कामुक संध्या long hindi font sex story

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Re: कामुक संध्या long hindi font sex story

Unread post by sexy » 21 Sep 2015 02:50

संध्या-क्या हुआ था किरण मुझे बताओ
किरण- राजू मुझे अभी भी ऐसा लगता जैसे वो रात मेरे साथ अभी कुच्छ दिन पहले ही गुज़री हो मैं अभी भी उस रात के बारे मे सोच के डर जाती हूँ. वो हादसा नही होता तो मेरी लाइफ ही अलग होती.
संध्या- बोल ना मेरी जान किरण क्या हुआ था उस डाके मे ऐसा जो तेरी लाइफ बदल गयी और क्या चेंज आए
किरण- उस रात हमारी हवेली को 20 डाकुओं ने घेर लिया और दनादन फाइरिंग करने लगे. हवेली मे मैं, मेरे हब्बी, मेरे ससुर , मेरी सास और मेरी ननद के अलावा 5-6 नौकर 4 नौकरानिया ही थी.
डाकुयों ने सभी मेल्स को एक रूम मे और सभी लॅडीस को एक रूम मे बंद कर दिया. सारे नौकर भी इसी तरह अलग अलग रूम मे बंद कर दिए गये. फिर मेरे ससुर से तिजोरी की चाबी माँगी गयी जो उन्होने देने से इनकार कर दिया. अब डाकुयों ने सभी मर्दो की पिटाई शुरू कर दी. बुरी तरह तीनो मर्दों को मारा पीटा गया. ससुर के हाथ पाँव तोड़ दिए देवर की कूल्हे की हड्डी और मेरे हब्बी के कमर के नीचे बहुत मारा. जब मेरे ससुर ने इतने पर भी चाबी नही दी तो उन्होने हम लोगो को रूम से निकाला और कामन रूम की तरफ ले गये और हमारे उपर पाश्विक अत्याचार की चेतावनी दी.
संध्या- हाए रे तो तेरे ससुर नही माने या टूट गये. आ रानी पहले मेरे को एक चुम्मा तो दे तेरी कहानी मे मस्त मज़ा है और तेरी जवानी मे उससे ज़्यादा नशा है.
किरण- आजा राजू मेरी चुचि चूस ले और मेरी पनियाई हुई चूत मे अपनी उंगलियाँ डाल
संध्या- उंगली क्यों मेरी जान जब इतना मोटा लौडा है मेरे पास तो क्यों ना उससे चोद दूं तेरी गीली चूत.
किरण- हाँ राजू आजा किरण की मस्त चूत मार यह कहानी तो तेरे झड़ने के बाद भी सुना दूँगी आजा मेरी चूत मार
संध्या- आओ किरण अपने राजू का मस्त लौडा सहलाओ इसका सूपड़ा हटा के इसको मस्त सहलाओ. मेरी जान तू बहुत मस्त है तेरा हब्बी तो तुझे उच्छल उच्छल के चोद्ता होगा है ना
किरण- राजू आजा तेरी किरण अब चुदासी हो चुकी है मेरे को चोद तुझे मैं वादा करती हूँ जल्दी ही संध्या की भी चूत दिलवा दूँगी. वो कुँवारी कच्ची कली है उसकी नथ उतारने मे तुझे मज़ा आ जाएगा.
संध्या- हाए किरण मत याद दिला संध्या की चूत की उसे चोद्ने का मन तो मेरे दिमाग़ मे 6 महीने से चल रहा है साली मेरे लौडे के नीचे आती नही सिर्फ़ चुचि को कपड़ों मे छुपाए रहती है मस्त ठोस चुचि है उसे तो कुतिया बनाके चोद्ना है साली की गान्ड भी मारूँगा चूत चुसूंगा और अपना गरम वीर्य पिलऊँगा संध्या नाम की कच्ची कली को
किरण- राजूऊऊऊ तूने इन सबसे मेरी चूत को बहुत गर्म कर दिया आजा मेरी भट्टी जैसी चूत मार आजा साले मुझे संध्या समझ के चोद दे देख तेरे सामने तेरी संध्या नंगी पड़ी है बिल्कुल मदरजात नंगी और गीली चूत के साथ चोद दे राजू अपनी जवान और चिकनी संध्या को चोद दे.
