ये कैसा परिवार !!!!!!!!!

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007
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ये कैसा परिवार !!!!!!!!!

Unread post by 007 » 16 Dec 2014 04:49

ये कैसा परिवार !!!!!!!!! पार्ट--1

ये है देल्ही देश का सबसे व्यस्त सिटी आबादी लगभग 1.5 करोड़ से भी ज़्यादा ... यहा सभी धर्म सभी प्रांत के लोग रहते है यहा कभी कोई लड़ाई झगड़ा न्ही होता यहा के लोग के काम {चुदाई या जॉब डिसाइड युवर सेल्फ़ आफ्टर रेड} मैं विश्वास रखते है ...यहा एक एरिया पड़ता है महरौली.... अधिकतर पंजाबी फॅमिलीस रहती है और किराए पर अप्प्ना घर उठाते है एसे ही एक घर मैं एक परिवार किराए पर रहने आया फॅमिली मैं केवल 2 लोग ही थे मियाँ {सुरेश} और बीवी {रत्ना}. मकान मालकिन एक 50 वर्षीया विधवा थी जिसके पति की डेथ कोई 10 साल पहले हो गई थी उसका एक लड़का था टीटू जो कुछ करना ही न्ही चाहता था एज करीब 18 साल ....मा अपने घर को किराए पर उठा कर घर का खर्चा चलाती थी...अभी तो शुरुआत है देखिए कितने आए लोग मिलते है इस परिवार मैं और किसका कैसा नेचर है ...........

सुरेश को रिलाइयन्स मैं सेल्स टीम लीडर है इसलिए कोई वर्किंग टाइम फिक्स न्ही है पोलीस की तरह 24 अवर सर्विस मैं उपलब्ध रहता है रात के 1 बजे हो 2 बजे हो कोई फ़र्क न्ही पड़ता बस उठो और पीसी पर रिपोर्ट तैयार करके भेजो कभी कभी तो हेड अपने घर पर बुला लेते है...

सुरेश की एज कोई 28 साल की थी हाइट 5.9 हैल्थि सुंदर था और रत्ना भी 5.4 के आसपास्स थोड़ा फॅट एक्सट्रा था लेकिन पूरी हाउस वाइफ टाइप थी हमेशा मॅक्सी और साडी पहनना पसंद करती थी....

सुरेश को काम पर जाने के लिए डेली रूटीन से गुज़रते हुए खाना ज़रूर खाना पड़ता था क्योंकि रत्ना उन्हे बिना खाना खाए न्ही जाने देती थी क्योंकि सुरेश बहुत चोदु किस्म के थे और लिए बिना न्ही मानते थे इसलिए रत्ना का मानना था कि कुछ ना कुछ खाते रहो तो निकलने से ज़्यादा असर न्ही होगा...खाना बनाते बनाते पसीने से भीग चुकी थी रत्ना और पसीने की वज़ह से जो खुसबू वाहा फैली थी उसने सुरेश को मदहोश कर दिया सुरेश धीरे से रत्ना के पीछे जा कर खड़ा हो गया और पीछे से अपपना लॅंड उसके टच करने लगा रत्ना बोली

उफ्फ तुम भी ना हर समय ये सब क्या है कभी तो चैन से रहने दिया करो यार्र हर वक़्त ठुकाई तुम्हारा मन न्ही भरता क्या कभी

सुरेश : यार्र शादी किसलिए की थी ..तुम्हारे घर गया था 5 लाख खर्चा किए है तुम्हारे बाप न्ही फिर इतनी खूबसूरत बीवी भी किसी किसी को मिलती है आओ एक राउंड होज़ाये..

