बात एक रात की compleet

Discover endless Hindi sex story and novels. Browse hindi sex stories, adult stories ,erotic stories. Visit psychology-21.ru
rajaarkey
Platinum Member
Posts: 3125
Joined: 10 Oct 2014 04:39

Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 11 Dec 2014 04:00

raj sharma stories

बात एक रात की--22

गतान्क से आगे.................

"हम तो अभी भी घूर रहे हैं...हमारी कोई ग़लती नही है. क्यों रमेश" महेंदर ने कहा.

"बिल्कुल...हे...हे..हा"

"ज़ोर से मत हंस उन्होने सुन लिया तो मज़ा किरकिरा हो जाएगा" महेंदर ने कहा.

"सॉरी तुम्हारी बात पर हँसी आ गयी" रमेश ने कहा.

"काश संजय को रोज कोई ना कोई काम रहे बाहर...हमारे मज़े लग जाएँगे" सुरिंदर ने कहा.

"सक इट नाउ" मोनिका ने कहा.

"एक एक बूब हमे पकड़ा दो हम अच्छे से चूसेंगे...इसके बस्का कुछ नही है" महेंदर ने कहा.

"धीरे बोलो यार कही सुन ना ले" रमेश ने कहा.

सुरिंदर बारी-बारी से मोनिका के निपल्स को मूह में दबा कर चूसने लगता है

"आअहह...म्‍म्म्ममम....यस....मै

ं गीली हो गयी....आअहह कुछ करो"

"चल नाडा खोल फिर देर किस बात की है" सुरिंदर ने कहा.

मोनिका ने झट से नाडा खोला और सलवार उतार दी. उसने नीले रंग की पॅंटी पहनी हुई थी. पॅंटी को भी उसने एक झटके में अपने शरीर से अलग कर दिया.

"वाउ.....क्या बॉडी है यार......बूब्स की तरह इसकी गान्ड भी बड़ी है...लगता है खूब मरवाती है गान्ड ये" मोहिंदर ने कहा.

"चूत तो देख एक दम चिकनी है...एक भी बाल नही है....इट्स ए वंडरफुल चूत" रमेश ने कहा.

"इस वंडरफुल चूत ने हमारी मुस्किल बढ़ा दी है....लेनी पड़ेगी ये चूत अब तो वरना हर वक्त दिमाग़ में घूमती रहेगी" महेंदर ने कहा.

"पर हम कैसे ले पाएँगे इस की.....भूलो मत हम यहा ड्यूटी पे हैं" रमेश ने कहा.

"सोचने में क्या बुराई है...मिले ना मिले आगे अपनी किस्मत है" महेंदर ने कहा.

"लो थोड़ा चिकना कर दो मेरे मेरे लंड को"

"उसकी ज़रूरत नही पड़ेगी शायद मुझे काफ़ी गीली लग रही मेरी पुसी" मोनिका ने कहा.

सुरिंदर ने मोनिका की चूत में उंगली डाली और बोला, "हां ऐसा लगता है जैसे ये पुसी आज नहा के आई है"

"फक मी नाउ..." मोनिका ने कहा.

"आज तुम चोदो मेरे उपर चढ़ कर...क्या कहती हो?"

"ठीक है लेट जाओ फिर" मोनिका ने कहा.

सुरिंदर बिस्तर पर लेट गया और अपने लंड को हाथ में पकड़ कर बोला, "टेक इट बेबी"

मोनिका सुरिंदर के उपर आ गयी और अपनी गान्ड को सुरिंदर के लंड के ठीक उपर हवा में थाम लिया.

"ले आओ अपनी गान्ड नीचे अब क्यों तडपा रही हो" सुरिंदर ने कहा.

"मेरे होल पे रख दो बाकी मैं संभाल लूँगी"

सुरिंदर ने लंड को चूत के द्वार पर टीका दिया और बोला, "अपनी गान्ड नीचे को पुश करो...खुद-ब-खुद घुस्स जाएगा ये चूत में"

मोनिका ने अपनी गान्ड को नीचे की ओर पूस किया और सुरिंदर का लंड मोनिका की चूत में गायब होता चला गया.

"हाई रे क्या एंट्री दी है लंड को....काश मेरा भी ले ले ऐसे ही" मोहिंदर ने कहा.

"क्या किस्मत है उस लंड की जो कि गरम चूत में घुस्सा हुआ है...एक हमारे लंड हैं जो यहा ठंड में थितुर रहे हैं"

"देख-देख कैसे उछल रही है उसके उपर" महिनदर ने कहा.

"पूरे लंड को बाहर निकाल के अंदर ले रही है..मज़ा आ गया यार ये तो पोर्न मोविए से भी अच्छा लग रहा है" रमेश ने कहा.

"आअहह मोनिका और ज़ोर से उछलो...मज़ा आ रहा है" सुरिंदर ने कहा.

"थक गयी मैं अब तुम करो" मोनिका ने कहा.

मोनिका सुरिंदर के उपर से उतर कर टांगे फैला कर लेट गयी और बोली, "संजय को बहुत पसंद है ये पोज़िशन"

"कौन सी पोज़िशन?"

"यही जिसमे मैं उपर थी"

"किसके साथ ज़्यादा मज़ा आता है....मेरे साथ या अपने पति के साथ" सुरिंदर ने कहा.

"ह्म्म दौनो के साथ अपना मज़ा है" मोनिका ने कहा.

"सुन रहे हो रमेश....पति से दुखी नही है फिर भी अपने यार को देती है...इसे कहते हैं कलयुग"

"देने दो यार उसकी चूत है तेरा क्या जाता है...तू भी तो भाभी से दुखी नही है...क्या तू नही लेता दूसरी लड़कियों की"

"कहा यार बहुत दिन से कोई चूत नही मिली बस बीवी से ही काम चला रहा हूँ"

"तेरे सामने क्या है....इसकी हम आसानी से ले सकते हैं" रमेश ने कहा.

