माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Discover endless Hindi sex story and novels. Browse hindi sex stories, adult stories ,erotic stories. Visit psychology-21.ru
The Romantic
Platinum Member
Posts: 1803
Joined: 15 Oct 2014 17:19

Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 29 Oct 2014 16:51

मैंने थोडी देर अपने होंठ रीमा के मूत के छेद पर ही चिपकाये रखे और फिर जीभ से चाट कर आस पास के हिस्से को साफ किया जिससे अगर मूत की एक बूंद भी लगी हो वह मेरे मुँह मे चली जाये मेरा पेट रीमा का लोटे भर मूत पीकर पीकर पूरी तरह भर गया था। बहुत ही मस्त स्वाद था माँ तुम्हारे मूत कर सच मे अगर तुम रुक रुक कर मूतती तो ज्यादा मजा आता। आगे से तुम रुक रुक कर मूतना मैं मूत पीने का पूरा मजा लेकर पीना चाहाता हूँ। चल अब खडा हो जा और मेरे चूतड छोड जिससे मैं भी खडी हो संकू तू तो जंहाँ मौका मिलता है मेरे चूतडो पर टूट पडता है पता नंही तुझी क्या मिलता मेरे चूतड मे। मैंने आखरी बार रीमा के चूतड मसले और रीमा के चूतड छोड दिये और रीमा उठ कर खडी हो गयी मैं भी रीमा के बगल मे खडा हो गया।

माँ आज तुम्ने अपना मूत पीलाकर मुझे ये बता दिया की तुम मुझको कितना प्यार करती हो एक प्यार करने वाली माँ ही अपने बेटे की मूत पीने के इच्छ को पूरा कर सकती है। और ये भी साबित हो गया की तू अपनी माँ को अपने से भी ज्यादा प्यार करता है तभी तो तूने मेरा मूत पी लिया देख तेरे लंड को भी मेरा मूत कितना अच्छा लगा कैसे उछल उछल कर अपनी खुशी का इजहार कर रहा है। हाँ क्यो न हो उसकी माँ के मुँह से निकाल पीला अमृत जो है। रीमा ने आगे बढ कर मेरे माथे को चूम लिया। और मेरे लंड को पकड कर मसल दिया। एक मस्ती की लहर मेरे तन मे दौड गयी।

तूने पानी मिला दिया है न चल मे इसमे बबल बाथ मिला देती हूँ फिर हम दोनो मिल कर नाहायेगें। रीमा ने बोतल उठा कर टब के पास जाकर झुक गयी और साबुन को पानी मे डालने लगी। उसके झुकने से उसके भारी चूतड एक दम मेरी आँखो के सामने आ गये। उसकी टाँगे भी थोडी खुली हुयी थी जिसकी वजह से उसकी गाँड और उसकी चूत भी दिखायी दे रही थी। उसकी चूत खुली हुयी थी जैसे अपने प्यारे लंड को बुलाने के लिये रिझा रही हो। मैं अपने आप को रोक नंही सका और जाकर रीमा के पीछे खडा होकर एक हाथ उसके चूतडो पर फेरने लगा। और दूसरे हाथ को उसकी चूत पर फिराने लगा। साले फिर से शुरु हो गया अभी तो इतने देर तूने मेरे चूतड मसले है मूत पीते हुये अब फिर आ गया तेरा तो मन ही नंही भरता मेरे चूतडो से गाँडू कही का पर क्या करूं तेरी माँ हूँ न तेरी इच्छा तो पूरी करनी ही पडेगी रीमा ने साबुन मिलाते हुये कहा। रीमा के मेरा हाथ फेरना अच्छा लग रहा था और वह भी अपने चूतड हिला कर मजा ले रही थी। अब मुझे रीझाने और गर्म करने के लिये बार बार कुछ कहती थी। मैं नीचे घुटनो के बल बैठ कर रीमा के चूतडो को चूमने लगा। अच्छा तो अब मेरी गाँड के पीछे पड गया गाँडू चूम ले और चूम ले मेरे चूतड मुझे भी तेरे से चुम्वाने मे मजा आ रहा है कर ले अपने मन के पूरी गाँडू साले।


