एक खौफनाक रात – Hindi Thriller Story

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Fuck_Me
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Re: एक खौफनाक रात – Hindi Thriller Story

Unread post by Fuck_Me » 29 Sep 2015 02:47

रोहित पहुँच गया रीमा के पास कोई 30 मिनिट में. पहुच कर उसने बेल बजाई. रीमा ने दरवाजा खोला.

“बहुत जल्दी आ गये आप. मुझे लगा एक दो घंटे में आएँगे.”

“अब आपने कुछ इसे तरीके से बुलाया की खुद को रोक नही पाए. खींचे चले आए आपके पास.”

रीमा हल्का सा मुश्कुराइ और बोली, “आईए जल्दी अंदर, कही कोई देख ना ले.”

“ओह हन…बिल्कुल”

रोहित अंदर आ गया और रीमा ने मुश्कूराते हुवे कुण्डी बंद कर ली.

“तुम्हारे होंटो पे जो ये सेडक्टिव स्माइल रहती है वो बुरा हाल कर देती है मेरा. ऐसे ना सटाया कीजिए हमें…पचेटाना आपको ही पड़ेगा.”

“अतचा क्या पचेटाना पड़ेगा. हमें कुछ समझ नही आया.”

“वैसे आज हुमारा मन खराब है. आपने याद किया तो आना पड़ा मुझे…वरना सीधा घर जा रहा था.”

“क्या हुवा ऐसा?”

“प़ड़्‍मिनी के साथ बहुत बुरा हुवा. उशके मा-बाप का सर काट कर डब्बे में सज़ा कर घर भेज दिया उशके उष साएको ने.”

“ऑम्ग ….. बस आगे मत बठाना कुछ. मैं शन नही पवँगी. ये तो हद हो गयी दरिंदगी की.” रीमा ने मूह पर हाथ रख कर कहा.

“मैं बहुत परेशान हूँ प़ड़्‍मिनी के लिए. मगर कुछ कर नही सकता. वो मुझसे बोलने तक को राज़ी नही है.”

“ह्म… इश्का मतलब आज मूड नही है जनाब का. कोई बात नही आपके आने से ही रोनक बढ़ गयी है यहा की. मेरे पास कुछ नयी मूवीस की द्वड पड़ी हैं….दोनो मिल कर देखते हैं.” रीमा ने कहा.

“ओह हाँ मूवी से याद आया. मेरे पास एक सीडी है साएको वो देखे.”

“वाउ क्या अल्फ़्रीड हिचकॉक की साएको की बात कर रहे हो. बहुत शुना है उशके बड़े में.” रीमा ने उत्शुकता से कहा.

“अब ये तो नही पता की ये वही है की नही. शुना तो मैने भी है उशके बड़े में. उशके उपर साएको लिखा ज़रूर है.”

“कहा है द्वड आओ चला कर देखते हैं.”

“द्वड जीप में पड़ी है अभी लेकर आता हूँ”

“ठीक है ले आओ..तब तक मैं पॉपकॉर्न तैयार कराती हूँ.”
रोहित जीप से द्वड ले आया, “तुम्हारे कमरे में ही देखेंगे ना.”

“हन वही देखनेगे…तुम चलो मैं आ रही हूँ.”

रीमा स्नॅक्स ले कर आ गयी जल्दी ही. “लगा दी क्या द्वड.”

“तुम खुद लगाओ ये लो.” रोहित ने द्वड रीमा को पकड़ा दी.

“ह्म हाँ वही मूवी तो है…मज़ा आएगा. बहुत दिन से देखना चाह रही थी मैं.”

रीमा ने द्वड, द्वड प्लेयर में डाल दी और प्ले करके रोहित के साथ बिस्तर पर आ कर बैठ गयी.

“अजीब बात है कोई नंबरिंग नही आई और मूवी शुरू हो गयी. पिक्चर क्वालिटी भी कुछ ज़्यादा अछी नही लग रही है. क्या साएको ऐसी ही है…फिर क्यों चर्चा है इश्कि इतनी.”

“एक मिनिट…रीमा वो साएको 1960 की बनी हुई थी. इशे देखने से लगता है की रीसेंट्ली बनी हुई है. तुम्हे ये सड़क कुछ जानी पहचानी सी नही लगती.”

“अरे हाँ ये सड़क ये मार्केट…देखी हुई सी लगती है.”

मूवी में बस सड़क दीखाई जा रही थी और मार्केट दीखाई जा रही थी. कोई आवाज़ नही आ रही थी. अचानक कॅमरा एक शुन्सान सी जगह घूम गया. कॅमरा अब एक लड़की को फॉलो कर रहा था.”

“ओह माई गोद….ये तो रागिनी है.”

“रागिनी कौन रागिनी?

“हमारे कॉलेज मैं पढ़ती थी. उष्का खून हुवा था साएको के हाथो. तुम्हे तो पता होना चाहिए…कैसे बेख़बर पुलिस वाले हो तुम?”

“ओह हाँ याद आया, मैं भूल गया था आज दीमग इतना घुमा हुवा है की पूछो मत. कही ये उशके मर्डर की वीडियो तो नही बना न्यू एअर साएको ने.”

तभी वीडियो में दीखया गया की अचानक किशी ने रागिनी को आकर पीछे से दबोच लिया और उसे कुछ सूँघा दिया. फिर उसे घसीट कर कार की डिकी में डाल दिया.

“ऑम्ग ये तो रागिनी के मर्डर की ही वीडियो है. रोहित बंद करो इशे मैं नही देख सकती.” रीमा ने कहा.

“रीमा मुझे ये देखनी पड़ेगी. प्लीज़ तुम दूसरे कमरे में चली जाओ…जैसे ही ये ख़त्म होगी मैं तुम्हे बुला लूँगा.”

“हॉरर मुझे अछी लगती है पर ये तो रियल है.”

“मेरी मानो मेरे साथ रहो. इशे देख कर अनॅलिसिस करेंगे, क्या पता साएको के खिलाफ कुछ मिल जाए.”

मूवी में अगला सीन एक घर का था. रागिनी नंगी पड़ी हुई थी फार्स पर और गिड़गिदा रही थी, “प्लीज़ मुझे जाने दो…प्लीज़.”

“हाहाहा….यहा से तुम कही नही जा सकती. यहा से अब तुम्हारी लाश ही बाहर जाएगी. घबराओ मत तुम्हे ऐसी मौत दूँगा की फकर होगा तुम्हे की तुम मेरे हाथो मारी गयी.”

मूवी में साएको का चेहरा नही दीख रहा था. पूरा फोकस रागिनी पर ही था.

“दो चाय्स हैं तुम्हारे पास. ये चाकू देख रही हो. इशे अपनी चुत में डाल लो. जिध तरह से लंड लेती हो चुत में उशी तरह से ये चाकू भी डाल लो. अगर तुम चुपचाप चाकू डाल लॉगी तो तुम्हे कुछ नही करूँगा. और अगर नही डाला चाकू तुमने तो मैं डाल दूँगा. मेरे डालने से दर्द ज़्यादा होगा. खुद ही डाल लो तो अछा है.”
रागिनी फूट-फूट कर रोने लगी और बोली, “प्लीज़ मैं ये नही कर सती…प्लीज़.”

“रोहित ये साएको तो बहुत ख़तरनाक है.”

“ये घर जहा ये वीडियो बनी है…कहा होगा ये घर…कुछ अजीब सा नही है ये कमरा. ऐसे कमरे कौन बनाता है आज कल. बहुत ही पूरेाना घर लगता है.”

“हन रोहित ऐसे घर तो गाँव में देखे थे कभी. अब ऐसी कन्स्ट्रक्षन कोई नही करवाता.”

अचानक मूवी रुक जाती है.

“ये क्या हुवा…इतनी ही है क्या ये.” रोहित ने कहा.

“अतचा है जो इतनी ही है….आगे उष्का मुर्दूर ही किया होगा उसने.”

“मुझे लग रहा था की शायद साएको की शकल देखने को मिलेगी…पर ये तो यही रुक गयी.”

बहुत ट्राइ करते हैं वो दोनो मूवी को आगे बढ़ाने की मगर मूवी आगे नही बढ़ती. वो वही तक थी.

“ये द्वड तुम्हे कहा मिली रोहित.” रीमा ने पूछा.

“ये मुझे विजय के घर पर मिली. विजय को गोली मारी थी मैने. वही साएको लग रहा था मुझे. पर अब बात और भी उलझ गयी है. इसे द्वड का मतलब है की विजय असली साएको से मिला हुवा था.” रोहित रीमा को अपने घर पर घाटी सारी बात बताता है.

“ये भी तो हो सकता है की उसे ये द्वड कही मिली हो और इसे से प्रेरित हो कर उसने भी साएको जैसा करने की सोची हो. वो कॉपीकॅट भी हो सकता है.”

“कॉपीकॅट तो वो था ही. इसमे कोई शक नही मुझे. बस ये पता लगाना है की क्या वो साएको से मिला हुवा था. इसे द्वड का विजय के घर से मिलना काफ़ी सारे सवाल खड़े कराता है. जिनका जवाब मुझे ढुंडना होगा. मुझे जाना होगा रीमा…सॉरी…आज तुम्हे कोई सुख नही दे पाया.”

“अतचा ही है मैं बच गयी. वरना आज जाने क्या हाल करते मेरा.”

“कब तक बचोगी…आज वैसे भी मूड ठीक नही था. अब ये द्वड देख कर दीमग और ज़्यादा उलझ गया है.
ऐसी हालत में संभोग में परवेश मूरखता है. धैर्या से फिर कभी आनंद लेंगे हम…और आपकी खूब रेल बनाएँगे”

“बना लीजिएगा हमें इंतेज़ार रहेगा.” रीमा ने मुश्कूराते हुवे कहा.
“आपकी इनही बातों से बहक जाता हूँ मैं. ट्रेन में भी आपने मुझे बहका दिया था इन अदाओ से.”

“ट्रेन में ऐसा कुछ नही किया था मैने..वो सब आपका किया धारा था.”

“चलिए कोई बात नही मेरा किया धारा ही सही…मज़ा तो खूब मिला था ना आपको.”

“हन वो तो मिला था…तभी तो तरसते हैं आपके लिए.” रीमा ने नज़रे झुका कर कहा.

“अफ क्या शर्मा रही हैं आप. मिलूँगा जल्दी ही आपसे. आज वो बात नही बन पाएगी…जीशकि आपको चाहत है. दीमग बहुत सारी बातों से घिरा हुवा है.”

“मैं समझ सकती हूँ…आप जाओ अभी फिर मिलेंगे आराम से.” रीमा ने कहा.

“कूल…वी विल मीट सून और विल मेक आ ब्लास्ट.”

“अब ये ब्लास्ट क्या है रेल से ज़्यादा ख़तरनाक है क्या …”

“हन कुछ ऐसा ही समझ लो..”

रोहित द्वड लेकर बाहर आ गया और वापिस विजय के घर की तरफ चल दिया, “क्या पता ऐसी और भी द्वड हो विजय के पास…देखता हूँ जाकर.”

रास्ते में रोहित को एक शुन्सान सड़क पर एक कार खड़ी मिली. उसमे हलचल हो रही थी. रोहित ने अपनी जीप रोकी और कार के शीसे का दरवाजा खड़क्या.

“क्या है…क्या दिक्कत है.” एक लड़का शीसा खोल कर बोला.

“यहा शुन्सान में क्या कर रहे हो. रात भी हो चुकी है. क्या तुम्हे साएको का दर नही.”

“तुम्हे क्या लेना देना…दफ़ा हो जाओ.”

“बड़े बाप की औलाद लगता है. पुलिस की वर्दी का कोई दर नही इशे.” रोहित ने मन में सोचा.

रोहित ने अंदर झाँक कर देखा तो पाया की एक लड़की बैठी सबक रही है. वो अपनी आँखो से आँसू पोंछ रही थी.

“कौन है ये लड़की…और ये रो क्यों रही है.”

“तेरी बहन है ये…तेरी बहन छोड़ रहा हूँ मैं. चल अब दफ़ा हो जा यहा से.”

“अतचा ऐसी बात है क्या…बहना चलो बाहर आ जाओ” रोहित ने कहा.

रोहित ने ये बोला ही था की उष लड़के ने बंदूक निकाल कर रोहित पर तां दी.

“एक बार समझ नही आता तुझे…चल निकल यहा से.”
अगले ही पल रोहित वो बंदूक चीन कर वापिस उष लड़के पर तां दी. “इन खिलोनो से खेलना ख़तरनाक है मुन्ना. चल चुपचाप बाहर निकल वरना तेरा भेजा उसा दूँगा अभी.”

“रूको…रूको निकलता हूँ… तुम जानते नही मुझे की मैं कौन हूँ. मैं गौरव मेहरा का भाई हूँ. पूरा डेप्ट खड़ीद सकता हूँ तुम्हारा.”

“गौरव मेहरा… इंट्रेस्टिंग. जल्द मुलाकात होगी तुमसे मुन्ना. चल अब ये कार यही छोड़ और पैदल निकल यहा से.”

“देख लूँगा तुम्हे मैं.” वो लड़का चलते हुवे बोला.