संध्या- हाँ रंडी बना दूँगा संध्या को साली गली के हर लौन्डे का लौडा लेगी तभी उसकी चूत मे शांति पड़ा करेगी देखना एक दिन वो अपने बाप से भी चुद जाएगी.
किरण- राजू मेरी गरम चूत मार इसमे उंगली डाल के ज़ोर से हिला देख तेरी संध्या और किरण दोनो लौडे की डेमांड कर रही है बता तू पहले किसे चोदेगा
संध्या – किरण को मेरी जान क्योंकि वो ही संध्या की गद्देदार चूत दिलवाएगी और मस्त मज़ा देगी अपनी गान्ड का
किरण- आजा राजू अपनी किरण पे चढ़ जा और उसे चोद के आआआआआआआआआआआआआआआआआआ आआअहहाआआआआआअहहाआआआआआ और डाल राजू अपने लौडे को और डाल
इधर संध्या ने किरण मे मोटी उंगली पेल के हिलना शुरू किया किरण को ऐसा लगा की कोई लौडा उसकी सेवा कर रहा है. वो गरमा के ससकरी मारने लगी और कमर हिलाने लगी.
किरण- हाँ राजू और डाल तेरा लौडा मेरे हब्बी से मोटा है मार साले किरण की गरम चट और मार
संध्या ने अपनी उंगली चोदने की स्पीड और बड़ा दी और उधर किरण ने अपनी कमर नचा नचा ने झड़ना शुरू कर दिया
संध्या ने झुक के किरण की चूत से मूह लगा दिया और किरण की चूत का मीठा मूत पीने लगी. किरण ने भी संध्या के मूह से अपनी चूत सताए रखी और सारा सरबत संध्या के मूह मे उडेल दिया. जब किरण की अपनी वासना का भूत कुच्छ कम हुआ तो उसने आगे बढ़ के संध्या के नरम उरोज मुट्ठी मे भीच लिए.
संध्या- हाए साली धीरे मसल पहले भी बोला था
किरण- तो मैने भी कहा था ना की कोई भी मर्द तुझे नंगी करेगा तो प्यार से नही मस्त ज़ोर लगा के इतने करारे माल को चोदेगा तू इसकी आदत डाल और बता डाकुओं की बात सुननी है या तेरी चूत का बुखार उतार दूं.
संध्या- पहले डाके वाली बात बताओ मेरी चूत का पानी तो फिर भी बह जाएगा

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Re: कामुक संध्या long hindi font sex story

Unread post by sexy » 21 Sep 2015 02:51

किरण- तो सुन उस डाके मे मुझे और तेरी बुआ रागिनी को कामन रूम की तरफ लाया गया. वहाँ तेरे डैड, दादा और चाचा पहले से ही पीट कर कुर्सी से बाँधे गये थे. डाकुओं के सरदार ने दादा जी से फिर पूछा की तिजोरी की चाबी दे दे नही तो आगे की उनकी कोई ज़िम्मेदारी नही. पर उन्होने बात नही मानी और कहा की जो मर्ज़ी वो किया जाए पर चाबी नही दी जाएगी क्योंकि उसमे गाव के किसानो की ज़मीन के कर्ज़े के कागज भी थे अगर वो लूट लिए जाते तो हम लोग एक रात मे ही आसमान से सड़क पर आ जाते. उपर से दादा जी ने सोचा की वो लोग झूठी धमकी दे रहे है शायद ज़्यादा कुच्छ ना करे और हम लोगो को ही लूटपाट के लौट जाएँगे. इधर डाकुओं के सरदार ने मुझे और तेरी बुआ रागिनी को कामन रूम से ले जा के मेरे बेड रूम मे भिजवा दिया और खुद भी वहाँ आ गया. अब हम दोनो समझ गयी की हमारी शामत आ गयी पर किस हद तक हम दोनो समझ नही पा रही थी. तेरी बुआ अभी कुँवारी और अनच्छुई थी 18 साल की ही तो थी और मैं नयी नवेली दुल्हन मेरी उमर भी 18 साल 6 माह ही थी. कहने का मतलब है एक नज़र मे हम दोनो जुड़वा लगती थी एज और लुक्स मे.