"ह्म्म बात तो ठीक है...ऐसा मोका रोज-रोज थोड़े ही मिलता है." महेंदर ने कहा.

अंदर सुरिंदर मोनिका को मिशनेरी पोज़िशन मे चोद रहा है.

"उउउहह यस फक मी हार्ड....." मोनिका ने कहा.

"संजय से हार्ड चोदुन्गा तुझे हे..हा..हा" सुरिंदर ने कहा.

"यस...डीपर आअहह हार्डर यस आइ आम कमिंग....उऊहह" मोनिका बड़बड़ाई.

"मेरा काम होने वाला है....पानी अंदर छोड़ दू क्या या बाहर छोड़ू"

"छोड़ दो अंदर कोई बात नही"

"देख लो कही संजय की जगह मेरे बच्चे खेले तुम्हारे आँगन में"

"गोली खा रही हूँ...चिंता की बात नही...आअहह"

"ये लो फिर.....आआहह" ये कह कर सुरिंदर ने बहुत तेज तेज धक्के मारे और अपने पानी को मोनिका की चूत की खाई में गिरा दिया.

"बहुत बढ़िया सीन देखा आज ये हमने" महिनदर ने कहा.

"चलो अब बाहर गेट के पास खड़े होते हैं कहीं साहब राउंड पे आ जाए"

"आआहह मज़ा आ गया...पर एक बात है...जब तुम बहुत तेज तेज धक्के लगा रहे थे कुछ आहट सुनाई दी थी मुझे"

"मुझे तो कुछ सुनाई नही दिया" सुरिंदर ने कहा.

हो सकता है मुझे वेहम हुआ हो पर फिर भी तुम चेक कर लेना. एक बात और पूछनी थी तुमसे" मोनिका ने कहा.

"क्या तुमने सच में उस लड़की को खून करते देखा था"

"तुझे क्या लगता है मैं झूठ बोल रहा हूँ"

"नही मेरा मतलब ये है कि वो लड़की देखने में बिल्कुल कातिल नही लगती"

"तुम कौन सा देखने में स्लुत लगती हो...पर तुम एक नंबर की स्लुत हो"

"ऐसा कुछ नही है जनाब बंदी, अपने पति के अलावा सिर्फ़ आप को देती है...वरना तो दुनिया घूमती है मेरे पीछे"

"वो तो है...मैं तो मज़ाक कर रहा था."

वैसे रात को किसके साथ गये थे तुम....और उस सीरियल किल्लर तक कैसे पहुँच गये"

"तुझे क्या करना है ये सब जान के"

"चलु मैं अब?" मोनिका ने कहा.

"अभी तो सादे 11 हुए हैं अभी जा कर क्या करोगी. ऐसा कर संजय को फोन कर दे कि तू किसी मॅरेज में गयी है""

"तो क्या यहा से 2 बजे निकलु. उस वक्त सड़के बिल्कुल शुन्सान होंगी. रही बात मॅरेज में जाने की तो वो मुमकिन नही है क्योंकि अभी शाम को ही बात हुई थी मेरी संजय से...अचानक मॅरेज का बहाना ठीक नही होगा."

"सड़के तो इस वक्त भी शुन्सान होंगी....उस किल्लर का ख़ौफ़ जो फैला है चारो और"

"कुछ भी हो मुझे जाना तो पड़ेगा ही"

"ठीक है जैसी तुम्हारी मर्ज़ी" सुरिंदर ने कहा.

मोनिका ने कपड़े पहने और बोली, "ठीक है फिर...मैं चलती हूँ"

"रूको मैं ज़रा टाय्लेट जा कर आता हूँ, मैं तुम्हे बाहर तक छोड़ दूँगा"

"मैं निकल रही हूँ लेट हो जाउन्गि"

"अरे रूको तो"

पर मोनिका दरवाजा खोल कर बाहर आ गयी और अपनी स्कूटी स्टार्ट करने लगी. पर किसी कारण से वो स्टार्ट नही हो पाई.

"क्या हुआ मैं कुछ मदद करूँ" महिनदर ने मोनिका के पास आ कर कहा.

"जी नही ये मेरी स्कूटी है और मैं अच्छे से जानती हूँ कि इसे स्टार्ट कैसे करना है"

महिनदर ने मोनिका की गान्ड पर हाथ रखा और बोला, "जी हां ये स्कूटी भी आपकी गान्ड की तरह है...बहुत अच्छे से टीकाई थी ये गान्ड आपने सुरिंदर के लंड पे...लंड सीधा घुस्स गया था"

मोनिका ने महिनदर का हाथ अपनी गान्ड से दूर झटक दिया और बोली,"तो तुम सब देख रहे थे हां शरम नही आती तुम्हे"

"इसने अकेले ने नही देखा मैने भी देखा...बहुत प्यार से देती हो चूत तुम...हमे कब दोगि" रमेश ने कहा.

"शट अप...मेरे पास फालतू वक्त नही अपनी बकवास किसी और को सुनाओ"

मोनिका ने एक बार फिर से ट्राइ किया और स्कूटी स्टार्ट हो गयी और वो बैठ कर चल दी.

"सोच लेना हम यही है" महिनदर ने मोनिका के पीछे से आवाज़ लगाई

तभी एक आहट होती है.

"ये आवाज़ कहा से आई" रमेश ने कहा.

"पता नही...ऐसा लगता है घर के अंदर से आई है" महिनदर ने कहा.

लेकिन तभी आवाज़ लगातार आने लगी.

"ऐसा लग रहा है जैसे कोई दरवाजा पीट रहा हो" रमेश ने कहा.

"आवाज़ घर के पीछे से आ रही है" महिनदर ने कहा.

"चलो चल कर देखते हैं" रमेश ने कहा.