“आबे शन तेरे भाई के पास ब्लॅक स्कॉर्पियो है क्या?”

“हन है क्यों…”

“मुझे रेंट पर लेनी थी. कल आऊगा तुम्हारे घर. सोच लेना आतची कमाई हो जाएगी तुम लोगो की ..”

“मेरे भैया के आगे बोलते ना ये तो अभी लाश गिरी होती तुम्हारी यहा.”

“लाश तो तेरी भी गिर सकती है चुपचाप निकल ले यहा से.”

वो लड़का भाग गया वाहा से कार छोड़ कर.

“आओं बाहर…अब चिंता की कोई बात नही है.”

लड़की डराते-डराते बाहर आती है.

“क्या नाम है तुम्हारा ?”

“सुमन..”

“चलो आओ तुम्हे घर छोड़ देता हूँ.”

“मैं हॉस्टिल में रहती हूँ. कॉलेज छोड़ दीजिए मुझे.”

“हन-हन छोड़ दूँगा बैठो तो सही”

समान चुपचाप जीप में बैठ गयी.

“क्यों आई थी इशके साथ जब पता है की ऐसे लड़के अतचा बर्ताव नही करते.”

“कुछ दीनो से ही ये बदल गया. पहले तो ऐसा नही था.”

“समझा कर उसे अब दूसरी लड़की मिल गयी होगी.”

“पता है मुझे. तभी नही आना चाहती थी उशके साथ. ज़बरदस्ती बंदूक दीखा कर लाया मुझे वो.”

“ह्म… कंप्लेंट लिखवा दे उष्की…अभी जैल में डाल दूँगा सेयेल को.”

“छोड़िए…बदनामी मेरी ही होगी और उष्का कुछ नही बिगड़ेगा.”

“संभोग किया आपने उशके साथ..?”

“एक्सक्यूस मे…”

“छोड़िए वैसे ही पूछ रहा था.”

“जी हाँ किया है…”

“ऐसे लोगो के साथ आपको इन लोगो से संभाल कर रहना चाहिए. ये आमिर बाप के बिगड़ैल लड़के भावनाओ को नही समझते. बस शोसन करते हैं. सब ऐसे नही होते मगर अधिकतर ऐसे ही होते हैं …”

“आप फ्लर्ट ना कीजिए मेरे साथ. अभी मेरा मन ठीक नही है.”

“मतलब किशी और वक्त चलेगा कूल कल मिलूँगा आपको.”

“फ़ायडा होगा नही कुछ आपको…फिर भी मिल लीजिएगा.” सुमन हल्का सा मुश्कुरा दी.

“वैसे मैं फ्लर्ट नही कर रहा था…पता नही क्यों लगा ऐसा आपको. लीजिए कॉलेज आ गया आपका. वैसे नाम क्या था उष्का.”

“संजीव मेहरा.”

“ह्म…ठीक है चलिए आप.”

“शुकरिया आपका. आज वो मुझे मार पीट रहा था. पहली बार किया उसने ऐसा. बहुत बुरा लग रहा था मुझे. बहुत चोट पहुँची दिल को.”

“कोई बात नही जायें आप. गुड नाइट. अब उष से दूर ही रहना.”

रोहित चल दिया वाहा से जीप लेकर विजय के घर की तरफ. “सरिता जी कही शो ना गयी हो.”

रोहित जब सरिता के घर पहुँचा तो रात के 11 बाज चुके थे.

“घर की सारी लाइट्स बंद हैं, लगता है सरिता जी शो गयी हैं. उन्हे उठाना ठीक नही होगा. सुबह मिलूँगा उनसे.”

रोहित अपनी जीप मोड़ कर वाहा से चलने वाला ही था की उसे एक छींख शुनाई दी. छींख घर के अंदर से ही आई थी. रोहित ने तुरंत अपनी पिस्टल निकाली और घर की तरफ भागा.उसने घर की बेल बजाई और दरवाजे को ज़ोर-ज़ोर से पीटा. मगर कुछ रेस्पॉन्स नही मिला. दुबारा कोई छींख तो नही आई घर के अंदर से कुछ-कुछ आवाज़े आ रही थी.

रोहित ने तुरंत फोन करके और पुलिस वालो को वाहा बुलवा लिया.

“सरिता जी दरवाजा खोलिए…मैं हूँ इनस्पेक्टर रोहित.”

मगर अंदर से कोई रेस्पॉन्स नही आया.

“ये दरवाजा तौड़ना होगा मुझे.” रोहित ने कहा और दूर लॉक पर फिरे किया.

दरवाजा खुल गया और रोहित हाथ में बंदूक ले कर तुरंत अंदर घुस्स गया. वो दीवार से चिपक गया और ध्यान से देखने की कोशिस की. अंधेरा था कमरे में पूरी तरह. रोहित कुछ भी नही देख पा रहा था. उसने ड्यूवर पर लाइट्स के बतन्स ढूंदे और उन्हे ऑन किया. मगर कुछ भी नही जला.

“लाइट काट न्यू एअर है शायद.” रोहित ने सोचा.

“सरिता जी आप कहा हो. मैं इनस्पेक्टर रोहित …. मिला था ना शाम को आपको. वेर अरे यू.”

“अफ टॉर्च भी नही है आज. क्या करूँ इसे अंधेरे में.” रोहित ने सोचा.

तभी अचानक कुछ हलचल हुई और कोई टकरा गया रोहित से.

“क…क…कौन है…”

“सरिता जी मैं हूँ रोहित पांडे.”

“आप क्यों कर रहे हैं मेरे साथ ऐसा..?”

रोहित को कुछ समझ नही आया. उसने फ़ौरन सरिता को दबोच लिया और उशके मूह पर हाथ रख दिया और उशके कान में बोला, “सस्शह…बिल्कुल चुप रहिए. कोई आपके घर में घुस्सा है शायद.”

तभी घर के पीचली तरफ कुछ आवाज़ हुई.

“आपके पास कोई टॉर्च है?” रोहित ने पूछा.

“है…मगर वो किचन में पड़ी है और वही से ये आवाज़ आ रही है शायद.”

“आप चिंता मत करो मैं हूँ यहा…बाकी पुलिस भी आ रही है. ये जो कोई भी घुस्सा है आपके घर में…पकड़ा जाएगा जल्दी ही.”

तभी घर के पीछे ज़ोर की आहत हुई”

“आप रुकिये यही मैं देखता हूँ की कौन है”

रोहित हाथ में बंदूक तने आगे बढ़ता है. पहुँच जाता है धीरे-धीरे घर के पीछे. रोहित अंजान था बिल्कुल की दीवार से एक साया चीपका खड़ा है बिल्कुल उशके पीछे. कदमो की हल्की से आहत शुनाई दी उसे और वो तुरंत मुड़ा मगर जब तक वो समझ पाता उशके सर पर एक वार हुवा और वो लड़खड़ा कर ज़मीन पर गिर गया. तभी पुलिस के साइरन की आवाज़ गूँज उठी. भाग गया वो साया रोहित को छोड़ कर.

रोहित का सर घूम रहा था. खून बह रहा था उशके सर से. उतना मुश्किल हो रहा था. मगर फिर भी वो हिम्मत करके उठा और बंदूक हाथ में ले कर लड़खड़ाते कदमो से आगे बढ़ा. पुलिस ने चारो तरफ से घेर लिया था घर को. हर तरफ देखा गया मगर वो साया नही मिला.

“निकल गया हाथ से सला. ये ज़रूर साएको ही था. पता नही क्या मारा मेरे सर पर कामीने ने, अभी तक सर घूम रहा है.” रोहित ने कहा.

घर की बीजली ठीक कर दी गयी और रोशनी में फिर से पूरे घर को एक बार फिर से चेक किया गया. कुछ नही मिला.

“ह्म किचन की खिड़की से घुस्सा था वो अंदर…यही से भागा भी होगा शायद” रोहित ने कहा.

रोहित सरिता के पास आया. वो ड्रॉयिंग रूम में सोफे पर बैठ कर सबक रही थी.
“सरिता जी माफी चाहता हूँ आपसे मगर एक बात पूछनी थी आपसे.” रोहित ने कहा.

“जी पूछिए.”

“जो द्वड मैं ले गया था यहा से, क्या वैसी द्वड और भी हैं.”

“जी नही वो एक ही थी…”

“अरे यू शुवर?”

“एस ई आम शुवर.”

“सरिता जी प्लीज़ अगर आपको कुछ भी पता है तो बता दीजिए. इसे साएको को पकड़ना बहुत ज़रूरी है.”

“मुझे कुछ नही पता…मैं कोई भी मदद नही कर सकती हूँ आपकी.”

“अगर आपको बुरा ना लगे तो आपके घर की तलासी लेना चाहता हूँ. क्या पता कुछ मिल जाए.”

“बे-शक लीजिए तलासी. मुझे कोई ऐतराज नही है.”

“थॅंक यू वेरी मच सरिता जी.”

पूरे घर को अतचे से चेक किया जाता है. रोहित को उम्मीद थी और द्वड मिलने की. मगर निराशा ही हाथ लगी.”

रोहित ने 2 पुलिस वाले लगा दिए सरिता की प्रोटेक्षन के लिए. और जीप में बैठ कर चल दिया.

“थोड़ी मरहम-पट्टी करवा लेता हूँ.पता नही क्या मारा था कम्बख़त ने.

………………………………………………………………..

मोहित अपनी बाएक पर जा रहा था ड्यूटी पर. दीख गयी पूजा उसे बस स्टॉप पर. आँखे चमक उठी उष्की.
पहुँच गया उशके पास और रोक दी बाएक उशके आगे. पूजा हल्का सा मुश्कुरा दी उसे देख कर.

“कैसी हो पूजा?”

“मैं ठीक हूँ मोहित. तुम कैसे हो?”

“ठीक हूँ मैं भी…लगता है कॉलेज से छुट्टी ले न्यू एअर थी. रोज देखता था तुम्हे यहा पर तुम नही दीखी.”

“हन मन नही होता था कॉलेज जाने का. लेकिन कितनी छुट्टी लूँ, अब जाना ही होगा.”

तभी पूजा की बस आ गयी.

“मोहित बस आ गयी मेरी मैं जौन.” पूजा ने कहा.

“अगर रोकुंगा तो क्या रुक जाओगी?”

“रुक जवँगी तुम कहोगे तो…पर क्यों रोकना चाहते हो मुझे.”

“प्यार कराता हूँ तुम्हे…जानती तो हो तुम…फिर भी पूछती हो क्यों. आओ बैठ जाओ तुम्हे घुमा कर लाता हूँ.”

“काई दीनो बाद कॉलेज जा रही हूँ मोहित…आज नही.”

“बाद में चलॉगी क्या…किशी और दिन.”

“हन देख लेंगे…तुम जाओ अपनी ड्यूटी पर लाते हो जाओगे.”

“निकल गयी बस तुम्हारी आओ तुम्हे छोड़ देता हूँ.”

“कोई बात नही 20 मिनिट में दूसरी आ जाएगी. तुम जाओ लाते हो जाओगे.”

“बैठ जाओ ना प्लीज़. मेरी खातिर.”

एक हल्की सी मुश्कान बिखर गयी पूजा के चेहरे पर और वो बैठ गयी मोहित की बाएक पर.

“क्या तुम्हे पता है की तुम मुझे प्यार करने लगी हो?”

“मुझे तो ऐसा कुछ नही पता.”

“पर मुझे पता है.”

“अतचा…तुम्हे कैसे पता.”

“बस पता है मुझे.”

पूजा ने अपना सर टीका दिया मोहित के कंधे पर और बोली,”शायद तुम ठीक कह रहे हो. मैं कुछ नही कह सकती क्योंकि मेरा दीमाग उलझन में फँसा हुवा है.”

“उलझन दूर हो जाएगी सारी एक बार मेरे प्यार के शुरूर में डूब कर देखो”

“मोहित वैसा कहा घूमना चाहते थे मुझे.”

“मुस्सूरीए ले चलता तुम्हे बाएक पर ही…चलॉगी.”

“कल चलें…आज कॉलेज में देख लेती हूँ की क्या चल रहा है.”

मोहित ने तुरंत बाएक रोक दी सड़क के किनारे और बोला, “पूजा…मेरी खातिर बोल रही हो या सच में जाना चाहती हो.”

“मुझे कुछ नही पता. तुम ले चलना मुझे बस. ख़ुसी ख़ुसी चलूंगी तुम्हारे साथ.”

“ये तो सपना सा लग रहा है मुझे…”

“चलूंगी मैं मोहित…तुम्हारे साथ कही भी चलूंगी. फिलहाल लाते हो रही हूँ…कॉलेज ले चलो ना जल्दी”

“ओह हाँ बिल्कुल” मोहित ने दौड़ा दी बाएक सड़क पर. कुछ ही देर में उसने पूजा को कॉलेज के बाहर उतार दिया.

“बाइ…कल मिलते हैं.” पूजा ने प्यारी सी मुश्कान के साथ कहा.

“ध्यान रखना अपना पूजा.”

“ओक जाओ अब लाते हो जाओगे.” पूजा ने कहा.

