सलीम जावेद की रंगीन दुनियाँ

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The Romantic
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Re: सलीम जावेद की रंगीन दुनियाँ

Unread post by The Romantic » 09 Nov 2014 16:08

रंगीन हवेली
भाग 2
ठकुराईन का इन्साफ़




दरअसल ठाकुर रोज रात मे हवेली की किसी एक औरत को चोदने के लिये बुलवाता था लेकिन सप्ताह मे एक बार अय्यासी का दरबार लगाता था। जब पहली बार इन तीनों को एक साथ बुलवाया था तो इनके आदमी फरियाद लेकर ठकुराईन के पास गये थे।ठकुराईन के पूछने पर बेला के पति बलदेव उर्फ‍ बल्लू ने डरते हुए कहा –
“मालकिन अभी तक तो ठाकुर साहब हम मे से किसी एक की औरत को अपनी सेवा मे बुलवाते थे हमे कोई एतराज नहीं क्योंकि हमारा तो काम ही आप सबकी सेवा करना है और हमारी औरतो की तरह हम सब भी दोस्त हैं सो अगर तीन मे से दो भी घर मे हो तो हमारा भी काम चल जाता था क्योंकि हम सब भी मर्द हैं हमें भी रात मे औरत की जरूरत पड़ती है।”
सुनकर ठकुराइन मुस्कुरायी उन्होंने एक भरपूर नज़र तीनो मर्दों पर डाली नीरा का पति नन्दू ठिगना पर मजबूत जिस्म का मालिक था शीला का पति धीरा लम्बा तगड़ा बाडीबिल्डर जैसा था बल्लू का कद बीच का बदन तगड़ा कसरती पर थोड़ा भारी था फिर ठकुराइन मुस्कुराते हुए बोली –
“ ठीक तुम लोग अभी काम से आये हो थके होगे नहाधो आओ तुम्हारा इन्साफ़ होगा।”
जब वे नहाधोकर आये तो देखा ठकुराइन के कमरे मे उनके पलंग से अलग एक बहुत बड़ा गददा बिछा है उसपर गाव तकिया लगाये ठकुराइन मुस्कुराते हुए अपनी पीठ के बल अधलेटी हैं उनके बदन पर कपड़ों के नामपर सिर्फ़ पेटीकोट ब्लाउज थे। जिसमें से उनका गदराया गुलाबी बदन जगह जगह से झॉक रहा था। उनके बड़े गले के लोकट ब्लाउज में से उनके बड़े बड़े उरोज फ़टे पड़ रहे थे इन तीनों को देखकर मुस्कुराते हुए बोली –
“आओ आओ बैठो बैठो। अब मुझे विस्तार से बताओ कि ठाकुर साहब के कमरे मे तुमने क्या देखा।”
तीनो ने एक दूसरे की तरफ़ देखा फिर नन्दू ने कहना शुरू किया –
“अब क्या बताये मालकिन मैने देखा ठाकुर साहब की नंगी गोद में नीरा पेटीकोट ऊपर किये अपने बड़े बड़े गुदाज नंगे चूतड़ों के बीच में उनके साढे सात इंची हलव्वी लण्ड को दबाये बैठी थी।”
ठकुराइन मुस्कुराते हुए बोली –
“अरे तेरा हिसाब साफ़ करना तो बहुत ही आसान है।”
यह कहकर उन्होंने खीचकर उसे बगल में बैठा लिया और झटके से उसकी धोती खीचकर निकाल दी फिर अपने दोनों हाथों से धीरे धीरे अपना पेटीकोट ऊपर उठाने लगी पहले उनकी पिण्डलियाँ फिर मोटी मोटी चिकनी गोरी गुलाबी जांघें बड़े बड़े गुलाबी भारी चूतड़ दिखे और फिर पावरोटी सी फूली दूधिया मलाई सी सफेद बिना बालों चूत देखकर तीनों दंग रह गये। अपना पूरा पेटीकोट ऊपर समेट कर नन्दू की नंगी गोद में बड़े बड़े गुलाबी भारी चूतड़ों को रखकर बैठ गयीं। फिर बोली –
“अब बताओ फिर क्या हुआ।”
ठकुराइन का यह मस्ताना रूप देखकर उनकी हिम्मत बढ़ी और धीरा बोला –
“हमने देखा ठाकुर साहब के एक तरफ़ शीला और दूसरी तरफ़ बेला बैठी थी । ठाकुर साहब के हाथ उनकी गरदनों के पीछे से होकर उनके ब्लाउज में घुसे हुए थे और उनके उरोजों से खेल रहे थे।”
ठकुराइन चहकी –
“अरे ये तो और भी आसान है आ जाओ दोनों फ़टाफ़ट।” इतना सुनना था कि दोनों ठकुराइन की तरफ झपटे। ठकुराइन के ब्लाउज में एक तरफ से धीरा ने हाथ डाला और दूसरी तरफ से बल्लू ने । ठकुराइन के ब्लाउज के बटन चुटपुटिया वाले थे कसा ब्लाउज दो दो हाथों का तनाव बरदास्त नहीं कर पाया चुटपुटिया वाले बटन एकदम से सारे के सारे खुल गये और उनके बड़े बड़े खरबूजों जैसे गुलाबी स्तन कबूतरों की तरह फ़डफ़ड़ा़कर बाहर आ गये। धीरा और बल्लू अपने दोनों हाथों से उनके एक एक विशाल स्तन को थाम कर उनके निप्पल को कभी चूसने लगते तो कभी अपने अंगूठो और अंगुलियो के बीच मसलने लगते। उधर नन्दू का लण्ड ठकुराइन के बड़े बड़े गुलाबी भारी चूतडों के बीच साँप की तरह लम्बा होकर उनकी गोरी पावरोटी सी फूली चूत तक फैल रहा था। वो ठकुराइन के गोरे गुलाबी गुदाज कंधों पर मुंह मार रहा था उनकी गोरी गदरायी कमर को सहलाते हुए उनके गुदगुदे चिकने पेट और नाभी को टटोल रहा था और उनकी गोल नाभी में उंगली डाल रहा था। ठकुराइन सिसकारी भरते हुए बोली –“इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स आहऔर बताओ आगे क्या हुआ।”
धीरा और बल्लू ठकुराइन के बड़े बड़े गुलाबी कबूतरों को सहलाते और अपने अंगूठो और अंगुलियो के बीच उनकी चोंच मसलते हुए बोले –