वो दोनो घर के पीछे आते है. पर वाहा पहुँचते ही उनके होश उड़ जाते हैं.

सुरिंदर खून से लथपथ था और खिड़की का शीसा पीट रहा था.

"ओह गॉड....अंबूलेंस बुलाओ जल्दी और हां विजय सर को भी फोन कर दो" मोहिंदर ने कहा और वो घर के दरवाजे की तरफ भागा.

दरवाजा खुला ही था. महिनदर भाग कर घर के अंदर घुस्स गया और वाहा पहुँच गया जहा से सुरिंदर खिड़की को पीट रहा था.

"अंबूलेंस आ रही है"रमेश भी उसके पीछे-पीछे आ गया.

"अब कोई फ़ायदा नही ये मर चुका है" महिनदर ने कहा.

"अपनी तो नौकरी गयी समझो अब" रमेश बाल पकड़ कर नीचे बैठ गया.

"तुम्हे क्या लगता है...क्या वो लड़की इसे मार कर गयी है" रमेश ने कहा.

"सस्स्शह" महिनदर ने रमेश को चुप रहने का इशारा किया.

"जिसने भी इसे मारा है..अभी यही छुपा है...तुम उस कमरे में देखो, मैं टाय्लेट किचन और स्टोर रूम में देखता हूँ" महिनदर ने धीरे से कहा.

"ठीक है...कोई भी बात हो तो ज़ोर से आवाज़ देना" रमेश ने कहा.

"ठीक है...चौक्कने रहना"

महिनदर टाय्लेट की तरफ बढ़ता है और रमेश कमरे की तरफ.

महिनदर टाय्लेट का दरवाजा खोलता है....लेकिन वो अपने बिल्कुल पीछे खड़े साए को नही देख पाता.

"क्या ढूँढ रहे हो" उस साए ने कहा.

महिनदर ने तुरंत मूड कर देखा लेकिन उसके मुड़ते ही उसके पेट को तेज धार चाकू ने चीर दिया.

क्रमशः..............................

BAAT EK RAAT KI--22

gataank se aage.................

"hum to abhi bhi ghur rahe hain...hamaari koi galti nahi hai. Kyon ramesh" mahender ne kaha.

"bilkul...he...he..ha"

"jor se mat hans unhone shun liya to maja kirkira ho jaayega" mahender ne kaha.

"sorry tumhaari baat par hansi aa gayi" ramesh ne kaha.

"kaas sanjay ko roj koi na koi kaam rahe baahar...hamaare maje lag jaayenge" surinder ne kaha.

"suck it now" monika ne kaha.

"ek ek boob hame pakda do hum achche se choosenge...iske baska kuch nahi hai" mahender ne kaha.

"dheere bolo yaar kahi shun na le" ramesh ne kaha.

Surinder baari-baari se monika ke nipples ko muh mein daba kar choosne lagta hai

"aaahhhhh...mmmmmm....yes....main gili ho gayi....aaahhh kuch karo"

"chal naada khol phir der kis baat ki hai" surinder ne kaha.

Monika ne jhat se naada khola aur salwaar utaar di. Usne neele rang ki panty pahni huyi thi. Panty ko bhi usne ek jhatke mein apne sharir se alag kar diya.

"wow.....kya body hai yaar......boobs ki tarah iski gaanD bhi badi hai...lagta hai khub marvaati hai gaanD ye" mohinder ne kaha.

"chut to dekh ek dam chikni hai...ek bhi baal nahi hai....its a wonderful chut" ramesh ne kaha.

"is wonderful chut ne hamaari muskil badha di hai....leni padegi ye chut ab to varna har vakt deemag mein ghumti rahegi" mahender ne kaha.

"par hum kaise le paayenge is ki.....bhulo mat hum yaha duty pe hain" ramesh ne kaha.

"sochne mein kya buraayi hai...mile na mile aage apni kismat hai" mahender ne kaha.

"lo thoda chikna kar do mere mere lund ko"

"uski jaroorat nahi padegi shaayad mujhe kaafi gili lag rahi meri pussy" monika ne kaha.

surinder ne monika ki chut mein ungli daali aur bola, "hum aisa lagta hai jaise ye pussy aaj naha ke aayi hai"

"fuck me now..." monika ne kaha.

"aaj tum chodo mere upar chadh kar...kya kahti ho?"

"theek hai let jao phir" monika ne kaha.

Surinder bistar par let gaya aur apne lund ko haath mein pakad kar bola, "take it baby"

monika surinder ke upar aa gayi aur apni gaanD ko surinder ke lund ke theek upar hava mein thaam liya.

"le aao apni gaanD neeche ab kyon tadpa rahi ho" surinder ne kaha.

"mere hole pe rakh do baaki main sambhaal lungi"

surinder ne lund ko chut ke dwar par tika diya aur bola, "apni gaanD neeche ko pus karo...khud-b-khud ghuss jaayega ye chut mein"

monika ne apni gaanD ko neeche ki aur pus kiya aur surinder ka lund monika ki chut mein gaayab hota chala gaya.

"hi re kya entry di hai lund ko....kaash mera bhi le le aise hi" mohinder ne kaha.

"kya kismat hai us lund ki jo ki garam chut mein ghussa hua hai...ek hamaare lund hain jo yaha thund mein thitur rahe hain"

"dekh-dekh kaise uchal rahi hai uske upar" mahinder ne kaha.

"pure lund ko baahar nikaal ke ander le rahi hai..maja aa gaya yaar ye to porn movie se bhi achcha lag raha hai" ramesh ne kaha.

"aaahhhh monika aur jor se uchlo...maja aa raha hai" surinder ne kaha.

"thak gayi main ab tum karo" monika ne kaha.

Monika surinder ke upar se utar kar taange faila kar let gayi aur boli, "sanjay ko bahut pasand hai ye position"

"kaun si position?"