रत्ना : अरे ऑफीस का टाइम हुआ है अभी 5 बजे ही तो ली थी तुमने अब्ब फिर

सुरेश : अरे आ जाओ यार्र

रत्ना : न्ही, काम करवाने के बाद मैं बहुत थक जाती हूँ और फिर मैं खाना न्ही ब्ना पाउन्गी

सुरेश : कोई बात न्ही यार्र मैं ऑफीस की कॅनटिन मैं ले लूँगा तुम आओ

रत्ना : न्ही

सुरेश वही पर उसकी मॅक्सी उठा कर उसकी पॅंटी से खेलने लगता है और रत्ना मदहोश होने लगती है फिर धीरे धीरे सुरेश अप्प्ना काम निपटा कर ऑफीस चला जाता है लेकिन रत्ना पॅंटी पहनना भूल जाती है ...अब्ब देखो क्या होता है.........

सुरेश ने जी भर कर ली थी इसलिए थक कर रत्ना बेहाल हो गयइ थी और गहरी नींद मैं सो गयइ थी. ऑफीस से दो बार सुरेश ने कॉल किया लेकिन फोन रिसीव न्ही किया सुरेश समझ गया कि रत्ना सो रही है हमेशा ये ही होता था इसमे कोई असचार्य की बात न्ही थी.शाम के चार बजे रतना उठी टाय्लेट गयइ और वाहा जा कर अपपनी प्यारी सी चूत देखी जिसका दीवाना था सुरेश ... जो हरदम हाथ डालना तो ज़रूरी ही समझता था ....रत्ना की चूत बिल्कुल प्यारी चिकनी सुन्दर सी थी..जो अब्ब रत्ना को भी अच्छी लगती थी....

रत्ना फ्रेश हो कर किचन मैं गयइ और अप्प्ने लिए 1 कॉफफी बना कर लाई और अप्प्नि डाइयरी पढ़ने लगी आज उसे हिमांशु की बहुत याद आ रही थी...

हिमांशु..रत्ना का एक्स-बाय्फ्रेंड रत्ना ने अप्प्नि खूब रातें रंगीन की थी हिमांशु के साथ कभी पिक्चर हॉल मैं कभी होटेल मैं कभी पिक्निक मैं ...रत्ना सोचते सोचते बहुत पीछे चली गयइ...जब वो इंटर की स्टूडेंट थी और बोर्ड एग्ज़ॅम्स चल रहे थे आज केमिस्ट्री का एग्ज़ॅम था और रत्ना अप्प्नि तैयारीओं मैं व्यस्त थी ....पढ़ाई की ..अरे न्ही आज वो स्कूल बंक करके हिमांशु के साथ डेट पर जा रही थी घर से प्राची ने अपपनी स्कूटी ली और निकल पड़ी मा ने टीका लगा कर दही खिला कर भेजा ...

मा- बेटा अच्छा पेपर करके आना

रत्ना-ठीक मा अब जाउ देर हो जाएगी आज सीट्स भी चेंज हो गयइ होंगी

मा- ठीक से जाना बेटा स्कूटी धीरे चलाना

रत्ना- ठीक है मा बाइ...

रत्ना से स्कूटी ले कर रेव पहुचि जहा पर अप्प्नि स्कूटी पार्किंग मैं लगा कर वो हुमान्शु की कार मैं बैठ गयइ और वो दोनो लोंग ड्राइव पर निकल गये रास्ते मैं हिमांशु ने स्मूचिंग और किस्सिंग का मौका न्ही छ्चोड़ा फिर वो अप्प्ने पेट होटेल मैं पहुचे जहा का वेटर उन्हे ठीक से पहचानता था हिमांशु से उसे 200 रुपये दिए ओर वो अप्प्ने रूम मैं चले गये....रत्ना एक कली थी बिल्कुल खिली हुई कली..दूध सी रंगत ...गुलाबी गाल फिट और स्कूल ड्रेस मैं वो कोई छ्होटी बच्ची लग रही थी अंदर जाते ही हिमांशु ने उसे अप्प्नि गोद मैं खीच लिया और शर्ट के ऊपर से ही बूब्स दबाने लगा..

रत्ना: हिमांशु पागल हो क्या मुझे घर भी जाना है शर्ट पर दाग लग जाएँगे

हिमांशु: तो उतार दो ना इसे

रत्ना: न्ही पागल हो क्या , हम न्ही उतारेंगे

हिमांशु: तो यहा क्या हम तुमहरि आरती उतारेंगे

रत्ना: तो उतारो

हिमांशु:क्या ?