कई बार तेरे डैड इस बात को बोल चुके है की मेरा लुक तेरी बुआ सा है और उनको ऐसा लगता है वो अपनी सग़ी बहन की चूत मार रहे है. इस फॅंटेसी से उनके लंड मे मस्त तनाव आ जाता है और वो मुझे बहुत मस्ती के साथ चोद्ते है.
संध्या- तो डैड आपको रागिनी बनाके चोद्ते है.
किरण- हाँ और रागिनी यह जानती है वो इस बात से खुद भी एक्साइटेड है की उसका सगा भाई उसकी चूत का दीवाना बनके अपनी बीवी चोद्ता है.
संध्या- यह बात मानी कि हर कोई मर्द फॅंटेसी मे दूसरे माल पर हाथ साफ करता है पर क्या कोई औरत खुद दूसरी औरत या लड़की बनके अपने पति से चुद सकती है
किरण- नही ऐसा नही होता क्योंकि किसी भी औरत को अपना मर्द शेयर करना पड़े तो वो करेगी पर खुद दूसरी औरत या लड़की बनके अपने ही पति से नही चुदेगि.
संध्या- पर ऐसी एक औरत है मेरी निगाह मे
किरण- कौन है मुझे बताओ तुम किसकी जानती हो
संध्या ने नंगी किरण की चुची दबोच ली और बोली-
संध्या- वो तुम हो मोम
किरण- तुझे कैसे मालूम
संध्या- मैने कल दिन मे अपने कानो से सुना और फिर देखा भी है कि तुम डैड को स्वाती बनके मज़ा दे रही थी उनका लौडा चूस रही थी उनके लौडे से चुद भी रही थी और बार बार स्वाती की कच्ची चूत को डैड को परोस रही थी
किरण- इस बात को तूने किसी को बताया तो नही ना
संध्या- नही मोम पर इस बात का राज़ तो बताओ

किरण- यह बात उस डाके से ताल्लुक रखती है, उस डाके मे डाकुयों का सरदार मुझे और रागिनी को मेरे बेडरूम की ओर ले गया और वहाँ क्या हुआ तू इसे सरदार और मेरे बीच के वार्तालाप के रूप मे सुन
सरदार- ये लड़कियों तुम लोग कौन हो बताओ पहले
किरण- हम मे एक यहाँ की बहू है और दूसरी इस हवेली की बेटी
सरदार- वाह तब तो मज़ा आ गया आज तिजोरी की चाबी नही मिलेगी तो इस हवेली की बेटी की निजी तिजोरी खोल दूँगा हा हा हा
किरण- क्या बकवास कर रहे हो जानते हो क्या कह रहे हो
सरदार- मुझे सब पता है तू कौन है
किरण- मैं रागिनी हूँ इस हवेली की बेटी ऊवार यह किरण है हवेली की बहू
सरदार- ओहो तभी चिड़िया इतना उड़ रही है लगता है तेरे पर काटें पड़ेंगे (पास आके रागिनी बनी किरण की एक चुचि ज़ोर से हथेली मे दबोच लेता है) तेरे दोनो कबूतर बड़े मस्त है बता किसी शिकारी ने इनको मुठ्ठी मे क़ैद किया है इनको या मैं तेरा पहला शिकारी हूँ
किरण-(तिलमिलाके) छ्चोड़ मुझे हरामी मेरे डैड को पता लगेगा तो तेरी बोटी बोटी काट देंगे
सरदार- अभी बताता हूँ तुझे मुझसे बदजुबानी का क्या परिणाम होता है. तेरा बाप मुझे क्या बोलेगा साले की हड्डी पसली तोड़ दी है अभी एक गोली मारूँगा साला उपर पहुँच जाएगा हरामी बुढ्ढा
किरण ने रागिनी की ओर देखा जो हैरत मे भी थी की किरण ने उसका रूप क्यों बदला और सरदार की धमकी सुनके उसने किरण से याचना सी भी कि की वो सरदार को गुस्सा नही दिलाए. किरण ने तुरंत डिसीजन लिया की उसे क्या करना है.