"yahi jisme main upar thi"

"kiske saath jyada maja aata hai....mere saath ya apne pati ke saath" surinder ne kaha.

"hmm dauno ke saath apna maja hai" monika ne kaha.

"shun rahe ho ramesh....pati se dukhi nahi hai phir bhi apne yaar ko deti hai...ise kahte hain kalyug"

"dene do yaar uski chut hai tera kya jaata hai...tu bhi to bhabhi se dukhi nahi hai...kya tu nahi leta dusri ladkiyon ki"

"kaha yaar bahut din se koi chut nahi mili bas biwi se hi kaam chala raha hun"

"tere saamne kya hai....iski hum asaani se le sakte hain" ramesh ne kaha.

"hmm baat to theek hai...aisa moka roj-roj thodi milta hai." mahender ne kaha.

Ander surinder monika ko missionery position me chod raha hai.

"uuuhhhh yes fuck me hard....." monika ne kaha.

"sanjay se hard chodunga tujhe he..ha..ha" surinder ne kaha.

"yes...deeper aaahhhh harder yes i am coming....uuhhh" monika badbadaayi.

"mera kaam hone waala hai....pani ander chod du kya ya baahar chodu"

"chod do ander koi baat nahi"

"dekh lo kahi sanjay ki jagah mere bachche khele tumhaare aangan mein"

"goli kha rahi hun...chinta ki baat nahi...aaahhhh"

"ye lo phir.....aaaahhhhh" ye kah kar surinder ne bahut tej tej dhakke maare aur apne paani ko monika ki chut ki khaayi mein gira diya.

"bahut badhiya scene dekha aaj ye hamne" mahinder ne kaha.

"chalo ab baahar gate ke paas khade hote hain kahin saahab round pe aa jaaye"

"aaaahhh maja aa gaya...par ek baat hai...jab tum bahut tej tej dhakke laga rahe the kuch aahat sunaayi di thi mujhe"

"mujhe to kuch sunaayi nahi diya" surinder ne kaha.

Ho sakta hai mujhe vaham hua ho par phir bhi tum check kar lena. Ek baat aur puchni thi tumse" monika ne kaha.

"kya tumne sach mein us ladki ko khun karte dekha tha"

"tujhe kya lagta hai main jhut bol raha hun"

"nahi mera matlab ye hai ki vo ladki dekhne mein bilkul kaatil nahi lagti"

"tum kaun sa dekhne mein slut lagti ho...par tum ek number ki slut ho"

"aisa kuch nahi hai janaab bandi, apne pati ke alaawa sirf aap ko deti hai...varna to duniya ghumti hai mere peeche"

"vo to hai...main to mazaak kar raha tha."

vaise raat ko kiske saath gaye the tum....aur us serial killer tak kaise pahunch gaye"

"tujhe kya karna hai ye sab jaan ke"

"chalu main ab?" monika ne kaha.

"abhi to saade 11 hue hain abhi ja kar kya karogi. aisa kar sanjay ko phone kar de ki tu kisi marriage mein gayi hai""

"to kya yaha se 2 baje niklu. Us vakt sadke bilkul shunsaan hongi. Rahi baat marriage mein jaaane ki to vo mumkin nahi hai kyonki abhi sham ko hi baat huyi thi meri sanjay se...achchaanak marriage ka bahaana theek nahi hoga."

"sadke to is vakt bhi shunsaan hongi....us killer ka khauf jo faila hai chaaro aur"

"kuch bhi ho mujhe jaana to padega hi"

"theek hai jaisi tumhaari marji" surinder ne kaha.

Monika ne kapde pahne aur boli, "theek hai phir...main chalti hun"

"ruko main jara toilet ja kar aata hun, main tumhe baahar tak chod dunga"

"main nikal rahi hun let ho jaaungi"

"arey ruko to"

par monika darvaaja khol kar baahar aa gayi aur apni scooty start karne lagi. Par kisi kaaran se vo start nahi ho paayi.

"kya hua main kuch madad karun" mahinder ne monika ke paas aa kar kaha.

"ji nahi ye meri scooty hai aur main achche se jaanti hun ki ise start kaise karna hai"

mahinder ne monika ki gaanD par haath rakha aur bola, "ji haan ye scooty bhi aapki gaanD ki tarah hai...bahut achche se teekaayi thi ye gaanD aapne surinder ke lund pe...lund seedha ghuss gaya tha"

monika ne mahinder ka haath apni gaanD se dur jhatak diya aur boli,"to tum sab dekh rahe the haan sharam nahi aati tumhe"

"isne akele ne nahi dekha maine bhi dekha...bahut pyar se deti ho chut tum...hame kab dogi" ramesh ne kaha.

"shut up...mere paas faaltu vakt nahi apni bakwaas kisi aur ko sunaao"

monika ne ek baar phir se try kiya aur scooty start ho gayi aur vo baith kar chal di.

"soch lena hum yahi hai" mahinder ne monika ke peeche se awaaj lagaayi

tabhi ek aahat hoti hai.

"ye awaaj kaha se aayi" ramesh ne kaha.

"pata nahi...aisa lagta hai ghar ke ander se aayi hai" mahinder ne kaha.

Lekin tabhi awaaj lagataar aane lagi.

"aisa lag raha hai jaise koi darvaaja pit raha ho" ramesh ne kaha.

"Awaaj ghar ke peeche se aa rahi hai" mahinder ne kaha.

"chalo chal kar dekhte hain" ramesh ne kaha.

Vo daono ghar ke peeche aate hai. Par vaha pahunchte hi unke hosh ud jaate hain.

Surinder khun se lathpath tha aur khidki ka sheesa pit raha tha.

"oh god....ambulence bulaao jaldi aur haan vijar sir ko bhi phone kar do" mohinder ne kaha aur vo ghar ke darvaaje ki taraf bhaaga.

