बाली उमर की प्यास compleet

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raj..
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Re: बाली उमर की प्यास

Unread post by raj.. » 11 Dec 2014 15:57

बाली उमर की प्यास पार्ट--42

गतान्क से आगे..................

"हॅपी ब'डे!" सुबह सोते हुए अचानक पिंकी ने अंजलि को पकड़कर झकझोर सा दिया... देर रात तक जागने रहने के कारण अंजलि जागने के बाद भी उनीनदी सी थी...,"उन्ह.. क्या है? थोड़ी देर और सोने दे ना...!" उसने कसमसा कर कहा.....

"अरे.. आज तेरा ब'डे है.. चल उठ जल्दी...!" पिंकी ने अंजलि की नींद तोड़ने के लिए उसके पेट पर अपनी कोहनी रख कर दबा दी...

"ऊई मम्मी... क्या करती है यार...?" अंजलि ने च्चटपटा कर उसकी कोहनी हटाई और बैठ कर अपनी आँखें मसल्ने लगी...

"कितने साल की हो गयी तू?" पिंकी ने पूचछा...

"अठारह की... क्यूँ?" अंजलि ने उसको अपनी उमर बता कर पूचछा....

"कुच्छ नही.. बस ऐसे ही पूचछा है..." पिंकी ने कहा और मुस्कुरा दी...

"ये कहाँ गयी...?" अंजलि ने अपनी साइड में खाली बिस्तेर देख कर पूचछा...

"पता नही... यहीं होगी बाहर... तुझे पता है.. सुबह सारी लड़कियों को ग्राउंड में इकट्ठा करते हैं... हमें कोई जगाने ही नही आया... तू सो रही थी, इसीलिए मैं भी नही गयी...!" पिंकी ने बताया...

"पिंकी!" अंजलि ने उसकी बात सुन'ने के बाद कहा..,"यार, मुझे भी बहुत बुरा लगा था जब उसने तुझे कमर दबाने को कहा... हम अपना कमरा चेंज कर लेंगे...!"

"तो क्या हो गया.. मुझसे बड़ी हैं.. एक आध बार काम बोल भी देंगी तो कर दूँगी... वैसे ये कमरा सब कमरों से अच्च्छा है... मैं इस कमरे में नही होती तो मेरे साथ भी दीदी कल ऐसा ही करती ना...?" पिंकी ने मन मसोस कर कहा....

"तू तो सो गयी थी ना...?" अंजलि ने हैरत से पूचछा.....

"हां... सुबह मैं बाहर निकली तो कल वाली लड़कियों में से एक ने बताया कि उनके साथ बहुत बेकार बातें की थी दीदी ने... 'वो' नही रहेगी यहाँ.... ऐसा बोल रही थी... एक बात पूच्छून...?"

"हाँ... पूच्छ...!"

"तुम वो... वो डाइयरी क्यूँ लिख रही हो?" पिंकी ने पूचछा तो अंजलि के होश उड़ गये...

"सीसी..कौनसी डाइयरी?"

"वही.. जो तेरे बॅग में रखी है... तेरा सामान निकाल कर अलमारी में रख रही थी तो मुझे मिली..."

"त्त..तूने 'वो' पढ़ ली?" अंजलि हड़बड़ा गयी...

"थोड़ी सी पढ़ी थी... तुमने उसमें पता नही कैसी कैसी गंदी बातें लिख रखी हैं... मैने बीच में ही छ्चोड़ दी...." पिंकी मुस्कुरकर बोली...

"मैं बताउन्गि तुझे...! कहाँ है मेरी डाइयरी...." अंजलि तुनक सी गयी....

"मैने च्छूपा दी.. बाद में पढ़ कर दूँगी.... हे हे हे..."

"देख.. चुपचाप 'वो' डाइयरी दे दे... वरना मैं...." अंजलि अपनी बात पूरी करती.. उस'से पहले ही दरवाजे पर एक लड़की आकर खड़ी हो गयी...,"पिंकी कौन है.. उसके गार्डियन आए हैं नीचे....!"

"पर... पापा तो कल आने थे..." पिंकी कहकर उठी और खुशी से झूमते हुए अपनी चप्पल ढूँढने लगी....

"रुक.. मैं भी तो आ रही हूँ...!" पिंकी को बाहर भागते देख अंजलि भी झट से उठी और अपना मुँह धोने लगी....

"आ जाओ.. मैं नीचे ही हूँ..." पिंकी ने एक पल ठिठक कर कहा और फिर भाग गयी....

*********************************8

"तुम...?" हॅरी को सामने पाकर पिंकी का बुरा हाल हो गया था.. गेस्ट रूम में हॅरी कुर्सी पर बैठा हुआ उसको देख कर मुस्कुरा रहा था...,"क्यूँ? तुम्हे खुशी नही हुई?"

"न्नाही.. ववो.. मैं तो बस... तुम मुझसे मिलने कैसे आ गये... यहाँ तो मम्मी पापा ही मुझसे मिल सकते हैं बस... और आज तो सॅटर्डे है... आज के दिन भी मिल सकते हैं क्या?" पिंकी हड़बड़ा कर बोली....

"मैं तो किसी और काम से आया था... प्रिन्सिपल मेडम से मिलने... सोचा... तुमसे भी मिलता चलूं...!" हॅरी प्यार से उसके चेहरे को निहारता रहा..,"आओ बैठो ना...!"

आअस्चर्य और झिझक के मिले जुले भाव पिंकी के चेहरे पर देखे जा सकते थे.. तभी अंजलि भागती हुई गस्ट रूम में घुसी और हॅरी को वहाँ पाकर वापस पलट गयी....

"म्‍मैइन.. 2 मिनिट में आ जाउ?" पिंकी हॅरी के सामने खुद को रात के कपड़ों में देख शर्मा रही थी....

"नही.. अभी तो मुझे जल्दी है... तुम बस दो मिनिट बैठ जाओ...!" हॅरी ने उसको अपने पास आने का इशारा किया....

"ऐसे ही जाना था तो मुझे क्यूँ बुलाया यहाँ....?" पिंकी ने मुँह बना लिया...

"एक 'किस' लेने के लिए... दे दो ना?" हॅरी शरारत करता हुआ बोला....

हॅरी के मुँह से सीधी बात सुनकर शर्म से पिंकी के गाल गुलाबी हो गये...," ऐसी बात मत करो.. मैं चली जाउन्गि..." पिंकी अपनी झिझक च्छुपाने के लिए उसकी तरफ कमर करके खड़ी हो गयी....

हॅरी चुपके से उठा और दरवाजा बंद करके वहीं अपनी कमर सटा कर खड़ा हो गया,"ऐसे कैसे चली जाओगी... एक 'किस' तो तुम्हे देनी ही पड़ेगी आज!"

बंद कमरे में एक बार फिर हॅरी के सामने खुद को पाकर पिंकी का कुँवारा यौवन मचल उठा... नज़रें उठाकर उसने क्षण भर के लिए हॅरी से नज़रें चार की और फिर उसके लब थिरक उठे...,"ंमुझे जाने दो ना... डर लग रहा है.. कोई आ जाएगा...."

"तुम इधर तो आओ एक बार..." हॅरी ने उसकी और अपने हाथ फैलाए...

पिंकी ने छलक्ते यौवन को संभालने की कोशिश करते हुए एक हाथ छातियो को च्छूपाते हुए अपने चेहरे पर रखा और नज़रें झुकाए हुए रेंगती हुई सी उसके पास जा पहुँची..,"क्क्या?"

"एक बार अपने होंटो पर होन्ट रखने दो ना जान!" हॅरी ने उसकी कलाई को पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया.... प्रतिरोध की गुंजाइश ही नही बची थी... पिंकी का बदन हॅरी की बाहों के दायरे में सिमटा हुआ था... हॅरी के दोनो हाथ पिंकी की कमर पर थे और पिंकी के दोनो हाथ लज्जा वश अपनी और हॅरी की छाती के बीच...

"नही.. होंटो पर नही प्लीज़... मुझे..!" अपनी उखड़ी साँसों को नियंत्रित करने की कोशिश करते हुए पिंकी ने अपना चेहरा उठा कर आँखें बंद कर ली... भला ये रज़ामंदी नही तो और क्या था... हॅरी ने उसको आगे कुच्छ बोलने ही नही दिया और थोड़ा झुक कर पिंकी के रसीले आधारों पर अपने होन्ट टीका दिए...

"अया..." पिंकी बावली सी होकर कराह उठी... हॅरी के हाथ जैसे ही नीचे सरकते हुए उसके नितंबों पर जाकर टीके.. काम तृष्णा बुझाने की ललक ने पिंकी को अपनी आइडियां उपर उठा अपने हाथों की दीवार को दोनो के बीच से अलग करके हॅरी के गालों को थाम लेने पर राज़ी कर ही लिया.... अपनी उभरती हुई चूचियो को हॅरी के सीने में धंसता हुआ पाकर पिंकी का रोम रोम दाहक उठा... नितंबों पर हॅरी के हाथों की जकड़न ने ऐसी आग लगाई की पिंकी सिसक उठी... उसके ऐसा लगा जैसे यही जन्नत है... नितंबों, चूचियो और आधारों के स्पर्श का असर जाने कैसे पिंकी की योनि तक जाकर उसको पिघलने लगा...

पूरे 2 मिनिट तक पिंकी के मन-बदन को झकझोर कर रख देने वाले अहसास के बाद जैसे ही हॅरी उस'से अलग हुआ, पिंकी अजीब सी नज़रों से उसको देखने लगी.. मानो पूच्छ रही हो,"रुक क्यूँ गये?"

"तुम कितनी मीठी हो पिंकी? मैं इस चूमबन को जिंदगी भर नही भुला पाउन्गा... तुम्हे कैसे लगा...?" हॅरी ने पूचछा तो पिंकी जैसे होश में आई... शरमाई और घबराई हुई सी पिंकी ने एक बार फिर नजरारें चुरा ली...,"अब तुम चले जाओगे क्या?"

"हां.. जाना पड़ेगा.. यहाँ तुम्हारे साथ तो नही रह सकता ना...? मौका मिलते ही फिर आउन्गा...!"

"कब?" पिंकी के सवाल में कुच्छ ऐसा भाव था.."जल्दी आना!"

"जल्द ही... मैं तो यहाँ आता रहता हूँ...!" हॅरी ने दरवाजा खोल दिया...,"कोई प्राब्लम हो तो बता देना...!"

"अपना... अपना नंबर. दे दो ना... मैं फोन करूँगी...!" पिंकी अब भी चेहरा झुकाए बोल रही थी.. नज़रें मिलना उसको दुश्वार लग रहा था...

"नंबर...?... अच्च्छा लिख लो... फोन तो करोगी ना...?" हॅरी मुस्कुरकर बोला....

"हां... एक दीदी के पास मोबाइल है.. उस'से मिस कॉल करूँ तो तुम कर लेना...!" पिंकी ने हॅरी से पेन लेते हुए अपने हाथ पर नंबर. लिख लिया....

"तुम उसका ही नंबर. दे दो.. मैं खुद कर लूँगा...."

"मेरे पास नंबर. नही है उसका... मैं शाम को फोन करूँगी...!"

"ठीक है.. अब मैं चलूं...?" हॅरी ने वापस जाकर अपना बॅग उठाया....

पिंकी ने सकुचते हुए हॅरी को देखा और फिर अपनी गर्दन हिला दी... हॅरी के जाने के बाद भी काफ़ी देर तक वह गुमसूँ सी उस जगह को देखती रही जहाँ वो कुच्छ देर पहले अपने 'यार' की बाहों में थी....

"अयाया!" पिंकी ने काफ़ी देर बाद एक लंबी साँस ली और ग्वेस्टर्म से निकल गयी....

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"ययए किसलिए आया था...? क्या बात हुई?" अंजलि उसका चेहरा पढ़ने की कोशिश करती हुई बोली....

"ये.. बड़ी मॅ'म को जानता है... उसी के पास आया था...!" पिंकी की आँखें चमक उठी...

"तुझसे क्या कह रहा था... क्या बात हुई..? तुमने दरवाजा क्यूँ बंद किया था एक बार...?" अंजलि अधीर हो रही थी.. कुच्छ मसालेदार सुन'ने को...

"कुच्छ नही.. उसने ही किया था जान बूझ कर.. 'क़िस्सी' माँग रहा था..."

"फिर.. तूने दी या नही..."

"ले ली उसने... मैं तो मना कर रही थी.. वो माना ही नही..." पिंकी शर्मा गयी...

"कहाँ पर?" अंजलि खुश होकर हंस दी...

"आए... तुम पिंकी हो ना?" दरवाजे से अचानक अंदर आई सीमा कुच्छ हड़बड़ी में लग रही थी....

"आ...हां दीदी!" पिंकी अचानक संभलते हुए बोली....

"तुमने पहले क्यूँ नही बताया यार...!" सीमा उसके पास आकर उसकी कमर पर हाथ रख कर बैठ गयी....

"बताया तो था दीदी.. पर क्यूँ पूच्छ रही हो?" पिंकी ने अचकचा कर पूचछा...

"तुम तो मेडम की ख़ासमखास लगती हो यार... मेडम ने तुम्हारा खास ध्यान रखने को बोला है....!"

"अच्च्छा... ववो.. हॅरी ने बोला होगा...!" पिंकी खुशी से झूम उठी...

"नही.. हॅरी कौन? मुझे तो मेडम ने बुलाकर बोला है!" सीमा सफाई देती हुई बोली....

"आपको नही दीदी.. हॅरी ने बड़ी मॅ'म को बोला होगा.. मेरा ध्यान रखने को...!"

"हूंम्म.. अब मुझे आरती को वापस बुलाना पड़ेगा... तुम दोनो अड्जस्ट कर लॉगी ना उसके साथ...?" सीमा ने दोनो की ओर बारी बारी से देखते हुए सवाल किया...

"हाँ.. पर उसको क्यूँ बुला रही हो.. '13' नंबर. वालियों ने टिकने नही दिया क्या उसको..!" अंजलि ने सवाल किया....

"अरे 13 नंबर. वालियों की.... मुझे अपने लिए भी तो चाहिए ना काम करवाने के लिए... तुम दोनो को तो कह नही सकती...!" सीमा मुस्कुरकर बोली और फिर अंजलि का हाथ पकड़ लिया..,"आज चलना है क्या..?"

"कहाँ?" अंजलि ने पूचछा तो पिंकी भी गौर से सीमा की ओर देखने लगी....

"वहीं यार... बोला था ना कल...!"

"पर कल तो चाचा जी आने वाले हैं..... आज कैसे?"

"कहाँ जा रहे हो.. मुझे भी तो बताओ ना...?" पिंकी ने उत्सुक होकर पूचछा...

"अरे सुबह तक वापस आ जाएँगे.. चिंता मत कर तू... आज खास प्रोग्राम है... चलना है तो बोल.... एक और लड़की चल रही है...?!" सीमा पिंकी के सवाल को नज़रअंदाज करते हुए बोली....

"मैं आपको थोड़ी देर मैं बता दूँगी दीदी...!" अंजलि असमन्झस में पड़ गयी थी...

"ठीक है... सोच कर बता देना... पर ऐसा मौका फिर नही आएगा..." सीमा ने कहा और अपने बालों को झटकती हुई कमरे से बाहर चली गयी....

"कहाँ जा रही है..? मुझे भी तो बता ना?" पिंकी जान'ने को व्याकुल हो उठी....

"किसी को बताएगी नही ना तू?" अंजलि ने पूचछा....

"आज तक बताई है कोई बात?" पिंकी ने अंजलि को घूरा....