“ओह हन…आज जल्दी पहुँचना था बाइ-बाइ. कल मिलते हैं.”
रोहित डॉक्टर के पास से मरहम पट्टी करवाने के बाद सीधा घर पहुँचा.

“भैया ये क्या हुवा, ये सर पे पट्टी क्यों बँधी है..?” पिंकी ने पूछा.

“सर पे पता नही क्या मार दिया जालिम ने. पिंकी एक बात शुन्ओ मेरी. जब तक ये साएको पकड़ा नही जाता तुम देल्ही चली जाओ चाचा जी के पास. मम्मी अंकली तो वाहा गये ही हुवे हैं. तुम तीनो वही रुक जाओ कुछ दिन.”

“भैया मेरा कॉलेज है यहा…मैं देल्ही कैसे जा सकती हूँ.”

“अरे छुट्टी ले लो ना. मगर तुम एक पल भी यहा नही रुकोगी. साएको ने चेतावनी दी है मुझे की मेरे लिए प्लान बना रखा है उसने. मैं नही चाहता की तुम लोगो पर कोई आँच आए.”

“भैया मैं ये बात नही मानूँगी.”

“थप्पड़ लगेगा एक गाल पर. जो कहा है वो करो. समान पॅक करो अपना. सुबह निकल रही हो तुम देल्ही. कॉलेज में छुट्टी के लिए मैं बोल दूँगा. मैं कोई बात नही शुनूँगा तुम्हारी.”

पिंकी पाँव पटक कर अपने कमरे में चली गयी और अंदर से कुण्डी लगा ली. रोहित उशके रूम के बाहर आ कर बोला, “सुबह मुझे कोई बहाना नही चाहिए. तुम सुबह 7 बजे निकल रही हो देल्ही. कार बुक करवा रहा हूँ मैं. शो जाओ और जल्दी उठ जाना.”

रोहित आ गया अपने रूम में और छोटी सी भूल पढ़ने बैठ गया. “आज ख़त्म कर दूँगा मैं ये कहानी. सबने मेरे से पहले पढ़ ली.. ….. आज ख़त्म करके रहूँगा.”

12 बजे बैठा था रोहित और 3 बजे तक पढ़ता रहा. पढ़ते वक्त उष्की आँखे नाम थी. शायद कहानी ही कुछ ऐसी थी. पढ़ने के बाद चुपचाप शो गया.

सुबह 6 बजे उठ गया रोहित. 7 बजे जैसे तैसे पिंकी को देल्ही रवाना किया. बिल्कुल नही जाना चाहती थी पिंकी कही भी. मगर रोहित के आगे उष्की एक नही चली.

सुबह 11 बजे रोहित समशान घाट में था. प़ड़्‍मिनी के पेरेंट्स का अंतिम शंसकार हो रहा था.
रोहित चुपचाप खड़ा हो गया प़ड़्‍मिनी के पास. कुछ बोल नही पाया. हेमंत (हितक्श) भी पास में ही खड़ा था. राजू कुछ दूरी पर खड़ा था. प़ड़्‍मिनी को परेशान नही करना चाहता था वो. इश्लीए उष से दूर ही रहा. मोहित को भी बुला लिया था राजू ने फोन करके. वो भी राजू के पास ही खड़ा था.

अपने पेरेंट्स की चीता को देखते हुवे प़ड़्‍मिनी की आँखे तपाक रही थी. प़ड़्‍मिनी की नज़र मोहित पर गयी तो वो आई उशके पास और बोली, “देखो तुम्हारे उष दिन के खेल ने क्या कहर ढा दिया मेरी जींदगी में. सब तुम्हारे कारण हुवा है. चले जाओ तुम यहा से. तुम्हे यहा किशणे बुलाया है.”

मोहित ने कुछ नही कहा. वो चुपचाप नज़रे झुकाए खड़ा रहा.

“मैं तुम्हे कभी माफ़ नही करूँगी.” प़ड़्‍मिनी फूट फूट कर रोने लगी. प़ड़्‍मिनी की चाची ने उसे रोते देखा तो उसे गले से लगा लिया. “बस प़ड़्‍मिनी बस.”

बहुत ही दुख भरा माहॉल था वाहा. जलती हुई चीता के साथ साथ काई सारी ख़ुसीया, सपने, उम्मीदे भी जल रही थी. अपने किशी करीबी की मृत्यु इंसान के अस्तिताव को हिला देती है. कुछ ऐसा ही हो रहा था प़ड़्‍मिनी के साथ. वक्त लगेगा उसे फिर से संभालने में. बहुत वक्त लगेगा.

प़ड़्‍मिनी की हालत ना राजू देख पा रहा था और ना ही रोहित. दोनो बस उसे तड़प्ते हुवे देख ही सकते थे. अजीब स्तिति थी जींदगी की ये.

शालिनी भी थी वाहा. वो भी चुपचाप खड़ी थी. रोहित उशके पास गया और बोला, “मेडम आज मुझे छुट्टी चाहिए. मेरा मन बहुत उदास है. कुछ भी करने का मन नही है.”

“ठीक है जाओ….मगर कल और ज़्यादा मेहनत करनी पड़ेगी तुम्हे.” शालिनी ने कहा.

“थॅंक यू मेडम.” रोहित ने कहा

हेमंत और उशके पेरेंट्स बड़ी मुश्किल से ले गये प़ड़्‍मिनी को शमशान से. वो वाहा से जाने को तैयार ही नही थी. घर आकर उसने खुद को अपने कमरे में बंद कर लिया. राजू हमेशा की तरह अपनी जीप में बैठ गया.

रोहित जब घर पहुँचा तो उसे रीमा का फोन आया, “कैसे हो रोहित.”

“ठीक हूँ मैं तुम कैसी हो.”

“मैं भी ठीक हूँ. मिस कर रही हूँ तुम्हे.”

“मेरे घर आ सकती हो.”

“क्यों नही आ सकती…तुम बुलाओ तो सही.”

“आ जाओ फिर.”

“मैं कॉलेज में हूँ. बस अभी 20 मिनिट में आती हूँ तुम्हारे पास.”

“हन आ जाओ. ई आम वेटिंग फॉर यू.”

रीमा पहुँच गयी घर 20 मिनिट में.

“ये सर पे क्या हुवा… …” रीमा हैरान रह गयी.

रोहित ने सरिता के घर की घतना शुनाई रीमा को.

“ऑम्ग क्या वो साएको था सरिता के घर में.”

“कुछ कह नही सकते अभी….मैने अपनी छ्होटी बहन को देल्ही भेज दिया है. पेरेंट्स तो पहले से ही वही हैं. मैं नही चाहता की उन्हे कुछ नुकसान पहुँचे. तुम भी कुछ दिन दूर रहना मुझसे. मैं नही चाहता की तुम्हे कुछ नुकसान पहुँचे.”

“मैं तुमसे दूर नही रह सकती. अपने बॉय फ्रेंड से भी ब्रेकप कर लिया मैने तुम्हारे लिए. तुम्हारी अडिक्षन हो गयी है मुझे.”

“ऐसा क्या हो गया रीमा”

“तुम खुद से पूछो.”

“पता है मैने छोटी सी भूल पूरी पढ़ ली रात”

“वाउ..थ्ट्स रियली ग्रेट….अब अपने व्यूस बताओ.”

“बेडरूम में चलते हैं आराम से लाते कर बात करेंगे.”

“हन बिल्कुल…वैसे आज घर पर कैसे हो?”

“यार शंसान से आया हूँ अभी. प़ड़्‍मिनी को देख कर दिल व्यतीत हो गया. कुछ करने का मन नही था. छुट्टी ले ली मैने एक दिन की.”

“अतचा किया रोहित. कभी-कभी छुट्टी भी लेनी चाहिए.”

रीमा और रोहित बेडरूम में आ गये और एक दूसरे के सामने लाते गये.

“हन तो जानेमन अब बताओ कैसी लगी छोटी सी भूल. मैं जान-ना चाहती हूँ की मेरी फेवोवरिट स्टोरी के बड़े में तुम्हारे क्या विचार हैं.”

“वाहियात स्टोरी थी पूछो मत.”

“क्या ऐसा कैसे कह सकते हो तुम.”

“और नही तो क्या… ऐसी कोई बात नही थी उसमे जो की वो एकषबीई पर हिट हुई.”

“मुझे तो बहुत आतची लगी थी खैर जाने दो …” रीमा का चेहरा उतार गया.

“रीमा मज़ाक कर रहा हूँ.. …छोटी सी भूल मेरी भी फेवोवरिट बन गयी है.”

“हद करते हो तुम भी ….”

“अतचा शुन्ओ मैं अपना रिव्यू देता हूँ.”

“हन बोलो मैं शन रही हूँ.”

“छोटी सी भूल एक ऐसी कहानी है जो हमें जींदगी का मतलब सीखाती है. ये कहानी हमारी आंतेर आत्मा को झकज़ोर देती है. जीवन के काई पहलुओं को उजागर कराती है ये कहानी. अगर आप एक नारी को समझना चाहते हैं तो ये कहानी पढ़ें. अगर आप ये जान-ना चाहते हैं की ब्लाटकार का नारी के अस्तिताव पर कितना गहरा घाव होता है तो छोटी सी भूल ज़रूर पढ़ें. बहुत ही अतचे से समझाया है एक औरात की भावनाओ को छोटी सी भूल ने.

ऋतु के जैसा कॅरक्टर किशी कहानी में नही देखा मैने. वो भटकती है जींदगी में. बिल्लू की हवस का शिकार हो जाती है. बहुत गिर जाती है अपनी जींदगी में. मगर उशके चरित्रा की एक बात हमेशा उशके प्राति प्रेम जगाए रखती है. वो बात है उष्का ये अहसास की वो ग़लत कर रही है, पाप कर रही है. कितने लोग हैं दुनिया में जिन्हे ये अहसास भी होता है की वो कुछ ग़लत कर रहे हैं. हम कभी अपनी ग़लती स्वीकार नही करते. मगर ऋतु हमेशा स्वीकार कराती है. ये उशके चरित्रा की शुनदराता को दर्शाता है.

ये कहानी दीखती है की किश तरह बदले की आग किशी की जींदगी बर्बाद कर सकती है. बिल्लू की बहन का रेप हुवा. ऋतु के हज़्बंद ने किया रेप कुछ लोगो के साथ मिल कर. बिल्लू ने बदले की आग में ऋतु को सिड्यूस किया और उशके चरित्रा को चलनी चलनी कर दिया. ये सब बातें बहुत ही एरॉटिक रूप में दीखाई गयी हैं कहानी में. ज़रूरी भी था. कहानी ही कुछ ऐसी थी. सेक्स इसे कहानी का अटूट हिस्सा लगता है. क्योंकि बिल्लू सेक्स का ही सहारा लेता है संजय से बदला लेने के लिए. ऋतु को बहुत ही बुरी तरह सिड्यूस किया जाता है और उसे बर्बाद कर दिया जाता है.

ऋतु और बिल्लू दोनो को बहुत गिराते हुवे दीखया गया कहानी में. मगर कहानी कुछ और ही रूप लेती है बाद में. जातीं ने दीखया है की जो इंसान गिराता है उष्की ही उपर उठने की भी संभावना होती है. बहुत गिरे ऋतु और बिल्लू दोनो और बाद में इतना उठे की शायद हम लोग उतना उठने की सोच भी ना पाए.
प्यार हुवा उन दोनो के बीच और ऐसा प्यार हुवा की आप रो पड़ेंगे देख कर. खूब रोया मैं रात को. इतनी शुनदर प्रेम कहानी मैने अपनी जींदगी में नही पढ़ी.

पेज नो 79 से 89 तक प्यार का तूफान चलता है कहानी में जीशमें की आप उलझ जाते हैं और आप ना चाहते हुवे भी आँसू बहाने लगते हैं. ऐसा तूफान सिर्फ़ जातीं भाई ही करियेट कर सकते हैं. अभी तक निकल नही पाया मैं उष तूफान से और सच पूछो तो निकलना चाहता भी नही. पता नही कितनी बार पढ़ुंगा मैं पेज 79 से 89 तक. पर ये जानता हूँ की हर बार एक बार और पढ़ने की इतचा होगी. क्या किशी रीडर के साथ कोई और कर सकता है ऐसा जातीं भाई के अलावा. कोई भी नही.

प्यार की जो उँचाई दीखाई गयी है बिल्लू और ऋतु के बीच उसे बहुत कम लोग समझेंगे. क्योंकि बहुत से लोग प्यार को समझते ही कहा हैं. ऐसी उँचाई हर कोई नही पा सकता अपनी जींदगी में.

छोटी सी भूल एरॉटिक ब्लास्ट से शुरू हो कर प्यार के तूफान पर ख़त्म होती है. इसे एक लाइन में ही मेरा पूरा रिव्यू छुपा है. जो इसे लाइन की गहराई को समझ लेगा वो पूरी कहानी को समझ लेगा.