Darvaaja khula hi tha. Mahinder bhaag kar ghar ke ander ghuss gaya aur vaha pahunch gaya jaha se surinder khidki ko pit raha tha.

"ambulence aa rahi hai"ramesh bhi uske peeche-peeche aa gaya.

"ab koi faayadaa nahi ye mar chuka hai" mahinder ne kaha.

"apni to naukri gayi samjho ab" ramesh baal pakad kar neeche baith gaya.

"tumhe kya lagta hai...kya vo ladki ise maar kar gayi hai" ramesh ne kaha.

"sssshhhh" mahinder ne ramesh ko chup rahne ka ishaaraa kiya.

"jisne bhi ise maara hai..abhi yahi chupa hai...tum us kamre mein dekho, main toilet kitchen aur store room mein dekhta hun" mahinder ne dheere se kaha.

"theek hai...koi bhi baat ho to jor se awaaj dena" ramesh ne kaha.

"theek hai...chaukkane rahna"

mahinder toilet ki taraf badhta hai aur ramesh kamre ki taraf.

Mahinder toilet ka darvaaja kholta hai....lekin vo apne bilkul peeche khade saaye ko nahi dekh pata.

"kya dhundh rahe ho" us saaye ne kaha.

Mahinder ne turant mud kar dekha lekin uske mudte hi uske pet ko tej dhaar chaaku ne cheer diya.

Kramashah..............................


rajaarkey
Platinum Member
Posts: 3125
Joined: 10 Oct 2014 04:39

Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 11 Dec 2014 04:01

raj sharma stories

बात एक रात की--23

गतान्क से आगे.................

"रा........" महिनदर के मूह से सिर्फ़ इतना ही निकल पाया क्योंकि अगले ही पल उस साए ने उसके मूह को दबोच कर उसका गला काट दिया. साए तो तड़प्ते हुए खून से लटपथ महिनदर को एक तरफ धकेल दिया. महिनदर मूह के बल फार्स पर गिर गया. वो दम तोड़ चुका था.

जब महिनदर ज़मीन पर गिरा तो ज़ोर की आवाज़ हुई. रमेश उसे सुन कर कमरे से बाहर आया.

"महिनदर कहा हो तुम....यहा तो कोई नही है...तुम्हे मिला क्या कुछ" रमेश ने कहा.

जब कोई रेस्पॉन्स नही आया तो रमेश टाय्लेट की ओर बढ़ा. वो साया रमेश को आता देख दीवार से चिपक गया.

"ओह नो..." रमेश ने महिनदर को फार्स पर पड़े देख कर कहा.

वो तुरंत महिनदर के पास आया और बोला, "महिनदर....महिनदर"

बस इतना ही बोल पाया था रमेश क्योंकि अगले ही पल उस साए ने उसकी गर्दन चीर दी. रमेश लड़खड़ा कर महिनदर के उपर गिर पड़ा.

नीचे गिरते ही रमेश ने उस साए को देखा. उसके आँखे हैरानी से फॅंटी रह गयी.

"मुझे ढूँढ रहे थे हा...हो गयी तस्सल्ली अब"

पर रमेश कोई भी जवाब देने से पहले ही दम तौड चुका था.

..............................

........

"गुरु लाइट बंद कर दू या जली रहने दूं" राज ने कहा.

"अरे लाइट बंद करो....ये भी क्या पूछने की बात है...रोशनी में मुझे नींद नही आती" नगमा ने कहा.

"ठीक है...मैं बंद कर देता हूँ" राज ने कहा.

पद्‍मिनी ने कुछ रिक्ट नही किया और चुपचाप करवट लिए पड़ी रही"

"वैसे तुम्हारी नौकरी का क्या हुआ......या फिर सब काम धनदा छोड़ कर कातिल के पीछे पड़े हो" नगमा ने कहा.

"अरे भोलू को कहा तो था कि पता करे बताया ही नही उसने कुछ अब तक" राज ने कहा.

"बिना पैसे दिए भरती नही होती पोलीस में...अपनी उम्मीद छोड़ दो" मोहित ने कहा.

"कैसी बात करते हो गुरु....लिस्ट में तो मेरा नाम था ना.....जाय्निंग ही लेट हो रही है" राज ने कहा.

"6 महीने हो गये इस बात को समझने की कोशिस कर तेरा नाम ग़लती से आ गया था लिस्ट में....जब तुमने कोई पैसा नही दिया तो तुम्हारी सेलेक्षन कैसे होगी...सबने 50-50 लाख दिए थे लिस्ट में आने के लिए और तुम फ्री में आ गये....ऐसा होता है कभी क्या....सब की जाय्निंग हो गयी बस तुम्हारी लटकी पड़ी है" मोहित ने कहा.

"शायद तुम ठीक कह रहे हो....पर ना जाने क्यों मुझे उम्मीद है की जिस तरह लिस्ट में मेरा नाम आया था वैसे ही मेरी जाय्निंग भी हो जाएगी....और एक बार मैं पोलीस में चला गया तो उस की खैर नही"

"मेरा राज सपने बहुत देखता है" नगमा अचानक बोली.

"तेरी गान्ड इसने पहले सपने में ही मारी थी फिर सचमुच में भी मार ली....हे..हे..हा..हा" मोहित ने कहा.

"तुमने सिखाया है इसे गान्ड मारना वरना मेरा राज बस मेरी चूत घिसता था बस" नगमा ने कहा.

राज ने मोहित को कोहनी मारी, "क्या करते हो गुरु...पद्‍मिनी जी का तो ख्याल किया करो...तुम भी नगमा की तरह कुछ भी बोल देते हो और उसे भी मोका मिल जाता है कुछ भी बोलने का" राज ने धीरे से कहा.