"नही पर.... 'वो' ये मुझे हॉस्टिल से बाहर घुमा कर लाने की बोल रही है... रात को...!" अंजलि ने बता ही दिया....

"तू पागल हो गयी है क्या? रात को हॉस्टिल से बाहर... वो भी 'ऐसी लड़की के साथ... क्या पता कहाँ फँसा देगी तुझको...!" पिंकी ने गुस्से से अंजू को लताड़ सी लगाई....

"ऐसा कुच्छ नही होगा... रात रात की तो बात है.. सुबह तक वापस आ जाउन्गि मैं...!" अंजलि ने समझाने की कोशिश की....

"पर क्यूँ जा रहे हो... ये तो बताओ.. मैं भी चालूंगी...!"

"तू नही पागल... ना!"

"क्यूँ? तुम जा रही हो तो मैं क्यूँ नही.. मैं भी चालूंगी तेरे साथ...!"

"समझा कर यार... आज मैं जाकर देख लेती हूँ... फिर कभी चल पड़ना...." अंजलि ने समझाने की कोशिश की....

"पर.. जा क्यूँ रही है तू...?"

"ववो.. वो घूम फिर कर आ जाएँगे बस... और कुच्छ नही...!" अंजलि ने सकपकाकर बात बनाई....

"नही.. मैं तुझे अकेले नही जाने दूँगी....!" पिंकी आड़ गयी..,"तू जाएगी तो मैं भी जाउन्गि.... बस!"

"वो तू सीमा से पूचछा... लेकर तो उसको ही जाना है ना?" अंजलि झल्ला उठी....

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"दीदी... मैं भी चलूं क्या...? तुम लोगों के साथ घूमने...." सीमा के आते ही पिंकी ने सवाल किया....

सीमा कुच्छ देर पिंकी की ओर देखते हुए कुच्छ सोचती रही और फिर 'ना' में गर्दन हिला दी....,"ना! तुझे नही जाना...!"

"पर क्यूँ दीदी? अंजलि भी तो जा रही है...." पिंकी बिगड़ कर बोली....

"तुझे नही जाना.. कह दिया ना... बाद में देखूँगी कभी....!" सीमा ने दो टुक जवाब दे दिया....

"ववो.. एक फोन करना है दीदी... कर लूं क्या?" पिंकी ने हताश होकर अपनी बात बदल दी....

"ले मार ले...बाहर जाकर बात कर ले... किसी को बोल मत देना ये बात.. सीक्रेट है.... समझ गयी?" सीमा ने कहकर उसकी तरफ मोबाइल उच्छाल दिया... पिंकी फोन लेकर बाहर निकल गयी....

"तूने इसको क्यूँ बताया यार...!" सीमा पिंकी के जाते ही अंजलि पर गुस्सा करती हुई बोली.....

"ये किसी को कुच्छ नही बताएगी दीदी.. इसके पास पहले के भी मेरे कयि राज हैं.. आप चिंता मत करो... और फिर इसको तो बताना ही पड़ता ना... इसको तो पता लगना ही था....!" अंजलि ने जवाब दिया.....

"ऐसे कैसे पता लगता.. मैं इसको कोई बहाना करके रात को दूसरे कमरे में सुला देती... उसके बाद हमें निकलना था... आइन्दा किसी को भी ऐसे मत बताना...!" सीमा तुनक कर बोली...

"ठीक है दीदी.. आगे से मैं ध्यान रखूँगी...." अंजलि ने कहा और फिर पूचछा....,"कितने बजे जाना है...?"

"10 बजे के बाद!" सीमा ने टका सा जवाब दिया.....

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"मत लेकर जाओ मुझे.... मैने हॅरी को बोल दिया... कल 'वो' मुझे लेकर जाएगा...!" अकेली होते ही पिंकी ने अंजू पर ताना सा मारा....

"क्या? तू रात को उसके साथ जाएगी..." अंजलि उच्छल सी पड़ी...,"पर वो कैसे लेकर जाएगा तुझे...?"

"मुझे नही पता.... मैने आज रात के लिए बोला था.. उसने कल का वादा किया है.. आज वो फ्री नही है...!"

"पर हॉस्टिल से कैसे लेकर जाएगा तुझे?"

"क्यूँ.. जब सीमा लेकर जा सकती है तो 'वो' क्यूँ नही... वो' बड़ी मॅ'म को जानता है.. उसको बोल कर ले जाएगा....!"

"और.... और 'वो' तुझसे 'प्यार' करने लगा तो?" अंजलि ने कहकर बत्तीसी निकाल दी....

"ऐसे कैसे कर लेगा 'प्यार'... शादी से पहले मैं ऐसा वैसा कुच्छ नही करने वाली...!" पिंकी ने कहा और शर्मा गयी....

"तो तू उस'से शादी करेगी?"

"और नही तो क्या?.. मीनू लंबू से करेगी तो उसको मेरी भी सेट्टिंग करवानी पड़ेगी...!" पिंकी ने तुरुप का पत्ता फैंका....

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रात करीब 10 बजे जैसे ही सीमा अंजलि और श्वेता को लेकर खेल के मैदान वाले पिच्छले गेट पर पहुँची.. गेट्कीपर ने बिना कुच्छ बोले चुपके से दरवाजा खोल दिया... बाहर थोड़ी ही दूर एक गाड़ी पहले ही उनके इंतजार में खड़ी थी...

"हाई जानेमन!" सीमा के अगली सीट पर बैठते ही ड्राइवर ने कहा तो सीमा ने उसकी तरफ झुक कर उसके होंटो को चूम लिया...,"चलो जल्दी... सुबह तक वापस भी आना है"

क्रमशः......................

"Happy B'day!" Subah sote huye achanak Pinky ne Anjali ko pakadkar jhakjhor sa diya... der raat tak jaagne rahne ke karan Anjali jaagne ke baad bhi uneendi si thi...,"unh.. kya hai? thodi der aur sone de na...!" Usne kasmasa kar kaha.....

"are.. aaj tera B'day hai.. chal uth jaldi...!" Pinky ne Anjali ki neend todne ke liye uske pate par apni kohni rakh kar daba di...

"ooyi mummy... kya karti hai yaar...?" Anjali ne chhatpata kar uski kohni hatayi aur baith kar apni aankhein masalne lagi...

"kitne saal ki ho gayi tu?" Pinky ne poochha...

"atharah ki... kyun?" Anjali ne usko apni umar bata kar poochha....

"Kuchh nahi.. bus aise hi poochha hai..." Pinky ne kaha aur muskura di...

"Ye kahan gayi...?" Anjali ne Apni side mein khali bister dekh kar poochha...

"pata nahi... yahin hogi bahar... tujhe pata hai.. subah sari ladkiyon ko ground mein ikattha karte hain... hamein koyi jagane hi nahi aaya... tu so rahi thi, isiliye main bhi nahi gayi...!" Pinky ne bataya...

"Pinky!" Anjali ne uski baat sun'ne ke baad kaha..,"yaar, mujhe bhi bahut bura laga tha jab usne tujhe kamar dabane ko kaha... hum apna kamra change kar lenge...!"

"toh kya ho gaya.. mujhse badi hain.. ek aadh baar kaam bol bhi dengi toh kar doongi... waise ye kamra sab kamron se achchha hai... main iss kamre mein nahi hoti toh mere sath bhi didi kal aisa hi karti na...?" Pinky ne man masos kar kaha....

"Tu toh so gayi thi na...?" Anjali ne hairat se poochha.....

"haan... subah main bahar nikli toh kal wali ladkiyon mein se ek ne bataya ki unke sath bahut bekaar baatein ki thi didi ne... 'wo' nahi rahegi yahan.... aisa bol rahi thi... ek baat poochhoon...?"

"Haan... poochh...!"

"Tum wo... wo diary kyun likh rahi ho?" Pinky ne poochha toh Anjali ke hosh udd gaye...

"Kk..kounsi diary?"

"Wahi.. jo tere bag mein rakhi hai... tera saaman nikal kar almari mein rakh rahi thi toh mujhe mili..."

"tt..tune 'wo' padh li?" Anjali hadbada gayi...

"Thodi si padhi thi... tumne usmein pata nahi kaisi kaisi gandi baatein likh rakhi hain... maine beech mein hi chhod di...." Pinky muskurakar boli...

"Main bataaungi tujhe...! kahan hai meri diary...." Anjali tunak si gayi....

"Maine chhupa di.. baad mein padh kar doongi.... he he he..."

"dekh.. chupchap 'wo' diary de de... warna main...." Anjali apni baat poori karti.. uss'se pahle hi darwaje par ek ladki aakar khadi ho gayi...,"Pinky koun hai.. uske guardian aaye hain neeche....!"

"Par... papa toh kal aane the..." Pinky kahkar uthi aur khushi se jhoomte huye apni chappal dhoondhne lagi....

"ruk.. main bhi toh aa rahi hoon...!" Pinky ko bahar bhagte dekh Anjali bhi jhat se uthi aur apna munh dhone lagi....

"aa jao.. main neeche hi hoon..." Pinky ne ek pal thithak kar kaha aur fir bhag gayi....

******************************

***8

"Tum...?" Harry ko saamne pakar Pinky ka bura haal ho gaya tha.. Guest room mein Harry kursi par baitha hua usko dekh kar muskura raha tha...,"kyun? tumhe khushi nahi huyi?"

"Nnahi.. wwo.. main toh bus... tum mujhse milne kaise aa gaye... yahan toh mummy papa hi mujhse mil sakte hain bus... aur aaj toh Saturday hai... aaj ke din bhi mil sakte hain kya?" Pinky hadbada kar boli....

"main toh kisi aur kaam se aaya tha... Principal madam se milne... Socha... tumse bhi milta chaloon...!" Harry pyar se uske chehre ko niharta raha..,"aao baitho na...!"

Aascharya aur jhijhak ke mile jule bhav Pinky ke chehre par dekhe ja sakte the.. Tabhi Anjali bhagti huyi gust room mein ghusi aur Harry ko wahan pakar wapas palat gayi....

"Mmain.. 2 minute mein aa jaaun?" Pinky Harry ke saamne khud ko raat ke kapdon mein dekh sharma rahi thi....

"Nahi.. abhi toh mujhe jaldi hai... tum bus do minute baith jao...!" Harry ne usko apne paas aane ka ishara kiya....

"Aise hi jana tha toh mujhe kyun bulaya yahan....?" Pinky ne munh bana liya...

"Ek 'kiss' lene ke liye... de do na?" Harry shararat karta hua bola....

Harry ke munh se seedhi baat sunkar sharm se Pinky ke gaal gulabi ho gaye...," Aisi baat mat karo.. main chali jaaungi..." Pinky apni jhijhak chhupane ke liye uski taraf kamar karke khadi ho gayi....

Harry chupke se utha aur darwaja band karke wahin apni kamar sata kar khada ho gaya,"Aise kaise chali jaaogi... ek 'kiss' toh tumhe deni hi padegi aaj!"

Band kamre mein ek baar fir Harry ke saamne khud ko pakar Pinky ka kunwara youvan machal utha... Najrein uthakar usne kshan bhar ke liye Harry se najrein char ki aur fir uske lab thirak uthe...,"mmujhe jane do na... darr lag raha hai.. koyi aa jayega...."

"tum idhar toh aao ek baar..." Harry ne uski aur apne hath failaye...

Pinky ne chhalakte youvan ko sambhalne ki koshish karte huye ek hath chhatiyon ko chhupate huye apne chehre par rakha aur najrein jhukaye huye rengti huyi si uske paas ja pahunchi..,"kkyaa?"

"Ek baar apne honton par hont rakhne do na jaan!" Harry ne uski kalayi ko pakad kar apni taraf kheench liya.... Pratirodh ki gunjaayish hi nahi bachi thi... Pinky ka badan Harry ki baahon ke dayre mein simta hua tha... Harry ke dono hath Pinky ki kamar par the aur Pinky ke dono hath lajja vash apni aur harry ki chhati ke beech...

"Nahi.. honton par nahi pls... Mujhe..!" Apni ukhdi saanson ko niyantrit karne ki koshish karte huye Pinky ne apna chehra utha kar aankhein band kar li... bhala ye rajamandi nahi toh aur kya tha... Harry ne usko aage kuchh bolne hi nahi diya aur thoda jhuk kar Pinky ke raseele adharon par apne hont tika diye...

"aaah..." Pinky bawli si hokar karaah uthi... Harry ke hath jaise hi neeche sarakte huye uske nitambon par jakar tike.. kaam trishna bujhane ki lalak ne pinky ko apni aidiyan upar utha apne hathon ki deewar ko dono ke beech se alag karke Harry ke gaalon ko thaam lene par raji kar hi liya.... Apni ubharti huyi chhatiyan ko Harry ke seene mein dhansta hua pakar Pinky ka rom rom dahak utha... Nitambon par Harry ke hathon ki jakadan ne aisi aag lagayi ki Pinky sisak uthi... uske aisa laga jaise yahi jannat hai... Nitambon, chhatiyon aur adharon ke sparsh ka asar jane kaise Pinky ki yoni tak jakar usko pighlane laga...

Poore 2 minute tak Pinky ke man-badan ko jhakjhor kar rakh dene wale ahsaas ke baad jaise hi Harry uss'se lalag hua, Pinky ajeeb si najron se usko dekhne lagi.. maano poochh rahi ho,"Ruk kyun gaye?"

"Tum kitni meethi ho Pinky? Main iss chumaban ko jindagi bhar nahi bhula paaunga... Tumhe kaise laga...?" Harry ne poochha toh Pinky jaise hosh mein aayi... sharmayi aur ghabrayi huyi si Pinky ne ek baar fir najrarein chura li...,"Ab tum chale jaoge kya?"

"Haan.. jana padega.. yahan tumhare sath toh nahi rah sakta na...? Mouka milte hi fir aaunga...!"

"Kab?" Pinky ke sawaal mein kuchh aisa bhav tha.."Jaldi aana!"

"Jald hi... main toh yahan aata rahta hoon...!" Harry ne darwaja khol diya...,"Koyi problem ho toh bata dena...!"

"Apna... apna no. de do na... main fone karoongi...!" Pinky ab bhi chehra jhukaye bol rahi thi.. najrein milana usko dushwar lag raha tha...

"No...?... achchha likh lo... fone toh karogi na...?" Harry muskurakar bola....

"Haan... ek didi ke paas mobile hai.. uss'se miss call karoon toh tum kar lena...!" Pinky ne Harry se pen lete huye apne hath par no. likh liya....

"Tum uska hi no. de do.. main khud kar loonga...."

"Mere paas no. nahi hai uska... main sham ko fone karoongi...!"

"Theek hai.. ab main chaloon...?" Harry ne wapas jakar apna bag uthaya....

Pinky ne sakuchate huye Harry ko dekha aur fir apni gardan hila di... Harry ke jane ke baad bhi kafi der tak wah gumsum si uss jagah ko dekhti rahi jahan wo kuchh der pahle apne 'yaar' ki baahon mein thi....

"aaaah!" Pinky ne kafi der baad ek lambi saans li aur guestroom se nikal gayi....

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"yye kisliye aaya tha...? kya baat huyi?" Anjali uska chehra padhne ki koshish karti huyi boli....

"Ye.. badi ma'm ko jaanta hai... usi ke paas aaya tha...!" Pinky ki aankhein chamak uthi...

"Tujhse kya kah raha tha... kya baat huyi..? tumne darwaja kyun band kiya tha ek baar...?" Anjali adheer ho rahi thi.. kuchh masaaledaar sun'ne ko...

"Kuchh nahi.. usne hi kiya tha jaan boojh kar.. 'kissi' maang raha tha..."

"Fir.. tune di ya nahi..."

"Le li usne... main toh mana kar rahi thi.. wo mana hi nahi..." Pinky sharma gayi...

