी इसलिए उसने एक शिष्या को बुलाया जिसने मुझे मेरी कार के बॅक सीट पर बिठा कर मुझे मेरे घर तक छ्चोड़ आया.



घर पहुँच कर देखा कि मेरे पति जीवन लाल काम पर जा चुके थे इसलिए मैं बच गयी. सासू जी ने मुझसे मेरी ऐसी हालत के बारे मे पूछा तो मैने बहाना बना दिया कि रात मेरी तबीयत खराब हो गयी थी. बड़ी मुश्किल से वहाँ के एक शिश्य को घर छ्चोड़ने के लिए राज़ी कर वापस लौटी हूँ. बेचारी सीधी साधी महिला मेरी बात को सच मान कर चुप रह गयी.



मैं घर आकर खूब नहाई और खाना खाकर जम कर नींद ली. बच्चा रोने लगा तो अपने बच्च्चे को बॉटल से दूध पिलाया. कुच्छ बचा ही नही था उसके लिए. सारा आश्रम तो पी गया था मेरे दूध की एक एक बूँद. मेरे दोनो दूध की बॉटल्स खाली थीं. शाम तक एक दम फ्रेश हो गयी थी. दो दिन के मंथन से मेरी चूत मे जो खलबली मची हुई थी वो भी काफ़ी हद तक शांत हो चुकी थी. मैं किसी घरेलू महिला की तरह बन संवर कर माथे पर सिंदूर और गले के मन्गल्सुत्र को ठीक कर अपने पति के आने का इंतेज़ार करने लगी. इस वक़्त कोई मुझे देखता तो उसे विस्वास ही नही होता कि मैं वही महिला हूँ जो आश्रम मे सेक्स के खेल मे व्यस्त थी. जिसने एक दिन मे जाने कितने लोगो के लंड की प्यास बुझाई थी. कितने लोगों का वीर्य अपनी कोख मे भरा था.
दोस्तो कहानी अभी बाकी है पढ़ते रहिए राज शर्मा की कामुक कहानियाँ आपका दोस्त राज शर्मा
क्रमशः............


raj..
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Re: रश्मि एक सेक्स मशीन

Unread post by raj.. » 22 Oct 2014 02:36

रश्मि एक सेक्स मशीन पार्ट -28

गतान्क से आगे...

शाम को जब मेरे पति घर आए तो मैं खुशी से चहक रही थी. मैने उन्हे अपने इंटरव्यू के बारे मे सब बताया. हां सिर्फ़ इंटरव्यू के बारे मे ही, लेकिन अपने संभोग के खेल के बारे मे कुच्छ भी नही बताया. मैने उनके सामने आश्रम, स्वामी जी और
वहाँ के उन्मुक्त वातावरण के बारे मे तारीफों के पुल बाँध दिए. वो भी मेरी बातों से काफ़ी प्रभावित नज़र आने लगे थे. मेरे पति जीवन भी काफ़ी रंगीन मिज़ाज आदमी थे. उनके लिए तो उस तरह का महॉल एक नया आनंद प्रदान करने वाला था.



मैने उन्हे बताया कि मैं स्वामी जी की शिष्या बन गयी हूँ. मैने उनको गुरु मान लिया है. उन्हों ने अपनी छत्र छाया मे मुझे ले लिया है. वो ये सुन कर मुस्कुरा दिए.



“अचानक ही इस तरह का डिसिशन लेने की कोई वजह?” उन्हों ने मुझे चिकोटी काटते हुए आगे कहा, " क्या बात है भाई तुम तो इन सब से बहुत दूर रहती थी? तुम्हे तो इन ढोंगी गुरु टाइप के आदमियों से सख़्त चिढ़ थी फिर इस गुरु जी के चक्कर मे कैसे पड़ गयी?"

"नहीं मेरे गुरुजी वैसे नहीं हैं. गुरु त्रिलोकनांदजी से एक बार मिलोगे तो तुम्हारी भी धारणा बदल जाएगी. गुरुजी सबसे अलग हैं. तुम भी चलना किसी दिन मेरे साथ तो तुम भी बाँध कर रह जाओगे उस वातावरण से."


"एम्म्म देखेंगे, ऐसा क्या है तुम्हारे इस त्रिलोकनंद स्वामी जी मे. नाम बहुत सुन रखा है उनका. कुच्छ रसिक टाइप का आदमी है शायद." उन्हों ने मुझे छेड़ते हुए पूछा, “ इतनी खूबसूरत और सेक्सी शिष्या को पाकर तो निहाल हो गये होंगे तुम्हारे गुरु जी. तुमने अपने रूप और सुंदरता के तीर चला चला कर उन्हे घायल कर दिया होगा. बेचारे! च्च्च….”



“ तुमने मुझे छेड़ना बंद नही किया तो मारूँगी अभी डंडे से.” मैने गुस्सा दिखाते हुए कहा, “ गुरु जी से एक बार मिलोगे तो मुग्ध हो जाओगे. उनकी वाणी उनका स्वाभाव और वहाँ का वातावरण तुम्हारे बदन को रोम रोम कर देगा. मैं ही कौनसी मानती थी इन गुरु और साधुओं को मगर आज मैं तो पूरी तरह दीवानी हो गयी हूँ उनके प्यार मे.” मैने उनको नही बताया की गुरुजी और उनके आश्रम का ज़िक्र आते ही मेरा पूरा बदन सनसनाने लगता है और. मेरे टाँगों के जोड़ पर गीला पन महसूस होने लगता है.