The Romantic
Platinum Member
Posts: 1803
Joined: 15 Oct 2014 17:19

Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 29 Oct 2014 16:52

मैंने रीमा के चूतडो का चुम्बन लिये जा रहा था। फिर मैंने रीमा की गाँड का चुम्बन ले लिया और अपनी जीभ से उसकी गाँड चाटने लगा। रीमा साबुन पानी मे मिला चुकी थी और टब मे अच्छे झाग बन गये थे। रीमा ने एक झटका दिया और मेरे चहरे को अपने चूतडो से अलग कर दिया। रीमा के चूतडो के धक्के से मैं पीछे की और गिर गया। रीमा मुड कर खडी हो गयी और बोली इनको बाद मे चाटना मेरे चोदू मादरचोद अब चल अपनी माँ को नहला पहले। नहा कर थोडी ताजगी आयेगी तब मैं तेरे साथ खेलूंगी। चल अब ऐसे ही पडा रहेगा कि अपनी माँ को नहलायेगा भी। चलो माँ तुम टब मे घुस जाओ मे तुम्को नहलाता हूँ। पहले तू घुस पानी मे फिर मैं घुसंगी समझा मैंने कहा ठीक है जैसा तुम कहो माँ।

मैं पानी मे घुस कर बैठ गया। रीमा भी पानी मे आ गयी और अपने पैर मेरी तरफ बढाते हुये बोली चल मेरे पैरे साफ कर पहले। रीमा के पैर काफी सुंदर थे और उन चिकने पैरो के देख कर मेरे लंड को कुछ कुछ होने लगा। मै रीमा के पैरो को मल मल कर साफ करने लगा। रीमा ने अपना पैर मेरी जाँघ पर रख रखा था। और मैं उसके घुटने के नीचे का भाग मल मल कर साफ कर रहा था। रीमा अपने दूसरे पैर से मेरे लंड के साथ खेल रही थी। मेरे लंड को कभी अपने पैरो की उंगलियो से छेडती तो कभी अपने पैरो के तल कुचलने की कोशिश करती। वह हर समय मुझे वासना की उँचायीयो पर रखना चाहती थी। इसीलिये मेरे लंड को लगातार छेडे जा रही थी। जिससे वह टनटनाया हुये खडा रहे। मैंने उसके पैरो के उंगलियो और तलवे दोनो को अच्छे से साफ किया साबून मे रगड रगड कर और फिर उसके घुटनो तक के हिस्से को साफ किया अच्छे से।

मैंने उसका एक पैर साफ कर दिया और रीमा ने अपना दूसरा पैर मेरी जाँघो मे रख दिया जिसे मैंने साफ करना शुरु कर दिया। रीमा के चूत मेरे बिल्कुल सामने थी जब मैं उसका पैर साफ कर रहा था। उस झाटो भरी चूत कि देख कर मेरा मन मचल रहा था मैंने आगे बढ कर उसकी चूत को चूम लिया और फिर से उसके पैर साफ करने लगा। चल अब मेरी जाँघे साफ कर बहुत रगड लिये मेरे पैर कह कर रीमा ने अपनी जाँघ सामने कर दी। मैं अपनी नाक रीमा के चूत के पास रख कर सूंघी फिर अपना गाल उसकी झाँटो पर रख कर उसकी जाँघे साफ करने लगा। साथ ही साथ मैं अपना गाल उसकी चूत पर रगडता भी जा रहा था। रीमा भी पूरी मस्ती मे अपनी सेवा करवा रही थी। और मैं रगड रगड कर उसकी गोरी जाँध को साफ कर रहा था साथ ही साथ रीमा की चूत के महक को लेते हुये अपने गाल झाँटो पर रगड रहा था।

उसकी मस्त गोरी जाँघो पर मैं प्यार से हाथ फेर रहा था और साबुन मल रहा था। फिर मैंने रीमा की दूसरी जाँघ पर भी अपना गाल चूत पर रगडते हुये साबुन से साफ कर दिया। रीमा ने कहा चल अब एक तरफ बैठ जा। मैं टब से टेक लगा कर बैठ गया। मेरा छाती के उपर का हिस्सा पानी से बाहर था बाकी पानी के अंदर। रीमा घूम कर अपने चूतड मटका कर मुझे दिखाने लगी और पीछे मुड कर मुझे देख कर मुस्कुरायी। क्या देख रहा है चूतड ले और मटका के दिखाती हूँ अच्छे लगते हैं न तुझे मेरे ये चूतड और इनका उभार ले देख ले थोडी देर। थोडी देर ऐसे ही अपने चूतड मटकाने के बाद रीमा फिर मेरे उपर बैठ गयी। मेरा लंड रीमा के चूतडो के नीचे दब गया। रीमा ने अपने हाथ से मेरा लंड पकड कर अपनी गाँड की दरार मे फंसा लिया। और अपनी चिकनी पीठ मेरी छाती पर टिका कर बैठ गयी। मैंने अपने हाथ उसकी बाँहो के नीचे से डाल कर उसकी चूचीयो पर रख दिये और उसके गाल का एक चुम्बन ले लिया। मेरा लंड रीमा के गाँड के दरार की कैद मे पूरी तरह जकड चुका था।