“पता नहीं मालकिन क्योंकि फिर हम चले आये आपके पास फ़रियाद लेकर।”
ठकुराइन ने चुटकी ली –
“ अभी तो कह रहे थे कि तुम भी मर्द हो क्या अन्दाज़ा नहीं लगा सकते।”
यह कहते हुए उन्होंने झटसे उनकी धोतियॉं खीचकर निकाल दी अब उनके नीचे के बदन बिलकुल नंगे थे ठकुराइन ने देखा कि उनके औजार बार बार हवा में ऊपर नीचे हो रहे हैं। ठकुराइन भी हवा में लहराते फौलादी लण्डों को देखकर मस्त हो रही थी। उन्होंने अपने दोनों हाथों में उनका एक एक लण्ड थाम लिया और सहलाने लगी। ठकुराइन के ऐसा करने से वे और भी जोश में आ गये और उनकी बड़ी बड़ी चूचियॉं को जोर जोर से दबाने और उनके निप्पल को कभी चूसने कभी चुभलाने लगे। तभी नन्दू ने ठकुराइन की गोरी पावरोटी सी फूली चूत को फैलाया और अपनी अंगुली उसमें डाल दी ठकुराइन के मुंह से एक सिसकारी सी निकली वो अपने होंठों को दांतों में दबाये थी। वह अपने आपको रोक नही पा रही थी। वह नन्दू को उत्साहित कर रही थी। नन्दू का लण्ड भी चूत के लिए तड़प रहा था। अचानक ठकुराइन उठ गयी और पलट कर नन्दू की तरफ घूम कर फिर से उसकी गोद में बैठ गयीं। ऐसा करने से उनकी चूचियॉं धीरा और बल्लू के हाथों से छूट गयी नन्दू ने उनके गदराये गोरे गुलाबी नंगे जिस्म को देखा धीरा और बल्लू ने चूचियों को दबादबाकर निपलों को मसल़मसल़कर और होंठों से चूसकर लाल कर दिया था। उनकी मोटी मोटी नर्म चिकनी गोरी गुलाबी जांघों भारी नितंबों के बीच मे उनकी गोरी पावरोटी सी फूली चूत का मुंह खुला था और उसके फौलादी लण्ड का सुपाड़ा चूत के मुंह की दोनों फूली फांको की तरफ़ मुंह उठाये था । नन्दू की उत्तेजना आपे से बाहर हो रही थी उसने झपट़कर दोनों हाथों मे बड़ी बड़ी चूचियों दबोच ली और उठकर उनपर मुंह मारने लगा । अब ठकुराइन ने नन्दू के लण्ड को पकड़कर सुपाड़ा चूत पर धरा और धीरे धीरे पूरा लण्ड चूत में धंसा लिया फिर बरदास्त करने की कोशिश में अपने होंठों को दांतों में दबाती हुयी पहले धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये जब मजा बढ़ा तो उन्होंने अपने दोनों हाथों में धीरा और बल्लू का एक एक लण्ड थाम लिया और वो सिसकारियॉं भरते हुए उछल उछलकर धक्के पे धक्का लगाने लगी उनके बड़े बड़े उभरे गुलाबी चूतड़ नन्दू के लण्ड और उसके आस पास टकराकर गुदगुदे गददे का मजा दे रहे थे उनकी गोरी गुलाबी बड़ी बड़ी उभरी चूचियां भी उछल रही थी जिन्हें नन्दू कभी मुंह से तो कभी दोनों हाथों से पकड़ने की कोशिश करता कभी पकड़ में आ जाते तो कभी उछल कूद में फिर से छूट जाते करीब आधे घंटे तक की उठापटक में नन्दू ने उनके गदराये गोरे गुलाबी नंगे उछलने जिस्म को दोनों हाथों मे दबोचने बड़ी बड़ी गुलाबी चूचियों पर झपटने सारे गदराये जिस्म की ऊचाइयों व गहराइयों पर जॅहा तॅहा मुंह मारने के बाद दोनों हाथों मे बड़ी बड़ी उभरी चूचियां पकड़कर एक साथ मुंह में दबा ली और उनके चूतड़ों को दबोचकर अपने लण्ड पर दबाते हुए चूत की जड़तक लण्ड धॉंसकर झड़ने लगा तभी ठकुराइन के मुँह से जोर से निकला –“उम्म्म्म्म्म्म्म्हहहहहहहहहहह
वो जोर से उछली और अपनी पावरोटी सी फूली चूत में जड़ तक नन्दू का लण्ड धॅंसा लिया और चूत को लण्ड पर बुरी तरह रगड़ते हुए वो भी झड़ने लगी।
धीरा व बल्लू के लण्ड अभी भी उन्होंने अपने हाथों में पकडे हुए थे जो बुरी तरह फनफना रहे थे। खासतौर से धीरा और उसका लण्ड बुरी तरह फनफना रहा था उसकी हालत बहुत खराब थी यह हालत देखकर ठकुराइन मुस्करायी –
“घबराओ नहीं मैं अभी आधी ही झड़ी हूँ और एक रात में मैं कम से कम दो राउण्ड तो चुदवाती ही हूँ।”
बल्लू ने धीरा और ठकुराइन की तरफ देखा और बोला,“तो फिर ठीक है मालकिन आप अभी आधे रास्ते पर हो सो इसे भी निपटा लो मैं इत्मिनान से दूसरे राउण्ड में चोदूँगा क्योकि आधे राउण्ड से मेरा काम नहीं चलता।”
ठकुराइन मुस्कराते हुए बोली “अच्छा ये बात है तो फिर तैयार रहना ।”
उन्होंने धीरा को इशारे से बुलाया धीरा उनके गदराये गोरे गुलाबी नंगे जिस्म और लाल पड़ गयी बड़ी बड़ी चूचियों को देख रहा था वह उनके निप्पल को अपने मुंह मे लेकर चुभलाने और अपनी जीभ से खेलने लगा। ठकुराइन ने अपनी नंगी नर्म चिकनी संगमरमरी जांघों को अलग किया उनके के बीच मे दबी अपनी गोरी पावरोटी सी फूली चूत का लाल मुंह अपने दोनो हाथों से खोल कर दिखाते हुए कहा आजा प्यारे धीरा चूत तैयार है धीरा ने चूत के मुंह की दोनों फूली फांको के ऊपर अपने फौलादी लण्ड का सुपाड़ा धरा और उसे चूत पर रगड़ने लगा। थोड़ी देर में ठकुराइन मारे उत्तेजना के आपे से बाहर हो गयीं और सिसकारियॉं भरने लगी और बोली अब जल्दी डाल। धीरा समझ गया उसने झपट़कर दोनों हाथों मे बड़ी बड़ी चूचियाँ दबोच उनके ऊपर झुककर गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रखकर लण्ड का सुपाड़ा चूत मे धकेला सुपाड़ा अन्दर जाते ह़ी उनके मुँह से निकला “ओहहहहहहहहहहह शाबाश धीरा सुपाड़ा तगड़ा है अब बाकी लण्ड भ़ी डाल कर दिखा।”