किरण- अरे बाबा नही नही आप ऐसा नही करो आप जो बोलॉगे वो मैं करूँगी आप मेरे डैड को कुच्छ मत करिएगा प्लज़्ज़्ज़
सरदार- अब आई ना कुतिया लाइन पे चल जो मैं बोलता हूँ वो कर
किरण- ठीक है
सरदार- तू अपने कपड़े उतार के अपनी नंगी मस्त जवानी के दर्शन करा अपने चंदर को
किरण- चंदर
सरदार- हाँ मेरा नाम चंदर है और मैं अब तेरी नंगी कामुक जवानी को देखूँगा पहले यह बता कितने मर्द तुझे दबोच चुके है
किरण- कोई नही
सरदार- (आगे बढ़े उसकी चची पर झपट्टा मरता है और ज़ोर से मसल देता है) हाए रे मस्त उन्छुइ चुची है हाए मर गया आज तो इन नीम्बुओं को पूरा निचोड़ दूँगा. ऐसे नही छ्चोड़ूँगा तू तो चुद गई आज मेरी रागिनी. तेरी चूत अपने मूसल लंड से चोदुन्गा और तेरी भाभी तुझे खुद आगे बढ़ बढ़ के चुद्वायेगि. है ना
रागिनी- (हड़बड़ा के) हाँ हाँ हाँ
चंदर- तो रुकी क्यों है वहाँ पे साली इधर आ और इस हरमजादि रागिनी के कपड़े उतार
(रागिनी और किरण दोनो सलवार सूट मे थी और किरण ने कोई सुहाग निशानी नही पहनी थी इसलिए सरदार को धोका हो गया साथ ही साथ किरण को भी उससे झूठ बोलने का मौका मिला. पर रागिनी ज़रूर सोच रही थी की किरण ऐसा क्यों कर रही है उससे पूछेगी फिलहाल तो यह डाकू उन दोनो का पिछा छ्चोड़े. साथ ही साथ वो डर भी रही थी सरदार डाकू उसे हवेली की भाभी समझ के ज़्यादा यातना ना दे. खैर उसने सोचा जो होगा देखा जाएगा आख़िर वो इस नये हालत मे कुच्छ कर भी तो नही सकती थी.उसने आगे बढ़के किरण के जिस्म से उसका कुर्ता उतारना शुरू किया)
चंदर- ई हरामज़ादी ऐसे नही इस कुतिया के कपड़े फाड़ के उतार नही तो तेरे कपड़े फाड़ के नंगी कर दूँगा
(रागिनी से सहम के किरण के कुर्ते को फाड़ के उतारना शुरू किया. किरण का जवान जिस्म चंदर के आगे नुमाया होने लगा चंदर की आँखे किरण की जवानी फैल गयी)
चंदर- वववववववओूऊऊऊऊऊव्ववववववववववव यह कुतिया बड़ी करारी है इसे मेरे पास भेज साली के कबूतरो का नज़ारा पास से करूँगा
रागिनी- नही इसे छोड़ दो तुम चाहो तो मैं
चंदर- चुप साली रंडी खुद तो दिन रत चुद्ती है अपने ख़सम से और आज तेरी ननद का नंबर आया तो आज भी अपनी ही चूत सामने फैला रही रही है. भेज इस कॅली को मेरे पास
रागिनी- जाओ सरदार के पास जाओ रागिनी
किरण धीमे धीमे कदमो से आगे बढ़ी और सरदार के पास जाके खड़ी हो गयी.चंदर ने आगे हाथ बढ़ा के किरण की दोनो चुची अपने खुरदुरे हाथों मे दबोच ली. चुचियों पर हाथों का दबाव पड़ते ही किरण की चूत ने पानी छोड़ दिया और उसके मूह से सिसकी निकल पड़ी

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Unread post by sexy » 21 Sep 2015 02:51

