माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

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The Romantic
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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 30 Oct 2014 07:54



रीमा ने अपने होंठ रजनी के होंठो पर रख दिये और दोनो एक दूसरे के होंठ चूसने लगी। रीमा ने अपनी जीभ रजनी के मुँह मे घुसा दी और उसकी जीभ से जीभ भिडाने लगी। रजनी के हाथ रीमा के नंगे बदन पर चल रहे थे और और वह रीमा की चूचीयो को अपने हाथो मे पकड कर मसल रही थी। रीमा भी अपने हाथ रजनी के मोटे चूतडो पर चला रही थी। थोडी देर एक दूसरे का चुम्बन लेने के बाद दौनो अलग हो गयी। कहाँ है तुम्हारे साहब जादे जरा हम से भी तो मिलवाओ उनको। मिलवाउंगी पर अभी नही कल सुबह। कल सुबह जल्दी तैयार रहना जैसे ही मैं फोन करु मेरे कमरे मे आ जाना मैं कमरे का दरवाजा खुला रखूंगी। तुम दीपक के लिये मेरा एक गिफ़्ट होगी। ठीक है जान जैसा तुम कहो। फिर दोनो कुछ देर बात करती रही। और चली गयी। बाहर जो कुछ हुया उसका मुझे बिल्कुल पता नंही था पर अगले दिन रीमा ने मुझे ये सब बताया।

अंदर मैं सोच रहा था कि इतनी देर हो गयी अभी तक रीमा ने दरवाजा क्यो नंही खोला। करीब ५ मिनट के बाद रीमा ने दरवाजा खोला और अंदर आ गयी। रीमा पूरी नंगी थी। रीमा मेरे पास आयी और बोली खाना आ गया है चल अब और फिर रीमा ने मेरा लंड पकडा और मुझे लंड से खींचते हुये और कमरे मे ले गयी। और मैं उसके पीछे किसी पालतू कुत्ते कि तरह चलता हुया आ गया। खाना टेबल पर लगा था। पर रीमा ने एक ही प्लेट रखी थी। मेरे को रीमा ने चेयर पर बैठने को कहा मैं चेयर पर बैठा तो मेरा लंड मस्ती मे तन कर उपर की और खडा था रीमा ने मेरे लंड को अपने हाथ से नीचे के तरफ दबाया और अपने चूतड मेरे लंड पर रखे और मेरी गोदी मे बैठ गयी। मेरे लंड रीमा के बदन के भार के कारण उसके चूतडो और मेरी जाँघ के बीच दब गया। फिर रीमा अपने चूतडो का दबाव मेरे लंड पर देती हुयी बोली अब हम दोनो माँ बेटा एक ही प्लेट से खाना खायेंगे। रीमा ने रोटी का एक टुकुडा तोडा और सब्जी लगा कर खाने लगी। उसको अपने मुँह मे चबा कर रीमा ने अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिये और अपने मुँह का टुकुडा जीभ से मेरे मुँह मे डाल दिया। रीमा का चबाया हुयी रोटी का स्वाद ही कुछ अलग था। मैं बहुत स्वाद लेकर देर तक उसको अपने मुँह मे लेकर चबाया। कैसा है खाना। बहुत अच्छा माँ तुम्हारे मुँह मे जाने से इसका स्वाद और भी अच्छा हो गया है। रीमा ने मुझे चूम लिया। रीमा ने मुझे इसी तरह अपने मुँह से चबा चबा कर ही पूरा खाना खिलाया। मेरा लंड उसके चूतडो की कैद मे फडफडाता रहा। फिर इसी तरह हम ने पूरा खाना समाप्त किया।