"Kahan par?" Anjali khush hokar hans di...

"Aey... tum Pinky ho na?" Darwaje se achanak andar aayi Seema kuchh hadbadi mein lag rahi thi....

"aa...haan didi!" Pinky achanak sambhalte huye boli....

"Tumne pahle kyun nahi bataya yaar...!" Seema uske paas aakar uski kamar par hath rakh kar baith gayi....

"Bataya toh tha didi.. par kyun poochh rahi ho?" Pinky ne achkacha kar poochha...

"tum toh Madam ki khasamkhas lagti ho yaar... madam ne tumhara khas dhyan rakhne ko bola hai....!"

"Achchha... wwo.. Harry ne bola hoga...!" Pinky khushi se jhoom uthi...

"Nahi.. Harry koun? mujhe toh madam ne bulakar bola hai!" Seema safayi deti huyi boli....

"aapko nahi didi.. Harry ne badi ma'm ko bola hoga.. mera dhyan rakhne ko...!"

"Hummm.. ab mujhe aarti ko wapas bulana padega... tum dono adjust kar logi na uske sath...?" Seema ne dono ki aur bari bari se dekhte huye sawaal kiya...

"Haan.. par usko kyun bula rahi ho.. '13' no. waaliyon ne tikne nahi diya kya usko..!" Anjali ne sawaal kiya....

"Arey 13 no. waaliyon ki.... mujhe apne liye bhi toh chahiye na kaam karwane ke liye... tum dono ko toh kah nahi sakti...!" Seema muskurakar boli aur fir Anjali ka hath pakad liya..,"aaj chalna hai kya..?"

"Kahan?" Anjali ne poochha toh Pinky bhi gour se Seema ki aur dekhne lagi....

"Wahin yaar... bola tha na kal...!"

"Par kal toh chacha ji aane waale hain..... aaj kaise?"

"Kahan ja rahe ho.. mujhe bhi toh batao na...?" Pinky ne utsuk hokar poochha...

"Arey subah tak wapas aa jayenge.. chinta mat kar tu... aaj khas program hai... chalna hai toh bol.... ek aur ladki chal rahi hai...?!" Seema Pinky ke sawaal ko najarandaaj karte huye boli....

"Main aapko thodi der main bata doongi didi...!" Anjali asamanjhas mein pad gayi thi...

"Theek hai... soch kar bata dena... par aisa mouka fir nahi aayega..." Seema ne kaha aur apne baalon ko jhatakti huyi kamre se bahar chali gayi....

"Kahan ja rahi hai..? mujhe bhi toh bata na?" Pinky jaan'ne ko vyakul ho uthi....

"kisi ko batayegi nahi na tu?" Anjali ne poochha....

"aaj tak batayi hai koyi baat?" Pinky ne Anjali ko ghoora....

"Nahi par.... 'wo' ye mujhe hostel se bahar ghuma kar lane ki bol rahi hai... raat ko...!" Anjali ne bata hi diya....

"tu pagal ho gayi hai kya? raat ko hostel se bahar... wo bhi 'aisi ladki ke sath... kya pata kahan fansa degi tujhko...!" Pinky ne gusse se Anju ko latad si lagayi....

"aisa kuchh nahi hoga... raat raat ki toh baat hai.. subah tak wapas aa jaaungi main...!" Anjali ne samjhane ki koshish ki....

"Par kyun ja rahe ho... ye toh batao.. main bhi chaloongi...!"

"tu nahi pagal... na!"

"kyun? tum ja rahi ho toh main kyun nahi.. main bhi chaloongi tere sath...!"

"samjha kar yaar... aaj main jakar dekh leti hoon... fir kabhi chal padna...." Anjali ne samjhane ki koshish ki....

"Par.. ja kyun rahi hai tu...?"

"wwo.. wo ghoom fir kar aa jayenge bus... aur kuchh nahi...!" Anjali ne sakpakakar baat banayi....

"Nahi.. main tujhe akele nahi jane doongi....!" Pinky ad gayi..,"Tu jayegi toh main bhi jaaungi.... bus!"

"wo tu Seema se poochha... lekar toh usko hi jana hai na?" Anjali jhalla uthi....

**********************************************************

"didi... main bhi chaloon kya...? tum logon ke sath ghoomne...." Seema ke aate hi Pinky ne sawaal kiya....

Seema kuchh der Pinky ki aur dekhte huye kuchh sochti rahi aur fir 'na' mein gardan hila di....,"Na! tujhe nahi jana...!"

"Par kyun didi? Anjali bhi toh ja rahi hai...." Pinky bigad kar boli....

"tujhe nahi jana.. kah diya na... baad mein dekhoongi kabhi....!" Seema ne do took jawaab de diya....

"wwo.. ek fone karna hai didi... kar loon kya?" Pinky ne hatash hokar apni baat badal di....

"le mar le...bahar jakar baat kar le... kisi ko bol mat dena ye baat.. secret hai.... samajh gayi?" Seema ne kahkar uski taraf mobile uchhal diya... Pinky fone lekar bahar nikal gayi....

"tune isko kyun bataya yaar...!" Seema Pinky ke jate hi Anjali par gussa karti huyi boli.....

"Ye kisi ko kuchh nahi batayegi didi.. iske paas pahle ke bhi mere kayi raaj hain.. aap chinta mat karo... aur fir isko toh batana hi padta na... isko toh pata lagna hi tha....!" Anjali ne jawaab diya.....

"aise kaise pata lagta.. main isko koyi bahana karke raat ko doosre kamre mein sula deti... uske baad hamein nikalna tha... aainda kisi ko bhi aise mat batana...!" Seema tunak kar boli...

"theek hai didi.. aage se main dhyan rakhoongi...." Anjali ne kaha aur fir poochha....,"Kitne baje jana hai...?"

"10 baje ke baad!" Seema ne taka sa jawab diya.....

***************************************

"Mat lekar jao mujhe.... Maine harry ko bol diya... kal 'wo' mujhe lekar jayega...!" Akeli hote hi Pinky ne Anju par tana sa mara....

"Kya? tu raat ko uske sath jayegi..." Anjali uchhal si padi...,"par wo kaise lekar jayega tujhe...?"

"Mujhe nahi pata.... maine aaj raat ke liye bola tha.. usne kal ka wada kiya hai.. aaj wo free nahi hai...!"

"Par hostel se kaise lekar jayega tujhe?"

"kyun.. jab Seema lekar ja sakti hai toh 'wo' kyun nahi... wo' badi ma'm ko jaanta hai.. usko bol kar le jayega....!"

"aur.... aur 'wo' tujhse 'pyar' karne laga toh?" Anjali ne kahkar batteesi nikal di....

"aise kaise kar lega 'pyar'... shadi se pahle main aisa waisa kuchh nahi karne wali...!" Pinky ne kaha aur sharma gayi....

"toh tu uss'se shadi karegi?"

"aur nahi toh kya?.. Meenu Lambu se karegi toh usko meri bhi setting karwani padegi...!" Pinky ne turup ka patta fainka....

*********************************

Raat kareeb 10 baje jaise hi Seema Anjali aur Shweta ko lekar khel ke maidan wale pichhle gate par pahunchi.. gatekeeper ne bina kuchh bole chupke se darwaja khol diya... bahar thodi hi door ek gaadi pahle hi unke intjaar mein khadi thi...

"Hi Janeman!" Seema ke agli seat par baithte hi Driver ne kaha toh Seema ne uski taraf jhuk kar uske honton ko choom liya...,"chalo jaldi... subah tak wapas bhi aana hai"


raj..
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Re: बाली उमर की प्यास

Unread post by raj.. » 11 Dec 2014 15:58

बाली उमर की प्यास पार्ट--43

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गतान्क से आगे..................

काफ़ी देर बाद जब गाड़ी शहर से भी गुजर गयी तो अंजलि से रहा ना गया," हम जा कहाँ रहे हैं दीदी...?"

"क्यूँ चिंता करते हो यार... आज की रात तुम दोनो कभी भूल नही पाओगेई... सारी रात मस्ती होगी.. देखना" सीमा ने मुड़कर पिछे देखते हुए कहा...,"एक बात तो बता... जब तू संदीप से चुद रही थी तो सुन्दर से क्या दिक्कत थी तुझे.. उसका भी ले लेती...!"

एक अंजान लड़के के सामने सीमा के मुँह से ऐसी बात सुनकर अंजलि सकपका गयी.. काफ़ी देर तक तो उस'से कुच्छ बोला ही नही गया...जब सीमा ने उसको एक बार फिर टोका तो वह हड़बड़ा कर बोली," ये क्या बात कर रही हो दीदी...?"

"अरे इस'से मत शर्मा... मस्त लड़का है ये.. कभी इसके नीचे आकर देखना... "सीमा अभी कुच्छ बोल ही रही थी कि लड़के ने उसको टोक दिया..,"एक बार फोन कर ले.... अभी अंदर जाना है कि नही... पहुँच तो गये.."

"ओह्ह... मोबाइल रह गया यार... अपना फोन निकाल कर दे एक बार.. ज्योति को बोल देती हूँ.. च्छूपा कर रख देगी...! सीमा ने अपनी जेबों में हाथ मारते हुए कहा और लड़के का फोन लेकर अपने मोबाइल पर फोन करके ज्योति को समझा दिया....

"आ गये हम... आ जाएँ क्या?" ज्योति को फोन करने के बाद सीमा ने दूसरा नंबर. मिला कर पूचछा....

"हां... मकान के सामने सड़क पर ही खड़े हैं...!" सीमा ने सामने वाले की बात का जवाब दिया.....

"2....... देख कर पागल हो जाएगा तू........ ओके.. हम आ रहे हैं...!" सीमा ने फोन पर कहा और फिर उसको वापस करती हुई बोली..,"चल.. सब ठीक है....!"

********************************************

सीमा ने मकान के बाहर से ही उस लड़के को वापस भेज दिया और दोनो को लेकर मकान में घुस गयी... अंजलि का दिल अब घबरा रहा था... हॉस्टिल से निकलते हुए जहाँ उसके रोमांच की कोई सीमा नही थी.. वहीं अब सीमा और उस लड़के की अजीब और निचले दर्जे की बातें सुन सुन कर उसके कान खड़े हो गये थे.... उसको लग रहा था कि उसने आकर ठीक नही किया...,"यहाँ तो कोई नही लग रहा दीदी... आप तो कह रहे थे कोई प्रोग्राम है...

"पूरी बारात से चुदेगि क्या तू? अंदर तो चल एकबार...!" सीमा ने बत्तीसी निकाल कर कहा....

"हाई सीमा... ये....नयी लड़कियाँ हैं क्या?"...अंदर घुसते ही उनको एक लड़की सिगरेट सुलगए हुए उनका इंतजार करती हुई मिली...

"हां.. एक दम फर्मफ़रेश!" सीमा कहकर अंजलि के गालों पर हाथ फेरती हुई हँसी और फिर शांत होकर पूचछा..,"बॉस कहाँ हैं..?"

"ऑफीस में ही बैठे हैं... तुम लेकर चलो इनको... मैं भी आती हूँ..." लड़की ने कहा और वहाँ से चली गयी....

"यहाँ.. यहाँ कुच्छ ग़लत तो नही होगा ना दीदी...!" श्वेता ने सवाल किया...

" कहा ना फिकर मत करो... ये हॉस्टिल नही; मस्ती का अड्डा है....आओ मेरे साथ...!" सीमा ने सहमी हुई श्वेता का हाथ पकड़ा और अंजलि को साथ आने का इशारा करके उपर चढ़ने लगी.....

सीमा उन दोनो को लेकर दूधिया प्रकाश में नहा रहे एक बड़े से कमरे में लेकर चली गयी... कमरे का फर्निचर आलीशान था... बीचों बीच लगे बिस्तर के पास ही चार गद्दे वाली कुर्सियाँ और उनके बीच एक टेबल रखी थी....

सीमा जाते ही अपनी शर्ट के बटन खोल कर कुर्सी पर पसर गयी..और ..,"आओ बैठो... शुरू करते हैं...मस्ती.." सीमा ने कहा और कहते ही टेबल पर रखी बोतल का ढक्कन खोलने लगी....

"ययए क्या है दीदी...शराब है क्या?" श्वेता ने घबराई आँखों से सीमा की ओर देखा....

"अरे... इसी के बाद तो प्रोग्राम शुरू होगा.. इसके बिना क्या मज़ा...." सीमा ने हंसते हुए कहा और चार में से तीन गिलास सीधे कर लिए....

"वापस चलो ना दीदी... हमें यहाँ अच्च्छा नही लग रहा सच में... आप तो अपने दोस्तों से मिलने लाई थी ना...?" अंजलि ने शंका से सीमा को घूरा....

"डॉन'ट वरी यार... सब आ जाएँगे धीरे धीरे... लो.. एक एक मारो तब तक..." सीमा ने गिलास उनकी ओर सरका दिए....

"नही दीदी.. ये सब तो आदमी पीते हैं... मैं नही पियूंगी..." गिलास अपनी तरफ बढ़ता देख श्वेता अचकचा सी गयी....

"क्यूँ...? आदमियों की गांद में क्या ज़्यादा दम होता है... ये देख मैं पी गयी.. चल उठा और सटाक जा इसको...!" सीमा ने आदेशात्मक लहजे में कहा....

"नही दीदी.. मुझसे नही पी जाएगी... आप जल्दी वापस चलो हॉस्टिल में...." अंजलि के मंन की बात श्वेता ने ही कह दी.....

"कल वाली बात भूल गयी क्या? मुझसे दोस्ती तोड़ रही है तू... तुझे पता नही कि मैं और क्या क्या कर सकती हूँ..... चल पी इसको...
"तू पी तो एक बार.. उल्टी होगी तो मैं देख लूँगी.... चल उठा और दवाई समझ कर पी जा... अंजलि... गिलास उठा ना यार.. ये क्या है?"

अंजलि कुच्छ देर हैरत से सीमा को देखती रही.. फिर अचानक खड़ी हो गयी...,"चलो दीदी यहाँ से अभी के अभी.. हमें नही करना कुच्छ भी यहाँ...!"

"अच्च्छा! तू तो बहुत बोलने लगी यार... नीचे बैठ जा... मुझे मजबूर मत कर वरना यहाँ तुम्हारा गॅंग रेप हो जाएगा... चार चार लोग जब एक साथ चोद्ते हैं तो जान भी निकल सकती है...समझी...,"सीमा आँखें तरेरने लगी थी अब," पिच्छले साल एक लड़की ने हॉस्टिल से आकर ऐसे ही ड्रामा किया था यहाँ... साली की लाश भी नही मिली आज तक... पोलीस आज तक यही समझ रही है कि वो अपने यार के साथ भाग गयी कहीं... भलाई इसी में है की गिलास उठाओ और मस्ती करो जमकर...! आज की रात नैतिकता भूल जाओ"

सीमा के धमकी देने मात्र से ही अंजलि और श्वेता दोनो थर थर काँपने लगी थी..,"प्लीज़ दीदी.. ऐसा कुच्छ मत करवाना.. मैं मर जाउन्गि...!" श्वेता ने तो हाथ जोड़ लिए....

"मैं क्या बोल रही हूँ.. गिलास उठाओ मस्ती करो... चलो.. अब पी भी लो यार.. मेरा दूसरा भी हो गया...." सीमा ने कुत्सित सी हँसी हंसते हुए दोनो को देखा तो कोई भी कुच्छ बोल ना सकी... दोनो ने खड़े खड़े ही अपने गिलास उठाए और नाक सिकोड कर एक ही साँस में दोनो ने गिलास खाली कर दिए...