चंदर- आजा साली कुतिया मेरा लोडा पैंट से बाहर निकाल और उसे सहला के मस्त कर तेरी भाभी की चूत मरने के लिए
किरण- राजा फिर मेरी चूत को क्या प्यासा छोड़ देगा
चंदर- नही मेरी जान तेरी चूत पर तो मैं अपनी सारी फौज छोडूंगा. मेरे सारे साथी तेरी चूत का रास्पान करेंगे और तुझे जी भर के चोदेंगे
रागिनी यह सुनके सिहर गयी की उसकी भाभी को 20 डाकू चोदेंगे और वो समझ गयी की किरण की चूत का बुरा हाल हो जाएगा पर अब कुछ नही हो सकता था दोनो इस खेल मे इतनी दूर तक आ गयी थी की अब सच्चाई पता लगती तो डाकू का सरदार उन दोनो की चूतों का भुर्ता बना देता, अपने साथियों के साथ उन दोनो की भयानक चुदाई करके.
चंदर- तू एक बात और जान ले मेरी रंडी
किरण- क्या बोलो ना मेरे मर्द राजा
चंदर- तेरी यह चुदाई बड़ी अनोखी और अजब होगी
किरण- कैसे भला
चंदर- तू देखती जा पहले बता तेरा भाई तेरी इस मादक चुदासी भाभी को कैसे चोदता है
किरण- हाए राजा एक रात मैं उन दोनो के बेडरूम के बाहर खड़ी थी और वो दोनो एक हफ्ते की जुदाई के बाद वासना का मिलन करने वाले थे मुझे पता था की आज इस हवेली की बहू की चूत हवेली का लंड चोड़ेगा ले तू उस मादक चुदाई को मेरे मूह से सुन
किशोर- हाए रानी बड़ी मस्त लग रही है
किरण- हाँ राजा आज दोपहर से चूत मे पानी भरा हुआ है और इतनी रात गये तेरा लंड लेने का मौका आया है
किशोर- क्या करूँ सब लोग बाहर बैठे टीवी देख रहे थे किसी को यह भी ध्यान नही की एक हफ्ते के तौर से लौटा हूँ मेरा लंड और तेरी चूत दोनो प्यासी होगी
किरण- तुनमे दोपहर मे फोन पर जब मेरी चूत चूमि थी तभी से इस साली मे पानी भरा है आओ इसे चूस और मस्त चुदाई करके इसका मान मर्दन कर दो
किशोर- ऐसे कैसे पहले मैं अपनी मादक किरण को पूरी तरह न्नगी करूँगा उसकी ठोस चुचियाँ मसलूँगा फिर उसकी चूत का नंबर आएगा वो भी तब जब वो मचल के मेरे मस्त ताने हुए लोडे को चुसेगी और उसका मीठा वीर्या पिएगी
किरण- आओ मेरे मर्द तेरे लोडे को चूस के तेरे लंड का अपनी चूत के द्वार पर स्वागत करूँगी
किशोर- किरण एक और मस्त कामुक इच्छा है जो तू पूरी कर दे
किरण- कौन सी
किशोर- आज तू अपनी गांड का स्वाद देदे
किरण- कोई बात नही मेरे राजा मेरी चूत चोदने के बाद तू मेरी गांड का द्वार अपने लंड से खोल लेना
किशोर- Thankyou किरण आओ मैं तुझे अपने लोडे की सैर करवाता हूँ
किरण- हाए रीईईईईई धीरे मस्लो मेरी चुचियों को
किशोर- साली सिसकार मार फोन पे तो ऐसे कर रही थी जैसे कोई तेरा यार तेरी चूत मार रह हो और मुझे अपनी आवाज़े सुना रही थी
किरण- वो तो मैं मज़ाक कर रही थी और तुझे पता है की इस हवेली मे कोई लोडा मुझे चोदने नही आ सकता है.