आख़िर में यही कहूँगा की प्यार का संदेश है छोटी सी भूल. ये संदेश हमें कुछ इसे तरह से शुनाया है जातीं भाई ने की आँखे बहने लगती है शुंते हुवे. इंटरनेट पर इसे कहानी से ज़्यादा शुनदर कहानी नही मिलेगी. जातीं भाई की खुद की स्टोरीस भी शायद इसे कहानी का मुक़ाबला नही कर सकती. उन सभी लोगो को छोटी सी भूल पढ़नी चाहिए जो प्यार को समझना चाहते है, जींदगी को समझना चाहते हैं और डूब जाना चाहते हैं एक प्यारी सी दुनिया में. और क्या कहूँ…तीस इस आ मस्त रीड”

रोहित जब अपनी बात करके हटा तो उसने देखा की रीमा की आँखे नाम हैं.

“अरे क्या हुवा तुम्हे?” रोहित ने पूछा.

“तुम्हारे रिव्यू ने फिर से रुला दिया. पूरी कहानी आँखो में घूम गयी.”

“मेरे दिल में जो था इसे कहानी के लिए कह दिया.”

“बहुत अतचा रिव्यू दिया है. एक बार फिर से पढ़ूंगी घर जा कर. कहानी को नये रूप में सामने रखा है तुमने.”

“ह्म.. आज पहली बार घर आई हो कुछ लॉगी.”

“तुम पास रहो बस मेरे…और कुछ नही चाहिए.” रीमा ये बोल कर चिपक गयी रोहित से.

“क्या तुमने सच में छोड़ दिया अपने बॉय फ्रेंड को मेरे लिए.”

“झुत नही बोलती हूँ मैं.”

“ऐसा क्यों किया तुमने पर”

“मुझे नही पता … तुम्हारा साथ अछा लगता है बस”

“रेल बनवाने की आदत प़ड़ गयी क्या.”

“आज मेरी डेट्स आई हुई हैं. सेक्स के लिए नही आई हूँ यहा. तुम्हारे साथ के लिए आई हूँ”

“सॉरी रीमा मज़ाक कर रहा था.. ….”

“ई लव यू रोहित.”

“क्या … क्या कहा तुमने.”

“ई लव यू”

“रीमा हटो यार मज़ाक मत करो. मैं कुछ लाता हूँ तुम्हारे लिए.”

रीमा ने रोहित की आँखो में देखा और बोली, “ई लव यू, क्या मज़ाक में कहता है कोई किशी को.”

रोहित रीमा को अपने से अलग कर देता है, “रीमा तीस इस टू मच. दोस्त हैं हम. दोस्त ही रहेंगे. तुम्हे पता है मैं किश से प्यार कराता हूँ फिर भी.”

“हन पर वो तुमसे बात तक नही कराती. क्यों पीछे पड़े हो उशके. क्या पता वो किशी और को चाहती हो.”

“रीमा प्लीज़ ये सब बोलने की ज़रूरात नही है तुम्हे. अगर तुम सच में प्यार कराती हो मुझे तो धन्यवाद है तुम्हारा. मगर मैं झुत नही बोलूँगा. मेरे दिल में तुम्हारे लिए कोई अहसास नही है. तुम्हे धोका नही दे सकता. मैं तुम्हे दोस्त के रूप में देखता हूँ और कुछ नही.”

रीमा की आँखे टपकने लगी ये शन कर. रोहित ने ये देख कर उसे बाहों में भर लिया और बोला, “पागल हो गयी हो तुम क्या. रो क्यों रही हो. मैने तुम्हे सच बोल दिया रीमा. झुत बोलने से फ़ायडा क्या है. कभी तुमसे प्यार हुवा तो ज़रूर कहूँगा. अभी वो अहसास नही है तो कैसे कह दूं.”

“कोई बात नही रोहित. चलो छोड़ो. लाओ कुछ खाने के लिए भुख लगी है मुझे. वैसे सच ही कहा था तुमने, बिल्लू और ऋतु के जैसा प्यार हर किशी को नसीब नही हो सकता. काश मेरी छोटी सी भूल भी प्यार में बदल जाती. मेरी तुम्हारी गाड़ी तो सेक्स पर ही रुक गयी है. एक दूसरे के शरीर से खेले और बाइ-बाइ करके चलते बने.”

“अब कैसे समझाओन तुम्हे.”

“कुछ समझाने की ज़रूरात नही है. चलो कुछ खाने को ले आओ. भुख लग रही है मुझे.”

“यार खाना तो बनाना पड़ेगा. ऐसा कराता हूँ बाहर से माँगा देता हूँ.”

“नही…बाहर से क्यों मँगाओगे. मैं बना देती हूँ.”

रीमा ने प्यार से स्वाड्िस्ट खाना बनाया.

“वाह यार बहुत अतचा खाना बनाती हो तुम तो. मज़ा आ गया.”

रोहित मुझे कॉलेज जाना होगा. एक असाइनमेंट सब्मिट करनी थी शाम तक. वो सब्मिट करके घर चली जवँगी.”

“ठीक है मैं तुम्हे चोद दूँगा. अभी तो 2 ही बजे हैं.”

“बस अभी छोड़ दो तो अतचा है. असाइनमेंट लिखनी भी तो है अभी. लाइब्ररी में बैठ कर लिख लूँगी.”
एक खौफनाक रात – Hindi Thriller Story- 37
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Re: एक खौफनाक रात – Hindi Thriller Story

Unread post by Fuck_Me » 29 Sep 2015 02:47

“ओक…जैसी तुम्हारी मर्ज़ी.”

रोहित रीमा को कॉलेज छोड़ कर घर वापिस आ जाता है और बेड पर लाते जाता है. उशके दीमग में रीमा की कही बाते ही घूम रही थी. जब वो उसे कॉलेज छोड़ने गया था तो रीमा रास्ते भर चुप रही थी. रोहित की जीप से उतार कर उसने रोहित को एक दर्द भारी मुश्कान से बाये किया था.

“ओह रीमा मुझे वक्त दो. झुत नही बोल सकता था तुमसे. तुम आतची लड़की हो. शुनदर हो. काश तुमसे ही प्यार हो जाए मुझे. प्यार भी अजीब चीज़ है. जहा ढूनडते हैं वाहा नही मिलता. जहा पाने की तम्माना भी नही होती वाहा मिल जाता है. सोचूँगा रीमा तुम्हारे बड़े में. थोड़ा सा वक्त दो मुझे.”

सोचते-सोचते रोहित की आँख लग गयी. बहुत गहरी नींद शो गया वो. शाम के 8 बजे उसे दूर बेल ने जगा दिया.

रोहित ने घड़ी में टाइम देखा, “ऑम्ग 8 बाज गये. इतनी देर तक शोता रहा मैं. कौन है इसे वक्त.”

रोहित ने दरवाजा खोला तो उसे दरवाजे पर एक लीफाफा पड़ा हुवा मिला. रोहित ने दायें बायें देखा पर उसे कोई दीखाई नही दिया.

रोहित ने लीफाफा खोला उसने जो देखा उसे देख कर उशके पाँव के नीचे से ज़मीन निकल गयी. रीमा की फोटो थी उसमें. रीमा के शरीर पर एक भी कपड़ा नही था और उसे बेड पर बाँध रखा था. एक चित्त भी थी लीफफ़े में. उसमें लिखा था.

“हेलो मिस्टर पांडे,
मिलने का वक्त आ गया है. आपके किशी करीबी को ढुंड रहा था मैं. इसे लड़की को आप कॉलेज छोड़ कर गये और मैं इशे उठा लाया. ऐसा कीजिए आप उशी खंदार में आ जाईए चुपचाप जहा आपको निशा और रामू की खूबसूरात डेड बॉडीस मिली थी. कोई चालाकी दीखाई तो रीमा का जो हाल करूँगा वो तो तुम जानते ही हो. और घबराना मत. मेरी आर्ट का हिस्सा बन-ने जा रहे हो तुम. तुम्हे फकर होगा की तुम मेरे हाथो मारे गये. जल्दी आईए आपके लिए एक गेम तैयार है. तुम्हारे घर से बस आधे घंटे का रास्ता है. तुरंत पहुँच जाओ वरना अंजम तुम जानते ही हो.”

रोहित के पास कुछ भी सोचने का वक्त नही था. उसे हर हाल में टाइम से खंदार पहुँचना था. उसने सोचा भी नही था की साएको रीमा को उठा लेगा उसे अपने जाल में फँसाने के लिए. रोहित ने मोबाइल निकाला आस्प साहिबा को फोन करने के लिए. मगर तभी उष्का फोन बाज उठा.

“हेलो” रोहित ने कहा.

“किशे फोन कर रहे हो मिस्टर रोहित पांडे. आप से ऐसी उम्मीद नही की थी मैने. आपकी हर हरकत पर नज़र है मेरी.”

रोहित ने चारो तरफ देखा नज़रे दौड़ा कर पर कोई दीखाई नही दिया. “ज़रूर कोई कॅमरा लगा रखा है कामीने ने.” रोहित ने सोचा.

“क्या सोच रहे हो मिस्टर पांडे. लगता है रीमा की कोई चिंता नही तुम्हे. ये मोबाइल एक तरफ फेंक दो और बिना किशी चालाकी के खंदार आ जाओ. ”

“ओक आ रहा हूँ. मेरी जीप की चाबी अंदर पड़ी है. वो तो उठा सकता हूँ ना.”

“हन उठा लो. मगर कोई चालाकी मत करना. तुम्हारे हर मूव पर नज़र है मेरी”

रोहित घर के अंदर गया और थोड़ी देर में बाहर आ गया. मगर बाहर आते ही उसने देखा की मिनी रिपोर्टर माएक लिए खड़ी है.

“इनस्पेक्टर रोहित पांडे जी क्या आप बता सकते हैं की ये साएको कौन हो सकता है.” मिनी ने पूछा.

“देखिए मैं इसे वक्त बहुत जल्दी में हूँ. प्लीज़ अभी कुछ मत पूछिए.” रोहित अपनी जीप की तरफ बढ़ा.

“देखिए लोगो को साएको के बड़े में जान-ने का पूरा हक़ है ताकि वो सतर्क रह सकें..” मिनी ने कहा.

रोहित ने आगे बढ़ कर मिनी को गले लगा लिया और बोला, “तुम्हारी जेब में एक चित्त डाल रहा हूँ. आस्प साहिबा से कॉंटॅक्ट करना. यहा मत पढ़ना.”

मिनी को कुछ समझ नही आया. रोहित फ़ौरन जीप ले कर निकल गया वाहा से.

“क्यों किया उसने ऐसा …. कुछ गड़बड़ है. चित्त कही और जा कर पढ़ती हूँ.” मिनी ने मन ही मन कहा.

………………………………………………………………………

रोहित फुल बढ़ता से 20 मिनिट में ही पहुँच गया खंदार पर. बड़ी सावधानी से उतरा वो जीप से. हाथ में गुण तां कर खंदार में घुस्स गया. कोई हलचल, कोई आवाज़ नही हो रही थी वाहा. बिल्कुल शुन्सान पड़ा था वो खंदार.

रोहित पूरी सतर्कता से आगे बढ़ रहा था. खंदार के हर कोने में ध्यान से देख रहा था. जब वो उशी टूटे हुवे कमरे में पहुँचा जीशमे की निशा और रामू की लाश मिली थी तो उशके होश उस गये.

“रीमा!” रोहित छील्लाया.

रीमा नही थी वो. कोई और थी. पीठ में खंजर गाड़ कर उसे दीवार के सहारे खड़ा कर रखा था. उष्की पीठ थी रोहित की तरफ. पहली नज़र में वो उसे रीमा ही लगी.

रोहित भाग कर आया उशके पास. उसने उष लड़की के कंधे पर हाथ रखा ही था की उशके गले पर कोई नुकीली चीज़ आ कर गड़ गयी. उसने तुरंत पीछे मूड कर देखा तो पाया की एक नकाब पॉश बिल्कुल उशके पीछे खड़ा है. ज़्यादा कुछ नही देख पाया वो. कुछ ही देर में वो बेहोश हो गया.

………………………………………………………………………………

मिनी ने रोहित के घर से थोड़ा दूर जाकर पढ़ी वो चित्त. “ऑम्ग…साएको ने इनस्पेक्टर की गर्ल फ्रेंड को किडनॅप कर लिया …..और इनस्पेक्टर को बुलाया है खंदार में.”

मिनी के पास आस्प साहिबा का नंबर नही था. वो तुरंर कॅमरमन को साथ लेकर थाने पहुँची और शालिनी को वो चित्त दीखाई.

“ओह नो….” शालिनी ने तुरंत बेल बजाई.

एक कॉन्स्टेबल अंदर आया.

“चौहान को भेजो जल्दी अंदर…और सभी को एक्कथा होने के लिए बोलो. हमें एक ऑपरेशन पे निकलना है.”

“जी मेडम”

चौहान अंदर आया तो शालिनी ने उसे वो चित्त दीखाई.

“ये रीमा कौन है…मेडम.” चौहान ने पूछा.

“ये सोचने का वक्त नही है…जल्दी से ऑपरेशन की तैयारी करो. 2 मिनिट में निकलना है हमें.”

चौहान ने कुछ ध्यान नही दिया शालिनी की बात पर और अपनी बहन रीमा को फोन मिलाया. मगर फोन स्विच्ड ऑफ मिला.