The Romantic
Platinum Member
Posts: 1803
Joined: 15 Oct 2014 17:19

Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 29 Oct 2014 16:53

रीमा की चूचीयाँ आधी पाने मे थी और आधी पानी के बाहर थी। और उसकी घुडियाँ एक दम कडी हो चुकी थी। टब मे लेट कर नाहने का अलग ही मजा हे मेरे लाल और वह जब अपने बेटे के साथ हो तो क्या कहना। चल अब मेरा पेट और चूचीया साफ कर। तेरे लंड को भी मजा आ रहा है देख कैसे मेरे चूतडो के कैद मे से निकलने को मरा जा रहा है। इसका बस चले तो अभी मेरी गाँड मे घुस जाये साला पर मैं भी इसको अपनी चूतड की कैद मे रखूंगी। मैं रीमा की के पेट और चूचीयो के मसल मसल कर साबुन लगाने लगा। साथ ही साथ रीमा के गर्दन और पीठ का चुम्बन भी लेता जा रहा था। रीमा भी काफी गर्म हो चुकी थी और मेरे कंधे पर सर रख कर वह अपना बदन मसलवा रही थी। मैं उसकी चूचीयाँ बहुत जोर जोर से मसल रहा था। साबून लगा होने के वजह से मेरे हाथ रीमा की चूचीयो पर फिसल रहे थे। रीमा के पेट को भी मैं अपने हाथ मे पकड कर मसल देता। रीमा के मुँह से मस्ती भरी करहा निकल जाती थी। रीमा की चूचीयो का रंग धीरे धीरे गुलाबी होने लगा क्योकी मैं बहुत जोर से उसकी चूचीयाँ मसल रहा था। रीमा की चूचीयाँ और बदन पर साबुन लगाने के बाद मैंने रीमा के कंधे और बाँहो पर साबुन लगाना शुरु कर दिया। उसकी मोटी माँसल बाँहो को पकड कर मसलने मे मुझे बहुत मजा आया और मेरा लंड रीमा के चूतड के नीचे और फूल कर कुप्पा हुये जा रहा था। मैं उसके कंधे और बाँहो को ऐसे मसल रहा था जैसे जोर जोर से मालिश कर रहा हूँ। रीमा मस्ती मे करहा कर आह ओह्ह के आवजे निकालते हुये अपने मजे का इजहार कर रही थी। पुरे शरीर पर साबुन लगाने के बाद मैंने रीमा के घुंडियाँ अपने हाथो मे पकड ली और जोर जोर से मसलने लगा। रीमा की घुंडियाँ बडी संवेदनशील थी मसलने के सीधा असर उसकी चूत पर होता था। घुंडियाँ मसलवाने से उसकी चूत गीली होनी शुरु हो गयी। और वह काफी गर्म हो गयी थी।

उसने अपनी टाँगे आपस मे रगडनी शुरु कर दी। और अपना एक हाथ अपने चूत पर रख कर चूत हो सहलाने लगी। मैं उसकी घुडियाँ पूरी बेदर्दी के साथ मसल रहा था। उसकी घुंडियाँ मसलने मे मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। घुंडियाँ मसलते हुये मैंने अपने हाथ रीमा के होंठो पर रख दिये और एक जोर दार चुम्बन ले लिया। रीमा काफी गर्म थी और जोर जोर से अपनी चूत अपने हाथ से रगड रही थी। मैं रीमा की होंठो का रस पीते हुये उसकी घुडियाँ मसले जा रहा था। मसलने के साथ साथ कभी मैं उसकी घुडियाँ जोर से खींच देता जिससे रीमा दर्द से करहा उठती पर मैंने उसकी होंठ अपने होंठो मे दबा रखे थे जिससे उसकी चीखने की आवाज गो गो करके ही रहा जाती पर रीमा को इस दर्द मैं भी मजा आ रहा था क्योकी उसके हाथ की रफतार उसकी चूत पर बढती जा रही थी। रीमा ने अपनी जीभ निकाली और मेरे मुँह मे घुसेड दी और मैं उसकी जीभ चूसने लगा। मेरे लंड को रीमा की हरकतो के वजह से बहुत मजा आ रहा था। जब रीमा अपनी चूत से खेल रही थी तो इसकी वजह से रीमा के चूतड हिल रहे थे जिसकी वजह से उसके चूतडो के नीचे दबा मेरा लंड रगड खा रहा था जिससे मेरे लंड को बहुत ही मजा आ रहा था उसको तो ऐसा लग रहा था जैसे रीमा अपने चूतडो से मेरे लंड का मुठ्ठ मार रही है। फिर थोडी देर मजा लेने के बाद रीमा बोली चल अब मैं तुझको नहलाती हूँ। रीमा ने मुझको खडा कर दिया और खुद नीचे बैठ कर मेरे पैरो पर साबुन लगाने लगी।