धीरा बड़ी बड़ी चूचियों को जोर जोर से दबाने गुलाबी होंठों को चूसने लगा। ठकुराइन की चूत एक लण्ड से चुदने के बाद भी बेहद गरम थी। धीरा को ऐसा लग रहा था जैसे लण्ड अन्दर खिचा जा रहा हो या चूत अपने मुंह की दोनों फूली फांको मे लण्ड दबाकर उसे अन्दर चूस रही हो। पूरा लण्ड अन्दर जाते ह़ी ठकुराइन के मुँह से निकला- “आहहहहहहहहहहहहहहह आह वाहहहह शाबाश लगा धक्का।”
धीरा ने थोड़ा सा लण्ड बाहर निकालकर वापस धक्का मारा दो तीन बाहर ह़ी धीरे धीरे ऐसा किया था कि ठकुराइन के मुँह से निकला- “अबे थोड़ा जोर जोर से। शाबाश लगा धक्के पे धक्का धक्के पे धक्का चोद ठकुराइन की चूत को उधर तेरी बीबी ठाकुर साहब के लण्ड से जम के मजे ले रही होगी। तू भी मजे ले उनकी बीबी की चूत चोद के। मेरी चूचियों और जिस्म का रस चूस और जोर जोर से चोद।”

धीरा मारे उत्तेजना के आपे से बाहर हो जोर जोर से धक्के पे धक्का लगाकर चोदने लगा उनके गदराये गोरे गुलाबी नंगे जिस्म को दोनों हाथों मे दबोचकर उनके ऊपर झुककर बड़ी बड़ी गुलाबी चूचियों के साथ खेलने और सारे गदराये जिस्म की ऊचाइयों व गहराइयों पर जॅहा तॅहा मुंह मारते हुए चोदने लगा हर धक्के पे उनके मुंह से आवाजें आ रही थी-
आह आहहहह उम्म्म आहहहहहहहहहहहहहहह उम्म्म्ह

उनकी संगमरमरी जांघें और भारी चूतड़ों को देख धीरा पागल हो रहा था ठकुराइन ने अपनी दोनों टांगे हवा मे फैला दी जिससे लण्ड उनकी चूत की जड़ तक धॉंसकर जा रहा था फिर उन्होंने दोनों टांगे उठाकर धीरा के कंध़ों पर रख दी अब हर धक्के पे उनकी चिकनी संगमरमरी जांघें और भारी चूतड़ धीरा की जांघों और लण्ड के आस पास टकराकर गुदगुदे गददे का मजा दे रहे थे जिससे फट फट की आवाज आ रही थी। लम्बे चौड़े धीरा ने दोनों हाथों में उनकी संगमरमरी जांघें और भारी चूतड़ों को दबोचकर उन्हें गोद में उठा लिया और खड़ा हो गया। उनके गुलाबी मांसल बाहों बड़ी बड़ी गुलाबी चूचियों पर जॅहा तॅहा कभी मुंह मारते कभी उनके निपलों को होंठों दांतों मे दबा चूसते हुए चोदने लगा ठकुराइन भी ऊपर से अपने गुदगुदे गददेदार चूतड़ उछाल उछाल कर गोरी पावरोटी सी फूली चूत मे जड़तक लण्ड धॅंसवाकर चुदवा रही थी। करीब आधे घंटे तक पागलों की तरह उनके गदराये गोरे गुलाबी नंगे जिस्म को दोनों हाथों मे दबोचकर उनके ऊपर झुककर बड़ी बड़ी गुलाबी चूचियों के साथ खेलते तो कभी दांतों मे दबा निप्पलो को तो कभी बारी बारी से होंठों में ले कर चुभलाते व चूसते हुए और सारे गदराये जिस्म की ऊचाइयों व गहराइयों पर संगमरमरी जांघ़ों और भारी चूतड़ों पर जहॉ तहॉं मुंह मारते हुए चोदने के बाद ऐसा लगा कि अचानक दोनो के जिस्म ऐठ रहे हों तभी धीरा ने ठकुराइन को नीचे गद्दे पर लिटा दिया और हुमच हुमचकर धक्के मारने लगा कि अचानक तभी ठकुराइन ने जोर से अपने चूतड़ों को उछाला और धीरा ने अगला धक्का मारा कि उनके जिस्मों से जैसे लावा फूट पडा़ ।
ठकुराइन के मुंह से जोर से निकला- उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्फ्फहहहहहहहहहहह ।
वो नीचे से अपनी कमर और चूतड़ों का दबाव डालकर अपनी चूत मे जड़ तक धीरा का लण्ड धॉंसकर झड़ रही थी और धीरा भी उनके गदराये जिस्म को बुरी तरह दबाते पीसते हुए दोनों हाथों में उनके चूतड़ों को दबोचकर अपने लण्ड पर दबाते हुए चूत की जड़तक लण्ड धॉंसकर झड़ रहा था। दोनों निढाल हो एक दूसरे के ऊपर पड़ गये।

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Re: सलीम जावेद की रंगीन दुनियाँ

Unread post by The Romantic » 09 Nov 2014 16:09


थोड़ी देर में ठकुराइन उठी और बोली हाय बल्लू मैं तो बहुत थक गयी हूँ अब मैं गरम पानी से स्नान करूंगी तभी थकान उतरेगी ।
बल्लू ने कहा ठीक है मालकिन चलिये मैं भी आपकी मदद करता हूँ ।
वो देख रहा था कि ठकुराइन का जिस्म डबल चुदाई की थकान से निढाल है। उसने उनकी दोनों बगलों में हाथ डाल सहारा देकर ठकुराइन को उठने में मदद की। बगलों में हाथ डालकर उठाने में ठकुराइन की बड़ी बड़ी चूचियां भी बल्लू के हाथों में आ गयी। वो उनकी तरफ़ देखने लगा। बल्लू को अपनी तरफ़ देखता पा कर ठकुराइन बोली, “क्या देख रहा है बल्लू।”