फिर हमने उठ कर टेबल साफ की और बाथरुम मे जाकर हाथ साफ किये। फिर रीमा बोली पेट पूजा तो हो गयी पर मेरी चूत की भूख अभी भी बाकि है अब मेरी चूत की भूख शांत करो। हम लोग बाहर कमरे मे आ गये। रीमा सोफे पर बैठ गयी मैं उसके बगल में बैठने लगा तो बोली तू चल नीचे बैठ मेरी टाँगो के बीच और मेरे मेरे पैर और जाँघो से खेल कर मुझे गर्म कर। मैं रीमा के टाँगो के बीच बैठ गया और उसके पैरो के चूमने लगा। बडे ही सुन्दर पैर थे रीमा के। उसके तलवो को चूमा उसकी पैरो के उंगलियो को चूमा। फिर घुटनो तक उसकी टाँगो को चूमा। मैन ऐसा उसकी दोनो टाँगो के साथ किया। रीमा को बहुत मजा आ रहा था और वह गर्म होने लगी थी। रीमा ने अपनी घुंडियाँ अपने हाथ मे लेकर मसल रही थी। उसके चूत भी रसीली हो चुकी थी। मैं ५ मिनट तक उसके पैरो को प्यार करता रहा। रीमा भी मेरे चूमने से काफी गर्म हो गयी थी। रीमा ने पास मे पडा अपने पेटीकोट का नाडा उठाया और बोली ला तेरे लंड को बांध दूँ। मैंने कहा माँ अब मुझे आदत हो गयी है अब मैं इसके बिना भी कट्रोल कर सकता हूँ। मुझे पता है पर मैं चाहती हूँ इसलिये तुझे बंधवाना पडेगा। मुझे जब मैं तेरे लंड पर नाडा बाँधती हूँ तो बहुत मस्ती चढ जाती है और मेरी चूत बहुत गीली हो जाती है इसलिये नाडा बाँधना बहुत जरूरी है। और जो मैं करने जा रही हूँ उसके लिये तेरे लंड का टनटनाये रहना बहुत ही जरुरी है पता चला तूने मुठ मार लिया तो। जैसी तुम्हारी मर्जी माँ पर तुम क्या करने जा रही हो वह मैं तुझे बाद में बताऊंगी । रीमा ने फिर कस के नाडा मेरे लंड और बाल्स पर बाँध दिया।

रीमा ने नाडा बहुत ही टाईट बाँधा था मेरे लंड की सारे नसे तन कर लंड पर दिखायी दे रही थी और लंड भी पत्थर के समान हो गया था। रीमा ने मेरे सर पर हाथ रखा और बोली मेरे राजा बेटे तेरे लिये तेरी रंडी माँ ने एक सप्राईज रखा है। वो क्या है माँ उसने पास मे रखा लिफाफा उठाया और मेरे को देती हुयी बोली। मैं अंदर बेडरुम मे तैयार होने जा रही हूँ। और तैयार होने के बाद मैं तुझको अंदर बुलाउंगी। तब तू ये लिफाफा खोल कर पढना। और फिर अंदर आना। ठीक है। मैंने कहा ठीक है। मैं होटल मे आने के बाद अभी तक उसके बेडरुम मे अभी तक नही घुसा था। रीमा ने मेरे गाल पर एक चुमा लिया और बेडरुम के और अपने चूतड मटकाती हुयी चली गयी। और दरवाजे पर जाकर पीछे मुड कर अपने चूतड थोडा उठा कर देखा और बोली देख जब मैं बुलाऊं तभी अंदर आना और मेरा लेटर पढना समझा नंही तो सारा मजा किरकिरा हो जायेगा और मुझे आँख मार कर अंदर चली गयी। मेरा लंड उसके मटकते चूतड देख कर मचल रहा था। पता नही रीमा ने क्या सोच रखा है रात के लिये। कुछ घंटो मे ही मुझे रीमा के साथ जो मजा अया था उसको सोच कर ही मेरा लंड मचल रहा था। पर शायद अभी बहुत कुछ बाकी था। अभी तो मुझे उसकी गाँड और चूतड से बहुत प्यार करना था थोडी ही देर में मै रीमा के चूतड और गाँड का गुलाम हो चला था।

क्रमशः.......................