"क्या करूँ यार यू ही ज़ुबान फिसल जाती है....वैसे तू ये बता बहुत चिंता रहती है तुझे पद्‍मिनी जी की दिल आ गया क्या तेरा उस पर उहह" मोहित ने भी धीरे से कहा

"क्या बात करते हो गुर...मैं तो बस"

"पद्‍मिनी जी की चूत मिलनी मुस्किल है...सपने देखना छोड़ दे" मोहित ने कहा.

"ऐसा कुछ नही है जैसा तुम सोच रहे हो....मुझे तो बस इंसानियत के नाते हमदर्दी है पद्‍मिनी जी से. हां पद्‍मिनी जी बहुत सुंदर हैं....पर मैं अब कुछ ऐसा वैसा नही सोचता"

"क्यों बे टीवी पर पद्‍मिनी जी को देख कर तो मूठ मार ली थी तूने और अब ऐसी बाते कर रहा है"

"तब की बात अलग थी....मैं मिला नही था तब पद्‍मिनी जी से....मिल कर उनके बारे में कुछ और ही अहसास हैं"

"साले कही ये प्यार तो नही है....शादी-शुदा है वो"

"मैं उनकी रेस्पेक्ट करता हूँ बस....मेरे मन में उनके प्रति कोई ग़लत ख्याल नही है...हर लड़की एक जैसी नही होती, समझा करो गुरु"

"ह्म....अच्छा एक बात बता पूजा के बारे में क्या ख्याल है या फिर वाहा भी तेरे इरादे नेक हैं" मोहित ने कहा.

"पूजा के बारे में इरादे बिल्कुल नेक नही हैं....पर लगता है वो पहले ही डलवा चुकी है...ज़रूर उस विक्की ने ली होगी उसकी"

"ह्म पूरी बात तो पता नही पर लगता तो यही है कि उसने पूजा की भी पॉर्न मूवी बनाई थी"

"हां और शायद वो उसे ब्लॅकमेल कर रहा था...तंग आकर वो उसे मारने पहुँच गयी" राज ने कहा.

राज और मोहित ने जितनी बाते सुनी थी विक्की के घर पे उसके अनुसार अंदाज़ा लगा रहे थे.

"पूजा वैसे पद्‍मिनी जी से कम सुंदर नही है" राज ने कहा.

"अच्छा तो तू पूजा की चूत मार के पद्‍मिनी जी का मज़ा लेगा" मोहित ने कहा.

"नही गुरु तुम फिर मुझे ग़लत समझ रहे हो...मैं सच्चे मन से पद्‍मिनी जी की मदद कर रहा हूँ"

"ह्म....पर पूजा नगमा जैसी नही है....वो इतनी आसानी से नही देगी अपनी" मोहित ने कहा.

"जानता हूँ....सच कहूँ तो मैं तो पूजा को पटाने के लिए ही चक्कर लगाता था उसके घर के लेकिन पट गयी नगमा" राज ने कहा.

"तो क्या हुआ नगमा पूजा जैसी सुंदर ना सही पर इसकी अपनी ही सुंदरता है...बॉडी बहुत सेक्सी है साली की" मोहित ने कहा.

"वो तो है तभी तो मैने मोका नही गवाया. पहली बार नगमा को उसी के घर में चोदा था"

"क्या बात है असली गुरु तो तुम हो मैं तो बस नाम का गुरु हूँ"

"पूजा को भी पटा लेता पर उसने एक बार हमे देख लिया"

"वो कैसे?"

"मैने नगमा को एक बार फिर उसी के घर में चोद रहा था. बापू इसका कही गया था और पूजा कॉलेज गयी थी. पूजा कॉलेज से जल्दी आ गयी और उसने खिड़की से सब देख लिया"

"फिर तो तेरा चान्स कम है....तुझे नही देगी वो" मोहित ने कहा.

"कोशिस करने में क्या हर्ज़ है....वैसे आज तो उसने अच्छे से बात की मुझसे"

"मुझे तो वो भी पद्‍मिनी जैसी लगी...बाकी तेरी किस्मत...तुझे मिल जाए तो मेरा भी ध्यान रखना"

"ध्यान रखना मतलब वो नगमा नही है...इसकी बात और है"

"है तो इसी की बहन...देखना वो भी इसी के जैसी बनेगी" मोहित ने कहा.

"मुझे ऐसा नही लगता पूजा और नगमा में ज़मीन आसमान का फ़र्क है" राज ने कहा.

इधर नगमा बार-बार कर्वते बदल रही है.

"अफ अजीब बिस्तर है ये तो नींद ही नही आ रही" नगमा धीरे से बड़बड़ाई.

अचानक वो पद्‍मिनी से आकर चिपक गयी और बोली, "सो गयी क्या तुम"

"क्या है...दूर हटो"

"डरो मत मैं ऐसी लड़की नही हूँ...मुझे सिर्फ़ आदमियों के लंड अच्छे लगते हैं" नगमा ने कहा.

"फिर भी दूर रहो मुझसे...नींद आ रही है मुझे" पद्‍मिनी ने कहा.

"मुझे तो बिल्कुल नींद नही आ रही इस पर तुम कैसे सो रही हो" नगमा ने कहा.

"आँखे बंद करो और सो जाओ...नींद आ जाएगी" पद्‍मिनी ने कहा.

"राज बड़ी फिकर करने लगा है तुम्हारी मुझे चिंता हो रही है...कहीं इतनी अछी चूत मारने वाला तुम मुझसे छीन ना लो" नगमा ने कहा.

"मेरा कोई इंटेरेस्ट नही है राज में समझी कितनी बार बताउ मैं....वैसे हर किसी के साथ तुम चल पड़ती हो फिर राज से इतना लगाव क्यों है"

"तुम नही समझोगी उसके जैसा प्रेमी मिलेगा ना तभी समझ पाओगि" नगमा ने कहा.

"मुझे समझना भी नही है" पद्‍मिनी ने कहा.

"राज जिस तरह से चूत में घुसाता है वैसे कोई और नही घुसाता. ख़ासकर जिन आदमियों से मैं मिली हूँ वो तो राज के आगे फीके ही हैं" नगमा ने कहा.