बल्लू ने जवाब दिया- “कुछ नहीं मालकिन देख रहा था कि सालों ने रगड़कर सारा कोमल बदन लाल कर दिया है।” ठकुराइन ने मुस्कराते हुए बल्लू के फ़नफ़नाते फौलादी लण्ड को थामकर सहलाते हुए जवाब दिया- “तू घबरा मत अभी ठकुराइन में बहुत दम है अभी गरम पानी से स्नान करने के बाद दूसरा राउण्ड पूरा का पूरा तेरा। अगर उसके बाद भी दम बचे तो सारी रात अपनी है।”
बल्लू मान गया कि दो जबरदस्त फौलादी लण्डों से चुदवाने के बाद भी ठकुराइन तीसरे से चुदवाने का दम रखती है और अपने ठाकुर साहब से किसी तरह कम नहीं है।
ठकुराइन आगे आगे और वो पीछे पीछे बाथरूम की तरफ़ जाने लगे। बल्लू बाथरूम की तरफ जाती ठकुराइन को देख रहा था। वो पूऱी तरह नंगी थी उसकी गोरी गुलाबी भरी हुई चिकनी पीठ बड़े बड़े गुलाबी चूतड़ चलने पर थिरक रहे थे। बाथरूम में पहुँचकर ठकुराइन टब का फव्वारा चलाने के लिए झुककर उसकी टोटी घुमाने लगी। झुकी हुयी ठकुराइन बड़े बड़े गुलाबी चूतड़ों के बीच में से गोरी पावरोटी सी फूली चूत दिखी जिसे वो चोदने वाला था। ठकुराइन टब में घुस गयी ओर बल्लू एक हाथ में फव्वारा लेकर दुसरे हाथ से ठकुराइन का संगमरमरी गदराया बदन मलमलकर नहलाने लगा। बल्लू के मर्दाने हाथ बड़े बड़े उरोजों पर फिसल रहे थे। मर्दाने हाथों के स्पर्श से ठकुराइन को हल्की मालिश का मजा आ रहा था और वो फिर से उत्तेजित होने लगी थी। थोड़ी देर में बल्लू ने देखा कि ठकुराइन के उभरे हुए बड़े बड़े खरबूजों जैसे गुलाबी स्तन और भी उभारदार व गोल हो गये। उनके निप्पल कठोर और बड़े बडे़ हो गये थे उसे मालुम था कि ऐसा तब होता है जब औरत बेहद उत्तेजित हो जाती है। वो देख रहा था कि पानी की बूंदे उनके नंगे गदराये गोरे गुलाबी जिस्म संगमरमरी बाहों बड़े बड़े उरोजों पर मोती के समान चमक रही थी। ये मोती उनक़ी बड़ी बड़ी चूचियों के निप्पलो से भी टपक रहे थे। जिन्हें बल्लू होंठों से पकड़कर चूसने लगा निप्पलो को बारी बारी से होंठों में ले कर चुभलाने चूसने लगा बल्लू के बल्लू के मरदाने हाथ उनकी मोटी मोटी चिकनी गुलाबी जांघों उनके बीच में उनकी गोरी पावरोटी सी फूली चूत से होते हुए भारी नितंबों सुन्दर टांगों पर फिसल रहे थे। बल्लू के होंठ ठकुराइन के बड़े बड़े उरोजों गदराये पेट गोल नाभी से फिसलकर पावरोटी सी फूली दूधिया मलाई सी सफेद बिना बालों वाली चूत जोकि धुलकर और भी कमसिन लगरही थी पर पहुंचे। बल्लू ने चूत होंठों में दबाकर चूसते हुए कहा- “हाय मालकिन मैनें कभी सोचा भी नहीं था कि चूत इतनी सुन्दर दूधिया मलाई सी सफेद बिना बालों वाली हो सकती है। आपकी इतनी सुन्दर चूत और बेला मेरी बीबी बता रही थी ठाकुर साहब का लण्ड भी जबरदस्त है फिर ठाकुर साहब क्यों हर रात दूसरी दूसरी औरतों को चोदते हैं।”
ठकुराइन ने बल्लू के होंठों में दबी चूत चुसवाते हुए सिसकी ली – “स्स्स्स्स्स्स्सी हाय बल्लू आखिर बिचारी दूसरी शानदार चूतों को भी तो ठाकुर साहब के जबरदस्त लण्ड का मजा मिलना चाहिये और उसी तरह तेरे जैसे जबरदस्त लण्डों को भी मेरी इस तेरे कहे मुताबिक दूधिया मलाई सी सफेद बिना बालों वाली चूत में हिस्सा मिलना चाहिये।”
यह कहकर ठकुराइन ने बल्लू का साढ़े सात इंच का फ़ौलादी लण्ड थाम लिया और बल्लू का मुंह अपनी चूत से हटा कर लण्ड का हथौड़े जैसा सुपाड़ा अपनी फूली चूत पर रगड़ने लगी बल्लू ने अपना एक पैर टब की दीवार पर जमाया और उस पर ठकुराइन ने अपनी संगमरमरी जांघ चढ़ायी अब लण्ड का सुपाड़ा ठीक चूत के मुंह पर था ठकुराइन ने लण्ड अपनी चूत पर लगाया बल्लू ने अपने दोनो हाथों की उंगलियां उनके भारी चूतड़ों पर जमा लण्ड उचकाया तो सट से पूरा लण्ड अन्दर चला गया। पूरा लण्ड अन्दर जाते ह़ी ठकुराइन ने सिसकारी भरी उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्मह । बल्लू ने अभी तीन चार धक्के ही मारे थे कि ठकुराइन बोल पड़ी- “उफ़ मुझे कमरे में ले चलो बल्लू राजा मैं तुमसे इतमिनान से चुदवाना चाहती हूँ।”
बल्लू बोला- “ठीक है मालकिन।”
उसने लण्ड चूत के अन्दर ही रहने दिया और ठकुराइन को वैसे ही गोद में उठा लिया। ठकुराइन ने अपनी दोनो टॉगें उसकी कमर से लपेट ली और अपनी संगमरमरी सुडोल मांसल बाहें गले में डाल दी। उनके बड़े बड़े खरबूजों जैसे गोल गोल गुलाबी स्तन बल्लू के गालों से टकरा रहे थे। बल्लू अपने दोनो हाथों की उंगलियां उनके भारी गुदाज चूतड़ों पर जमाये हुए उन्हें कमरे की तरफ़ ले चला । चलने से लगने वाले हिचकोलों से बल्लू का लण्ड ठकुराइन की चूत में थोड़ा अन्दर बाहर हो रहा था। कमरे में पहुँचकर उन्होंने देखा नन्दू और धीरा जमीन वाले से गद्दे से उठकर पलंग पर सो रहे हैं।