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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 30 Oct 2014 07:55

रीमा ने जाते हुये मुझे कयी मस्त राम की कहानियो के किताब दे गयी थी। और राज शर्मा के कहानिओ के ब्लॉग के बारे में बता गई थी और कहा के इसको पढो और अपने लंड को मस्त टनटना कर रखो मुझे तैयार होने मे थोडी देर लगेगी। तब तक ये मस्त चुदायी की कहानियाँ तुम्हारा साथ देंगी। मैं मस्त राम की कहानीयाँ पढने लगा और मेरा लंड जो पहले से ही खडा था और भी भूखे शेर के तरह हो गया। वह कहानियाँ सिर्फ माँ बेटे की चुदायी की रास लीला से भरी हुयी थी। रीमा को तैयार होने मे करीब१ घंटा लगा। मैंने तब तक दो तीन किताब खत्म कर दी थी। और अपने खडे लंड के साथ खेल रहा था। रीमा ने अंदर से मुझे आवाज लगायी बेटा मे तैयार हो गयी हूँ अंदर आ जा जल्दी से। रीमा की आवाज सुनते ही मेरे अंदर एक नया उत्साह आ गया और मैंने कमरे की तरफ भागा पर तभी मुझे याद आया की रीमा ने एक लेटर भी दिया था मैंने रीमा का लेटर लिया और खोल कर पढने लगा।

मेरे प्यारे मेरी रसीली चूत और भरपूर गाँड के दीवाने बेटे दीपक,

आज मैं तुमसे मिल कर बहुत खुश हूँ। तुम बिलकुल वैसे ही हो जैसा मैंने सोचा था। काश तुमने मेरी कोख से जनम लिया होता और तुम मेरे सगे बेटे होते। तुमने कुछ घंटो मे जो मुझे मजा दिया मेरी चूत को जो सुख पहुंचाया है वह तो मुझे अपने पूरी जिंदगी मैं भी नही मिला। मेरे बदन को प्यार करने वाला तुम्हारे जैसा रसीया मर्द मुझे कभी मिल ही नंही सकता और तुम्हारे अंदर जो मेरे प्रति जो स्मर्पण की भावना है वह एक बेटे के अंदर ही हो सकती है और तुम्हारी माँ भी अपने बेटे को मादरचोद बना कर आज बहुत खुश है। तुम जैसे मेरी हर बात मानते हो वह मुझे बहुत मस्त कर देता है और तुम्हारे लंड पर नाडा बाँध कर तडपाने मे मुझे जो मजा आता है उसको तो मैं बयान ही नंही कर सकती। आज हम पहेली बार मिल रहें है तो आज ये हमारी पहली रात है। औरत और आदमी के बीच पहली रात सुहाग रात होती है तो मैं इस रात हो सुहाग रात की तरह ही मनाना चाहाती थी। और मैं अंदर सुहगिन की तरह तैयार होने ही गयी थी। मेरे राजा बेटे तेरी माँ तेरा अंदर सजी धजी तेरा इंतजार कर रही है आ और आकर अपने अरमान पूरे कर ले बेटा। आज की रात तू मेरा मर्द है और मैं तेरी औरत। आज अंदर सुहाग सेज पर तू अपनी माँ को भोगेगा इसलिये आज की रात तेरी रात है बेटा आजा अब और देर न कर और अंदर आजा। आज तेरे अरमान पूरे होने के रात है और आकर तू अपने अरमान पूरे कर ले। कर ले जो करना है तुझे अपनी इस माँ के मोटे बदन के साथ जो नयी नवेली दुल्हन की तरह सजी दझी अपनी चूत खोल कर अपने लाडले बेटी की दुल्हन बनी इंतजार कर रही है।