रत्ना: क्या उतारना है

हिमांशु : स्कर्ट

रत्ना : न्ही वो ऊपर करके काम कर लेना. शर्ट उतार दो

हिमांशु:न्ही मुझे तुम्हारी देखनी है

रत्ना: अरे हर बार देखना देखना है करते हो हमेशा तो देखते हो, बदल थोड़े ना गयइ है

हिमांशु: तुम दिखओगि कि हम जाए , और आज के बाद बुलाना मत मुझे

रत्ना: अरे बाबा गुस्सा मत हो उतार लो, तुम बहुत वो हो अप्प्नि बात मनवा लेते हो..

रत्ना : हिमांशु देखो ये अच्छी बात न्ही है हर बार तुम ये ही करते हो

हिमांशु: क्या ?

रत्ना :मुझे न्ही मालूम क्या कहते है इसे ?

हिमांशु: किसे ?

रत्ना: मुझे शरम आती है

हिमांशु : मेरे सामने नगी चूत ले के खड़ी हो तब शरम न्ही आ रही है

ये सुन कर रत्ना नाराज़ हो जाती है

रत्ना: रहने दो कपड़े दो

हिमांशु: नाराज़ हो गई क्या

रत्ना: न्ही मुझसे बात ना करो

हिमांशु: अरे मैने मज़ाक किया था यार्र फिर क्या ग़लत कहा , नंगी खड़ी हो झांते तक न्ही बनाती हो और "चुदाई" कहने मैं शरम आ रही है

रत्ना: ठीक है अब्ब तुम खुद देखो आज के बाद मुझसे बात मत करना....

रत्ना इतना ही सोच रही थी कि किसी ने दरवाज़ा खटखटाया तो रत्ना जैसे होश मैं आ गई..........दरवाज़ा खटखटाया जा रहा था इसका मतलब कोई अंदर ही है डोर ओपन किया तो देखा कि मकान मालकिन का पागल लड़का था

लड़का : आंटी 1 ठंडी बोटेल दे दो पानी की

रत्ना: {मन मैं घोनचू पागल मैं आंटी दिखती हूँ इसे अभी ठोक दे तो 3 बच्चो का बाप बन जाए} ये लो पानी

पानी दे कर गेट बंद कर लेती है , लेकिन तभी कोई काम याद आ जाता है और वो मकान मालकिन के रूम की तरफ जाती है और बेड पर बैठ जाती है. बेड पर रत्ना कुछ इस तरह से बैठी होती है कि उसकी मॅक्सी उप्पेर उठ जाती है और पॅंटी तो रत्ना ने सुबह से ही न्ही पहनी थी..

रत्ना :चाची कहा हो ?

मकान मालकिन{म्म} : अब क्या हो गया रत्ना बोल बेटा .

रत्ना: चाची कल वो आपको किराया दिया था उसमे 500 रुपये ज़्यादा आ गये थे आपने कहा था सुबह वापस ले लेना सुबह से सो रही थी याद न्ही रहा

: हाँ , हाँ लाती हूँ अब्बी रुक्क जा तू

मकान मालकिन जाती है एक 500 का नोट ले कर आती है तभी उसकी नज़र रत्ना की उप्पर उठी मॅक्सी पर पड़ती है अंदर का भी हल्का नज़ारा दिखता है

: आज कल फ़ुर्सत भी मिल पाती होग्गी तुज्झे

रत्ना: किस बात की चाची ,

: कपड़े भी तो न्ही पहने का मौका मिल पाता

रत्ना : तुम भी चाची

: क्या तुम भी देख तेरी चूत दिख रही है , झांते न्ही साफ करती क्या कभी , इसे साफ रखा कर न्ही तो इन्फेक्षन हो जाएगा

रत्ना मकान मालकिन के मूह से ये सुनकर हैरान हो गयइ , शायद छ्होटे सहर का असर था आगे आगे देखो होता है क्या ................