ठकुराइन को हॅंसी आगयी वो बोली-“ काफ़ी समझदार हैं साले हमारे चुदायी के खेल के लिए पूरा ही गद्दा खाली कर दिया।”
फिर वो हॅंसते हुए बल्लू की गोद से उतर गयी जिससे बल्लू का लण्ड ठकुराइन की चूत से झटके से निकल गया बल्लू के मुँह से “हाय” निकल गयी। उसने एक तौलिया बल्लू को दिया क्योंकि वो भी भीग गया था दूसरे से अपना बदन पोंछने लगी। बदन पोंछकर दोनों गद्दे पर आ गये। बल्लू का लण्ड मीनार की तरह खड़ा था। ठकुराइन और बल्लू ने एक दूसरे की तरफ करवट ली बल्लू ठकुराइन की बड़े बड़े उरोजों और निप्पलों को टटोलते हुए बोला “हाय मालकिन अब तो शुरू करें।”
ठकुराइन ने अपनी बाईं टांग बल्लू की जांघ के ऊपर चढ़ा दी बल्लू के लण्ड का सुपाड़ा ठकुराइन की संगमरमरी जांघों के बीच पावरोटी सी फूली चूत के मॅुह के ठीक सामने आ गया। दोनों पुराने खिलाड़ी थे ठकुराइन ने लण्ड हाथ से पकड़ कर सुपाड़ा ठिकाने से लगाया और पूछा क्या ऐसे डालकर चोद सकते हो। जवाब में बल्लू ने धक्का मारा। पूरा का पूरा लण्ड अन्दर चला गया ठकुराइन के मुँह से निकला –
ओहहहहहहहहहहह भई वाह।
बल्लू उनके निप्पल को अपने मुँह मे लेकर चुभलाते और अपनी जीभ से खेलते हुए धीरे धीरे कमर चला कर रगड़ते हुए चोदने लगा। बल्लू के दोनो हाथों की उंगलियॉं ठकुराइन की गुदाज़ पीठ और मोटी मोटी संगमरमरी चिकनी जांघों को सहला गद्देदार भारी नितंबों को दबा रही थी करीब आधे घंटे तक दोनो गद्दे भर में लोट ते हुए चुदायी करते रहे कभी ठकुराइन ऊपर तो कभी बल्लू ऊपर कि अचानक बल्लू ठकुराइन को ऊपर करके खुद नीचे हो गया दोनो की नजर मिली बल्लू ने कुछ इशारा किया तो ठकुराइन उठकर बैठ गयी। अब उनके गद्देदार भारी चूतड़ बल्लू की जांघों पर आ गये। बल्लू ने बड़ी बड़ी चूचियां थाम कर कमर उचकायी तो ठकुराइन अपने आपको उछलने से रोक नहीं पायी और उसकी कमर की ताकत का लोहा मान गयीं। ठकुराइन को उछालकर बल्लू ने अपनी कमर रोकली तो लण्ड बाहर आने लगा जैसे ही बल्लू ने महसूस किया कि सुपाड़ा बाहर निकलने वाला है उसने हाथों में थमी बड़ी बड़ी चूचियां नीचे खीच ली।ठकुराइन का जिस्म अपने वजन के साथ नीचे आकर गिरा पावरोटी सी फूली चूत में जड़ तक बल्लू का लण्ड धॅंस गया जांघें और भारी चूतड़ बल्लू की कमर जांघों और लण्ड के आस पास जोर से टकराये ठकुराइन जैसी जबरदस्त चुदक्कड़ औरत भी उफ़ कर गयी। लेकिन ठकुराइन को मजा भो बहुत आया वो बोली –
“हाय बल्लू फिर ऐसे ही कर।”
बस फिर क्या था बल्लू ने अपनी कमर के जोर से ठकुराइन की पावरोटी सी फूली चूत उछाल उछालकर अपने लण्ड पर पटक पटक कर चोदी।
बल्लू करीब आधे घंटे तक उनके गदराये गोरे गुलाबी नंगे उछलते जिस्म को दोनों हाथों मे दबोचता तो कभी बड़ी बड़ी गुलाबी चूचियों पर झपटता और सारे गदराये जिस्म की ऊचाइयों व गहराइयों पर जॅहा तॅहा मुंह मारता रहा। काफी उठापटक के बाद बल्लू ने दोनों हाथों मे बड़ी बड़ी उभरी चूचियां पकड़कर दोनो निपल एक साथ मुंह में दबा लिये फिर दोनों हाथों मे उनके चूतड़ों को दबोचकर अपने लण्ड पर दबाते हुए चूत की जड़तक लण्ड धॉंसकर झड़ने लगा तभी ठकुराइन के मुँह से जोर से निकला- उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्ह आहहहहह

और फिर जोर से उछलकर हुए अपनी पावरोटी सी फूली चूत में जड़ तक बल्लू का लण्ड धॉंसकर और उसे लण्ड पर बुरी तरह रगड़ते हुए वो भी झड़ने लगी । दोनों एक दूसरे की बाहों मे पडे हॉफ रहे थे एक दूसरे की बाहों में लिपटे लिपटे ही सो गये।

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Re: सलीम जावेद की रंगीन दुनियाँ

Unread post by The Romantic » 09 Nov 2014 16:11


दूसरे दिन जब सब सोकर उठे तो नन्दू धीरा और बल्लू जल्दी जल्दी कपडे़ पहनकर जाने लगे तभी ठकुराइन बोली- हवेली के सब लोगों को बता देना कि जिस किसी आदमी की औरत को ठाकुर साहब चुदायी के मजे लेने के लिए रात में बुलायेंगे। वो आदमी अगर चाहे तो उसी रात ठकुराइन से इंसाफ़ मांगने आ सकता है। ठकुराइन ऐसे ही सबको इंसाफ़ देगी।
यह सुनकर वे बोले- कोई बेवकूफ़ ही होगा जो आपका इंसाफ़ नही पसन्द करेगा और फिर हॅं‍सते हुए चले गये।