तेरी रंडी माँ,

रीमा

और खत के अंत मे रीमा ने अपने होठो से किस करके अपने गुलाबी होठों की छाप भी छोडी थी। अब तो अपने आप को रोक पाना मेरे लिये बिल्कुल ही नामुमकिन था। मैं दौड कर बेडरुम के तरफ बढा। और रुम क दरवाजा खोल कर अंदर घुसा। रुम मे घुसते ही वहाँ का नजारा देख कर मेरे होश ही उड गये। रीमा दरवाजे के थोडी दूर पर ही खडी हुयी थी। और सामने बिस्तर सजा हुया था। उस पर फूल पडे हुये थे। और एक बडी सुन्दर से चादर बिछी हुयी थी। बिसतर बिल्कुल ऐसा ही सजा हुया था जैसे सुहागरात मे सजाते है। फूलो के खुशबू से भरपूर। रीमा पूरी एक सजी धजी खडी थी। रीमा का सारा शरीर गहनो से लदा हुया था। उसने सर पर लाल रंग की पारदर्शी चुनरी पहन रखी थी। और माथे पर माँग टीका था। और माथे पर एक बडी से बिंदी लगी हुयी थी। आखो के उपर छोटी छोटी बिंदिया लगी थी जैसे एक नयी नवेली दुल्हन लगाती है। चहरे पर काफी मेकप किया था रीमा ने। गालो पर लाली लगायी थी और होठों पर गहरे लाल रंग के लिप्सटिक जो मौके के पूरे अनुकूल थी। वैसे तो रीमा बहुत सुन्दर थी पर दुल्हन के रुप मे उसकी सुन्दरता और बढ गयी थी। उसके हाथ भी पूरे गहनो से लदे थे। दोनो हाथो मे बाजू बंध और उंगलियो मे अंगूठीयाँ और हाथो मे काफी मंहगी चूडीयाँ पहनी थी। साथ ही सोने के कडे भी पहन रखे थे। उसने कमर के उपर सिर्फ ब्रा पहन रखी थी। और उस ब्रा मे कप नही थे। उसकी चूचीयाँ पूरी नंगी थी। और उसकी घुंडियाँ एक दम तन कर खडी थी। उसने अपनी घुडियाँ और उसके आस पास का हिस्सा लिप्सटिक से लाल कर रखा था। गोरे रंग की चूचीयाँ और उस पर लाल रंग की घुंडियाँ बहुत मस्त लग रही थी और लंड कि मस्ती को बढाने वाली थी। उसका लाल रंग एक अलग ही आमंत्रण दे रहा था। उसने गले मे मंगल सूत्र और हार पहन रखा था। जो उसके गोरे रंग पर बहुत फब रहा था। उसका मंगल सूत्र ठीक उसकी चूचीयो के बीच आकर ठहरा था। उसने अपनी कमर मे सोने के तगडी बाँघ रखी नाभी के ठीक नीचे। उसकी तगडी से झालर लटक रही थी जो उसकी चूत के थोडी ही उपर थी। उसने कोच्रलस पेंटी पहन रखी थी। जिसका रंग काला था। उसकी चूत पेंटी के बीच पूरी खुली हुयी थी। उसने पैरो मे स्टाकिंग पहन रखी थी। काले रंग की। जो उसकी मोटी जाँघो के आधा ढके हुये थी। उसने पैरो मे पायल और पैरो के उंगलियो मे बिछुये पहने हुये थे। और ६ इंच हील पहनी हुयी थी। वह बिल्कुल उसी तरह से सजी हुयी थी जैसे उत्सव फिल्म मे रेखा सजी थी। वह इस समय किसी अप्सरा से कम नंही थी। उसके हाथो मे एक ट्रे थी जिसमे एक बडा गिलास रखा था। जो की पूरा भरा हुया था। उसमे कुछ पीले रंग का दर्व्य था।


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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 30 Oct 2014 07:56