आख़िर लड़की तो लड़की ही होती है वो तो नॉर्माली अप्प्नि मा के आगे भी कपड़े न्ही बदलती फिर एक अंजान औरत उसकी बेहद प्राइवेट पार्ट के बारे मैं कॉमेंट पास करे तो ये तो उसके लिए एक दोसरे मर्द से चुदवा लेने के बराबर बात हुई...

रत्ना : क्या चाची आंट शॅंट बोल रही हो इतने गंदे वर्ड्स कोई यूज़ करता है

मालकिन: अब्ब बाई चूत को पुसी कह देगी तो क्या वो चुदवाना छ्चोड़ कर चोदने लगेगी

रत्ना तो हक्का बक्का रह जाती है एसे शब्द सुनकर और वापस कमरे मैं आ जाती है

और याद करती है कि जब हिमांशु को उसने किस तरह से डांटा था चूत शब्द का यूज़ करने पर ..शायद रत्ना को आक्चुयल पता न्ही था कि योनि को चूत भी कहते है क्योंकि हाइह्क्लास सोसिटी का असर भी हो सकता है कि वो चूत कहने मैं हीनता महसूस कर रही थी क्योंकि चूत तो ग़रीबो की होती है.

लेकिन उसने तय कर लिया कि अब कल ही यहा से रूम शिफ्ट कर देंगे चाहे जो कुछ भी हो अगर इस बुढ़िया का एसा ही बहाविएर रहा तो किसी दिन इसका लड़का मुझ पर ना चढ़ जाए ... उसने तुरंत सुरेश को कॉल किया

रत्ना: सुरेश आज ही न्या अड्रेस ले कर आओ हम कल ही शिफ्ट करेंगे

सुरेश: अरे जानू क्या हुआ इतना गुस्सा किसी ने कुछ कहा

रत्ना: तुम आज ही रूम देखो न्ही तो मैं पापा से कह कर पापा का कोई गुड़गाँवा वाला बंग्लो ले लेती हू तुम्हे पसंद हो या ना हो

सुरेश: रत्ना तुम जानती हो ना कि मैं भीख न्ही लेता इसलिए मैने तुम्हारी शादी मैं दहेज़ भी न्ही लिया था क्योंकि मैं कुछ भी बिना मेहनत के न्ही लेना चाहता

रत्ना : प्लीज़ सुरेश प्लीज़ फिर वाहा तुम मुझे अपने हिसाब से रखना सारा दिन बिना कपड़ो के रहूंगी जैसा तुम सोचते हो लेकिन किराए के घर मैं एसा कैसे हो पाएगा बोलो

सुरेश : ठीक है लेकिन तुम्हे मेरा मूह मैं भी लेना पड़ेगा क्योंकि तुम हमेशा कहती हो "छि ये केवल पिक्चर मैं होता है इसे कोई मूह मैं डालता है " समझी कि न्ही

रत्ना : ठीक है बाबा वो भी करूँगी

सुरेश : क्या ?

रत्ना: अरे वो ही लूँगी मूह मैं

सुरेश : वो क्या ?

रत्ना : तुम्हारा लंड बस खुश...

लंड शब्द रत्ना इतनी उत्तेजना मैं बोल देती है आवाज़ बाहर पागल लड़के तक चली जाती है और वो गेट खटखटाने लगता है ....

क्रमशः..............................................


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Re: ये कैसा परिवार !!!!!!!!!

Unread post by 007 » 16 Dec 2014 04:50

ये कैसा परिवार !!!!!!!!! पार्ट--2

गेट खटखटाने की आवाज़ सुनकर रत्ना घबरा जाती है कि क्या हो गया....और गेट खोलती है तो देखती है कि सामने 18 साल का लंबा तगड़ा लड़का खड़ा है शायद वो बहुत उत्तेजित हो गया था लंड शब्द ने उसको पागल कर दिया था ...