“कही ये मेरी बहन रीमा तो नही….रोहित का उष से क्या लेना देना… …”

“ये सब बाद में सोचेंगे बेवकूफ़. जल्दी से ऑपरेशन के लिए रीडी करो सबको. ये साएको बचके नही जाना चाहिए आज.” शालिनी ने दृढ़ता से कहा. “थॅंक यू मिनी. प्लीज़ अभी कुछ मत दीखाना टीवी पर. और हमारे साथ भी मत आना. बहुत ख़तरा है वाहा.”

“ख़तरा माल लेना ही हमारी जॉब है मेडम. डोंट वरी अबौट मे.”

“ओक आस यू विश”

5 मिनिट बाद शालिनी पुलिस की बहुत बड़ी पार्टी ले कर निकल पड़ी खंदार की और.

मगर जब वो वाहा पहुँचे तो वाहा उन्हे बस एक लड़की की लाश मिली. जीशकि पीठ में खंजर गाड़ा था.
“ओह शूकर है ये मेरी बहन नही है.” चौहान लड़की के चेहरे को देख कर बोला.

“मगर रोहित कहा है?” शालिनी ने कहा.

“दर कर भाग गया होगा वो मेडम” चौहान ने कहा.

“पागल हो गये हो क्या तुम. बिना सोचे समझे कुछ भी बोले जा रहे हो. अतचे से हर तरफ देखो.” शालिनी ने चौहान को दाँत दिया.

खंदार में कर तरफ देखा गया. खंदार के पीछे जो जंगल था वाहा भी हर तरफ देखा गया. मगर रोहित का कुछ पता नही चला.

“ऐसा करो पूरा जंगल छान मारो. लगता है हमें आने में देरी हो गयी. कुछ अनहोनी की आशंका हो रही है मुझे.” शालिनी ने कहा.

पूरा जंगल भी छान लिया पुलिस ने मगर उन्हे रोहित का कुछ शुराग नही मिला. मगर फिर भी पुलिस की तलाश जारी रही.

“खंदार में बुलाया उसने रोहित को. खंदार बिल्कुल जंगल के पास है. इसे जंगल में ही गड़बड़ लगती है. पर कुछ मिल क्यों नही रहा.” शालिनी प्रेशान हो रही थी.

……………………………………………………………………………..

रोहित की जब आँख खुली तो उसने खुद को एक बंद कमरे में पाया. तुरंत उष्की नज़र कमरे में बीचे बेड पर गयी. रीमा निर्वस्त्रा पड़ी थी उशके उपर. उशके हाथ पाँव बँधे हुवे थे. बिस्तर पर ही उशके कपड़े भी पड़े थे.

“रीमा!” रोहित छील्लाया.

“रोहित प्लीज़ मुझे बचा लो. मैं मारना नही चाहती.” रीमा रोते हुवे बोली.

रोहित तुरंत उठ कर रीमा के पास आया और उशके हाथ पाँव खोल दिए.

“रीमा तुम बिल्कुल चिंता मत करो…मैं हूँ ना”

“ये वही कमरा लग रहा है जो की हमने उष द्वड में देखा था.”

“हन वही है ये. बिल्कुल वही है.” रोहित ने कहा.

“बहुत खूब मिस्टर पांडे…तुमने तो मेरे कहे बिना ही गेम शुरू कर दी. मैं भी तुम्हे यही बोलना चाहता था की रीमा के हाथ पाँव खोलो पहले.” कमरे में आवाज़ गूँज उठी. आवाज़ एक छोटे से स्पीकर से आ रही थी जो की देवार पर टंगा था.

“तुम चाहते क्या हो?” रोहित ने कहा.

“बहुत ही सिंपल सी गेम है. हाथ तुमने खोल ही दिए हैं रीमा के. अब इश्कि गर्दन काट कर उष डब्बे में रख दो जो की बिस्तर के पास रखा है.”

रोहित का चेहरा गुस्से से लाल हो गया, “अतचा क्यों ना तुम्हारी गर्दन काट कर रख दम इसे डब्बे में. अगर हिम्मत है तो आ जाओ यहा. खंदार में भी तुमने एक नपुंशककी तरह पीछे से वार किया. सच बता है ना तू नमार्द?”

“मिस्टर पांडे समझ सकता हूँ मैं. तुम्हारी गर्ल फ्रेंड को उठा लाया मैं. तुम गुस्से में हो. पर मैं एक आर्टिस्ट हूँ. शांति से काम कराता हूँ. वैसे तुम्हारे पास इश्का सर कातने के अलावा कोई चारा नही है. टीवी ऑन करके देखो समझ जाओगे….हाहहाहा”

रोहित ने टीवी ऑन किया तो उशके होश उस गये. “पिंकी!… कामीने तुझे मैं जींदा नही छोड़ूँगा.”

रोहित ने देखा की पिंकी एक बंद कमरे में खड़ी है. उशके साथ एक आदमी भी खड़ा है.

“तुम्हारी बहन के साथ जो आदमी बंद है उष कमरे में वो रेपिस्ट है. काई रेप कर चुका है. तुम तो इशे जानते ही होंगे. पुलिस इनस्पेक्टर हो तुम तो.”

रोहित उष आदमी को देखते ही पहचान गया. उशके उपर रेप के 2 केस चल रहे थे पर सज़ा नही मिल पाई थी.

“ये आदमी रेप करेगा तुम्हारी बहन का. अगर तुम चाहते हो की तुम्हारी बहन रेप से बच जाए तो तुरंत काट डालो गला रीमा का. अगर ऐसा नही किया तो 5 मिनिट के बाद ये आदमी टूट पड़ेगा तुम्हारी बहन पिंकी पर. चाय्स तुम्हारी है. तुम्हे बहन की इज़्ज़त प्यारी है या अपनी गर्ल फ्रेंड की जान.”

“कामीने इशे तू गेम कहता है. सेयेल तू इंसान है या जानवर. आजा यहा और आमने सामने बात कर. तेरा ये गेम खेलने का शॉंक ना भुला दिया तो मेरा नाम भी रोहित नही.”

“हाहहाहा…मज़ा आएगा. इंट्रेस्टिंग. एक मिनिट बर्बाद कर दिया तुमने. कुछ करो वरना बहन की लूट-ती हुई इज़्ज़त देखोगे.”

रोहित और रीमा दोनो ही गहरे शॉक में थे. दोनो कुछ भी नही बोल पाए. 5 मिनिट बीट गये तो उष आदमी ने पिंकी को दबोच लिया.

“कामीने छोड़ उशे….”रोहित छील्लाया.

मगर उष कमरे तक रोहित की आवाज़ कहा पहुँच सकती थी. साएको ने उष आदमी को कहा था, “अगर रेप नही कर पाए इसे लड़की का तो तुम्हारी लाश जाएगी यहा से बाहर.” और पिंकी को उसने कहा, “अगर तुमने रेप होने दिया तो तुम्हे काट डालूँगा.”

जैसा की उसने निशा के साथ किया था, वैसा ही वो पिंकी के साथ कर रहा था.

रीमा ने रोहित के कंधे पर हाथ रखा और बोली, “काट दो मेरा सर रोहित और रुकवा दो ये ब्लाटकार. ब्लाटकार मौत से भी ज़्यादा भयानक होता है.”

“चुप रहो तुम. ऐसा कुछ नही करूँगा मैं.” अचानक रोहित की नज़र रूम में लगे कॅमरा पर गयी. कॅमरा देवार पर बहुत उपर लगा हुवा था. रोहित ने टेबल से टीवी को उठाया और उसे नीचे रख दिया.
टेबल पर चढ़ कर उसने कॅमरा को उतार लिया और पाँव के नीचे रख कर कुचल दिया.

साएको ये देख कर तिलमिला उठा और तुरंत उष कमरे की तरफ बढ़ा जीशमे रोहित और रीमा थे. उशके एक हाथ में बहुत बड़ा चाकू था और एक हाथ में बंदूक थी.

रोहित ने कॅमरा तोड़ने के बाद कमरे में जल रहे बल्ब को भी फोड़ दिया. “रीमा तुम कपड़े पहन लो और इसे बेड के नीचे चुप जाओ. आता ही होगा वो साएको. पागल हो गया होगा वो ये देख कर की मैने कॅमरा तोड़ दिया.”

रीमा फ़ौरन कपड़े पहन कर बेड के नीचे चुप गयी. टीवी पर पिंकी उष आदमी से संघर्ष कर रही थी. रोहित ने टीवी भी बंद कर दिया.

कमरे के दरवाजे के बाहर आहत हुई तो रोहित तुरंत दरवाजे के साथ देवार से चिपक गया. अगर दरवाजा खुलता तो वो दरवाजे के पीछे रहता. कमरे में बिल्कुल अंधेरा हो गया.

दरवाजा खुला तो बाहर से कुछ रोशनी आई. बाहर भी एक बल्ब जल रहा था. साएको जैसे ही अंदर आया रोहित ने उसे दबोच लिया. मगर साएको ने तुरंत छुड़ा लुया खुद को और रोहित के पेट पर चाकू से वार किया. चाकू हल्का सा चियर कर निकल गया रोहित के पेट को.

साएको ने फिरे किया रोहित पर मगर रोहित ने नीचे झुक कर उष्की टाँग पकड़ कर कुछ इसे तरह से खींची की वो धदाम से गिर गया फार्स पर. बहुत तेज आवाज़ हुई उशके गिरने से. सर भी टकराया था साएको का फार्स से.

रीमा बेड के नीचे से निकल आई और रोहित उष्का हाथ पकड़ कर फ़ौरन कमरे से बाहर आ गया. साएको ने फिरे किया रोहित पर मगर गोली दरवाजे पर लगी. रोहित ने बाहर आते ही दरवाजा बंद कर दिया था. कुण्डी लगा दी बाहर से रोहित ने ताकि साएको निकल ना सके.

“रोहित कैसे निकलेंगे यहा से.”

“चिंता मत करो…पिंकी को ढूनडते हैं पहले”

वो दोनो बात कर ही रहे थे की उन्हे पिंकी की छींख शुनाई दी.

रोहित तुरंत दौड़ा उष कमरे की तरफ जीशमे की पिंकी बंद थी. क्योंकि उष कमरे से पिंकी के छीनखने छील्लाने की आवाज़ आ रही थी इश्लीए वो कमरा ढूँडने में ज़्यादा दिक्कत नही हुई.

वो कमरा बाहर से बंद था. टाला लगा था उष पर. चाबी कमरे के बाहर पड़े टेबल पर ही पड़ी थी. एक बड़ा सा चाकू भी पड़ा था टेबल पर. रोहित ने टाला खोला और चाकू उठा लिया.

रोहित अंदर आया तो देखा की वो आदमी पिंकी को मार रहा है, “खोल टांगे साली…खोल टांगे.”

रोहित ने एक हाथ से उष्की टाँग पकड़ी और खींच लिया उसे पिंकी के उपर से. फिर बिना सोचे समझे चाकू गाड़ दिया उशके शीने में.

“रेप करना तेरी हॉबी है क्यों … आज तेरा खेल ख़त्म” रोहित ने कहा.

“रोहित चलो जल्दी…यहा से निकलते हैं.” रीमा ने कहा.

पिंकी ने फ़ौरन अपने कपड़े पहन लिए.

तुम दोनो इशी कमरे में रूको. कुण्डी लगा लो अंदर से. मैं उष साएको का काम तमाम करके आता हूँ.

“रोहित उशके पास गुण है…प्लीज़ अभी निकलते हैं यहा से.”

“नही रीमा, आज उसे मार कर ही जवँगा यहा से. नही बचेगा अब वो”

रोहित हाथ में चाकू लेकर उष कमरे की तरफ बढ़ा जीशमे उसने साएको को बंद किया था. उसने दरवाजा खोला तो दंग रह गया. वाहा कोई नही था.

“ऐसा कैसे हो सकता है…कहा गया वो कमीना साएको. कमरा तो बाहर से बंद था.” रोहित ने वक्त गँवाना ठीक नही समझा. उशके साथ 2 जवान लड़किया थी.

उसने फ़ौरन उष कमरे का दरवाजा बंद किया और वापिस रीमा और पिंकी के पास आ गया. उसने दरवाजा खड़क्या, “जल्दी खोलो हमें निकलना होगा यहा से तुरंत.”

रीमा ने दरवाजा खोला और बोली, “क्या हुवा?”

“वो कमीना साएको कमरे में नही है…चलो जल्दी निकलते हैं यहा से.”

तभी उन्हे कदमो की आहत शुनाई दी.

“कौन है वाहा अपने हाथ उपर करो”

“अरे ये तो आस्प साहिबा की आवाज़ है” रोहित ने कहा.

“मेडम मैं हूँ रोहित….” रोहित छील्लाया.

शालिनी के साथ पूरी पुलिस घुस्स आई थी वाहा.

“तुम ठीक तो हो ना रोहित?” शालिनी ने पूछा.

“हन मैं ठीक हूँ पर वो साएको हाथ से निकल गया आज फिर … पुलिस को आस पास चारो तरफ फैला दीजिए…वो ज़रूर कही आस पास ही होगा.” रोहित ने कहा.