कैसी लगी तुझे अपने दुल्हन मेरे लाल। आज इस दुल्हन को तुझे भोगना है आज तेरी और तेरी माँ की सुहाग रात है बेटा। बहुत मजेदार माँ बहुत ही सुंदर दुल्हन हो तुम माँ। बेटा तूने इतनी देर से मेरी चूत को इतना मजा दिया है। तो आज की रात तेरी है। मैं तेरे सामने हूँ जो करना है कर ले मेरे साथ अपने सारे अरमान पूरे कर ले। सुबह से तूने मेरी चूत झडा झडा कर इसका बुरा हाल कर दिया है की मेरी चूत भी तोबा बोलने लगी है। तो मेरे लाल इसलिये मैं तुझे अपनी चूत मे लंड नंही डालने दूंगी पर बाकी तू जो चाहे कर सकता है। हाँ चूत चुसना चहाता है तो चूस सकता है पर मेरी चूत बहुत ही संवदनशील हो चुकी है तेरा लंड नंही ले पायेगी अपने अंदर। सुबह से मेरे चूतडो के पीछे पडा है। आ अब करले अपनी हसरत पूरी। अब मैं तुझे अपने चूतडो के साथ खेलने को मना नंही करूंगी। आज के पूरी रात कर ले अपनी मर्जी की। रीमा ने अपने चूतडो और गाँड से खेलने की पूरी छूट दे दी थी। वैसे पूरी रात तू मुझे भोगेगा तो तुझे बहुत मेहनत करनी पडेगी। और पूरी रात मेहनत करने मे तुझे थोडी ताकत की जरुरत होगी। उसके लिये भी मैंने इंतजाम कर लिया है। ये ले इसी पी ले अपनी ट्रे आगे बढाते हुये बोली। अपने बेटे को ताकत देने के लिये उसकी माँ के मूत से बढ कर क्या होगा। माँ का मूत वैसे भी लंड को शक्ति देने के लिये बहुत जरुरी है। मैंने अभी अभी इस गिलास मे मूता है। देख कितनी देर से तेरे लिये बचा कर रखा था मैंने अपना मूत। खाने के बाद काफी पाने पिया था ताकि काफी मूत बना सकूं तेरे लिये। मेरे मूत से पूरा गिलास ही भर गया। इसको पीने से तेरे को पूरी रात मेरे को रौदने की ताकत मिलेगी मेरे लाल। मुझे पता है कि क्या है तेरे मन में कैसे तडप रहा है तू मेरे बदन को उधेडने के लिये और तेरा लंड तडप रहा है मेरी गाँड फाड डालने के लिये और इन सब के लिये तेरे तेरे को रात मे भी मूत की जरुरत पडेगी ताकत के लिये फिर मैं तो हुँ ही जब भी रात मे मन कर मुझे बता देना तेरे को अपना मूत पीला दूंगी।

मैं तो इतनी देर से रीमा की सुंदरता को निहार रहा था और उसके प्रेम भरे वचन सुन रहा था। रीमा के बात सुनते ही मेरा सरा शरीर मे मस्ती की एक लहर दौड गयी। रीमा ने ट्रे आगे बढा कर मूत से भरा हुया गिलास मुझे दे दिया। मैं मूत से भरे गिलास को अपनी नाक के नीचे रख कर सुंघने लगा। मूत की तीखी मस्त कर देने वाली गंध मेरी नाक मे घुस गयी। मेरा लंड नाडे मे बंधा फडफडाने लगा। बेटा मैंने तेरा लंड बाँध के रखा था क्योकी मैं नंही चाहाती थी कि कमरे मे आने से पहले तू झडे और मुझे इस रूप मे देखने का पूरा मजा न ले सके। वैसे तो तू मजा लेने के लिये आजाद है और चाहे तो नाडा खोल सकता है और कितनी भी बार झड सकता है। क्योकी आज की रात तू मेरा मर्द है और मैं तेरी औरत और मर्द को मजा देने मे औरत को खुशी होती है पर मुझे अच्छा लगेगा अगर तुम रात भर इसी तरह नाडा बाँधे रहो और करीब सुबह जाकर ही अपना नाडा खोलो। क्योकि अगर मैं तुम्हारे लंड पर नाडा बंधे हुये देखूंगी तो मेरी चूत पूरी रात गर्म रहेगी और मैं तुम्को बहुत मजा दे सकूंगी। मैं रीमा के बात का मतलब समझ गया और मैंने नाडा ना खोलने का ही विचार किया। और वैसे भी मुझे रीमा की हर बात मानने मे बहुत खुशी होती थी और मेरा लंड भी मस्त हो जाता था। फिर मैंने रीमा के मूत से भरा गिलास मुँह मे लगाया और उसका गर्म गर्म मूत पीने लगा। रीमा क मूत मैं एक बार पी चूका था और उसका स्वाद मेरे दिल मे बस गया था। उसका खारा गर्म मूत मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और मैं उसको स्वाद लेकर पी रहा था। रीमा का मूत एक बार मैं सीधा रीमा की चूत से पी चुका था पर अब गिलास से मूत पीने का अलग ही आंनद आ रहा था। मैं रीमा का मूत चुसकियाँ लेकर पी रहा था और रीमा अपनी वासना भरी निगाहो से मुझे निहार रही थी और मुझे अपने मूत को पीते हुये देख रही थी। और थोडी देर मैं ही मूत पीकर गिलास खाली कर दिया। सचमुच माँ तुम्हारा मूत ये खारा गर्म मूत पीकर मेरे अंदर एक नया उत्साह भर गया है। मैंने मूत पीकर गिलास रीमा के ट्रे मे रख दिया। रीमा ने ट्रे ली और पीछे मुड कर ट्रे रखने चल दी। रीमा का गोरा बदन और उसके भारी चूतड जो उंची ऐडी की हील होने के वजह से और भी उभर आये थे और उस पर उसकी मटकती चाल अब तो मेरे लिये रुकना बिल्कुल मुशकिल था। और अब तो रीमा ने मुझे पूरी आजादी भी दे दी थी कुछ भी करने की।