"ये सब एक नंबर की बकवास है" पद्‍मिनी बड़बड़ाई.

"नही सच कह रही हूँ" नगमा ने कहा. नगमा ने पद्‍मिनी के चुतड़ों पर हाथ रखा और बोली, "पता नही क्या करता है वो...गान्ड को पकड़ कर जोरदार तरीके से घुसाता है चूत में लंड"

पद्‍मिनी ने नगमा का हाथ अपने चताड़ो से दूर झटक दिया और बोली, "यहा टच मत करो"

"क्यों क्या हुआ कुछ-कुछ होता है क्या....मुझे लग ही रहा था कि तुम्हारी गान्ड बहुत सेक्सी है अब साबित भी हो गया. लिया है ना तूने भी गान्ड में"

"ऐसा कुछ नही है...मैं ये उल्टे काम नही करती" पद्‍मिनी ने कहा.

"मैं ही कौन सा करती हूँ पर ये आदमी लोग किसी ना किसी बहाने से ले ही लेते हैं मेरी गान्ड अब देखो ना कैसे मारी थी भोलू ने मेरी गान्ड आज जबकि मैने उसे पहले ही मना किया था." नगमा ने कहा.

"वो कहानी तुम सुना चुकी हो...सो जाओ अब रात बहुत हो गयी है" पद्‍मिनी ने कहा.

"सच बता क्या तुमने सच में नही लिया गान्ड में अब तक" नगमा ने पूछा.

"अब क्या स्टंप पेपर पे लिखवा के लाकर दू" पद्‍मिनी झल्ला कर बोली.

"ठीक है ठीक है तुम्हारी गान्ड है तुम ज़्यादा अच्छे से जानती हो...वैसे तेरा पति एक नंबर का चूतिया था जो उसने इतनी सेक्सी गान्ड नही मारी" नगमा ने कहा.

"दूर हटो अब...मेरी नींद ना खराब करो" पद्‍मिनी ने नगमा को झटका दिया.

"ओके जी मैं तो हाल-चाल पूछने आई थी गुड नाइट" नगमा ने कहा.

...................................................

"उफ्फ मैं अपने गले की चैन शायद सुरिंदर के घर भूल आई" मोनिका बड़बड़ाई.

मोनिका अपने घर पहुँच गयी है. उसे ज़रा भी अंदाज़ा नही कि उसके सुरिंदर के घर से जाने के बाद वाहा खून की नादिया बह गयी.

"अभी सुरिंदर को फोन करती हूँ..."

मोनिका सुरिंदर का फोन ट्राइ करती है.

"क्या बात है...ये फोन क्यों नही उठा रहा" मोनिका बड़बड़ाई.

"शायद सो गया होगा....मैं भी थोड़ी देर लेट लेती हूँ....सुबह बात करूँगी सुरिंदर से."

मोनिका बिस्तर पर पसर जाती है.

"सुरिंदर के साथ कब तक चलेगा ये सब....किसी दिन संजय को पता चल गया तो....नही...नही ऐसा नही होगा....पर जो भी हो मुझे जल्दी ये सब ख़तम करना होगा"

"इस से पहले की मेरे तन की हवस मेरी ज़िंदागी बर्बाद कर दे...इस कहानी को यही ख़तम किया जाए. पर मैं ये भी जानती हूँ कि ये सब सोचना आसान है और करना मुस्किल...चलो देखते हैं किस्मत कहा ले जाती है"

"ना मैं उस दिन शादी में जाती और ना ही सुरिंदर के चक्कर में फस्ति......कम्बख़त ने पहली ही मुलाकात में फँसा लिया मुझे" मोनिका सोचते-सोचते ख़यालो में खो जाती है.......................

क्रमशः..............................

BAAT EK RAAT KI--23

gataank se aage.................

"ra........" mahinder ke muh se sirf itna hi nikal paaya kyonki agle hi pal us saaye ne uske muh ko daboch kar uska gala kaat diya. Saaye to tadapte hue khun se latpath mahinder ko ek taraf dhakel diya. Mahinder muh ke bal fars par gir gaya. Vo dam taod chuka tha.

Jab mahinder jamin par gira to jor ki awaaj huyi. Ramesh use shun kar kamre se baahar aaya.

"mahinder kaha ho tum....yaha to koi nahi hai...tumhe mila kya kuch" ramesh ne kaha.

Jab koi response nahi aaya to ramesh toilet ki aur badha. Vo saaya ramesh ko aata dekh deevaar se chipak gaya.

"oh no..." ramesh ne mahinder ko fars par pade dekh kar kaha.

Vo turant mahinder ke paas aaya aur bola, "mahinder....mahinder"

bas itna hi bol paaya tha ramesh kyonki agle hi pal us saaye ne uski gardan cheer di. Ramesh ladkhada kar mahinder ke upar gir pada.

Neeche girte hi ramesh ne us saaye ko dekha. Uske aankhe hairaani se phanti rah gayi.

"mujhe dhundh rahe the huh...ho gayi tassalli ab"

par ramesh koi bhi jawaab dene se pahle hi dam taud chuka tha.

"guru light band kar du ya jali rahne dun" Raj ne kaha.

"arey light band karo....ye bhi kya puchne ki baat hai...roshni mein mujhe neend nahi aati" nagma ne kaha.

"theek hai...main band kar deta hun" Raj ne kaha.

Padmini ne kuch react nahi kiya aur chupchaap karvat liye padi rahi"

"vaise tumhaari naukri ka kya hua......ya fir sab kaam dhanda chod kar kaatil ke peeche pade ho" nagma ne kaha.

"arey bholu ko kaha to tha ki pata kare bataaya hi nahi usne kuch ab tak" Raj ne kaha.