चौहान थोड़ा पीछे था इश्लीए अपनी बहन को नही पहचान पाया. जब वो वाहा पहुँचा तो हैरान रह गया. रीमा तुम.. …तुम यहा क्या कर रही हो .”

रीमा की तो साँस अटक गयी. कुछ भी नही बोल पाई.

“सिर रीमा को साएको उठा लाया था…इश्लीए ये यहा है.” रोहित ने बात को संभालने की कोशिस की.

“तुम कैसे जानते हो रीमा को .. … …”

“ट्रेन में मुलाक़ात हुई थी इनसे. आप घबरयें मत हम सिर्फ़ अच्छे दोस्त हैं.” रोहित ने मुस्कुराते हुवे कहा.

“ये वक्त है क्या ये सब बाते करने का.” शालिनी ने दोनो को दाँत दिया.

“सॉरी मेडम” रोहित ने कहा.

चौहान बस दाँत भींच कर रह गया. उसने रीमा को गुस्से से घूर कर देखा. रीमा ने दर के मारे नज़रे झुका ली.

“चौहान तुम एक पार्टी लेकर तुरंत जंगल को कवर करो. ये साएको यही कही होना चाहिए.”

“जे मेडम” चौहान ने कहा और रोहित को घूराता हुवा वाहा से चला गया. उष्की आँखो से आग बरस रही थी.

“मेडम मैने साएको को कमरे में बंद कर दिया था. मगर अब वो वाहा नही है. चलिए उशी कमरे को ठीक से देखते हैं.”

“हन बिल्कुल” शालिनी ने 2 कॉन्स्टेबल रीमा और पिंकी के साथ छोड़ दिए और रोहित के साथ उष कमरे की तरफ चल दी जीशमे की रोहित ने साएको को बंद किया था. साथ में 4 गन्मन भी थे.

वो दरवाजे की कुण्डी खोल कर अंदर घुस्से तो उन्हे कमरा खाली मिला.

“ऐसा कैसे हो सकता है, वो बंद कमरे से गायब कैसे हो गया. ज़रूर कोई ख़ुफ़िया रास्ता या शुरंग है यहा.” शालिनी ने कहा.

“सही कहा मेडम मुझे भी यही लगता है.” रोहित ने कहा.

“ये बेड एक तरफ सरकाओ” शालिनी ने कॉन्स्टेबल्स को कहा.

बेड एक तरफ सरक्या गया तो उन्हे एक ख़ुफ़िया रास्ता मिला. “हराव ये पठार” शालिनी ने कहा.

पठार हटाया गया तो उनका शक यकीन में बदल गया, “ये कोई शुरंग रगली है. तहकाना भी हो सकता है.”

“मेडम आप मुझे अपनी पिस्टल दीजिए. मैं जा कर देखता हूँ.”

शालिनी ने अपनी पिस्टल रोहित को दे दी और वो उतार गया उष छोटी सी खिड़की में एक टॉर्च ले कर. अंदर झाँक कर वो बोला, “मेडम ये तो बहुत बड़ी शुरंग लगती है.” रोहित ने कहा.

रोहित के पीछे पीछे काफ़ी पुलिस वाले अंदर घुस्स गये. शालिनी भी अंदर घुस्स गयी. वो आगे बढ़ते गये शुरंग में पर उन्हे साएको का कोई शुराग नही मिला. वो जंगल के बीचो-बीच घनी झाड़ियों में जाकर बाहर निकले.

“बहुत शातिर दीमग है ये साएको. क्या ठीकना बना रखा है. जंगल में ये घर कब और किशणे बनाए होंगे वो भी अंदरग्राउंड.”

“क्या जहा से हम आए है क्या वो जगह अंदरग्राउंड है.” रोहित ने कहा.

“हन…बहुत मुश्किल से मिली वो हमें. घनी झाड़ियों में एक छोटी सी गुफा में एक छोटा सा दरवाजा था जहा से हम सब वाहा पहुँचे.”

“मतलब की हमारा शक सही था. हम सही सोच रहे थे की जंगल में कुछ गड़बड़ है.”

“हन पर वो साएको तो निकल गया ना हाथ से फिर से.” शालिनी ने कहा.

“मुझसे ही ग़लती हो गयी. पर मैं क्या कराता. मेरा पूरा ध्यान पिंकी और रीमा को शूरक्षित रखने पर था.”

शालिनी ने गहरी साँस ली और बोली, “लीव इट.”

वाहा हर तरफ तलास की गयी मगर साएको का कुछ पता नही चला. रोहित और शालिनी शुरंग के ज़रिए वापिस उशी कमरे में पहुँच गये. उष जगह को अच्छे से देखा गया. पर वाहा ऐसा कोई शुराग नही मिला जीश से उन्हे साएको को ढूँडने में मदद मिले. उष जगह को शील बंद कर दिया गया. जंगल को पूरी तरह छाना गया पर वाहा भी साएको का कुछ पता नही चला.

“वो भाग गया होगा पुलिस को देख कर.” रोहित ने कहा.

“हन यही लगता है.” शालिनी ने कहा.
चौहान रीमा को लेकर घर पहुँचा. रात के 2 बाज गये थे. रास्ते भर उसने रीमा से कोई बात नही की.

घर आ कर उसने रीमा के मूह पर ज़ोर से थप्पड़ मारा, “बता क्या रिश्ता है तेरा उष रोहित पांडे से. कैसे जानता है वो तुझे.”

“हम अच्छे दोस्त हैं, भैया.” रीमा गिड़गिडाई.
एक खौफनाक रात – Hindi Thriller Story- 38
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Re: एक खौफनाक रात – Hindi Thriller Story

Unread post by Fuck_Me » 29 Sep 2015 02:48

“कब बने दोस्त तुम दोनो.”
“कुछ दिन पहले ट्रेन में मिला था वो मुझसे जब मैं बुवा के घर से आ रही थी.”

“अछा इतनी जल्दी वो फ्रेंड भी बन गया तेरा. इतनी आज़ादी दे न्यू एअर है मैने तुझे और तू फ़ायडा उठा रही है.”

रीमा कुछ नही बोल पाई.

“चल दफ़ा हो जा मेरी नज़रो के सामने से. जल्दी तेरी शादी करके तुझे यहा से दफ़ा कर दूँगा. अगले हफ्ते तुझे देखने आ रहे हैं लड़के वाले.”

“भैया अभी तो मैं पढ़ रही हूँ.”

“हन देख रहा हूँ की कितना पढ़ रही है. चल जा अपने कमरे में. एक ,दो महीने के अंदर ही शादी करवा दूँगा तुम्हारी.”

रीमा सुबक्ते हुवे अपने कमरे में आ गयी और गिर गयी बिस्तर पर. दिल घबरा रहा था उष्का शादी के नाम से.

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रोहित भी पिंकी के साथ लेकर घर की तरफ चल दिया.

रास्ते में पिंकी ने रोहित को बताया की कैसे साएको उसे जंगल में ले गया था.

“सुबह सुबह सड़क शुनशान थी. अचानक हमारी कार के आगे उसने अपनी कार लगा दी और हमें रुकने पर मजबूर कर दिया. नकाब पहन रखा था उसने. ड्राइवर को गोली मार दी उसने और मुझे कुछ सूँघा कर वाहा जंगल ले गया.”

“इशईलिए मैं तुझे यहा से दूर भेज रहा था. कोई बात नही जो हुवा शो हुवा. मैं कल खुद छोड़ कर आऊगा देल्ही. अब अकेला नही भेजूँगा तुझे. ” रोहित ने कहा.

अगले दिन सुबह 8 बजे रोहित पिंकी को लेकर देल्ही चल दिया. आने, जाने की टॅक्सी बुक कर ली थी उसने.

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प़ड़्‍मिनी के चाचा चाची सुबह सिवियर ही निकल दिए देल्ही के लिए. प़ड़्‍मिनी के चाचा का देल्ही में किड्नी का ऑपरेशन होना था जीशके लिए उन्हे वाहा पहुँचना ज़रूरी था. हेमंत को भी उनके साथ ही जाना था. करिटिकल सिचुयेशन थी, ऑपरेशन में डेले नही कर सकते थे. वो बोल रहे थे प़ड़्‍मिनी को भी साथ चलने के लिए और उनके साथ ही रहने के लिए. मगर उसने माना कर दिया, “मैं इसे घर को छोड़ कर नही जवँगी. मम्मी पापा की यादें हैं यहा. और वैसे भी भागने से फ़ायडा क्या है. मौत अगर लिखी है तो कही भी आ सकती है.”

सुबह 8 बजे निकले थे वो लोग और प़ड़्‍मिनी उन्हे सी ऑफ करने बाहर तक आई थी. उन्हे सी ऑफ करने के बाद जैसे ही प़ड़्‍मिनी वापिस मूडी घर में जाने के लिए राजू ने प़ड़्‍मिनी को आवाज़ दी, “प़ड़्‍मिनी जी!”

प़ड़्‍मिनी रुक गयी और पीछे मूड कर देखा. राजू उष्की तरफ बढ़ रहा था. राजू उशके पास पहुँच कर बोला, “कैसी हैं आप अब?”

“जींदा हूँ”

“समझ नही आता की क्या करूँ आपके लिए.”

“तुम्हे कुछ करने की ज़रूरात नही है.” प़ड़्‍मिनी ने कहा और अपने घर में घुस्स कर कुण्डी लगा ली और दरवाजे पर खड़ी हो कर सुबकने लगी, “तुमने कौन सा कसर छोड़ी है मुझे परेशान करने की.”

राजू खड़ा रहा चुपचाप. कर भी क्या सकता था. “मैं भी पागल हूँ. जब पता है की वो मेरी बात से परेशान ही होती हैं फिर क्यों…और परेशान कराता हूँ उन्हे.” राजू वापिस जीप में आकर बैठ गया कुपचाप.

………………………………………………………………………………….

सुबह 9 बजे ही तैयार हो गया मोहित आज. पूजा के साथ घूमने जो जा रहा था वो.

“कहा मिलना है, इसे बड़े में तो बात ही नही हुई पूजा से. सीधा घर चला ज़ाऊ क्या उसे लेने.” मोहित ने सोचा.

“नही..नही..कही नगमा कोई पंगा ना कर दे. शायद पूजा वही बस स्टॉप पर ही मिलेगी.”

जैसा की मोहित ने सोचा था, पूजा उसे बस स्टॉप पर ही मिली.

मोहित को बाएक पर आते देख उशके होंटो पर मुश्कान बिखर गयी. पर अगले ही पल वो उदास भी हो गयी.

मोहित ने उशकेव सामने बाएक रोकी और बोला, “क्या हुवा पहले मुश्कुराइ और फिर चेहरा लटका लिया.कोई प्राब्लम है क्या पूजा.”

“हन वो पिता जी की तबीयत खराब है कल शाम से. दीदी अकेली परेशान हो रही है. ऐसे में घूमने कैसे ज़ाऊ तुम्हारे साथ.”

“ओह…इसमे परेशान होने की कौन सी बात है पूजा. घूमने फिर कभी चलेंगे. तुम घर जाओ और पिता जी की सेवा करो.”

“कॉलेज में एक इंपॉर्टेंट लेक्चर है वो अटेंड करके आ जवँगी.”

“गुड, आओ बैठ जाओ, छोड़ देता हूँ तुम्हे कॉलेज मैं.” मोहित ने कहा.

“नही मैं चली जवँगी…तुम ड्यूटी के लिए लाते हो जाओगे.”

“हो जाने दो लाते. तुम्हे कॉलेज छोड़े बिना कही नही जवँगा. बैठ जाओ प्लीज़ और आज फिर अपना सर रख लेना मेरे कंधे पर. बहुत अतचा लगा था कल जब तुमने सर रखा था मेरे कंधे पर. बहुत रोमॅंटिक फील हो रहा था मुझे.”

“अतचा…वो तो यू ही रख दिया था मैने, सर में दर्द हो रहा था कल.”

“अतचा बैठो तो”

पूजा बैठ गयी और जैसे ही मोहित बाएक ले कर आगे बढ़ा पूजा ने सर टीका दिया उशके कंधे पर.

“सर में दर्द हो रहा है ?” मोहित ने पूछा.

“हन, तुम्हे कैसे पता.”

“क्योंकि जैसा कल फील हो रहा था मुझे वैसा ही आज भी फील हो रहा है. हटाना मत सर अपना कॉलेज तक”

“मोहित, तुम्हे बुरा तो नही लगा ना की मैं आज भी नही चल रही तुम्हारे साथ.”

“पागल हो क्या बुरा क्यों लगेगा. वैसे मेरा मन भी कल से खराब है. कल शंसान गया था प़ड़्‍मिनी के पेरेंट्स के अंतिम संस्कार पर. कल से मन बहुत खराब हो रहा है. बहुत बुरी तरह से कटाल किया साएको ने उनका.”

“आख़िर ये साएको पकड़ा क्यों नही जा रहा मोहित.”

“बहुत चालाक है ये साएको पूजा. मगर पकड़ा जाएगा एक ना एक दिन वो. कब तक बचेगा. ”

“हन वो तो है.

बातो बातो में कॉलेज आ गया. मोहित ने बाएक रोक दी गाते के बाहर और पूजा उतार गयी बाएक से.