मैं रीमा के पीछे गया और घुटनो के बल उसके पीछे बैठ गया। मेर चेहरा उसके चूतडो के सामने था। जैसे ही उसने झुक कर ट्रे नीचे रखी वैसे ही उसके चूतड मेरे मुँह से टकरा गये और मैंने उसको एक चुम्बन दे दिया। रीमा के मुँह से एक आह निकल गयी। रीमा को श्याद मेरी इस हरकत की उंमीद नंही थी। तभी तो मेरी इस हरकत से रीमा एक दम से सकपका गयी। मैंने रीमा के दोनो चूतडो पर बडे ही प्यार से चुम्बन लिये और फिर अंत मे उसके चूतडो के बीच से झाँकती हुये काली झाँटो से भरी चूत का भी चुम्बन लिया फिर थोडी देर तक मैं रीमा के चूतडो को निहारता हुया उसके चूतडो को मसलने का मजा लेने लगा। उसका बदन से बहुत ही अच्छी महक आ रही थी श्याद उसने कोई पर्फूयम लगाया था। रीमा खडी हुयी सब कुछ कराती रही और मजे लेती रही उसने मुझे एक बार भी मना नंही किया। फिर मैंने रीमा से बिस्तर के तरफ चलने को कहा रीमा बोली जैसा तू बोले बेटा वर्ना मैं तो सोच रही थी की तू मुझे सारी रात ऐसे ही खडा रखेगा और मेरे चूतडो से ही खेलता रहेगा। अरे मेरी प्यरी चुदक्कड माँ सुहाग रात का मजा तो सुहाग की सेज पर ही आता है ये तो बस मैं अपनी प्यरी दुल्हन के चूतडो का थोडा मुआयना कर रहा था। रीमा एक अदा से मुस्कुरायी और बोली चल बिसतर पर चलते है कह कर वह बिस्तर की और चल दी। रीमा अपने चूतड मटकाते हुये बिस्तर की तरफ चलने लगी मैंने रीमा की कूल्हो को पकड रखा था और रीमा के चूतडो को अपनी आँखो के सामने रखना चाहाता था इसलिये मैं उसके पीछे घुटनो के बल चल रहा था और हर कदम पर उसके उसके चूतडो को चूमता जा रहा था। जब वो दाँया पैर आगे रखती तो मैं बाँये चूतड को चूमता और जब वह बाँया पैर आगे रखती तो दाँये चूतड को। रीमा को मेरा चूतड चूमना बडा ही अच्छा लग रहा था इसलिये उसने बिस्तर तक पहुंचने मे बहुत समय लगाया ताकि में पूरा मजा लेकर उसके चूतडो को चूम सकूं। रीमा बेड के पास पहुँच कर रुक गयी और मैंने उसके दोनो चूतडो पर जम कर चुम्बनो की बौछार कर दी। पागलो की तरह उसके कूल्हे पकड कर उसके चूतडो को चूमने लगा। चूतड थोडी देर चूमने के बाद मैने आगे बढने की सोची और मैं खडा हो गया। और रीमा पलट कर मेरे सामने आ गयी। अब हम दोनो एक दुसरे के बहुत पास थे।