हे- आंटी अभी आपने क्या कहा था लंड ये लंड क्या होता है आंटी
रत्ना - क्या कहा मैने तो कुछ न्ही कहा तुम क्या कह रहे हो
हे- न्ही मैने मम्मी के मूह से भी सुना है बिट्टू {हिज़ नेम} अप्प्ना लंड मेरे इस छेद {होल} मैं डाल मेरे इस डंडे को ममी लॅंड कहती है क्या आपके पास भी है दिखाओ आंटी दिखाओ
रत्ना को समझ ही न्ही आ रहा था कि ये पागल क्या कह रहा है अप्प्नि मा के बारे मैं एसा होता तो है लेकिन पागल पड़के के साथ रत्ना को अप्प्ना समय फिर याद आने लगा कि कैसे उसके घर मैं क्या सब होता था लेकींन वो बाद मैं..


बिट्टू- आंटी दिखाओ अप्प्ना लंड कैसा होता है लंब बाल {हेर्स} वालो का लंड मैने आज तक न्ही देखा केवल मेरे दोस्तो का देखा है जो सब घर पर आते है और मम्मी को दिखाते है
अब रत्ना को थोडा मज़ा आने ल्गा उस पागल की बाते सुनकर
रत्ना - अच्छा कोन कोन से दोस्त आते है मम्मी के पास
बिट्टू- अनिल, महेश , किशोर और हाँ आपके सुरेश अंकल भी तो आते थे पहले अब यही रहने लगे
रत्ना को काटो तो खून न्ही वो सोचने लगी ये क्या सुरेश का चक्कर इस बुद्धिया [ओल्ड लेडी] से कोई जावन् चूत न्ही मिली थी क्या सुरेश को लेकिन उसने फिर पूचछा

रत्ना- बिट्टू ठीक से याद करो सुरेश अंकल न्ही हो सकते
बिट्टू- न्ही आंटी वो सुरेश अंकल ही थे .अब आप मुझे अपना लंड दिखाओ
रत्ना ने उसे बहलाने के लिए उसे ज़्यादा बोलना स्टार्ट कर दिया
रत्ना- हाँ दिखौन्गि लेकिन ये ब्ताओ सुरेश अंकल क्यों और कैसे आते थे
बिट्टू- अंकल आते थे और मम्मी मुझे सुला देती थी और दूसरे कमरे मैं चली जाती थी मम्मी ने अंकल को एक कार भी दिलवाई थी .अंकल उसी कार से आते थे

अब रत्ना को समझ आ रहा था कि जब रत्ना के पापा ने उसे अपना आलीशान घर रहने को दिया तो सुरेश ने क्यों इनकार कर दिया था और कई बार रात को सुरेश 5 से 20 मिनूट के लिए गायब हो जाता था

रत्ना - अच्छा बिट्टू किसी से कुछ मत बताना जो तुमने मुझे बताया है
बिट्टू - न्ही हा बता दूँगा
रत्ना- क्या ?
बिट्टू- हाँ अब अगर आपने मुझे अपना लंड न्ही दिखाया तो मैं सभी को बता दूँगा

रत्ना सन्न रह गई कि क्या कोई पागल लड़का भी ब्लॅकमेलिंग कर सकता है !!लेकिन शायद सेक्स मैं इतनी ही ताक़त है जो अच्छे अच्छे पागलो को समझदार ब्ना देता है . रत्ना को इस बात का बिल्कुल भी अंदाज़ न्ही था कि सुरेश के संबंध इस ओल्डलेडी से हो सकते है इसलिए उसका रात मैं अचानक गायब हो जाना उसे समझ न्ही आता था लेकिन बिट्टू की बातो ने हलचल मचा दी थी उसके सीने मैं. चोर कभी अपने बच्चे को चोर न्ही देखना चाहता ये ही हॉल रत्ना का था रत्ना की टीन एज जिन कार्नो से भरी थी वो जानने मैं तो काफ़ी वक़्त है लेकिन रत्ना को या किसी भी चूत वाली मालकिन को ये कैसे बर्दास्त होता कि उसस्के हिस्से का लंड कोई और खाए ..रत्ना इस बात की सच्चाई परखना चाहती थी लेकिन बिट्टू की ब्लॅकमेलिंग उसे परेशान कर थी कि कही इस पगले ने सब कुछ बता दिया तो दोनो सतर्क हो जाएँगे और फिर सक्चाई कभी पता न्ही चल पाएगी इसलिए रत्ना ने एक त्वरित निर्णय लिया कि वो बिट्टू को वो जगह दिखाएगी और समझाएगी कि वाहा कोई लंड जैसी चीज़ न्ही होती.