ठकुराइन जब उन्हें भेजकर उठी तो उनके बदन का जोड़ जोड़ चुदायी की कसरत के मारे दर्द कर रहा था। रोजमर्रा के काम खत्म करते करते दोपहर हो गयी। दोपहर के खाने के बाद ठकुराइन ने सोचा कि थोड़ा आराम करले क्योंकि बदन का जोड़ जोड़ टूट रहा था। लेटते ही आँख लग गयी। ठकुराइन करीब सात बजे तक सोती रहीं जब उठी तब भी बदन टूट रहा था। वो सोचने लगीं कि उनका ऐलान अबतक तो हवेली में फैल गया होगा और नामालूम आज ठाकुर का मन किस औरत पर आजाये और रात में उसे कैसे मुस्टंडे आदमी से निपटना पड़े। वे अभी सोच ही रही थी कि रामदास माली आ धमका। ठकुराइन ने उस लम्बे तगड़े बलिष्ठ रामदास माली की तरफ़ देखा और पूछा-
“क्या बात है रामदास।”
रामदास ने जवाब दिया- “आज तो हद ही हो गयी मालकिन ठाकुर साहब ने मेरी औरत फुलवा को अभी से बुलवा लिया कहा कि मालिश करवाना है और फुलवा मालिश बहुत अच्छा करती है आपका ऐलान नन्दू धीरा और बल्लू ने बताया सो मैं इधर चला आया।”
ठकुराइन ने एक जोरदार अंगड़ाई लेते हुए पूछा- “बदन तो मेरा भी बहुत टूट रहा है तूने अपनी बीबी से मालिश करना सीखा या नहीं।”
ठकुराइन की अंगड़ाई ने रामदास के होश उड़ा दिये। अंगड़ाई लेते समय उनकी कमर पतली व सीने के बड़े बड़े गोल उभारदार उरोज और भी गोल बड़े बड़े और भारी लगने लगे जैसेकि दो बड़े बड़े गोल खरबूजे या बेल हों। वो आवाक उन्हें देखता रह गया। ठकुराइन ने ये भांप लिया और मुस्कराते हुए बोली तूने जवाब नहीं दिया।
रामदास ने चौंककर हड़बड़ाते हुए जवाब दिया- “मम्मालकिन फुलवा ने मालिश करना मुझसे ही सीखा है।”
ठकुराइन चहकी- “अच्छा ये बात है तो आजा मैदान में ठाकुर तेरी बीबी से मालिश करवा रहा है तू उनकी बीबी की मालिश कर तेरा इंसाफ़ भी हो जाएगा और मेरे बदन का दर्द भी मिट जाएगा। ड्रेसिंग टेबिल पर तेल क्रीम व पाउडर रखे उन्हें उठा ला और अलमारी से एक बड़ा तौलिया निकाल के उधर कोने में पडे़ उस गद्दे पर बिछा दे।”
रामदास बोला बहुत अच्छा मालकिन।
रामदास ने वैसा ही किया। वो तो नहा धोकर तैयार होकर ही आया था क्योंकि नन्दू धीरा और बल्लू की बातों से उसे ऐसा ही होने की उम्मीद थी। ठकुराइन ने साड़ी उतार दी और खाली पेटीकोट ब्लाउज में आकर गद्दे पर बिछे तौलिये पर बैठ गयी और बोली पहले मेरी कमर की मालिश कर दे। रामदास सोचने लगा कहीं ये सचमुच ही मालिश कराके बिना चुदवाये टरका तो नहीं देगी उधर मेरी बीबी को तो ठाकुर बिना चोदे आने नहीं देगा। दोनों हथेलियों में तेल लेकर पीठ की ओर बैठ गया और गद्देदार चूतड़ों के ऊपर कमर पर दोनों हाथों से मालिश करते हाथों को आगे उनके मांसल गुदगुदे पेट पर फेरते हुए दाये हाथ की बीच की उंगली गोल गहरी नाभी में डाल दी। ये बरसों पुराना चुदक्कड़ो़ का इशारा था जिसका मतलब है मैं तेरी चूत चोदना चाहता हूँ चुदवाओगी या नहीं। ठकुराइन पुरानी चुदक्कड़ खिलाडि़न थी रामदास का इशारा समझ गयी उसने मुस्कुराकर रामदास की तरफ़ आँख का इशारा किया जिसका मतलब था कि वो चुदाई के मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार है। रामदास की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वो खुशी खुशी कमर की मालिश करने लगा वो बार बार ठकुराइन की कमर पर दोनों हाथों से मालिश करते हाथों को आगे उनके मांसल गुदगुदे पेट पर फेरते हुए पेटीकोट के नारे से टकरा देता चार छ बार ऐसा करने के बाद वो बोला- “मालकिन इस तरह बार बार हाथ नारे से टकरा जाते हैं ठीक से मालिश करते नहीं बनता अगर नारा खोल दें तो ठीक से मालिश कर पाऊँगा।”
ठकुराइन समझ गयी रामदास चूत सहलाना चाहता है उसे मालिश में बहुत मजा आ रहा था वो बोली- “तू ही खोल दे ना।”
रामदास ने नारा खोल दिया। अब उसके हाथ ठकुराइन की रेशमी पावरोटी सी फूली गुदगुदी चूत तक पहुंचने लगे मालिश के बहाने वो बीच बीच चूत को हाथ में पकड़कर दबा भी देता। पेटीकोट नीचे सरक गया था और ठकुराइन के उभरे हुए गद्देदार चूतड़ आधे नंगे हो गए थे। उन्हें भी रामदास बीच बीच में हाथों दबोच लेता था। थोड़ी देर में ठकुराइन के मुंह से सिसकारियॉं छूटने लगी वो अपने ब्लाउज के बटन खोलते हुए बोली अब थोड़ा पीठ पर मालिश कर रामदास। बटन खोल के वो पेट के बल लेट गयीं। लेटने में उनके उभरे हुए बड़े बड़े गुलाबी गद्देदार चूतड़ और भी नंगे हो गए।रामदास का लण्ड अकड़कर फेोलाद हो रहा था। वो उनका मतलब समा गया उसने ब्लाउज पीठ पर ऊपर सरका दिया फिर अपनी एकटांग उनके चूतड़ों के दूसरी तरफ़ ले जाकर उन्हें अपनी टांगों के बीच में कर लिया। अब वो घुटनों के बल होकर उनकी नंगी गदरायी हुयी गुलाबी नर्म चिकनी पीठ पर मालिश करने लगा। मालिश करते समय जब वो आगे पीछे होता तो उसका 7 फौलादी लण्ड जो कि अकड़कर धोती से बाहर आ गया था उनके उभरे हुए चूतड़ों की नाली से रगड़ जाता था। तभी ठकुराइन के मुंह से उत्तेजना भरी