“पूजा हमेशा ख्याल रखना अपना. शुन्सान जगह पर कभी मत जाना. हमेशा ग्रूप में रहना. मेरे लिए अपना ख्याल रखना.”

“तुम्हारे लिए क्यों.”

“क्योंकि मेरी जींदगी हो तुम.”

“हटो जाओ तुम.” पूजा शर्मा गयी.

“अरे सच कह रहा हूँ. तुम सच में मेरी जींदगी हो. तुम्हारे बिना नही जी सकता मैं.”

“अतचा…जाओ लाते हो जाओगे. मेरे भी लेक्चर का टाइम होने वाला है.”

“ओह हाँ तुम निकलो. बाइ. टके केर.”

पूजा कॉलेज के अंदर चली गयी और मोहित अपने ऑफीस की तरफ चल दिया.
जब वो ऑफीस पहुँचा तो उशके कमरे के बाहर एक खूबशुरआत लेडी बैठी थी कुर्सी पर.

“आप का परिचाय.”

“मेरा नाम दीपिका है. मुझे आपके बॉस ने आपसे मिलने को कहा है. मैं गौरव मेहरा की बीवी हूँ.”

“ओह हाँ याद आया. प्लीज़ कम इन.” मोहित ने कहा.

मोहित कमरे में घुस्स गया. पीछे पीछे दीपिका भी आ गयी.

मोहित के बैठते ही वो उशके सामने बैठ गयी. दीपिका ने जीन्स और टॉप पहना हुवा था. टॉप कुछ इसे तरह का था की उशके बूब्स को वो बहुत अतचे से बाहर की हवा दे रहा था . ना चाहते हुवे भी मोहित की निगाह चली गयी उशके बूब्स पर. बस निपल्स छुपे हुवे थे अंदर वरना तो सब कुछ बाहर ही था .

“ठरकी लगती है ये एक नंबर की. जानबूझ कर दीखा रही है अपना समान. सुबह सुबह इशे ही आना था ऑफीस.”

“आपके बॉस ने आपको बता ही दिया होगा सब कुछ.” दीपिका ने कहा.

“जी हाँ बता दिया है. तो आपको लगता है की आपके पाती के किशी लड़की के साथ नज़ायज़ संबंध हैं और आपको सबूत चाहिए ताकि आप तलाक़ के लिए कोर्ट में जा सकें. इस तट रिघ्त.”

“एस आब्सोल्यूट्ली.”

“ठीक है आज से ही काम शुरू हो जाएगा.”

“टोटल कितनी पेमेंट करनी होगी मुझे.”

“उशके बड़े में आप बॉस से बात कर लीजिए. मैं वो मॅटर्स हॅंडल नही कराता.” मोहित ने कहा.

“थॅंक यू वेरी मच. मुझे जल्द से जल्द कुछ सबूत चाहिए. मैं उष वहासी के साथ नही रह सकती. आप मेरे कपड़े देख रहे हैं. बहुत रिवीलिंग हैं ना.”

मोहित के समझ में नही आया की वो क्या कहना चाहती है. “क्या मतलब ..”

“मेरा पाती मुझे रिवीलिंग कपड़े पहनाता है. उसे अछा लगता है जब दुनिया मुझे ऐसे कपड़ो में देखती है. ये टॉप जो आप देख रहे हैं कल ही लाकर दिया उन्होने. उनकी चाय्स के अनुसार कपड़े पहन-ने होते हैं मुझे.”

“ओह..वेरी बाद.”

“आपको ये सब बताया क्योंकि आप मेरी चाहती को देख रहे थे और शायद मुझे ग़लत समझ रहे थे. मेरे पास कोई भी चारा नही होता है ये कपड़े पहन-ने के शिवा. मुझे उनसे तलाक़ चाहिए और बिना सबूत के तलाक़ मिलेगा नही. उनके काई औरातो से संबंध हैं लेकिन अधिकतर वो कामिनी के साथ रहते हैं. आप इन्वेस्टिगेशन करेंगे तो सब जान जाएँगे. मैं चलती हूँ.” दीपिका उठ कर चली गयी.

मोहित तो देखता ही रह गया उशे. बहुत ही अजीब सा कुछ कहा था उसने. “क्या ऐसा हो सकता है शायद हो भी सकता है. एक से बढ़कर एक नमूने हैं दुनिया में.”

मोहित अपने सीकरेट इंत्रुएमेंट्स लेकर निकल पड़ा. एक तो बड़ा कॅमरा था उशके पास जो की विज़िबल था. एक सीकरेट कॅमरा उष्की पेन में भी था जो की किशी को दीखता नही था .

मोहित ने इंक्वाइरी की तो पता चला की दीपिका सही कह रही थी. गौरव मेहरा आमिर था और खूब पैसे वाला था. बहुत सारे शॉंक पाल रखे थे उसने. उष्का ज़्यादा तार कामिनी से ही मिलना जुलना रहता था. मोहित ने कामिनी का अड्रेस पता किया और पहुँच गया उशके घर. वो एक बड़े से फ्लॅट में अकेली रहती थी. फ्लॅट उसे गौरव मेहरा ने ही लेकर दिया था. मोहित उशके घर पहुँचा. दरवाजे पर कान लगा कर देखा तो पाया की अंदर से कुछ आवाज़े आ रही हैं. आवाज़े कुछ इसे तरह की थी जीश तरह की काम-करीड़ा के वक्त निकलती हैं

लॉक खोलने में तो मोहित माहिर था ही. खोल कर घुस्स गया चुपचाप अंदर.

“आअहह चूस ये लंड. अतचे से चूस.”

मोहित उष बेडरूम की तरफ बढ़ा जहा से आवाज़ आ रही थी. कमरे का दरवाजा हल्का सा खुला था. क्योंकि मैं दरवाजा बंद था इश्लीए बेडरूम का दरवाजा बंद करना भूल गये थे शायद वो लोग.

मोहित ने झाँक कर देखा तो दंग रह गया. अंदर कामिनी के साथ गौरव मेहरा नही बल्कि उष्का छोटा भाई संजीव मेहरा था. दीपिका मोहित को परिवार के लोगो की फोटो दे गयी थी इश्लीए उसने संजीव को पहचान लिया था.

“भैया की रखैल को छोड़ने का मज़ा ही कुछ और है.” संजीव ने कहा.

मोहित वाहा से जाने ही वाला था की उसे कुछ हलचल शुनाई दी अपने पीछे. उसने मूड कर देखा तो पाया की एक लड़की बिल्कुल नंगी उष्की तरफ बढ़ रही है.

उसने इशारो में पूछा, “कौन हो तुम.”

मोहित थोड़ा घबरा गया फिर उष लड़की के पास आया और बोला, “कामिनी जी से मिलने आया था पर वो अभी बिज़ी है. बाद में आऊगा.”

“मैं तो बिज़ी नही हूँ. मुझे बता दीजिए.”

“आप कौन हैं.”

“मेरा नाम कुमकुम है.” उष लड़की ने कहा और मोहित का लिंग पकड़ लिया.

“देखिए मैं इसे काम के लिए नही आया था.”

“कोई बात नही आ गये हैं तो ये काम भी हो जाए.”

“जी नही माफ़ कीजिए.” मोहित उसे झटका दे कर वाहा से बाहर आ गया.

“अफ क्या मुसीबत है. इन्वेस्टिगेशन करनी कितनी मुस्किल होती है .” मोहित वाहा से झटपट निकल लिया.

कुमकुम उष बेडरूम में घुस्स गयी जिसमे कामिनी और कुमकुम थे.

“कुमकुम तू कहा घूम रही है. चल कामिनी के साथ मिल कर तू भी शककर.”

“तुम्हारे भैया को पता चल गया ना तो हमारा खून शककर लेंगे वो.” कुमकुम ने मुश्कूराते हुवे कहा.

“भैया तो अपनी दुनिया में खोए रहते हैं आजकल. उन्हे कुछ पता नही चलेगा.”

कुमकुम पास आ गयी और कामिनी के पास बैठ कर वो संजीव की बॉल्स को सक करने लगी. कामिनी उशके लिंग को चूस रही थी और कुमकुम उष्की बॉल्स को.

“आअहह गुड डबल धमाका” संजीव ने कहा

कुछ देर तक वो यू ही शककरते रहे.

“पहले कौन डलवाएगा.” संजीव ने पूछा.

“हम दोनो तैयार हैं. तुम ही तैय करो किशके अंदर डालना है.” कामिनी ने हंसते हुवे कहा.

संजीव ने कामिनी को बिस्तर पर पटका और चढ़ गया उशके उपर. एक झटके में उसने पूरा लंड उष्की चुत में डाल दिया.

“आअहह” कामिनी कराह उठी.

“तुम भी पास में लाते जाओ. एक साथ दोनो की लूँगा” संजीव ने कहा.

कुमकुम लाते गयी कामिनी के बाजू में. कुछ देर संजीव कामिनी के अंदर धक्के मराता रहा. फिर उसने अचानक लंड निकाला बाहर और कुमकुम के उपर चढ़ गया और उष्की चुत में लंड घुस्सा दिया.

“आअहह एस…ऊओह संजीव.” कुमकुम कराह उठी.

संजीव का एक हाथ कामिनी के उनहारो को मसल रहा था और एक हाथ कुमकुम के उभारो को मसल रहा था. पर कुमकुम की चुत में लंड पूरी रफ़्तार से घूम रहा था.

कुछ देर कुमकुम की चुत का आनंद लेने के बाद संजीव वापिस कामिनी पर चढ़ गया और पूरी रफ़्तार से फक्किंग करने लगा. जल्दी ही वो ढेर हो गया कामिनी के उपर. कामिनी भी बह गयी उशके साथ ही.

“मेरा क्या होगा अब. तुम दोनो का तो ऑर्गॅज़म हो गया. मेरे ऑर्गॅज़म का क्या.”

“बस अभी थोड़ी देर में तैयार हो जवँगा.”

मोहित भाग कर अपनी बाएक स्टार्ट करने लगा तो उसने देखा की फ्लॅट के बाहर एक ब्लॅक स्कॉर्पियो आकर रुकी है. उसमे से गौरव मेहरा निकला और सीधा कामिनी के फ्लॅट की तरफ बढ़ा.

“कुछ गड़बड़ होने वाली है इसे फ्लॅट में आज.” मोहित ने मन ही मन सोचा.

गौरव मेहरा के पास मास्टर की थी फ्लॅट की. लॉक खोल कर सीधा बेडरूम में आ गया. जब वो वाहा पहुँचा तो संजीव के साथ कामिनी और कुमकुम आँखे मीचे पड़ी थी.

“बहुत बढ़िया.” गौरव मेहरा ने कहा.

“गौरव …” कामिनी और कुमकुम दोनो ने एक साथ कहा.

गौरव ने बंदूक तां दी कामिनी की तरफ.

“गौरव प्लीज़..मेरी बात……”

आगे कुछ नही बोल पाई कामिनी क्योंकि गोली उशके सर में लगी सीधी. गजब का निशाना था गौरव का.

“भैया प्लीज़…” संजीव गिड़गिदाया.

गौरव ने कामिनी को शूट करने के बाद कुमकुम पर बंदूक तां दी.

“नही गौरव मेरी बात….”

गोली उशके भी सर के आर-पार हो गयी.

“चल निकल यहा से वरना तुझे भी मार डालूँगा.” गौरव ने कहा.

संवीव ने फ़ौरन कपड़े पहने और चुपचाप वाहा से निकल गया. गौरव भी फ्लॅट को लॉक करके वाहा से निकल गया.

मोहित संजीव और गौरव के जाने के बाद चुपचाप फ्लॅट में घुस्सा. जब वो बेडरूम में पहुँचा तो दंग रह गया.

“ओह माई गोद… दोनो को मार दिया उसने. अपने भाई को क्यों नही मारा.” मोहित ने कहा.

मोहित ने ज़्यादा देर वाहा रुकना ठीक नही समझा और फ़ौरन वाहा से निकल गया. उसने ये बात फ़ौरन रोहित को फोन करके बताई.

“दोनो लड़कियों को गोली मार दी उसने. ब्लॅक स्कॉर्पियो भी है उशके पास.”

“ह्म मुझे पता है की ब्लॅक स्कॉर्पियो है उशके पास. मैं अभी देल्ही पहुँचा हूँ. अपनी बहन को यहा छोड़ने आया था. आ कर देखता हूँ की क्या माजरा है.”

रोहित देल्ही से लौट-ते ही उष फ्लॅट पर गया. मगर उसे वाहा कोई लाश नही मिली. मोहित भी उशके साथ ही था.

“सिर मैने अपनी आँखो से देखी थी दोनो लड़कियों की लाश”

“इश्का मतलब गायब कर दी उसने डेड बॉडीस. इसे घतना के बाद ये गौरव मेहरा प्राइम सस्पेक्ट बन गया है.”

“बिल्कुल सिर. और उशके पास ब्लॅक स्कॉर्पियो भी है.” मोहित ने रोहित को दीपिका की कही बाते भी बता दी.

“ये सब शन के तो ये गौरव मेहरा ही साएको लगता है.”
रोहित को कटाल का कोई नामो निशान तक नही मिला था उष फ्लॅट में.