रत्ना - ठीक है बिट्टू लेकिन किसी से कुछ मत कहना और चूना मत जब मैं दिखाउ समझे
बिट्टू- ठीक है
रत्ना - तो दरवाज़ा बंद करो
बिट्टू ने जल्दी से दरवाज़ा बंद कर दिया और रत्ना ने सर्माते हुए मॅक्सी थोडा उपर की लेकिन फिर गिरा दी शायद नारी लज़्ज़ा उसे और उपर न्ही जाने दे रही थी 5 बार इस तरह करने से शायद बिट्टू का सबर जवाब दे गया
बिट्टू- ये क्या कर रही है दिखाओ ना चलो हटो मैं खुद देख लेता हूँ
और रत्ना को बिना मौका दिए उसने मॅक्सी उपेर कर दी ओए वाहा चिकनी सपाट जगह देख कर वो चौक गया . रत्ना का शरम से बुरा हॉल था आप लोग तो जानते ही होंगे कि घरेलू लड़की चाहे जितने अलग अलग मर्दो से चुदवाये लेकिन हर नये मर्द के सामने वो कुँवारी कन्या ही बनती है कॉलेज हूर रत्ना का नेचर भी कुछ वैसा ही था

बिट्टू- ये क्या अप्प्के तो बॉल न्ही है ममी के तो खूब सारे बाल है और मम्मी की सिकुड़ी सिकुड़ी लंड है. आपकी तो बहुत अच्छी है ये कहते हुए उसने रत्ना की चूत मैं उंगली डाल दी .

अचानक हुए इस वार से रत्ना बौखला गई क्योंकि उसने साफ मना किया था बिट्टू को कि वो च्छुएगा न्ही लेकिन ये वो समझ न्ही सकी कि मर्द तो मर्द होता था गढ्ढा देख कर डंडा कब मानता है अगर एसा होता तो शायद भारत की आबादी इतनी ना होती हमारे हिन्दुस्तान मैं अनपढ़ हो या पागल वो 2 काम ज़रूर जानते है पैसे गिनना और चूत मारना ...मज़बूत हाथ पड़ने से रत्ना बुरी तरह भीग गई थी क्योंकि पागल ही सही लेकिन था तो लंड वाले का ही हाथ ना......


उस पागल बिट्टू के हाथ ने जैसे जादू कर दिया पागल ही सही था तो एक मर्द ही और रत्ना जैसी कमतूर लड़की को सिग्नल ही काफ़ी होता है लेकिन यहा तो कॉनट्रॉल रूम ही हाथ आ गया था और ये पागल उसकी कामभावना शांत कर सकता था रत्ना ने धीरे से पागल का हाथ पकड़ कर अप्प्नि चिकनी चूत पर फिराया अबकी बार चौकने की बारी बिट्टू की थी बिट्टू ने तुरंत अप्प्ना हाथ पीछे खींच लिया ...छी कितना गीला है

रत्ना - ये गीला होता है जब अच्छा होता है तो गीला होता है
बिट्टू - अच्छा ,, लेकिन मम्मी की तो गीली न्ही होती है है
रत्ना- अरे वो बूड्दी है उसकी क्या गीली होगी उसका सारा पानी सूख गया है
इस तरह के उल्टे सीधे ज्वाबो के उत्तर देती रही रत्ना और अपना काम भी करवाती रही तभी बिट्टू की मम्मी की आवाज़ आगाई