ऊॅऊॅऊॅऊॅऊॅऊॅऊॅऊॅ की आवाज आने लगी।
थोड़ी देर में ठकुराइन पलटी और अपने बड़े बड़े दूध से सफेद उरोजों को सहलाते हुए बोली- “रामदास कल साले नन्दू धीरा और बल्लू ने दबादबाकर चूस चूस कर मेरी चूचियां सुजादी थी फिर सुबह से ब्रा ब्लाउज में कसे कसे इनकी हालत और भी खराब हो गयी है जरा पाउडर लगा कर थोड़ा सहलाओ तो कुछ आराम मिले।”
रामदास टांगें फैला कर बैठ गया और अपनी टांगों के बीच में जगह बना कर बोला मालकिन अगर आप यहॉं बीच में आकर बैठ जाये तो यह काम बढि़या और आसानी से हो सकता है। ठकुराइन ने उसके धोती में अकड रहे साढ़े 7’’ फौलादी लण्ड देखा और मुस्कुराकर उठीं और रामदास की टांगों के बीच में दोनो पैर एक ही तरफ करके बैठ गयीं ताकि वह उनके चूतड़ों के बीच की नाली में अपना लण्ड लगा कर ना रगड़ सके। रामदास उनकी चालाकी पर मुस्कुरा उठा। उसने हाथ में पाउडर लिया और ठकुराइन के आगे से खुले ब्लाउज में से झाँकती थिरकती बड़ी बड़ी चूचियों पर लगा कर सहलाने लगा। उत्तेजना से ठकुराइन की सॉसें तेज हो रही थी। थोड़ी देर में बोला मालकिन मेरा हाथ बार बार ब्लाउज से टकराता है और मैं पाउडर ठीक से नहीं लगा पा रहा हूँ अगर आप ब्लाउज उतार दें तो आसानी होगी पेटीकोट तो आप पहने ही हो। ठकुराइन ने चिकनी संगमरमरी बाहें ऊपर उठा दीं और रामदास ने ब्लाउज उतार दिया। अब ठकुराइन का ऊपर का गोरा गुलाबी गदराया बदन बिलकुल नंगा था जिसपर रामदास पाउडर छिड़क छिड़क के पाउडर लगाने के बहाने जम के सहला रहा था । ठकुराइन की सॉसें और तेज हो गयीं। रामदास फिर बोला- “मालकिन थोड़ा पास आ जायें तो आसानी हो।”
ठकुराइन रामदास की तरफ़ खिसकी तो पेटीकोट का नारा खुला होने से वो उनके चूतड़ों से और नीचे उतर गया। ऐसे ही बार बार बोल बोल के खिसका खिसका के रामदास ने ठकुराइन का गोरा गुलाबी गदराया नंगा बदन अपने सीने से बिलकुल सटा लिया और अपने हाथों और जिस्म से उनकी पीठ बाहों कन्धों और बड़े बड़े उरोजों बुरी तरह रगड़ रहा था। उसका फौलादी लण्ड ठकुराइन की गोरी गुलाबी चिकनी जांघ से टकरा रहा था और बुरी तरह अकड़ रहा था। कुछ सोच के रामदास फिर बोला – “मालकिन अगर आप मेरी तरफ़ घूम जाएं तो मैं आपके निपलों की मालिश कर दूँ क्योंकि इन की मालिश होंठों से की जाती है।” ठकुराइन रामदास की तरफ़ घूमने लगीं तो पैरों में फॅ़सा पेटीकोट उनकी टॉग रामदास के जिस्म के दूसरी तरफ़ नहीं जाने दे रहा था । रामदास फिर बोला –“मालकिन अगर आप पेटीकोट उतार दें तो आसानी होगी। आप चाहें तो मेरी धोती ओढ़ ले।”
यह कहकर उसने अपनी धोती उतार दी। ठकुराइन ने उसका फनफनाता फौलादी लण्ड देखा तो फटाफट पेटीकोट उतार फेंका और उसकी तरफ़ घूम गयी। फिर रामदास की जांघों के ऊपर अपनी मोटी मोटी गोरी गुलाबी संगमरमरी जांघें चढ़ा कर बैठ गयी । जिससे उनकी गोरी गुलाबी पावरोटी सी फूली चूत की फॉकें खुल कर चूत का मुँह रामदास के फनफनाते फौोलादी लण्ड के सुपाड़े से टकराने लगा। रामदास अपने दोनों हाथों में उनके बड़े बड़े उरोजों पकड़ कर उनके गुलाबी निपलों को बारी बारी से होंठों में दबा चुभलाने लगा। उसके मुंह से उोजना भरी निपल चुभलाने चूसने की उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्मह जैसी आवाजें आ रही थी। ठकुराइन की गोरी गुलाबी पावरोटी सी फूली चूत का मुँह उसके लण्ड के सुपाड़े से टकरा टकराकर बुरी तरह पनिया रहा था उनके मुंह से उत्तेजना के मारे ऊॅऊॅऊॅऊॅऊॅऊॅऊॅऊॅ की आवाजें आ रही थी।
रामदास का लण्ड भी बुरी तरह पनिया रहा था। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि अब बात आगे कैसे बढ़ाये। तभी ठकुराइन बोली- “रामदास तूने मेरे पैरों की मालिश तो की ही नहीं।”