“मोहित, तुम्हारे पास गौरव मेहरा और उशके भाई की फोटो है ना?”

“जी हाँ हैं.”

“एक-एक कॉपी मुझे दे दो. प़ड़्‍मिनी से सिंाकत करवा लेता हूँ. ये दोनो भाई किसी साएको से कम नही हैं.”

मोहित ने स्नॅप्स रोहित को दे दी.

“गौरव मेहरा से बाद में मिलूँगा पहले ये स्नॅप्स प़ड़्‍मिनी को दीखा कर आता हूँ.”

“आस यू विश” मोहित ने कहा.

रोहित वो स्नॅप्स ले कर सीधा प़ड़्‍मिनी के घर पहुँच गया. उसने वो स्नॅप्स राजू को थमा दी और बोला,”ये स्नॅप्स प़ड़्‍मिनी को दीखाओ और पूछो की क्या इनमे से कोई साएको है.”

“सिर वो अभी बहुत परेशान है. किशी से कोई भी बात नही करना चाहती वो.”

“मैं समझ रहा हूँ पर हम हाथ पर हाथ रख कर नही बैठ सकते. प़ड़्‍मिनी से रिकवेस्ट करो वो मन जाएगी. उसे बस ये स्नॅप्स देख कर हाँ या ना में ही तो जवाब देना है. जाओ ट्राइ करो जा कर.”

राजू स्नॅप्स ले कर घर के दरवाजे की तरफ बढ़ा. उष वक्त रात के 10 बाज रहे थे. राजू को दर लग रहा था दरवाजा खड़काते हुवे. मगर उसने खड़का ही दिया.

“क्या है अब?” प़ड़्‍मिनी ने पूछा

“रोहित सिर कुछ स्नॅप्स लाए हैं. देख लीजिए हो सकता है इनमे से कोई साएको हो.” राजू ने स्नॅप्स प़ड़्‍मिनी की तरफ बढ़ाते हुवे कहा.

प़ड़्‍मिनी ने स्नॅप्स पकड़ ली और गौर से देखने लगी. कुछ कन्फ्यूज़्ड सी हो गयी वो गौरव मेहरा की स्नॅप्स देखते हुवे. रोहित दूर से प़ड़्‍मिनी के रिक्षन को अब्ज़र्व कर रहा था. प़ड़्‍मिनी को कन्फ्यूज़्ड अवस्था में देख कर वो तुरंत प़ड़्‍मिनी के पास आया और बोला, क्या हुवा प़ड़्‍मिनी, क्या यही साएको है”

“मैं ठीक से कुछ नही कह सकती. मुझे लगता है अब मैं उष्का चेहरा भूल चुकी हूँ.”

“क्या … …ऐसा कैसे हो सकता है.”

“मुझे जो लग रहा है मैने बोल दिया. वैसे भी डारी हुई थी मैं उष वक्त. उष्का चेहरा मुझे हल्का हल्का याद रहा. मगर अब सब ढुंदला ढुंदला हो गया है.”

“ओह नो प़ड़्‍मिनी …अगर ऐसा है तो हमारा काम और भी मुश्किल हो जाएगा.” रोहित ने कहा.

“मेरा दीमग मेरे बस में नही है. सब खो गया है…बिखर गया है. अब इंतेज़ार है तो बस इसे बात का की वो साएको मुझे भी मार दे आकर टांकी मुझे इसे जींदगी से छुटकारा मिले.” ये कह कर दरवाजा पटक दिया उसने.

रोहित और राजू एक दूसरे को देखते रह गये.

“अब क्या होगा सिर”

“प़ड़्‍मिनी ट्राउमा में है. ऐसे में मेमोरी लॉस हो जाना स्वाभाविक है. वैसे भी एक झलक ही तो देखी थी उसने साएको की. कोई बात नही. अब कुछ और सोचना होगा.”

वो दोनो बाते कर ही रहे थे की एक कार रुकी घर के बाहर. उसमे से एक व्यक्ति निकला और घर की तरफ बढ़ा.

मगर गन्मन ने उसे पीछे ही रोक लिया. रोहित और राजू उशके पास आ गये. रोहित ने पूछा, “किश से मिलना है आपको.”

“मुझे प़ड़्‍मिनी से मिलना है.”

“क्यों मिलना है?”

“शी इस माई वाइफ. आपको बतने की ज़रूरात नही है की क्यों मिलना है.”

“क्या …” राजू और रोहित एक साथ बोले.

राजू और रोहित दोनो ही शॉक्ड हो गये प़ड़्‍मिनी के हज़्बंद को देख कर.
वो देखते रहे और वो घर की तरफ बढ़ गया.

“एक मिनिट…तुम्हारे पास क्या सबूत है की तुम प़ड़्‍मिनिन के पाती हो.” रोहित ने पूछा.

“प़ड़्‍मिनी बता देगी अभी. उष से मिल तो लेने दो.”

“ह्म ठीक है…आओ.” रोहित ने कहा.

सुरेश रोहित और राजू के साथ दरवाजे की तरफ बढ़ा.

रोहित ने बेल बजाई.

“अब क्या है. मुझे परेशान क्यों…..” प़ड़्‍मिनी बोलते बोलते रुक गयी.

“कैसी हो प़ड़्‍मिनी.” सुरेश ने कहा.

प़ड़्‍मिनी ने कोई जवाब नही दिया.

“प़ड़्‍मिनी क्या ये तुम्हारा पाती है.” रोहित ने प़ड़्‍मिनी से पूछा.

“पाती नही है…पाती था. चले जाओ यहा से. मुझे तुमसे कोई बात नही करनी है.” प़ड़्‍मिनी ने दरवाजा वापिस बंद कर दिया.

“प़ड़्‍मिनी रूको.” सुरेश छील्लाया और दरवाजा पीतने लगा.

“बहुत खूब. प़ड़्‍मिनी के पेरेंट्स के बाद अब सारी जायअंकल प़ड़्‍मिनी की है. सब कुछ तुम्हे मिल सकता है, है ना. वाह. हेमंत सही कहता था. तुम सच में राइडर हो. तुम्हारी हर बात में एक राइडर छुपा होता है.”

“बकवास मत करो…मैं अपनी पत्नी से प्यार कराता हूँ. हमारे बीच मतभेद हैं, पर हम वो मिल जुल कर सुलझा लेंगे.”

“सुलझा लेना मगर अभी यहा से दफ़ा हो जाओ. प़ड़्‍मिनी की सुरक्षा के लिए पुलिस लगी हुई है यहा. यहा कोई तमासा नही चाहता मैं. वो अभी तुमसे बात नही करना चाहती. बाद में ट्राइ करना मिस्टर राइडर.”

“मेरा नाम सुरेश है. मैं कोई राइडर नही हूँ .”

“ पता है मुझे. पर क़ानूनी भासा में आपने जो हरकत की यहा आकर उष से आपको राइडर ही कहा जाएगा. प़ड़्‍मिनी के प्राति अचानक ये प्यार एक राइडर लिए हुवे है. प़ड़्‍मिनी की दौलत मिल रही है आपको…इश् प्यार के नाटक के बदले…हर्ज़ ही क्या हैं क्यों ..”

“मैं तुम्हारी बकवास शन-ने नही आया हूँ यहा. मिल लूँगा मैं बाद में प़ड़्‍मिनी से. ये मेरे और उशके बीच की बात है तुम अपनी टाँग बीच में मत अदाओ.”

“सिर ठीक कह रहे हैं मिस्टर राइडर, चले जाओ यहा से वरना तुम्हे साएको समझ कर एनकाउंटर कर देंगे तुम्हारा.” राजू ने कहा.

“देख लूँगा तुम दोनो को मैं.” सुरेश पाँव पटक कर चला गया.

“राजू तुम यहा पूरा ध्यान रखना. जब तक साएको पकड़ा नही जाता हमें प़ड़्‍मिनी की सुरक्षा में कोई कमी नही रखनी.”

रोहित चल दिया वाहा से थाने की तरफ अपनी जीप ले कर.

“ये पिंकी का फोन क्यों नही मिल रहा.” रोहित ने कहा.

रोहित ने एक बार फिर से ट्राइ किया. इसे बार फोन मिल गया.

“हेलो पिंकी…कैसी हो तुम.”

“ठीक हूँ भैया.”

“देखो…देल्ही में माहॉल ठीक नही है आजकल. ज़्यादा इधर-उधर मत घूमना. घर पर ही रहना.”

“जी भैया मैं घर पर ही रहूंगी. आप अपना ख्याल रखना.”

पिंकी को फोन करने के बाद रोहित ने रीमा को फोन मिलाया.

“ही जानेमन कैसी हो. अब तुम्हारे भैया को पता चल गया है. अब कैसे रेल बनावँगा मैं तुम्हारी… .”

फोन के दूसरी तरफ रीमा नही चौहान था. ये शुंते ही पागल हो गया वो

“सेयेल कामीने…कुत्ते…रख फोन. आ रहा हूँ अभी थाने मैं. आज तुझे जींदा नही छोड़ूँगा. …”

रोहित के तो हाथ से फोन ही चुत गया. बात ही कुछ ऐसी थी

“अब थाने जाना ठीक नही होगा. प्राइवेट बाते शन ली कामीने ने. चल कर इसे गौरव मेहरा की खबर लेता हूँ.”

रोहित गौरव मेहरा के घर की तरफ चल दिया.

गौरव मेहरा के घर पहुँच कर उसने बेल बजाई.

एक नौकर ने दरवाजा खोला.

“एस?”

“गौरव मेहरा है घर पे.”

“जी हाँ हैं है.”

“बुलाओ उशे. कहो की इनस्पेक्टर रोहित आया है. कुछ पूचेटाछ करनी है उष से.” रोहित ने कहा.

“आपने अपायंटमेंट ली है क्या.”

“क्या बकवास कर रहे हो. मैं इनस्पेक्टर हूँ. उष से मिलने के लिए मुझे अपायंटमेंट की कोई ज़रूरात नही है. उष से कहो की चुपचाप आ जाए मुझसे मिलने वरना घसीट कर ले जवँगा उसे यहा से.”

नौकर चला गया वाहा से. कुछ देर बाद गौरव मेहरा आया. उशके चेहरे पर गुस्सा था.

“तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई बिना मेरी इज़ाज़त के यहा तक आने की.”

“ज़्यादा बकवास मत कर. ये बता की कामिनी और कुमकुम कहा हैं.”

“कौन कामिनी और कौन कुमकुम…मैं इन्हे नही जानता.”

“अतचा…जब थाने में ले जा कर गान्ड पे डंडे मारूँगा ना तो सब याद आ जाएगा तुझे.”
गौरव मेहरा ने तुरंत पिस्टल तां दी रोहित पर और फिरे किया उशके सर पर. लेकिन रोहित पहले से तैयार था इसे बात के लिए. झुक गया नीचे फ़ौरन और दबोच लिया गौरव मेहरा को और पिस्टल रख दी उशके सर पर.

“बाकी की बाते तो होती रहेंगी. फिलहाल तुझे पुलिस वाले पर गोली चलाने के जुर्म में गिरफ्तार कराता हूँ मैं.”

रोहित गौरव मेहरा को गिरफ्तार करके थाने ले आया.

“इनस्पेक्टर बहुत बड़ी भूल कर रहे हो तुम. तुम्हे बर्बाद कर दूँगा मैं.”

“अपनी चिंता कर तू, मेरी चिंता छोड़ दे. और हाँ तैयार करले अपनी गान्ड को. डंडा ले कर आ रहा हूँ मैं. मार-मार कर लाल कर दूँगा.”

“तुझे ऐसी मौत दूँगा की तू याद रखेगा.”

“याद तो तू रखेगा मुझे…चल अंदर.” रोहित ने गौरव मेहरा को सलाखों के पीछे ढकैयल दिया और टाला लगा दिया.

“20 मिनिट हैं तुम्हारे पास. याद कर लो की कामिनी और कुमकुम कौन हैं और उन्हे मार कर कहा गायब किया है तुमने. 20 मिनिट में याद नही कर पाए अगर तो फिर मुझे मत बोलना बाद में की क्यों डंडे मार रहे हो गान्ड पे.” रोहित ये बोल कर चला गया वाहा से.

गौरव मेहरा दाँत भींच कर रह गया.

रोहित अपने कॅबिन कें आ गया. जैसी ही वो कुर्सी पर बैठा भोलू भागता हुवा कॅबिन में आया.

“सिर अभी-अभी चौहान सिर आए थे. आपको पूछ रहे थे. बहुत गुस्से में लग रहे थे वो.”

“ह्म…अब तो नही हैं ना वो यहा.”

“नही तभी चले गये थे.”

“गुड…छोड़ो चौहान को चौहान को देख लेंगे बाद में. तुम फिलहाल अपने रेकॉर्ड्स में चेक करो. इसे गौरव मेहरा का ज़रूर कोई पुलिस रेकॉर्ड होगा.”

“जी सिर अभी चेक कराता हूँ.”

भोलू ये बोल कर वाहा से निकला ही था की एक लेडी कमरे में घुस्स गयी.
एक खौफनाक रात – Hindi Thriller Story- 39
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