एमेम- बिट्टू कहा है. रत्ना बिट्टू तुम्हारे पास है क्या
रत्ना- बिट्टू किसी से कुछ मत ब्ताना फिर कुछ और बताउन्गी और दिखाउन्गी समझे
बिट्टू- ठीक है न्ही बताउन्गा
एमेम- बिट्टू..........................
बिट्टू- हाँ मम्मी
एमेम- कहा हो बेटा
रत्ना- कुतिया कितनी बड़ी रॅंडी है साली अपने लड़के से छी छी.......
बिट्टू - मैं टाय्लेट मैं हूँ
एमेम- जल्दी से आ जाओ जल्दी से {अभी तो इसका खड़ा होगा थोड़ा मज़ा ले ले}
बिट्टू- आता हूँ
एमेम- आओ बेटा आओ रूम मैं
एमेम- चलो बेटा सो जाओ समय हो गया है
बिट्टू- न्ही अभी मुझे दोस्तो के पास जाना है
एमेम- [धीरे से लंड पर हाथ ल्गा कर साइज़ चेक कर लेती है] न्ही बेटा अभी लेट जा फिर जाना मैं लाइट बंद कर देती हूँ
बिट्टू - ठीक है
मकान मालकिन लाइट बंद कर देती है और दोनो एक ही बिस्तर पर लेट जाते है.
एमेम- बिट्टू पॅंट उतार दो अप्प्नि न्ही तो पैर मैं दर्द होगा
बिट्टू - ओके लो............
ये कह कर बिट्टू पॅंट उतार देता है और बिट्टू का बड़ा सा लॅंड अंडरवेर मैं महसूस करती है फिर लेट जाती है

मकन्मल्किन धीरे से उसका लॅंड सहलाने लगती है और जैसे ही पूरा खड़ा होता है उसकी पॅंट अंडरवेर नीचे उतार कर 69 की पोज़िशन मैं आ जाती है और बहुत एक्शिटेड होकर लंड चूस्ति है 2 मिनूट मैं ही बिट्टू झाड़ जाता है और एमेम उसका पूरा वीर्या मलाई की तरह गटक जाती है और दोनो सो जाते है एक पति और पत्नी की तरह ......

007
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Re: ये कैसा परिवार !!!!!!!!!

Unread post by 007 » 16 Dec 2014 04:50


रत्ना के दिल मैं तूफान उठ रहा था कि "आख़िर एसा क्यों" ? उसका पति किसी और का क्यों ?
जबकि अपनी कहानिया लड़कियाँ तुरंत भुला देती है खैर इन सब बातों का क्या मतलब रात को सुरेश के आते ही रत्ना ने दिन भर के गुस्से को ना जाने कैसे काबू कर लिया था कि लग ही न्ही रहा था कि सुबह से वो सुरेश पर भड़क रही थी ... कि आने दो ये करूँगी वो कहूँगी...
सुरेश ने आते ही कहा ..

लो मैं नये फ्लॅट की चाभी ले आया
रत्ना- हम न्ये घर मैं न्ही चलेंगे
सुरेश- लेकिन सुबह तो तुम गरम हो रही थी
रत्ना- गरम तो मैं अभी भी हू छ्छू कर देख लो

इतना कह कर रत्ना ने सुरेश का हाथ अप्प्नि चूत पर रख दिया
सुरेश ने बड़े प्यार से सहलाया और कहा