"शाबाश.. बैठ जाओ... मैं फोर्स नही करना चाहती यार... फोर्स करने से मज़ा खराब हो जाता है... आओ बैठो... एंजाय करो...!" सीमा ने हंसकर कहा और अगले पैग तैयार करने लगी....

"पर दीदी... हॉस्टिल में कब चलेंगे वापस...?" अंजलि ने डरते डरते पूचछा....

"अभी पूरी रात बाकी है यार... क्यूँ फिकर करती हो.. मैं हूँ ना साथ में... लो.. ये खाओ.. जी ठीक हो जाएगा...." सीमा ने प्लेट उनकी और सरका दी.....

************

"बस दीदी जी.. प्लीज़... 2 बार पी ली मैने.. और ले ली तो सच में ही मर जाउन्गि.... प्लीज़..." श्वेता की आँखों से आँसू निकल आए...

"ओके... अब तुम्हारी मर्ज़ी... मैं तो पियूंगी जी भर कर... तब तक तुम कपड़े निकाल कर फैंक दो अपने....!" सीमा ने मस्ती में अपनी कमीज़ उतारी और ब्रा के हुक खोलने लगी....

सीमा की हालत देखकर दोनो विचलित सी होती जा रही थी..,"पर.. दीदी.. आपने तो कहा था कि..."

"सब आ जाएँगे यार... बस आने ही वाले हैं.. तुम कपड़े तो निकालो अपने.. बार बार बोलनी पड़ती है तुमको बात... सुनता नही है क्या?"

सीमा की इस आवाज़ के बाद दोनो में इतना साहस नही था कि 'वो' कुच्छ और बोल पाती... दोनो खड़ी हुई और झिझकते हुए एक दूसरी से मुँह फेर कर अपने कपड़ों को बदन से अलग करने लगी..... कुच्छ ही देर बाद दोनो निर्वस्त्र कुर्सी पर बैठकर सहमी हुई एक दूसरी को देख रही थी...

तभी वही लड़की कमरे में घुसी और सीमा के कान के पास मुँह लाकर कुच्छ बोला... मोरनी जैसे कान रखने वाली अंजलि भी बात का पूरा मतलब नही समझ पाई.. पर बोलते हुए लड़की ने उसी की ओर इशारा किया था....

"कल तक कैसे रुकेंगे यार यहाँ... किसी और दिन का प्रोग्राम रख लो.....!" सीमा ने लड़की की तरफ देखते हुए कहा....

"पर बॉस ने बोला है... तुम बात कर लो...!" लड़की ने कहा....

"ठीक है.. तौलिया देना लाकर...!" सीमा उठ खड़ी हुई...

लड़की बाथरूम से तौलिया निकाल कर लाई और सीमा ने उस'से लेकर अपने कंधों पर डाल लिया...."तुम यहीं रहना तब तक....!"

"मनीषा आई हुई है.... उसको भेज देना.. मुझे अभी कुच्छ काम है....!" लड़की ने कहा और कुर्सी पर बैठ कर लज्जा से सकूचाई और भय के मारे काँप सी रही लड़कियों को घूर्ने लगी.....

इधर आ एक बार...!" सीमा अचानक ठिठक कर दरवाजे पर रुकी और इशारे से उस लड़की को बाहर अपने पास बुलाया....

"हां..?" लड़की ने बाहर आकर सीमा से पूचछा....

"डॉली..! तेरा दिमाग़ खराब है क्या? इनके सामने मनीषा का नाम क्यूँ लिया?" सीमा गुस्से से उस लड़की को झिदक्ति हुई बोली...

"पर हुआ क्या, ये तो बता..." डॉली बात को समझ नही पाई थी..

"ये अंजलि है ना..." सीमा ने बाहर से ही अंजलि की ओर उंगली से इशारा किया..," मनीषा के गाँव की ही है... वो इसके सामने कैसे आएगी......?"

"ओह.. पर मुझे पता नही था यार... कोई बात नही.. पूछेगि तो मैं बोल दूँगी की मैं किसी और मनीषा की बात कर रही थी...." लड़की ने जवाब दिया....

"कोई ज़रूरत नही है... मैं मनीषा से पूच्छ लेती हूँ.. अगर उसको कोई दिक्कत होगी तो मैं किसी और लड़की को मनीषा बनाकर भेजती हूँ.....कहाँ है वो?" सीमा ने डॉली से पूचछा....

"चल ठीक है... जल्दी भेजना... वो नीचे 4 नो. में बैठी है शायद" डॉली ने कहा और वापस पलट गयी....

*****************************************************

"कोई दिक्कत है क्या?" लड़की ने मुस्कुरकर अंजलि और श्वेता के सामने बैठते हुए पूचछा....

"ववो.. हम कपड़े पहन लें क्या?" अंजू ने थोड़ा झिझकते हुए पूचछा....

"क्यूँ? शर्म आ रही है क्या?" लड़की ने कहा और खिलखिला कर हंस पड़ी... अंजू और श्वेता ने प्रतट्युत्तर में अपनी पलकें झुका ली....

"यार.. ऐश ही तो करने आई हो... आज की रात सब कुच्छ भूल कर एंजाय करो...यूँ घुट कर बैठने से क्या होगा... ये सब तुम्हे रोज रोज नही मिलेगा....बाकी तुम्हारी मर्ज़ी...!" डॉली का इतना कहना था कि दोनो ने उठकर फटाफट वापस अपने कपड़े डालने शुरू कर दिए....

डॉली कुच्छ देर उनको आस्चर्य से देखती रही... अचानक उसने अपना मोबाइल निकाला और एक नंबर. लगा लिया....

"हां.. बोल डॉली!" उधर से आवाज़ आई....

"बॉस.. ये लड़कियाँ तो मेरे सामने ही शर्मा रही हैं... बाकी सब कैसे करेंगी... सीमा ने अच्छे से ट्रेंड नही किया लगता है इनको...!"

"चल मैं बात करता हूँ...! सीमा को भेज मेरे पास!" बॉस ने कहा और लड़की के जवाब देने से पहले ही फोन काट दिया...

***********************

"मनीषा... तू तो पूरे एक साल बाद आई है... आज कैसे?" सीमा सीधी मनीषा के पास जाकर मुस्कुराते हुए बोली....

"बस ऐसे ही... कुच्छ काम था...!" मनीषा ने उसको टाल सा दिया....

"ववो.. तेरे गाँव की एक लड़की आई हुई है.... उपर मत जाना तू!" सीमा ने मनीषा को सचेत किया....

"मेरे गाँव की?" मनीषा थोड़े अचरज से सीमा की आँखों में झाँकते हुए बोली..,"कौन?"

"अंजलि..!"

"क्ककयाअ? अंजू?... वो यहाँ कैसे आई...?" मनीषा अचानक उच्छल सी पड़ी....

"मेरा केस है... क्यूँ? तेरी कुच्छ लगती है क्या?" मनीषा के चेहरे पर अचानक उभरे भावों ने सीमा को विचलित सा कर दिया था.....

"क्कहाँ है वो?" मनीषा का चेहरा लाल होने लगा था....

"यार परेशान मत हो.. उसको तेरे बारे में कुच्छ पता नही लगेगा.... मैं सब संभाल......" सीमा की बात अधूरी ही रह गयी.... मनीषा ने गुस्से से तमतमते हुए दोनो हाथों में उसका गला दबोच लिया..,"जान से मार दूँगी तुझे... है कहाँ 'वो' जल्दी बता..."

"छ्चोड़ यार.. सच में मार देगी क्या? उपर है.. स्टूडियो वाले कमरे में...!" सीमा ने बड़ी मुश्किल से अपना पीछा छुड़ाया.. मनीषा उसको छ्चोड़ते ही कमरे से बाहर भागी....

***************************

"म्म्मMअनिशाआ तूमम?" मनीषा को अपने सामने खड़ी देख अंजलि बुरी तरह से सकपका गयी.. इस'से पहले कि वो कुर्सी से उठकर कुच्छ और बोल पाती.. एक झन्नाटे दार थप्पड़ ने उसके गालों पर अपनी उंगलियों की छाप छ्चोड़ दी....

"तुझे मैने मना किया था ना.... ऐसे चक्करों से दूर रहने को बोला था ना.. ?क्यूँ आई है यहाँ...?" इसके साथ ही मनीषा ने एक और तमाचे के साथ उसका दूसरा गाल भी लाल कर दिया...

"म्‍म्माइन.. मुझे तो सीमा यहाँ....!" अंजलि को ठप्पाड़ों से ज़्यादा चुभन मनीषा की अंगारे उगलती आँखों की हो रही थी... मनीषा बोलने लगी तो वह बीच में ही रुक गयी....

**************
"आ जाउ सर..?" सीमा ने दरवाजे पर खड़े हो कर पूचछा....

"एक मिनिट...!" बॉस ने कहकर फोन लगाया...," प्रेम! अजय को लेकर उपर चले जाओ.. मनीषा के तेवर ठीक नही लग रहे... देखना कोई गड़बड़ नही होनी चाहिए......"

"हां.. आ जाओ!" बॉस ने सीमा को अंदर बुलाया.. सीमा के कमरे में आने के बाद भी वह 'बॉस' को देख नही पा रही थी... उन्न दोनो के बीच अंधेरे की एक काली चादर पसरी हुई थी.....

"वो.. डॉली कह रही है कि लड़कियाँ झिझक रही हैं... क्या बात है...?" बॉस ने सीमा के आते ही सवाल किया....

"ववो... क्या है सर.. की दोनो लड़कियाँ नयी हैं.. कल ही हॉस्टिल में आई थी.... थोड़ा टाइम तो लगेगा ना....!" सीमा ने जवाब दिया....

"इनको अच्छे से गरम करके लाना था ना यार... खैर.. कैसे भी इनके कपड़े निकलवा कर कुच्छ शॉट्स ले लो... उसके बाद कहीं नही जाएँगी ये..."

"वो तो मैने निकलवा दिए थे.. 2-2 पैग भी पीला दिए... पर सुनील नही आया है अभी तक... मैं उसी का वेट कर रही हूँ.... ववो मनीषा को पता नही क्या प्राब्लम हो गयी अचानक.. अंजलि का नाम सुनते ही भड़क गयी..." सीमा ने कहा....

"हां... वो तो मैं देख ही रहा हूँ...? उसको अंजलि के पास भेजा किसने?!" बॉस ने सिगरेट सुलगाते हुए पूचछा....

"म्‍मैइन उसको मना करने ही गयी थी... पर वो तो अपने आप ही उपर भाग गयी... उसकी कुच्छ लगती तो नही है ना ये?" सीमा ने जवाब देकर पूचछा....

बॉस ने सीमा की बात टाल दी....,"तुम कल अंजलि को लेकर रेस्ट हाउस पहुँच जाओ...एक मिनिस्टर का ऑर्डर है.. कल रात का...! उसको कोई ऐसी ही पटाखा लड़की चाहिए... 50000 आज ही तुम्हे दे देता हूँ.. बाकी बाद में कर लेंगे...!"

"पर सर...... मुझे नही लगता कि आज बिना कुच्छ किए 'वो' वापस आने को राज़ी होगी... कपड़े उतारने में ही इतना टाइम लगा दिया.....

**********************************

"पर दीदी...आप यहाँ कैसे आई...?" अंजलि सहमी हुई सी मनीषा के सामने खड़ी अपने गालों को सहला रही थी.....

"वो सब बाद में बताउन्गि.... चलो मेरे साथ....!" मनीषा ने हड़बड़ी में अंजलि का हाथ पकड़ लिया.....

"कहाँ लेकर जा रही हो...? बॉस से पूच्छने दो मुझे..." डॉली ने खड़ी होकर जैसे ही अपना मोबाइल निकाला; मनीषा ने झपट लिया...," साली को कच्चा चबा जाउन्गा यहीं... चुप चाप पड़ी रह... चल अंजू...!" मनीषा अंजू का हाथ पकड़ कर पलटी ही थी कि दरवाजे पर 2 युवकों को देख कर वा ठिठक गयी...," मेरे रास्ते से हट जाओ प्रेम... ये मेरी..... ये मेरी बेहन है...!"

"ठीक है ठीक है... बॉस से तो पूच्छ लो... चलो पिछे....!" हत्ते कत्ते प्रेम ने गुर्राकार रेवोल्वेर तान दी तो मजबूरन मनीषा को अपने पैर वापस खींचने पड़े........

" बॉस! मनीषा एक लड़की को वापस लेकर जा रही है... !" प्रेम ने रेवोल्वेर मनीषा पर ताने हुए ही दरवाजे पर खड़े खड़े फोन किया....

"मनीषा को बाहर निकाल दो और दोनो के कपड़े निकलवाओ.. सुनील आ गया है.. उसको मैं उपर भेज रहा हूँ...! उसके बाद डॉली को बाहर भेज कर रूम लॉक करवा लेना...." बॉस ने आदेशात्मक लहजे में कहा...

"जी बॉस!" प्रेम ने कहकर फोन काटा और मनीषा की ओर घूरता हुआ बोला,"बॉस ने बोला है कि मनीषा कुच्छ पंगा करे तो गोली मार देना... तुम हमसे सीनियर हो.. सारी बातें अच्छे से समझती हो... चुपचाप बाहर चली जाओ.. वरना मुझे मजबूरन...."

बेबस सी खड़ी मनीषा प्रेम का इशारा समझकर बाहर निकल गयी......

"चलो... नंगी हो जाओ 2 मिनिट में... वरना..... चलो तुम भी...!" प्रेम ने एक एक करके अंजलि और श्वेता को घूरा... डॉली लड़कों के पास आकर खड़ी हो गयी थी....

घिघियाई हुई अंजलि ने श्वेता की तरफ देखते हुए अपने कमीज़ का पल्लू पकड़ लिया... श्वेता फफक फफक कर रोने ही लगी थी...

"चलो जल्दी करो!" प्रेम एक बार फिर गुर्राया....

"ज्जई..." श्वेता सिसकती हुई बुदबुदाई और अंजलि के शुरू करने के साथ ही उसने भी खुद को निर्वस्त्र करना शुरू कर दिया....

अचानक सुनील ने कमरे में प्रवेश किया...,"ये.. हाथ में रेवोल्वेर क्यूँ पकड़ रखी है भाई... रेप सीन की शूटिंग तो कल परसों होनी है ना?"

"डॉली! बाहर जा कर दरवाजा लॉक कर दे....! मैं फोन करूँ तो खोल देना...!" प्रेम ने मुस्कुरकर सुनील का स्वागत करने के बाद डॉली को बाहर जाने का इशारा किया....,"अगर ये प्यार से नही मानती तो रेप सीन आज ही शूट कर लेना... हे हे हे..."

"क्या माल है यार..." सुनील अपनी लपलपाति जीभ को होंटो पर फेरता हुआ अंजलि को घूरकर बोला.... अंजलि के हाथों में छुपे उन्मुक्त मस्त नंगे उभारों को देख कर वहाँ खड़े तीनो लोगों के मुँह में पानी आ रहा था... तब तक श्वेता भी उपर से नंगी हो चुकी थी...

"इसके साथ रेप मत करो यार... ये तो 'प्याआर' करने की चीज़ है स्साली...!" सुनील ने आगे जाकर अंजलि के नितंबों को सलवार के उपर से ही मसलता हुआ उसके उभारों को अपनी छाती पर रगड़ने लगा...,"बोल... प्यार से कर लेगी ना?"

अंजलि बिना कुच्छ बोले सकुचती हुई पिछे हटने की कोशिश करने लगी... तभी प्रेम का फोन बज उठा....

"जी बॉस!"