किशोर- वो तो मुझे पता है पर तू एक बात बता
किरण- क्या
किशोर- यहाँ हवेली की कौन सी नौकरानी तुझे पसंद आई
किरण- सभी ठीक है मेरी खूब सेवा करती है
किशोर- साली सेवा के लिए नही चूत मरवाने के लिए पुच्छ रहा हूँ कौन सी हरमज़ड़ी तुझे पसंद है बता उसे आज बुला लूँगा तेरी चूत मालिश को
किरण- हाए रे क्या ऐसा हो सकता है
किशोर- क्यों नही साली सभी इस हवेली की जिंदगी भर की गुलाम है तू बोल तो सही तेरे साथ साथ वो मेरे लोडे की भी सेवा ना करे तो मेरा नाम किशोर नही
किरण- वो है ना अपने नौकर सरवन की जोरू
किशोर- ओह वो ऋतु तू भी ना साली माल तो तगड़ा चुना तूने
किरण- क्या ऐसा हो पाएगा की ऋतु मेरी सेवा करे और हम दोनो को रति सुख प्रदान करे
किशोर- हाँ क्यों नही मेरी जान तू देखती जा
किरण- ऋतु किसी को बोल तो नही देगी अपने पति को या हमारे पिताजी को
किशोर- नही तू चिंता मत कर और आज तू ऋतु से रतिसुख की कल्पना को साकार होते देख देखना मैं भी क्या हाल करता हूँ साली ऋतु का ना न्नगी करके कुतिया की तरह उपभोग किया. साली को रंडी बना दूँगा रातों की रंडी. देखना दिन मे सरवन की बीवी और रात मे तेरी और मेरी पर्सनल दासी बनके रहेगी

किशोर ने अपनी जेब से मोबाइल निकाला और सरवन का नंबर डाइयल किया
किशोर- सरवन कहाँ है तू रे
सरवन- याहूं घर मे मलिक हुकुम करो क्या सेवा करूँ
किशोर- तेरी बीवी वो कहाँ है
सरवन- यहीं मेरे पास ही
किशोर- एक कम करो तुम दोनो तुरंत मेरे पास आओ और एक बात बतो, पिताजी या छ्होटे ने तो कोई आदेश तो नही दिया
सरवन- नही मलिक
किशोर- तो तुम दोनो तुरंत हमारे रूम पर आओ तुम्हारा इंतज़ार कर रहा हूँ मई और अपनी जोरू को साथ लेके आना छ्होटी मालकिन बुला रही है उसे.