सुरेश- क्या बात है जान बहुत गरम हो रही हो आज क्या तुम्हारा भाई आया था
रत्ना- भाई का इससे क्या मतलब क्या भाई मुझे गरम करता है
सुरेश- क्या यार मैने तो एसे ही कहा है केवल
रत्ना- ये कोई कहने की बात है
सुरेश- तो क्या तुम्हारे भाई ने कभी कोशिश न्ही की तुम्हारे साथ करने की
रत्ना- सुरेश मैं तुम्हारे रोज़ के नाटक से थक गई हूँ तुम्हे एसि घरेलू संबंधो की बात करने मैं ज़्यादा मज़ा आता है क्या. मैं तो हूँ तुम्हारे पास फिर क्यों तुम अनैतिक सेक्स की बातें करते हो
सुरेश- क्योंकि मुझे अच्छा लगता है
रत्ना- तुम्हे केवल अप्प्नि फिकर है
सुरेश- एसी बात न्ही है मेरी जान अगर तुम ही न्ही हो तो मैं तो अकेला हूँ ना
रत्ना- तो फिर बार बार मेरे भाई और पापा की बाते क्यों करने लगते हो क्या तुम्हे अप्प्नि रत्ना पर भरोसा न्ही है ..
सुरेश- यार रत्ना देख मैने कई बार तेरे भाई को तुम्हारी पॅंटी सूंघते हुए और तुम्हारे बाथरूम मैं झाँकते हुए देखा है इसलिए कहता हूँ
रत्ना- धत्त्तत्त.........झूट
सुरेश- कसम से जान
रत्ना- मेरा भाई एसा न्ही है चलो भाई को देखा और पापा
सुरेश- उसकी तो पूछो न्ही , बुड्ढ़ा अप्प्नि लड़की के बारे मैं...
रत्ना- सुरेश ये ठीक न्ही है मेरे घर वाले एसे न्ही है
सुरेश- तो पूछ के देख लो अगर मुझ पर विश्वास न्ही है
रत्ना- ये कैसे पूछा जा सकता है
सुरेश- तो मेरी बात पर भरोसा करो ना जान
इतना कह कर सुरेश बाथरूम फ्रेश होने चला जाता है

रत्ना सोचती है " क्या सुरेश सच कह रहा है मेरे घर वाले मुझे चोदना चाहते है " छीईइ सुरेश कितना गंदा है

सुरेश वापस आकर पीछे से रत्ना को दबोच लेता है और पीछे से अप्प्ना खोंटा चुभाने लगता है
रत्ना- लगता है आज इरादे ठीक न्ही है ..पीछे से हटो वाहा नो एंट्री.
सुरेश- सब करवाती है ..केवल तुम्हे ...
रत्ना- कोन करवाती है और कितने लोगो के साथ कर चुके हो...

सुरेश ग़लती से जो बोल गया उसे दबाता है
सुरेश- अरे भाई मैं तो पॉर्न मूवीस की बात कर रहा था..

फिर सुरेश पीछे से मॅक्सी उठा कर पॅंटी नीचे करने को हाथ बदाता है लेकिन पॅंटी थी ही न्ही.
सुरेश- तो आज पूरी तैयारी के साथ हो
इतना कह कर बेड पर ले जाता है
और मॅक्सी उपर उठा देता है और उसकी कोमल नाज़ुक जगह देख कर पागल हो जाता है और मूह लगा कर चाटना स्टार्ट कर देता है... क्लाइटॉरिस को जीभ से सहलाने से रत्ना उततजीत हो जाती है
रत्ना- मुझे पेशाब लगा है हटो अभी वापस आती हूँ
सुरेश- न्ही मुझ पर कर दो
रत्ना- पागल हो क्या हटो
सुरेश- रानी मेरा आज बहुत मन है तुम्हारा पेशाब पीने का प्लीज़ मुझ पर पेशाब करो
रत्ना- तुम्हारा दिमाग़ खराब हो गया है कितना गंदा सेक्स चाहते हो
सुरेश- ये मेरी चाहत है पूरा करो मुझ पर मेरे मूह पर मूतो मैं पीऊंगा
रतना- गंदा लगेगा
सुरेश- लगने दो तुम करो बस
फ़ि सुरेश ज़मीन पर लेट जाता है और रत्ना को इस तरह मूह पर बैठाता है कि क्लाइटॉरिस उसके होंट पर आ जाती है रत्ना के गरम पानी से सुरेश तर हो जाता है और उस रात पूरा 4 बजे तक चुदाई चलती है फिर दोनो थक कर सो जाते है