"अंजलि के साथ कुच्छ मत करना... उसको 'कल' के लिए बचाकर रखना है... जहाँ तक हो सके दूसरी लड़की को भी 'प्यार' से डील करने की कोशिश करो....उसको नंगी करके बिस्तर पर ले आओ!"

"जी बॉस... और कुच्छ?" प्रेम ने पूचछा....

"बस.. कुच्छ होगा तो मैं फोन कर दूँगा.... याद रखना अंजलि खुद भी कहे तो कुच्छ नही करना है... समझ गये ना...!"

"जी बॉस.. हम ध्यान रखेंगे...." कहकर प्रेम ने फोन जेब में डाला..," पीछे आजा सुनील.. अपना काम संभाल ले..... तुम में से अंजलि कौन है?"

"ज्जई... मैं..!" अंजलि को उम्मीद की हल्की सी किरण दिखाई दी....

"हुम्म... तुम्हारा नाम क्या है...?" प्रेम ने श्वेता की तरफ आँख मारते हुए पूचछा....

"ज्जई.. श्वेता...!"

"वेरी गुड! अजय!" प्रेम ने पास खड़े दूसरे लड़के को टोका...

"हां भाई...!"

"श्वेता तेरी है... अंजलि मेरी! हे हे हे"

"कोई बात नही भाई... ये भी कम नही है....!" अजय बत्तीसी निकाल कर बोला और आगे जाकर श्वेता को अपनी बाहों में उठा लिया.....

क्रमशः................

गतान्क से आगे..................

Kafi der baad jab gadi shahar se bhi gujar gayi toh Anjali se raha na gaya," Hum ja kahan rahe hain didi...?"

"Kyun chinta karte ho yaar... aaj ki raat tum dono kabhi bhool nahi paogei... Sari raat masti hogi.. dekhna" Seema ne mudkar pichhe dekhte huye kaha...,"Ek baat toh bata... Jab tu Sandeep se chud rahi thi toh Sunder se kya dikkat thi tujhe.. uska bhi le leti...!"

Ek anjaan ladke ke saamne Seema ke munh se aisi baat sunkar Anjali sakpaka gayi.. kafi der tak toh uss'se kuchh bola hi nahi gaya...jab Seema ne usko ek baar fir toka toh wah hadbada kar boli," ye kya baat kar rahi ho didi...?"

"arey iss'se mat sharma... mast ladka hai ye.. kabhi iske neeche aakar dekhna... "Seema abhi kuchh bol hi rahi thi ki ladke ne usko tok diya..,"ek baar fone kar le.... abhi andar jana hai ki nahi... pahunch toh gaye.."

"Ohh... mobile rah gaya yaar... apna fone nikal kar de ek baar.. Jyoti ko bol deti hoon.. chhupa kar rakh degi...! Seema ne apni jebon mein hath maarte huye kaha aur ladke ka fone lekar apne mobile par fone karke Jyoti ko samjha diya....

"Aa gaye hum... aa jayen kya?" Jyoti ko fone karne ke baad Seema ne dusra no. mila kar poochha....

"haan... makaan ke saamne sadak par hi khade hain...!" Seema ne saamne wale ki baat ka jawaab diya.....

"2....... dekh kar pagal ho jaayega tu........ ok.. hum aa rahe hain...!" Seema ne fone par kaha aur fir usko wapas karti huyi boli..,"chal.. sab theek hai....!"

********************************************

Seema ne makaan ke bahar se hi uss ladke ko wapas bhej diya aur dono ko lekar makaan mein ghus gayi... Anjali ka dil ab ghabra raha tha... Hostel se nikalte huye jahan uske romanch ki koyi seema nahi thi.. wahin ab Seema aur uss ladke ki ajeeb aur nichle darje ki baatein sun sun kar uske kaan khade ho gaye the.... Usko lag raha tha ki usne aakar theek nahi kiya...,"Yahan toh koyi nahi lag raha didi... aap toh kah rahe the koyi program hai...

"poori baarat se chudegi kya tu? andar toh chal ekbaar...!" Seema ne batteesi nikal kar kaha....

"Hi Seema... ye....nayi ladkiyan hain kya?"...andar ghuste hi unko ek ladki cigarette sulgaye huye unka intjaar karti huyi mili...

"haan.. ek dum farmfresh!" Seema kahkar Anjali ke gaalon par hath ferti huyi hansi aur fir shant hokar poochha..,"Boss kahan hain..?"

"office mein hi baithe hain... tum lekar chalo inko... main bhi aati hoon..." Ladki ne kaha aur wahan se chali gayi....

"yahan.. yahan kuchh galat toh nahi hoga na didi...!" Shweta ne sawaal kiya...

" kaha na fikar mat karo... ye hostel nahi; masti ka adda hai....aao mere sath...!" Seema ne sahmi huyi Shweta ka hath pakda aur Anjali ko sath aane ka ishara karke upar chadhne lagi.....

Seema un dono ko lekar doodhiya prakash mein naha rahe ek bade se kamre mein lekar chali gayi... Kamre ka furniture aalishan tha... beechon beech lage bistar ke paas hi char gadde wali kursiyan aur unke beech ek table rakhi thi....

Seema jate hi apni shirt ke button khol kar Kursi par pasar gayi..aur ..,"aao baitho... shuru karte hain...Masti.." Seema ne kaha aur kahte hi table par rakhi botal ka dhakkan kholne lagi....

"Yye kya hai didi...sharaab hai kya?" Shweta ne ghabrayi aankhon se Seema ki aur dekha....

"Arey... isi ke baad toh program shuru hoga.. iske bina kya maja...." Seema ne hanste huye kaha aur char mein se teen gilaas seedhe kar liye....

"wapas chalo na didi... hamein yahan achchha nahi lag raha sach mein... aap toh apne doston se milane layi thi na...?" Anjali ne shanka se Seema ko ghoora....

"don't worry yaar... sab aa jayenge dheere dheere... lo.. ek ek maaro tab tak..." Seema ne gilas unki aur sarka diye....

"Nahi didi.. ye sab toh aadmi peete hain... main nahi piyungi..." Gilas apni taraf badhta dekh Shweta achkacha si gayi....

"Kyun...? aadmiyon ki gaand mein kya jyada dum hota hai... ye dekh main pi gayi.. chal utha aur satak ja isko...!" Seema ne aadeshatmak lahje mein kaha....

"nahi didi.. mujhse nahi pi jayegi... aap jaldi wapas chalo hostel mein...." Anjali ke mann ki baat shweta ne hi kah di.....

"Kal wali baat bhool gayi kya? mujhse dosti tod rahi hai tu... tujhe pata nahi ki main aur kya kya kar sakti hoon..... chal pi isko...

"Tu pi toh ek baar.. ulti hogi toh main dekh loongi.... chal utha aur dawayi samajh kar pi ja... Anjali... gilas utha na yaar.. ye kya hai?"

Anjali kuchh der hairat se Seema ko dekhti rahi.. fir achanak khadi ho gayi...,"chalo didi yahan se abhi ke abhi.. hamein nahi karna kuchh bhi yahan...!"

"Achchha! tu toh bahut bolne lagi yaar... neeche baith ja... mujhe majboor mat kar warna yahan tumhara gang rape ho jayega... char char log jab ek sath chodte hain toh jaan bhi nikal sakti hai...samajhi...,"seema aankhein tarerne lagi thi ab," pichhle saal ek ladki ne hostel se aakar aise hi drama kiya tha yahan... sali ki lash bhi nahi mili aaj tak... police aaj tak yahi samajh rahi hai ki wo apne yaar ke sath bhag gayi kahin... bhalayi isi mein hai ki gilaas uthao aur masti karo jamkar...! aaj ki raat naitikta bhool jao"

Seema ke dhamki dene matra se hi Anjali aur shweta dono thar thar kaanpne lagi thi..,"Plz didi.. aisa kuchh mat karwana.. main mar jaaungi...!" shweta ne toh hath jod liye....

"Main kya bol rahi hoon.. Gilas uthao masti karo... chalo.. ab pi bhi lo yaar.. mera dusra bhi ho gaya...." Seema ne kutsit si hansi hanste huye dono ko dekha toh koyi bhi kuchh bol na saki... dono ne khade khade hi apne gilas uthaye aur naak sikod kar ek hi saans mein dono ne gilas khali kar diye...

"shaabash.. baith jao... main force nahi karna chahti yaar... force karne se maja kharaab ho jata hai... aao baitho... enjoy karo...!" Seema ne hanskar kaha aur agle paig taiyaar karne lagi....

"Par didi... hostel mein kab chalenge wapas...?" Anjali ne darte darte poochha....

"Abhi poori raat baki hai yaar... kyun fikar karti ho.. main hoon na sath mein... lo.. ye khao.. ji theek ho jayega...." Seema ne plate unki aur sarka di.....

************

"bus didi ji.. pls... 2 baar pi li maine.. aur le li toh sach mein hi mar jaaungi.... plz..." Shweta ki aankhon se aansoo nikal aaye...

"OK... ab tumhari marzi... main to piyungi ji bhar kar... tab tak tum kapde nikaal kar faink do apne....!" Seema ne masti mein apni kameej utari aur bra ke hook kholne lagi....

Seema ki halat dekhkar dono vichlit si hoti ja rahi thi..,"Par.. didi.. aapne toh kaha tha ki..."

"Sab aa jayenge yaar... bus aane hi wale hain.. tum kapde toh nikalo apne.. baar baar bolni padti hai tumko baat... sunta nahi hai kya?"

Seema ki iss aawaj ke baad dono mein itna sahas nahi tha ki 'wo' kuchh aur bol pati... Dono khadi huyi aur jhijhakte huye ek dusri se munh fer kar apne kapdon ko badan se alag karne lagi..... kuchh hi der baad dono nirvastra kursi par baithkar sahmi huyi ek dusri ko dekh rahi thi...

Tabhi wahi ladki kamre mein ghusi aur Seema ke kaan ke paas munh lakar kuchh bola... Morni jaise kaan rakhne wali Anjali bhi baat ka poora matlab nahi samajh payi.. par bolte huye ladki ne usi ki aur ishara kiya tha....

"kal tak kaise rukenge yaar yahan... kisi aur din ka program rakh lo.....!" Seema ne ladki ki taraf dekhte huye kaha....

"Par boss ne bola hai... tum baat kar lo...!" Ladki ne kaha....

"Theek hai.. touliya dena lakar...!" Seema uth khadi huyi...

Ladki bathroom se touliya nikal kar layi aur Seema ne uss'se lekar apne kandhon par daal liya...."Tum yahin rahna tab tak....!"

"Manisha aayi huyi hai.... usko bhej dena.. mujhe abhi kuchh kaam hai....!" Ladki ne kaha aur kursi par baith kar lajja se sakuchayi aur bhay ke maare kaanp si rahi ladkiyon ko ghoorne lagi.....

Idhar aa ek baar...!" Seema achanak thithak kar darwaje par ruki aur ishare se uss ladki ko bahar apne paas bulaya....

"Haan..?" Ladki ne bahar aakar Seema se poochha....

"Dolly..! tera dimag kharaab hai kya? inke saamne Manisha ka naam kyun liya?" Seema gusse se uss ladki ko jhidakti huyi boli...

"Par hua kya, ye toh bata..." Dolly baat ko samajh nahi payi thi..

"Ye Anjali hai na..." Seema ne bahar se hi Anjali ki aur ungali se ishara kiya..," Manisha ke gaanv ki hi hai... Wo iske saamne kaise aayegi......?"

"Oh.. par mujhe pata nahi tha yaar... koyi baat nahi.. poochhegi toh main bol doongi ki main kisi aur Manisha ki baat kar rahi thi...." Ladki ne jawaab diya....

"Koyi jarurat nahi hai... Main Manisha se poochh leti hoon.. agar usko koyi dikkat hogi toh main kisi aur ladki ko Manisha banakar bhejti hoon.....kahan hai wo?" Seema ne Dolly se poochha....

"Chal theek hai... jaldi bhejna... Wo neeche 4 no. mein baithi hai shayad" dolly ne kaha aur wapas palat gayi....

*****************************************************

"Koyi dikkat hai kya?" Ladki ne muskurakar Anjali aur Shweta ke saamne baithte huye poochha....

"Wwo.. hum kapde pahan lein kya?" Anju ne thoda jhijhakte huye poochha....

"Kyun? sharm aa rahi hai kya?" Ladki ne kaha aur khilkhila kar hans padi... Anju aur shweta ne prattyuttar mein apni palkein jhuka li....

"Yaar.. aish hi toh karne aayi ho... aaj ki raat sab kuchh bhool kar enjoy karo...yun ghut kar baithne se kya hoga... ye sab tumhe roj roj nahi milega....baki tumhari marji...!" Dolly ka itna kahna tha ki dono ne uthkar fatafat wapas apne kapde daalne shuru kar diye....

Dolly kuchh der unko aascharya se dekhti rahi... achanak usne apna mobile nikala aur ek no. laga liya....

"Haan.. bol Dolly!" Udhar se aawaaj aayi....

"Boss.. ye ladkiyan toh mere saamne hi sharma rahi hain... baki sab kaise karengi... Seema ne achchhe se trained nahi kiya lagta hai inko...!"

"Chal main baat karta hoon...! Seema ko bhej mere paas!" Boss ne kaha aur ladki ke jawaab dene se pahle hi fone kaat diya...

***********************

"Manisha... tu toh poore ek saal baad aayi hai... aaj kaise?" Seema seedhi Manisha ke paas jakar muskurate huye boli....

"Bus aise hi... kuchh kaam tha...!" Manisha ne usko taal sa diya....

"Wwo.. tere gaanv ki ek ladki aayi huyi hai.... upar mat jana tu!" Seema ne Manisha ko sachet kiya....

"Mere gaanv ki?" Manisha thode acharaj se Seema ki aankhon mein jhaankte huye boli..,"Koun?"

"Anjali..!"

"Kkkyaaa? Anju?... wo yahan kaise aayi...?" Manisha achanak uchhal si padi....

"mera Case hai... kyun? teri kuchh lagti hai kya?" Manisha ke chehre par achanak ubhare bhawon ne Seema ko vichlit sa kar diya tha.....

"kkahan hai wo?" Manisha ka chehra laal hone laga tha....

"Yaar pareshan mat ho.. usko tere baare mein kuchh pata nahi lagega.... Main sab sambhal......" Seema ki baat adhoori hi rah gayi.... Manisha ne gusse se tamtamate huye dono haathon mein uska gala daboch liya..,"jaan se maar doongi tujhe... hai kahan 'wo' jaldi bata..."

"Chhod yaar.. Sach mein maar degi kya? upar hai.. Studio wale kamre mein...!" Seema ne badi mushkil se apna peechha chhudaya.. Manisha usko chhodte hi kamre se bahar bhagi....

***************************

"mmmManishaaaa tumm?" Manisha ko apne saamne khadi dekh Anjali buri tarah se sakpaka gayi.. iss'se pahle ki wo kursi se uthkar kuchh aur bol pati.. ek jhannate daar thappad ne uske gaalon par apni ungaliyon ki chhap chhod di....

"tujhe maine mana kiya tha na.... aise chakkaron se door rahne ko bola tha na.. ?kyun aayi hai yahan...?" Iske sath hi Manisha ne ek aur tamache ke sath uska dusra gaal bhi laal kar diya...

"mmmain.. mujhe toh Seema yahan....!" Anjali ko thappadon se jyada chubhan Manisha ki angaare ugalti aankhon ki ho rahi thi... Mainsha bolne lagi toh wah beech mein hi ruk gayi....

**************

"aa jaaun Sir..?" Seema ne darwaje par khade ho kar poochha....

"ek minute...!" Boss ne kahkar fone lagaya...," Prem! Ajay ko lekar upar chale jaao.. Manisha ke tewar theek nahi lag rahe... dekhna koyi gadbad nahi honi chahiye......"