सरवन- अभी हाज़िर हुआ मलिक
किशोर- देखा अभी आएगा सला अपनी करारी जोरू के साथ फिर हम दोनो उसकी बीवी का मज़ा लूटेंगे
किरण- क्या सच मे ऐसा होगा और सरवन होने देगा
किशोर- देखती जाओ जान सला खुद अपने हाथों से ऋतु की चूत हो चौड़ा करके मेरे लोडे के आयेज लाके ना बोले मलिक इसे चोद दो तो मेरा नाम बदल देना
किरण- वाउ क्या ऐसा होगा
किशोर- हाँ पर जो मैं बोलू वो करती जाना
तभी सरवन अपनी बीवी ऋतु के साथ रूम मे आता है
सरवन- मलिक आपने याद किया
किशोर- हाँ रे मुझे और मालकिन के शायर मे दर्द हो रहा है ज़रा हमारी मालिश कर्दे
सरवन – अभी लो मलिक मैं आपकी और यह ऋतु मालकिन की मालिश करके आप डोड़नो के शरीर को ताज़गी से भर देंगे
इतना बोलके सरवन ने ऋतु को देखा. उसने हामी मे सिर हिलाया. इधर किशोर और किरण दोनो कॉन्फोर्ट कपड़ो मे थे किरण ने निघट्य डाली हुई थी तो किशोर लूँगी मे था सरवन ने टेबल से तेल की शीशी उतही और ऋतु को पकड़ते हुए बोला
सरवन- ले ऋतु तू मालकिन की टाँगों की मालिश कर्दे और मैं मलिक के पैर अबता हूँ फिर मालिश करूँगा
किशोर- आओ दोनो लोग यहाँ बेड के उपर आके करो
सरवन और ऋतु बेड पर चाड जाते है और किशोर और किरण की मालिश का डुआर शुरू होता है ऋतु ने किरण की निघट्य घउटें तक उपर कर दी और तेल लगाने लगी और इधर किशोर ने भी लूँगी घुटने तक उठा दी दोनो थोड़ी देर तो मालिश करते रहे फिर किशोर बोल उठा
किशोर- सरवन आजा पूरे शरीर की मालिश कर दे देखक कई दिन से लौटा हूँ पूरा शरीर दर्द करता है यही हाल तेरी मालकिन का है
इतना कहके उसने अपनी लूँगी उतार दी उसके नीचे उसने पारदर्शी ब्रीफ पहना हुआ था उस ब्रीफ के अंदर उसके मान की भावना का उद्गार उसका लिंग अरधरप से कहदा हुआ था. इधर किरण ने भी किशोर की देखा देखी अपनी नाइट उतार दी वो सिर्फ़ पर्धारषी ब्रा और पनटी मे थी. दोनो नौकर और नौकरानी समझ गये उन्हे क्या करना है
सरवन- मलिक आआआप्प्प्प्प्प अगली मालिश मुझ से नही मेरी इस हरमिण जोरू ऋतु से कारवओ तो ज़्यादा आनंद आएगा साली मालिश ऐसी करती है की मलिक को नशा आ जाएगा क्योंकि यह हरमज़ड़ी मालिकों की सेवा बचपन से ही करती आ रही है इसकी नाथ बड़े मलिक ने ही उतरी है
किशोर – आआअजाआ ऋतु तू आके मेरी तेल मालिश कर और सरवन मालकिन की सेवा करेगा
इधर सरवन ने तेल मे हाथ डुबोय और किरण की जांघों पर हाथ फेरने लगा. किरण के शरीर मे झुरजुरी दौड़ गयी उसे एक कामुक अहसास होने लगा उसे ऐसा लगा की उसकी टाँगों पर साँप रेंग रहा हो और वो साँप उसकी गीली चूत की ऊवार बढ़ रहा हो. इधर किशोर के लिए ऋतु मुस्कुराती हुई बढ़ी और बोली
ऋतु- आओ मलिक मैं आपके मान की इच्छयों को चार चाँद लगा दूं आइए मलिक आप मालकिन को भोगने के लिए पूरी तरह से टायर हो जाइए
किशोर- आ ऋतु पहले मेरे बदन का दर्द दूर कर फिर मैं तेरी मालकिन को चोद के उसकी प्यास भुजौंगा
ऋतु- मलिक आइए मैं आपकी टाँगों की तेल मालिश कर देती हूँ
ऋतु ने तेल मे हाथ डुबो कर किशोर की झंघों पर फेरा तो उसका लंड फड़फदा उठा उसने आयेज बढ़ के ऋतु के मस्त चुचे पकड़ लिए.
किशोर- साली तू अभी जवान कुतिया है आज तेरी मालकिन के साथ तेरी चूत का भी रस पीना पड़ेगा
ऋतु- मलिक यह मेरा सायभाग्या होगा जो आप मुझ पर सवारी करेंगे. आप जैसा बोलेंगे मैं करती जाओंगी