रामदास ने तीन चार तकिये अपने पैरों की ओर रखे और कहा- “आप इनपर लेट जायें मैं अभी किये देता हूँ।” तकिये इतने ऊँचे थे कि ठकुराइन उनपर अधलेटी सी हो पायी थी। रामदास यही तो चाहता था इससे उसका बदन अभी भी ठकुराइन के बदन ऊपर के गोरे गुलाबी गदराये हिस्से के बिलकुल करीब था पर उनकी गोरी गुलाबी पावरोटी सी फूली चूत उभर कर सामने आ गयी थी। रामदास बारी बारी से उनकी संगमरमरी टांगें अपने कन्धों पर रखकर मालिश करने लगा। दोनों बुरी तरह उत्तजित हो रहे थे। ठकुराइन की मोटी मोटी केले के तने जैसी चिकनी गोरी गुलाबी जांघों पिण्डलियों पर रामदास के हाथ फिसल रहे थे। कभी कभी मारे उत्तेजना के रामदास उनकी गोरी गुलाबी पिण्डलियों पर मुँह भी मार रहा था। रामदास के हाथों नंगी नर्म चिकनी मोटी मोटी गोरी गुलाबी संगमरमरी जांघों को सहलाने नितंबों को दबाने स्तनों के साथ खेलने से ठकुराइन के मुँह सिसकारियां छूट रही थी। तभी ठकुराइन ने अपनी दोनों टांगें उसके कन्धों पर रख ली और उनकी मोटी मोटी केले के तने जैसी चिकनी गोरी गुलाबी जांघों पिण्डलियों को रामदास दोनों हाथों में दबोचने जोरजोर से सहलाने लगा। बीच बीच में मारे उत्तेजना के उनकी गोरी गोरी गुलाबी पिण्डलियों पर दॉत गड़ा देता था। ठकुराइन की मोटी मोटी केले के तने जैसी चिकनी गोरी गुलाबी जांघों के बीच में से गोरी पावरोटी सी फूली चूत की फॉकें जो कि टांगें रामदास कन्धों पर रखी होने के कारण फ़ैल गयी थी और चूत का मुँह ठीक सुपाडे़ के सामने आ गया। लण्ड और चूत एक दूसरे से टकरा टकराकर बुरी तरह पनिया रहे थे। ठकुराइन रामदास की तरफ़ खिसकीं उनकी चूत लण्ड से फिर टकराई ठकुराइन बोली – “रामदास तू क्या सोचता है ठाकुर और तेरी फुलवा अभी क्या कर रहे होंगे।”
रामदास बोला – “फुलवा ठाकुर साहब की मालिश खतम कर राजरानी सी आराम से लेटी होगी और ठाकुर साहब के लण्ड से अपनी चूत की मालिश करवा रही होगी यानि चुदवा रही होगी ।”
ठकुराइन बोली – “तो क्या मैं और तू उनसे कम हैं।”
रामदास बोला- “बिलकुल नहीं मालकिन।”
ठकुराइन हाथ से उसके फौलादी लण्ड का सुपाड़ा पकड़ अपनी चूत के मुँह से लगा कर बोली- “तो फिर लगा धक्का।”
रामदास ने धक्का मारा। सुपाड़ा अन्दर घुस गया और रामदास उसे गोल गोल घुमाने लगा। चूत की दीवारों से घूमकर रगड़ते सुपाड़े का मजा लेते हुए ठकुराइन ने सिसकारी ली और बोली - “वाह माली राजा बगिया खोदने में तेरी खुरपी तो जबरदस्त घूमती है ही चूत में लण्ड तो उससे भी जबरदस्त घूमता है अगर पूरा लण्ड डाल के घूमाता तो और भी मजा आता।”
रामदास धक्का मारते हुए बोला- “ये लो मालकिन पूरा लण्ड।”
इस धक्के से रामदास का पूरा का पूरा फ़ौलादी लण्ड ठकुराइन की पावरोटी सी फूली हुयी चूत में समा गया और रामदास अपना लण्ड चूत में गोल गोल घुमाने लगा। ठकुराइन मजे से कराहते हुए बोली- “अबे जोर जोर से चोद ये ठकुराइन की चूत है अगर तुझसे न बने तो मैं चोदूँ तुझे पटक के।”
इतना रामदास के लिए काफी था। उसने जोर जोर से चोदना शुरू किया। अब रामदास ठकुराइन की गद्देदार फूली हुयी चूत पर अपनी कमर पटक पटक के चोद रहा था ठकुराइन की दोनों टांगें रामदास के कन्धों पर होने के कारण उनकी गद्देदार फूली हुयी चूत मोटी मोटी गोरी गुलाबी चिकनी जांघें भारी गद्देदार चूतड़ रामदास के लण्ड के आस पास टकराकर डनलप के गुदगुदे गद्दे का मजा दे रहे थे और उनसे फटफट की आवाज आ रही थी। रामदास ने दोनों हाथों से ठकुराइन के उछलते बड़े बड़े गोरे गुलाबी उरोजों को थामकर एकसाथ दोनों काले काले निपल होंठों में दबा लिये फिर ठकुराइन की नंगी नर्म चिकनी गोरी गुलाबी संगमरमरी मांसल बाहों को उँगलियॉं में दबोच कर निपल चूसने लगा। अचानक ठकुराइन ने अपनी बायीं टांग रामदास के कन्धे से उतार ली और बायीं करवट ले ली। ठकुराइन के आदेश पर रामदास ने उनकी दूसरी टांग भी बायीं तरफ़ ही उतार दी। अब वो बगल से चोद रहा था। इसी तरह करीब आधे घंटे तक तरह तरह से जैसे जैसे ठकुराइन ने बताया वैसे वैसे रामदास ने अगल बगल दायें बायें ऊपर नीचे घुमा घुमाकर उठापटककर रगड़ते हुए चुदाई करने के बाद अचानक ठकुराइन के मुँह से जोर से निकला- “उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्हआाााहहहहह।”
और उन्होंने रामदास को पलट दिया ऊपर चढ़कर जोर जोर से उछलते हुए अपनी पावरोटी सी फूली चूत में जड़ तक रामदास का लण्ड धॉंसकर उसे लण्ड पर बुरी तरह रगड़ते हुए झड़ने लगी। रामदास भी ठकुराइन की आग हो रही चूत की गर्मी झेल नहीं पाया उनके बड़े बड़े गुलाबी चूतड़ों को दोनो हाथों में दबोचकर अपने लण्ड पर दबाते हुए चूत की जड़ तक लण्ड धॉंसकर झड़ने लगा दोनों एक दूसरे की बाहों मे पडे़ हॉफ रहे थे एक दूसरे की बाहों में लिपटे लिपटे ही सो गये।
दूसरे दिन जब रामदास जाने लगा तो ठकुराइन ने कहा- “मैं बुधवार को उन तीनों का दरबार लगाती हूँ बहुत थक जाती हूँ बदन का जोड़जोड़ दर्द करता है तू हर वृहस्पतिवार को मालिश के लिए आजाया कर।”
रामदास- “जी बहुत अच्छा ।”
उधर फुलवा ठाकुर साहब के कमरे में पहुंची। ठाकुर अपने लम्बे चौड़े पलगं पर अधलेटा था।

क्रमश:………………