"haan.. aa jao!" Boss ne Seema ko andar bulaya.. Seema ke kamre mein aane ke baad bhi wah 'boss' ko dekh nahi pa rahi thi... unn dono ke beech andhere ki ek kali chadar pasri huyi thi.....

"Wo.. dolly kah rahi hai ki ladkiyan jhijhak rahi hain... kya baat hai...?" Boss ne Seema ke aate hi sawaal kiya....

"wwo... kya hai Sir.. ki dono ladkiyan nayi hain.. kal hi hostel mein aayi thi.... thoda time toh lagega na....!" Seema ne jawaab diya....

"Inko achchhe se garam karke lana tha na yaar... khair.. kaise bhi inke kapde nikalwa kar kuchh shots le lo... uske baad kahin nahi jayengi ye..."

"Wo toh maine nikalwa diye the.. 2-2 paig bhi pila diye... par Sunil nahi aaya hai abhi tak... main usi ka wait kar rahi hoon.... wwo Manisha ko pata nahi kya problem ho gayi achanak.. Anjali ka naam sunte hi bhadak gayi..." Seema ne kaha....

"haan... wo toh main dekh hi raha hoon...? usko Anjali ke paas bheja kisne?!" Boss ne cigarette sulgate huye poochha....

"Mmain usko mana karne hi gayi thi... par wo toh apne aap hi upar bhag gayi... uski kuchh lagti toh nahi hai na ye?" Seema ne jawab dekar poochha....

Boss ne Seema ki baat taal di....,"Tum kal Anjali ko lekar rest house pahunch jao...ek Minister ka order hai.. kal raat ka...! usko koyi aisi hi patakha ladki chahiye... 50000 aaj hi tumhe de deta hoon.. baki baad mein kar lenge...!"

"Par Sir...... Mujhe nahi lagta ki aaj bina kuchh kiye 'wo' wapas aane ko razi hogi... kapde utaarne mein hi itna time laga diya.....

**********************************

"Par didi...aap yahan kaise aayi...?" Anjali sahmi huyi si Manisha ke saamne khadi apne gaalon ko sahla rahi thi.....

"wo sab baad mein bataaungi.... chalo mere sath....!" Manisha ne hadbadi mein Anjali ka hath pakad liya.....

"Kahan lekar ja rahi ho...? Boss se poochhne do mujhe..." Dolly ne khadi hokar jaise hi apna mobile nikala; Manisha ne jhapat liya...," Sali ko kachcha chaba jaaunga yahin... chup chap padi rah... chal Anju...!" Manisha Anju ka hath pakad kar palati hi thi ki Darwaje par 2 yuvakon ko dekh kar wah thithak gayi...," Mere raaste se hat jaao Prem... Ye meri..... ye meri behan hai...!"

"theek hai theek hai... boss se toh poochh lo... chalo pichhe....!" hatte katte Prem ne gurrakar revolver taan di toh majbooran Manisha ko apne pair wapas kheenchne pade........

" Boss! Manisha ek ladki ko wapas lekar ja rahi hai... !" Prem ne revolver Manisha par taane huye hi darwaje par khade khade fone kiya....

"Manisha ko bahar nikal do aur dono ke kapde nikalwaao.. Sunil aa gaya hai.. usko main upar bhej raha hoon...! Uske baad Dolly ko bahar bhej kar room lock karwa lena...." Boss ne aadeshatmak lahje mein kaha...

"Ji boss!" Prem ne kahkar fone kata aur Manisha ki aur ghoorta hua bola,"Boss ne bola hai ki Manisha kuchh panga kare toh goli maar dena... Tum humse senior ho.. sari baatein achchhe se samajhti ho... chupchap bahar chali jao.. warna mujhe majbooran...."

Bebas si khadi Manisha Prem ka ishara samajhkar bahar nikal gayi......

"chalo... nangi ho jao 2 minute mein... warna..... chalo tum bhi...!" Prem ne ek ek karke Anjali aur Shweta ko ghoora... Dolly ladkon ke paas aakar khadi ho gayi thi....

Ghighiyayi huyi Anjali ne Shweta ki taraf dekhte huye apne kameej ka pallu pakad liya... Shweta fafak fafak kar rone hi lagi thi...

"Chalo jaldi karo!" Prem ek baar fir gurraya....

"Jji..." Shweta sisakti huyi budbudayi aur Anjali ke shuru karne ke sath hi usne bhi khud ko nirvastra karna shuru kar diya....

Achanak Sunil ne kamre mein pravesh kiya...,"Ye.. hath mein revolver kyun pakad rakhi hai bhai... rape scene ki shooting toh kal parson honi hai na?"

"Dolly! bahar ja kar darwaja lock kar de....! Main fone karoon toh khol dena...!" Prem ne Muskurakar Sunil ka swagat karne ke baad Dolly ko bahar jane ka ishara kiya....,"agar ye pyar se nahi maanti toh rape scene aaj hi shoot kar lena... he he he..."

"Kya maal hai yaar..." Sunil apni laplapati jeebh ko honton par ferta hua Anjali ko ghoorkar bola.... Anjali ke hathon mein chhupe unmukt mast nange ubhaaron ko dekh kar wahan khade teeno logon ke munh mein pani aa raha tha... tab tak Shweta bhi upar se nangi ho chuki thi...

"Iske sath rape mat karo yaar... ye toh 'pyaaaar' karne ki cheej hai ssaali...!" Sunil ne aage jakar Anjali ke nitambon ko salwar ke upar se hi masalta hua uske ubharon ko apni chhati par ragadne laga...,"Bol... pyar se kar legi na?"

Anjali bina kuchh bole sakuchati huyi pichhe hatne ki koshish karne lagi... tabhi Prem ka fone baj utha....

"Ji boss!"

"Anjali ke sath kuchh mat karna... Usko 'kal' ke liye bachakar rakhna hai... jahan tak ho sake dusri ladki ko bhi 'pyar' se deal karne ki koshish karo....usko nangi karke bistar par le aao!"

"Ji boss... aur kuchh?" Prem ne poochha....

"Bus.. kuchh hoga toh main fone kar doonga.... yaad rakhna Anjali khud bhi kahe toh kuchh nahi karna hai... samajh gaye na...!"

"Ji Boss.. hum dhyaan rakhenge...." Kahkar Prem ne fone jeb mein daala..," Pichhe aaja Sunil.. apna kaam sambhal le..... Tum mein se Anjali koun hai?"

"jji... main..!" Anjali ko ummeed ki hulki si kiran dikhayi di....

"Humm... tumhara naam kya hai...?" Prem ne Shweta ki taraf aankh maarte huye poochha....

"jji.. Shweta...!"

"Very good! Ajay!" Prem ne paas khade dusre ladke ko toka...

"haan bhai...!"

"Shweta teri hai... Anjali meri! he he he"

"Koyi baat nahi bhai... ye bhi kam nahi hai....!" Ajay batteesi nikal kar bola aur aage jakar Shweta ko apni baahon mein utha liya.....



raj..
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Re: बाली उमर की प्यास

Unread post by raj.. » 11 Dec 2014 16:06


बाली उमर की प्यास पार्ट--44



गतान्क से आगे..................

आधी नंगी श्वेता अजय की बाहों में आते ही आँख बंद करके सिसक उठी.... उसके मदमस्त गेनहूए रंग के करारे 'सेब' अजय की नज़रों के सामने थिरक से रहे थे... श्वेता अपने नितंबों और नंगी कमर पर पहली बार जवान हाथों की चुभन महसूस करके बावली हुई जा रही थी... सिर्फ़ एक बात थी जो अब तक उसकी समझ में नही आई थी... मनीषा ने अंजू को थप्पड़ मार कर लताड़ क्यूँ लगाई और उस आदमी ने मनीषा को रेवोल्वेर के दम पर बाहर क्यूँ भेजा... यही कारण था कि मस्ती में रंगी होने के बावजूद वह भय के मारे काँप भी रही थी....

"ट्तूम.. अब क्या करोगे?" कांपति आवाज़ में श्वेता ने धड़क'ते दिल से सवाल किया....

"जो तुम करने आई हो जान... और क्या?" अजय ने ले जाकर श्वेता को बिस्तर पर पटक दिया और उसके साथ लेटकर उसकी चूचियो से खेलने लगा...,"करोगी ना?"

"आहाआँ...." अपनी चूचियो की घुंडीयों को कसकर भींचे जाने से श्वेता सिसक उठी और अजय का हाथ हटाकर उन्हे अपने हाथों में छुपा लिया...,"पर 'वो' लड़की अंजलि को डाँट क्यूँ रही थी... यहाँ कुच्छ ग़लत तो नही होगा ना...?"

"छ्चोड़ो ना यार... वो खुद तो इतने मज़े करती है यहाँ आकर... दरअसल 'ये' उसकी बेहन है... उसको तो बुरा लगेगा ही ना... तुम ही बताओ.. तुम्हारी कोई बेहन तुम्हे यहाँ देख लेती तो गुस्सा करती की नही...!" कहते हुए अजय ने उसका नाडा खींच लिया.....

"हां...!पर इनको तो बाहर भेज दो..." श्वेता ने अपनी सलवार पकड़ ली....

"चिंता मत करो.. अभी भाई ने क्या बोला है.. तुम मेरी हो... और कोई तुम्हे कुच्छ नही कहेगा.. ये बस यहाँ मज़ा लेने के लिए खड़े हैं..." अजय ने आसवशण देते हुए जवाब दिया और एक बार फिर सलवार नीचे करने की कोशिश करने लगा.....

श्वेता को मालूम था की यहाँ ये अपनी मर्ज़ी से ही सब कुच्छ करेंगे... भलाई इसी में है की खुशी खुशी मज़े लिए जायें... जैसे ही अजय उसकी छातियो पर झुका... आँखें बंद किए हुए ही उसने उत्तेजना के मारे अजय का सिर पकड़ कर अपनी छातियो से चिपका लिया और अपने नितंबों को उपर उचका सलवार को निकल जाने दिया....

इसके साथ ही हल्क काले बालों वाली श्वेता की योनि सबके सामने बेपर्दा हो गयी... फांकों के बीच अजय की उंगली के रेंगने के साथ ही श्वेता ने कसमसा कर अपनी जांघें थोड़ी सी खोल कर उंगली का स्वागत किया...और उसकी योनि ने चिकना पानी छ्चोड़ दिया....

"पहले किया है कभी?" अजय के हल्का सा दबाव देते ही उंगली योनि में सर्ररर से घुस गयी थी...

"आहह... नही..." श्वेता ने सिर पटकते हुए अपने उपर सवार हो रहे पागलपन का सबूत दिया और झूठ बोल दिया....

"झूठ मत बोल यार... मैं तेरा आदमी थोड़े ही हूं... तेरी चूत तो कह रही है कि तूने किया है पहले भी.....!" अजय खेला खाया लड़का था....

"हहान.. किया है...एक बार... तुम बात क्यूँ कर रहे हो... 'वो' करो ना जल्दी....!" श्वेता उंगली अंदर बाहर होने से तड़प उठी थी....

"क्यूँ नही जान... अभी लो... अभी मज़ा देता हूँ तुम्हे..." अजय बिस्तर पर खड़ा होकर अपनी पॅंट उतारने लगा.... बिस्तर से थोड़ी दूरी पर कमरे में लगे पर्दे के पीछे सुनील अब कमरे को अच्छे से फोकस कर चुका था...... अंजलि असमन्झस में थी कि क्या करे और क्या नही... वह नीरस आँखों से कमरे में हो रही हर गतिविधि पर नज़रें गड़ाए देख रही थी....

बिना देर किए ही अजय पूरी तरह नगन होकर मस्ता चुकी श्वेता की जांघों के बीच बैठा और अपने लिंग को एक ही झटके में ठिकाने लगा दिया......

"अयाया!" श्वेता की योनि एक बार में ही पूरे लिंग को हजम कर गयी थी... आनंद के मारे पागल सी हो उठी श्वेता अपने नितंबों को शुरुआत से ही उच्छलने लगी....

"पूरी मस्तयि हुई लौंडिया है साली....!" अजय ने उसकी चूचियो को पकड़ कर धक्के मारते हुए मुड़कर प्रेम की ओर देखा.....

दरवाजे पर तैनात प्रेम ने अचानक अंजलि को अपने पास आने का इशारा किया....

"क्क्या?" अंजलि सरक कर उसके पास चली गयी....

"लंड चूसना आता है ना?"

"क्क्या?" अंजलि ने दोहराया.....

"अरे लंड मुँह में लिया है क्या कभी...?" प्रेम तनिक उत्तेजित स्वर में बोला तो अंजलि ने नज़रें झुका ली....

"नीचे बैठ जाओ.... यहाँ..!" प्रेम ने पॅंट की जीप खोल कर अंजलि को अपने कदमों में बैठने का इशारा किया और अपना तना हुआ लिंग बाहर निकाल लिया....

"देख क्या रही है जानेमंन... चूस इसको जी भर कर...!" अंजलि बैठ कर उसको घूर्ने लगी तो प्रेम ने आगे बढ़ कर अपना लिंग उसके होंटो से सटा दिया... अंजलि को ऐतराज भी नही था... उसने होन्ट खोले और 'गप्प' से लिंग को अपने होंटो में दबोच लिया.....

***********

जैसे ही अजय श्वेता के बदन को पूरी तरह तोड़ कर रख देने के बाद हांफता हुआ उस'से अलग हुआ.. प्रेम उसकी जगह लेने को आतुर हो उठा...."हट पिछे....!" प्रेम ने अंजलि को लगभग धकेल ही दिया... और उच्छल कर श्वेता की जांघों में जा बैठा....

"आ और नही प्लीज़....!" श्वेता गिड़गिडती हुई बोली...,"दुख रही है... तुम अंजलि के साथ कर लो.. फिर हमें जाना है...!"

"देख छ्होरी.. चोद्ते हुए मुझे टोका ताकि पसंद नही है.. अब की बार बोली तो पिछे घहुसेड दूँगा... समझी....!" प्रेम ने कहा और टूट चुकी श्वेता पर पिल पड़ा....

"भाई.. मैं इसकी ले लून तब तक....!" अजय अब पानी छ्चोड़ चुके लिंग को अंजलि से चटवा रहा था......

"उपर कुच्छ भी कर ले... नीचे हाथ नही लगाना इसको... बॉस ने मना किया है...!" प्रेम ने एक पल रुक कर कहा तो अंजलि तड़प उठी... 'आह' अपनी योनि को सलवार के उपर से ही छेड़ते हुए उसके मुँह से निकला......

********************************

श्वेता का बुरा हाल हो चुका था... बुरी तरह 'हाए हाए' कर रही श्वेता को अब सुनील उल्टी करके चोद रहा था... प्रेम और अजय अंजलि को अपने साथ खड़ा करके सुनील द्वारा तैयार की गयी मूवी दिखा दिखा कर हंस रहे थे... श्वेता और अंजलि की शकल हर दृशय में बड़ी सॉफ सॉफ नज़र आ रही थी जबकि लड़कों के चेहरों को अवाय्ड करने की कोशिश की गयी थी.... सब कुच्छ समझ जाने के बाद अंजलि की आँखों में आँसू आ गये... अब जाकर वह समझी थी कि मनीषा क्यूँ उसको वहाँ से ले जाना चाहती थी..... पर अब तो 'वो' शिकार बन चुकी थी...

श्वेता अभी भी उनकी साज़िश से अंजान बिस्तर में पड़ी सूबक रही थी...

"ट्तूम.. इसका क्या करोगे...?" अंजलि ने बेचारी शकल बनाकर पूचछा....

"क्कुच्छ नही... तुम दोबारा आने से मना ना करो.. बस इसीलिए....!" प्रेम ने हंसते हुए जवाब दिया......

****************

सीमा भी कमरे में आ चुकी थी.... सारी बात समझने के बाद अब श्वेता के चेहरे पर भी हवाइयाँ उड़ रही थी....

"अर्रे यार... प्राब्लम क्या है... जब तुम्हारा चुड़ाने का मन करे तो तुम इनको बुला लेना... और जब किसी का तुम्हे चोदने का मंन करेगा तो ये तुम्हे बुला लेंगे... सो सिंपल.. तुम इतना दर क्यूँ रही हो....?" सीमा श्वेता के कंधे पर हाथ रखती हुई बोली....

"ववो.. वो तो ठीक है दीदी जी.. पर... ये फिल्म क्यूँ बनाई...!" श्वेता ज़रा सी हमदर्दी पाकर रोने सी लगी थी.....

"अब ये नाटक मत कर यार... हॉस्टिल चलने पर सब समझा दूँगी....!" सीमा ने झल्लते हुए कहा....

"तो चलो दीदी... जल्दी चलो....!" श्वेता के लिए वहाँ एक पल भी रुकना भारी हो रहा था.....

"ववो.. क्या है कि... अभी तो गाड़ी नही है यहाँ... कल सुबह चलेंगे या कल रात को....!" सीमा ने कहा.....

ये बात सुनकर तो दोनो पर जैसे पहाड़ टूट पड़ा...,"पर कल तो मेरे घरवाले आने हैं दीदी.... आपने रात को ही वापस आने को बोला था...."

"मेरे भी..." अंजलि ने हां में हां की....

"ओहो.. जब मैं यहाँ हूँ तो तुम फिकर क्यूँ कर रहे हो.... मैं प्रिन्सिपल मेडम से कहलवा दूँगी.. बस! वो कुच्छ भी बोल देंगी....!" सीमा बोल ही रही थी कि डॉली दरवाजे पर आकर खड़ी हो गयी..,"सीमा!".. उसके साथ ही मनीषा खड़ी थी....

"हाँ... बोल.." सीमा पलट कर दरवाजे तक गयी.....

"बॉस ने बोला है कि आप सब अंजलि को छ्चोड़ कर नीचे आ जाओ... मनीषा मान गयी है... वो रात को अंजलि के साथ रहना चाहती है... इनको यहीं रहने देने को बोला है.....!"

"ठीक है..." सीमा कहकर मनीषा के पास गयी और उसके कंधे पर हाथ मारा..,"इतना सेनटी मत हुआ कर यार... कुच्छ नही होता इन्न बातों से... एंजाय ही तो करते हैं बस! जा अंदर..."

मनीषा बिना कोई जवाब दिए अंदर आ गयी... जैसे ही बाकी सब बाहर गये... डॉली ने कुण्डी लगाकर ताला लगा दिया.....

*************************

"ले लिए मज़े? कर ली अपनी भी जिंदगी बर्बाद... क्या ज़रूरत थी तुझे यहाँ आने की...!" अकेली होते ही बेबस हो चुकी मनीषा अंजलि पर बरस पड़ी....

नशे का हल्का हल्का सुरूर अंजलि पर अब भी था... कमीज़ तो उसने निकाल ही रखा था... मनीषा की नियत का अंदाज़ा लगाकर वह सलवार खोलने की तैयारी करने लगी... वह खुद भी तो तड़प रही थी बहुत...

"ये क्या कर रही है तू...?" मनीषा ने उसको सलवार का नाडा खोल कर नीचे करते देखा तो वह गुर्रकार बोली...,"कमीज़ पहन ले चुपचाप... हो तो गया सत्यानाश... अब और क्या इरादा है....!"

अंजलि से कुच्छ बोलते ना बना.... वह सिर झुका कर एक पल खड़ी हुई और अचानक हड़बड़ा कर कमीज़ ढूँढने लगी......

"ये तूने क्या किया अंजू...?" मनीषा ने पास आकर अंजलि के कंधे थाम लिए और रोने सी लगी....

"आ... आज के बाद नही आउन्गि दीदी... ग़लती हो गयी...!"

"हुंग... आज के बाद नही आएगी... तुझे पता भी है तू किन लोगों के हत्थे चढ़ गयी है... तुझे शायद पता नही कि तरुण भी इन्ही लोगों के साथ काम करता था... वही मुझे अपने प्यार के जाल में फँसा कर यहाँ लाया था और मैं उसके मरने के बाद भी इस दलदल से निकल नही पाई हूँ... कैसे निकलेगी तू...? तुझे बचाने के लिए मैने उसका खून तक कर दिया और तू फिर भी...." मनीषा की आँखों से आँसुओं की झड़ी लगी हुई थी...

तरुण का कत्ल करने की बात सुनकर अंजलि फटी आँखों से मनीषा को देखती रह गयी...... अचानक उसको मानव का ख़याल आया...,"आपके पास मोबाइल है दीदी...?"

"ये इतने पागल नही हैं... 5 साल से इनके पास आते रहने के बावजूद में लाख कोशिश करके ये जान नही पाई हूँ कि 'बॉस' कौन है...." मनीषा अपना सिर पकड़ कर बैठ गयी....

"त्तोह.. तो क्या दीदी तरुण को आपने...?" अंजलि ने उसके पास बैठते हुए पूचछा...

"हाँ... तो क्या ग़लत किया...? उसने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी.. तुम्हारी, मीनू और पिंकी की करने वाला था.... बता.. बता ग़लत किया क्या मैने?" मनीषा को इस रूप में अंजलि ने पहली बार ही देखा था... रोते हुए.. नारी की तरह....

"नही दीदी.. आपने सही किया... पर ये लोग कौन हैं... तरुण ने आपको कैसे फँसाया.. पूरी बात बताओ ना मुझे....!" अंजलि ने मनीषा के कंधे पर सिर रख लिया.....

बड़ी मुश्किल से मनीषा अपने जज्बातों पर काबू पाती हुई बोलने को तैयार हुई.. धीरे से बिस्तेर से उठकर वह दीवार के पास जाकर खड़ी हुई उपर कोने में मकड़ी के जाले की तरफ उंगली से इशारा करके बोलना शुरू किया...," इस मकड़ी को देख रही हो अंजू? कितनी शांत और मासूम सी लग रही है... पर ऐसा है नही... इसकी वीभात्सा और कुत्सित शक्तियाँ इसके द्वारा बुने गये इस जाल में हैं... ये निसचिंत बैठी है... इसके अनुपम और अनोखे जाल के आकर्षण में बँध कर कोई ना कोई शिकार देर सवेर आ ही जाना है... इसका खेल तभी शुरू होगा... इस महीन से धागे से बने जाल में एक बार अगर शिकार फँस गया तो उसका बच कर निकलना असंभव है... शिकार बाहर निकलने के लिए जितना फड़फडाएगा; उतना ही उलझता जाएगा.... उसके बाद ये तुच्छ सी दिखने वाली मकड़ी, जब चाहे, जहाँ से चाहे शिकार के शरीर को नोचेगी... उसके एक एक अंग को पूरे इतमीनान से हजम करेगी.....

ये लोग इस मकड़ी की तरह हैं अंजू! इनकी मक्कारी का पता हम जैसे शिकार को इनके जाल में फँसने के बाद ही चलता है... उमंगों और आशाओं से भरी उभरती जवानी में प्यार होना कोई बड़ी बात नही है... किसी की भी प्यार भरी मुस्कुराहट कमसिन उमर में हमें उसके दिल के करीब ले जाती है... ये लोग अक्सर अपने घिनोने मकसद को पूरा करने के लिए 'प्यार' नाम का इस्तेमाल करते हैं.... प्यार से पैदा होता है सहज विश्वाश... विश्वाश जो हमें 'यार' की खुशी के लिए कुच्छ भी करने पर विवश कर देता है... झिझकते हुए ही सही, पर पहली बार 'उसके' सामने कपड़े उतारने पर भी...

तरुण ने भी मेरे साथ 5 साल पहले ऐसा ही छल किया... तब उसने ऐसा अपने किसी दोस्त के बहकावे में आकर किया था... पर बाद में उसको भी इसमें मज़ा आने लगा... अपनी किस्मत से अकेले ही टकराने का मंन बना चुकी मैं खेतों में काम करने अकेली ही जाती थी ... दिन में भी और कभी कभी रात में भी.... तरुण को लगा मुझे बड़ी आसानी से हासिल किया जा सकता है.. और उसने कर भी लिया... उसकी बड़ी बड़ी मनमोहक बातों के जाल में उलझ कर मैं एक दिन उसके साथ यहाँ तक पहुँच गयी.. बहला फुसला कर तरुण ने मेरे कौमार्य को यहीं पहली बार कमरे के सामने रौंदा था.... ये मुझे बाद में पता चला कि अब मेरी इज़्ज़त तरुण के अलावा किसी और के हाथ में भी है....

बहुत छट-पटाई.. पर कुच्छ भी ना कर सकी... इनके पास मेरे नंगे बदन के फोटो थे... तरुण मेरी कीमत लेकर भाग गया... और मुझे इस दलदल में सड़ने को छ्चोड़ गया... एक दम लचर!

ये जो कहते मुझे करना पड़ता... जहाँ कहते मुझे जाना पड़ता... सोना पड़ता! अपने चक्रव्युवहा में 'ये' लड़कियों को ही नही, तथाकथित इज़्ज़तदार और अमीर लोगों को भी फाँसते हैं.... ट्रेंड करने के बाद हमें उनके पास केमरा च्छुपाकर ले जाने को कहा जाता है... उनके साथ अपनी नंगी तस्वीरें उतारने को कहा जाता है... और फिर हमी से ये लोग उनके पास फोन करवाते हैं... ब्लॅकमेलिंग के लिए....

पहली बार मैं तरुण के कहने पर ही तुम्हे उठाकर चौपाल में ले गयी थी... वो देखना चाहता था कि तुम किस हद तक जा सकती हो..... पर जाने क्यूँ मुझे तुम्हे छ्छूते हुए तुम्हारे अंदर अपना अक्स महसूस हुआ... मुझे तुम्हारे कुंवारे शरीर से 'प्यार' सा हो गया..... मैं तुम्हे वहाँ पहुँचने नही देना चाहती थी जहाँ वो तुम्हे लेकर जाना चाहता था... इसीलिए मैने तुम्हारी 'काम' भावना को खुद ही शांत करने की कोशिश की..... मैं तुम्हारे और करीब आकर तुम्हे सब कुच्छ बता देना चाहती थी.... पर तुम कभी मेरे पास आई ही नही....

मीनू के लेटर्स उसने मुझे रखने के लिए दे रखे थे... उस रात उसने मुझे चौपाल में बुलाकर 'वो' लेटर्स मुझसे माँगे और अपना 'पूरा' प्लान मुझे बताया.... उसके प्लान में तुम्हारा नाम सुनकर मैं बौखला गयी और लेटर्स के साथ एक 'चाकू' भी ले गयी... लेटर्स उसको सौंप कर मैने तुम्हे इस सारे मामले से बचाए रखने की गुज़ारिश की, पर वो हंस कर वापस जाने के लिए पलटने लगा...

और मजबूरन जो सोचकर मैं वहाँ गयी थी, मैने वो कर दिया... बरसों पहले से सीने में धधक रही टीस अचानक पागलपन की लपटों में बदल गयी और मैने पिछे से उसका मुँह दबोच कर दनादन चाकू के वार उसकी छाती और पेट में कर दिए.... मैं बहुत डरी हुई थी.. पर हल्का सा संतोष भी था... अपना बदला लेने का और तुम्हारी जिंदगी बचाने का.....

हड़बड़ाई हुई मैं बाहर निकल कर अपने घर में घुसने ही वाली थी कि चौपाल के गेट पर आकर सोनू इधर उधर टहलता दिखाई दिया... मुझे लगा कहीं उसने मुझे देख ना लिया हो.... कुच्छ देर बाद 'वो' अंदर चला गया और थोड़ी ही देर बाद भागता हुआ बाहर निकला... मैने उसको किसी से कुच्छ ना कहने के लिए रोकने को आवाज़ भी लगाई पर 'वो' नही रुका.....

चौपाल में लोगों की लड़ाई सुन'ने वाली बात मैने इसीलिए फैलाई थी ताकि अगर सोनू ने मुझे देख लिया हो तो मैं कह सकूँ की मैं भी आवाज़ सुनकर ही वहाँ गयी थी.....सब कुच्छ ठीक हो गया था... तरुण को उसके किए की सज़ा मिल गयी और किसी को शक भी नही हुआ... पर फ़ायदा क्या हुआ.. मेरी तो जिंदगी पहले ही बर्बाद हो चुकी थी... जिसको बचाने के लिए मैने 'वो' सब किया... 'वो' आज मेरे सामने यहीं बैठी है..... इस दलदल में......

क्रमशः................


गतान्क से आगे..................

aadhi nangi Shweta Ajay ki baahon mein aate hi aankh band karke sisak uthi.... Uske madmast genhuye rang ke karare 'seb' Ajay ki najron ke saamne thirak se rahe the... Shweta apne nitambon aur nangi kamar par pahli baar jawaan hathon ki chubhan mahsoos karke bawli huyi ja rahi thi... Sirf ek baat thi jo ab tak uski samajh mein nahi aayi thi... Manisha ne Anju ko thappad maar kar lataad kyun lagaayi aur Uss aadmi ne Manisha ko revolver ke dum par bahar kyun bheja... Yahi karan tha ki masti mein rangi hone ke bawjood wah bhay ke maare kaanp bhi rahi thi....

"ttum.. ab kya karoge?" Kaanpti aawaj mein Shweta ne dhadak'te dil se Sawaal kiya....

"Jo tum karne aayi ho jaan... aur kya?" Ajay ne le jakar Shweta ko bistar par patak diya aur uske sath letkar uski chhatiyon se khelne laga...,"Karogi na?"

"aahaaan...." Apni chhatiyon ki ghundiyon ko kaskar bheenche jane se Shweta sisak uthi aur ajay ka hath hatakar unhe apne hathon mein chhupa liya...,"Par 'wo' ladki Anjali ko daant kyun rahi thi... yahan kuchh galat toh nahi hoga na...?"

"Chhodo na yaar... wo khud toh itne maje karti hai yahan aakar... darasal 'ye' uski behan hai... usko toh bura lagega hi na... tum hi batao.. tumhari koyi behan tumhe yahan dekh leti toh gussa karti ki nahi...!" Kahte huye Ajay ne uska naada kheench liya.....

"haan...!par inko toh bahar bhej do..." Shweta ne apni salwar pakad li....

"Chinta mat karo.. abhi bhai ne kya bola hai.. tum meri ho... aur koyi tumhe kuchh nahi kahega.. ye bus yahan maja lene ke liye khade hain..." Ajay ne aaswashan dete huye jawab diya aur ek baar fir salwar neeche karne ki koshish karne laga.....

Shweta ko maloom tha ki yahan ye apni marji se hi sab kuchh karenge... bhalaayi isi mein hai ki khushi khushi maje liye jaayein... Jaise hi ajay uski chhatiyon par jhuka... aankhein band kiye huye hi usne uttejana ke maare Ajay ka sir pakad kar apni chhatiyon se chipka liya aur apne nitambon ko upar uchka salwar ko nikal jane diya....

Iske sath hi hulke kaale baalon wali Shweta ki yoni sabke saamne beparda ho gayi... Faankon ke beech Ajay ki ungali ke rengne ke sath hi Shweta ne kasmasa kar apni jaanghein thodi si khol kar ungali ka swagat kiya...aur uski yoni ne chikna pani chhod diya....

"Pahle kiya hai kabhi?" Ajay ke hulka sa dabav dete hi ungali yoni mein sarrrr se ghus gayi thi...

"aahhhh... nahi..." Shweta ne sir patakte huye apne upar sawaar ho rahe pagalpan ka saboot diya aur jhooth bol diya....

"Jhooth mat bol yaar... main tera aadmi thode hi hoon... teri choot toh kah rahi hai ki tune kiya hai pahle bhi.....!" Ajay khela khaya ladka tha....

"Hhaan.. kiya hai...ek baar... tum baat kyun kar rahe ho... 'wo' karo na jaldi....!" Shweta ungali andar bahar hone se tadap uthi thi....

"Kyun nahi jaan... abhi lo... abhi maja deta hoon tumhe..." Ajay bistar par khada hokar apni pant utaarne laga.... Bistar se thodi doori par kamre mein lage parde ke peechhe Sunil ab camre ko achchhe se focus kar chuka tha...... Anjali asamanjhas mein thi ki kya kare aur kya nahi... wah neeras aankhon se kamre mein ho rahi har gatividhi par najarein gadaye dekh rahi thi....

Bina der kiye hi Ajay poori tarah nagan hokar masta chuki Shweta ki jaanghon ke beech baitha aur apne ling ko ek hi jhatke mein thikane laga diya......

"aaaah!" Shweta ki yoni ek baar mein hi poore ling ko hajam kar gayi thi... anand ke maare paagal si ho uthi Shweta apne nitambon ko shuruaat se hi uchhalne lagi....

"Poori mastayi huyi loundiya hai sali....!" Ajay ne uski chhatiyon ko pakad kar dhakke maarte huye mudkar Prem ki aur dekha.....

Darwaje par tainaat prem ne achanak Anjali ko apne paas aane ka ishara kiya....

"kkya?" Anjali sarak kar uske paas chali gayi....

"Lund choosna aata hai na?"

"kkya?" Anjali ne dohraya.....

"arey lund munh mein liya hai kya kabhi...?" Prem tanik uttejit swar mein bola toh Anjali ne najrein jhuka li....

"Neeche baith jao.... yahan..!" Prem ne pant ki jip khol kar anjali ko apne kadmon mein baithne ka ishara kiya aur apna tanaa hua ling bahar nikal liya....

"Dekh kya rahi hai janemann... choos isko ji bhar kar...!" Anjali baith kar usko ghoorne lagi toh Prem ne aage badh kar apna ling uske honton se sata diya... Anjali ko aitraaj bhi nahi tha... Usne hont khole aur 'gapp' se ling ko apne honton mein daboch liya.....

***********

Jaise hi Ajay Shweta ke badan ko poori tarah tod kar rakh dene ke baad haanfta hua uss'se alag hua.. Prem uski jagah lene ko aatur ho utha...."Hat pichhe....!" Prem ne Anjali ko lagbhag dhakel hi diya... aur uchhal kar Shweta ki jaanghon mein ja baitha....

"aah aur nahi pls....!" Shweta gidgidati huyi boli...,"Dukh rahi hai... tum Anjali ke sath kar lo.. fir hamein jana hai...!"

"dekh chhori.. chodte huye mujhe toka taki pasand nahi hai.. ab ki baar boli toh pichhe ghhused doonga... samjhi....!" Prem ne kaha aur toot chuki Shweta par pil pada....

"Bhai.. main iski le loon tab tak....!" Ajay ab pani chhod chuke ling ko Anjali se chatwa raha tha......

"upar kuchh bhi kar le... neeche hath nahi lagana isko... boss ne mana kiya hai...!" Prem ne ek pal ruk kar kaha toh Anjali tadap uthi... 'aah' apni yoni ko salwar ke upar se hi chhedte huye uske munh se nikla......

********************************

Shweta ka bura haal ho chuka tha... buri tarah 'haye haye' kar rahi Shweta ko ab Sunil ulti karke chod raha tha... Prem aur Ajay anjali ko apne saath khada karke Sunil dwara taiyaar ki gayi movie dikha dikha kar hans rahe the... Shweta aur Anjali ki shakal har drishay mein badi saaf saaf najar aa rahi thi jabki ladkon ke chehron ko avoid karne ki koshish ki gayi thi.... Sab kuchh samajh jane ke baad Anjali ki aankhon mein aansoo aa gaye... ab jakar wah samajhi thi ki Manisha kyun usko wahan se le jana chahti thi..... par ab toh 'wo' shikaar ban chuki thi...

Shweta abhi bhi unki sazish se anjaan bistar mein padi subak rahi thi...

"ttum.. iska kya karoge...?" Anjali ne bechari shakal banakar poochha....

"kkuchh nahi... tum dobara aane se mana na karo.. bus isiliye....!" Prem ne hanste huye jawaab diya......

****************

Seema bhi kamre mein aa chuki thi.... sari baat samajhne ke baad ab Shweta ke chehre par bhi hawaayiyan udd rahi thi....

"arrey yaar... problem kya hai... jab tumhara chudne ka man karey toh tum inko bula lena... aur jab kisi ka tumhe chodne ka mann karega toh ye tumhe bula lenge... so simple.. tum itna dar kyun rahi ho....?" Seema Shweta ke kandhe par hath rakhti huyi boli....

"wwo.. wo toh theek hai didi ji.. par... ye film kyun banayi...!" Shweta jara si hamdardi pakar rone si lagi thi.....

"ab ye natak mat kar yaar... hostel chalne par sab samjha doongi....!" Seema ne jhallate huye kaha....

"toh chalo didi... jaldi chalo....!" Shweta ke liye wahan ek pal bhi rukna bhari ho raha tha.....

"wwo.. kya hai ki... abhi toh gadi nahi hai yahan... kal subah chalenge ya kal raat ko....!" Seema ne kaha.....

Ye baat sunkar toh dono par jaise pahad toot pada...,"Par kal toh mere gharwale aane hain didi.... aapne raat ko hi wapas aane ko bola tha...."

"mere bhi..." Anjali ne haan mein haan ki....

"Oho.. jab main yahan hoon toh tum fikar kyun kar rahe ho.... main Principal madam se kahalwa doongi.. bus! wo kuchh bhi bol dengi....!" Seema bol hi rahi thi ki Dolly darwaje par aakar khadi ho gayi..,"seema!".. uske sath hi Manisha khadi thi....

"haan... bol.." Seema palat kar darwaje tak gayi.....

"boss ne bola hai ki aap sab Anjali ko chhod kar neeche aa jao... Manisha maan gayi hai... wo raat ko Anjali ke sath rahna chahti hai... Inko yahin rahne dene ko bola hai.....!"

"theek hai..." Seema kahkar Manisha ke paas gayi aur uske kandhe par hath maara..,"Itna senty mat hua kar yaar... kuchh nahi hota inn baaton se... enjoy hi toh karte hain bus! ja andar..."

Manisha bina koyi jawaab diye andar aa gayi... jaise hi baki sab bahar gaye... Dolly ne kundi lagakar tala laga diya.....

*************************

"Le liye maje? kar li apni bhi jindagi barbaad... kya jarurat thi tujhe yahan aane ki...!" Akeli hote hi bebas ho chuki Manisha Anjali par baras padi....

Nashe ka hulka hulka suroor Anjali par ab bhi tha... kameej toh usne nikal hi rakha tha... Manisha ki niyat ka andaja lagakar wah salwaar kholne ki taiyari karne lagi... wah khud bhi toh tadap rahi thi bahut...

"ye kya kar rahi hai tu...?" Manisha ne usko salwar ka nada khol kar neeche karte dekha toh wah gurrakar boli...,"Kameej pahan le chupchap... ho toh gaya satyanash... ab aur kya iraada hai....!"

Anjali se kuchh bolte na bana.... wah sir jhuka kar ek pal khadi huyi aur achanak hadbada kar kameej dhoondhne lagi......

"Ye tune kya kiya Anju...?" Manisha ne paas aakar Anjali ke kandhe thaam liye aur rone si lagi....

"aa... aaj ke baad nahi aaungi didi... galti ho gayi...!"

"hunh... aaj ke baad nahi aayegi... tujhe pata bhi hai tu kin logon ke hatthe chadh gayi hai... Tujhe shayad pata nahi ki Tarun bhi inhi logon ke sath kaam karta tha... wahi mujhe apne pyar ke jaal mein fansa kar yahan laya tha aur main uske marne ke baad bhi iss daldal se nikal nahi payi hoon... kaise nikalegi tu...? Tujhe bachane ke liye maine uska khoon tak kar diya aur tu fir bhi...." Manisha ki aankhon se aansuon ki jhadi lagi huyi thi...

Tarun ka katl karne ki baat sunkar Anjali fati aankhon se Manisha ko dekhti rah gayi...... achanak usko manav ka khayal aaya...,"aapke paas mobile hai didi...?"

"Ye itne pagal nahi hain... 5 saal se inke paas aate rahne ke bawjood mein lakh koshish karke ye jaan nahi payi hoon ki 'boss' koun hai...." Manisha apna sir pakad kar baith gayi....

"ttoh.. toh kya didi Tarun ko aapne...?" Anjali ne uske paas baithte huye poochha...

"haan... toh kya galat kiya...? usne meri jindagi barbaad kar di.. tumhari, meenu aur Pinky ki karne wala tha.... bata.. bata galat kiya kya maine?" Manisha ko iss roop mein Anjali ne pahli baar hi dekha tha... rote huye.. nari ki tarah....

"nahi didi.. aapne sahi kiya... par ye log koun hain... Tarun ne aapko kaise fansaya.. poori baat batao na mujhe....!" Anjali ne Manisha ke kandhe par sir rakh liya.....

Badi mushkil se Manisha apne jajbaaton par kabu pati huyi bolne ko taiyaar huyi.. dheere se bister se uthkar wah deewar ke paas jakar khadi huyi upar kone mein makdi ke jaale ki taraf ungali se ishara karke bolna shuru kiya...," Iss makdi ko dekh rahi ho Anju? Kitni shant aur masoom si lag rahi hai... par aisa hai nahi... iski vibhatsa aur kutsit shaktiyan iske dwara bune gaye iss jaal mein hain... Ye nischint baithi hai... iske anupam aur anokhe jaal ke aakarshan mein bandh kar koyi na koyi shikaar der sawer aa hi jana hai... iska khel tabhi shuru hoga... iss maheen se dhaage se bane jaal mein ek baar agar shikaar fans gaya toh uska bach kar nikalna asambhav hai... shikaar bahar nikalne ke liye jitna fadfadayega; utna hi ulajhta jayega.... Uske baad ye tuchh si dikhne wali makdi, jab chahe, jahan se chahe shikaar ke shareer ko nochegi... Uske ek ek ang ko poore itminaan se hajam karegi.....

Ye log iss makdi ki tarah hain Anju! Inki makkari ka pata hum jaise shikaar ko inke jaal mein fansne ke baad hi chalta hai... umangon aur aashaaon se bhari ubharti Jawani mein pyar hona koyi badi baat nahi hai... Kisi ki bhi pyar bhari muskurahat kamsin umar mein hamein uske dil ke kareeb le jati hai... Ye log aksar apne ghinone maksad ko poora karne ke liye 'pyar' naam ka istemaal karte hain.... Pyar se paida hota hai sahaj vishvash... vishvash jo hamein 'yaar' ki khushi ke liye kuchh bhi karne par vivash kar deta hai... jhijhakte huye hi sahi, par pahli baar 'uske' saamne kapde utaarne par bhi...

Tarun ne bhi mere sath 5 saal pahle aisa hi chhal kiya... tab usne aisa apne kisi dost ke bahkaawe mein aakar kiya tha... par baad mein usko bhi ismein maja aane laga... Apni kismat se akele hi takrane ka mann bana chuki main kheton mein kaam karne akeli hi jati thi ... din mein bhi aur kabhi kabhi raat mein bhi.... Tarun ko laga mujhe badi aasani se hasil kiya ja sakta hai.. aur usne kar bhi liya... uski badi badi manmohak baaton ke jaal mein ulajh kar main ek din uske sath yahan tak pahunch gayi.. bahla fusla kar Tarun ne mere koumarya ko yahin pahli baar camrey ke saamne rounda tha.... ye mujhe baad mein pata chala ki ab meri ijjat Tarun ke alawa kisi aur ke hath mein bhi hai....

Bahut chhatpatayi.. par kuchh bhi na kar saki... inke paas mere nange badan ke photo the... Tarun meri keemat lekar bhag gaya... aur mujhe iss daldal mein sadne ko chhod gaya... ek dum lachar!

Ye jo kahte mujhe karna padta... jahan kahte mujhe jana padta... sona padta! apne chakravyuvha mein 'ye' ladkiyon ko hi nahi, tathakathit ijjatdaar aur ameer logon ko bhi fansate hain.... Trained karne ke baad hamein unke paas camra chhupakar le jane ko kaha jata hai... Unke sath apni nangi tasveerein utaarne ko kaha jata hai... aur fir hami se ye log unke paas fone karwaate hain... blackmailing ke liye....

Pahli baar main Tarun ke kahne par hi tumhe uthakar choupal mein le gayi thi... Wo dekhna chahta tha ki tum kis had tak ja sakti ho..... Par jane kyun mujhe tumhe chhoote huye tumhare andar apna aks mahsoos hua... mujhe tumhare kunware shareer se 'pyar' sa ho gaya..... Main tumhe wahan pahunchne nahi dena chahti thi jahan wo tumhe lekar jana chahta tha... Isiliye maine tumhari 'Kaam' bhawna ko khud hi shant karne ki koshish ki..... Main tumhare aur kareeb aakar tumhe sab kuchh bata dena chahti thi.... par tum kabhi mere paas aayi hi nahi....

Meenu ke letters usne mujhe rakhne ke liye de rakhe the... Uss raat usne mujhe choupal mein bulakar 'wo' letters mujhse maange aur apna 'poora' plan mujhe bataya.... Uske plan mein tumhara naam sunkar main boukhla gayi aur letters ke sath ek 'chaku' bhi le gayi... Letters usko sounp kar maine tumhe iss sare maamle se bachaye rakhne ki gujarish ki, par wo hans kar wapas jane ke liye palatne laga...

Aur majbooran jo sochkar main wahan gayi thi, maine wo kar diya... Barson pahle se seene mein dhadhak rahi tees achanak pagalpan ki lapton mein badal gayi aur maine pichhe se uska munh daboch kar danadan chaku ke vaar uski chhati aur pate mein kar diye.... Main bahut dari huyi thi.. par hulka sa santosh bhi tha... apna badla lene ka aur tumhari jindagi bachane ka.....

Hadbadayi huyi main bahar nikal kar apne ghar mein ghusne hi wali thi ki choupal ke gate par aakar Sonu idhar udhar tahalta dikhayi diya... mujhe laga kahin usne mujhe dekh na liya ho.... kuchh der baad 'wo' andar chala gaya aur thodi hi der baad bhagta hua bahar nikla... maine usko kisi se kuchh na kahne ke liye rokne ko aawaj bhi lagayi par 'wo' nahi ruka.....

Choupal mein logon ki ladayi sun'ne wali baat maine isiliye failayi thi taki agar Sonu ne mujhe dekh liya ho toh main kah sakoon ki main bhi aawaj sunkar hi wahan gayi thi.....Sab kuchh theek ho gaya tha... Tarun ko uske kiye ki saza mil gayi aur kisi ko shak bhi nahi hua... Par fayda kya hua.. meri toh jindagi pahle hi barbaad ho chuki thi... jisko bachane ke liye maine 'wo' sab kiya... 'wo' aaj mere saamne yahin baithi hai..... iss daldal mein......