"bina paise diye bharti nahi hoti police mein...apni ummeed chod do" mohit ne kaha.

"kaisi baat karte ho guru....list mein to mera naam tha na.....joining hi let ho rahi hai" Raj ne kaha.

"6 mahine ho gaye is baat ko samajhne ki koshis kar tera naam galti se aa gaya tha list mein....jab tumne koi paisa nahi diya to tumhaari selection kaise hogi...sabne 50-50 lack diye the list mein aane ke liye aur tum free mein aa gaye....aisa hota hai kabhi kya....sab ki joining ho gayi bas tumhaari latki padi hai" mohit ne kaha.

"shaayad tum theek kah rahe ho....par na jaane kyon mujhe ummeed hai ki jis tarah list mein mera naam aaya tha vaise hi meri joining bhi ho jaayegi....aur ek baar main police mein chala gaya to us ki khair nahi"

"mera Raj sapne bahut dekhta hai" nagma achchaanak boli.

"teri gaanD isne pahle sapne mein hi maari thi phir sachmuch mein bhi maar li....he..he..ha..ha" mohit ne kaha.

"tumne sikhaaya hai ise gaanD maarna varna mera Raj bas meri chut ghista tha bas" nagma ne kaha.

Raj ne mohit ko kohni maari, "kya karte ho guru...padmini ji ka to khyaal kiya karo...tum bhi nagma ki tarah kuch bhi bol dete ho aur use bhi moka mil jaata hai kuch bhi bolne ka" Raj ne dheere se kaha.

"kya karun yaar yu hi jubaan fisal jaati hai....vaise tu ye bata bahut chinta rahti hai tujhe padmini ji ki dil aa gaya kya tera us par uhh" mohit ne bhi dheere se kaha

"kya baat karte ho gur...main to bas"

"padmini ji ki chut milni muskil hai...sapne dekhna chod de" mohit ne kaha.

"aisa kuch nahi hai jaisa tum soch rahe ho....mujhe to bas insaaniyat ke naate hamdardi hai padmini ji se. Haan padmini ji bahut shunder hain....par main ab kuch aisa vaisa nahi sochta"

"kyon be tv par padmini ji ko dekh kar to muth maar li thi tune aur ab aisi baate kar raha hai"

"tab ki baat alag thi....main mila nahi tha tab padmini ji se....mil kar unke baare mein kuch aur hi ahsaas hain"

"saale kahi ye pyar to nahi hai....shaadi-shuda hai vo"

"main unki respect karta hun bas....mere man mein unke prati koi galat khyaal nahi hai...har ladki ek jaisi nahi hoti, Samjha karo guru"

"hmm....achcha ek baat bata puja ke baare mein kya khyaal hai ya phir vaha bhi tere iraade nek hain" mohit ne kaha.

"puja ke baare mein iraade bilkul nek nahi hain....par lagta hai vo pahle hi dalva chuki hai...jaroor us vikki ne li hogi uski"

"hmm puri baat to pata nahi par lagta to yahi hai ki usne puja ki bhi porn movie banaayi thi"

"haan aur shaayad vo use blackmail kar raha tha...tang aakar vo use maarne pahunch gayi" Raj ne kaha.

Raj aur mohit ne jitni baate shuni thi vikki ke ghar pe uske anusaar andaaja laga rahe the.

"puja vaise padmini ji se kam shunder nahi hai" Raj ne kaha.

"achcha to tu puja ki chut maar ke padmini ji ka maja lega" mohit ne kaha.

"nahi guru tum phir mujhe galat samajh rahe ho...main sach man se padmini ji ki madad kar raha hun"

"hmm....par puja nagma jaisi nahi hai....vo itni asaani se nahi degi apni" mohit ne kaha.

"jaanta hun....sach kahun to main to puja ko pataane ke liye hi chakkar lagaata tha uske ghar ke lekin pat gayi nagma" Raj ne kaha.

"to kya hua nagma puja jaisi shunder na sahi par iski apni hi shundarta hai...body bahut sexy hai saali ki" mohit ne kaha.

"vo to hai tabhi to maine moka nahi gavaaya. Pahli baar nagma ko usi ke ghar mein choda tha"

"kya baat hai asli guru to tum ho main to bas naam ka guru hun"

"puja ko bhi pata leta par usne ek baar hame dekh liya"

"vo kaise?"

"maine nagma ko ek baar phir usi ke ghar mein chod raha tha. Bapu iska kahi gaya tha aur puja college gayi thi. Puja college se jaldi aa gayi aur usne khidki se sab dekh liya"

"phir to tera chance kam hai....tujhe nahi degi vo" mohit ne kaha.

"koshis karne mein kya harz hai....vaise aaj to usne achche se baat ki mujhse"

"mujhe to vo bhi padmini jaisi lagi...baaki teri kismat...tujhe mil jaaye to mera bhi dhyaan rakhna"

"dhyaan rakhna matlab vo nagma nahi hai...iski baat aur hai"

"hai to isi ki bahan...dekhna vo bhi isi ke jaisi banegi" mohit ne kaha.

"mujhe aisa nahi lagta puja aur nagma mein jamin aasmaan ka fark hai" Raj ne kaha.

Idhar nagma baar-baar karvate badal rahi hai.

"uff ajeeb bistar hai ye to neend hi nahi aa rahi" nagma dheere se badbadaayi.

Achchaanak vo padmini se aakar chipak gayi aur boli, "so gayi kya tum"

"kya hai...dur hato"

"daro mat main aisi ladki nahi hun...mujhe sirf aadmiyon ke lund achche lagte hain" nagma ne kaha.

"phir bhi dur raho mujhse...neend aa rahi hai mujhe" padmini ne kaha.

"mujhe to bilkul neend nahi aa rahi is par tum kaise so rahi ho" nagma ne kaha.

"aankhe band karo aur so jao...neend aa jaayegi" padmini ne kaha.

"Raj badi fikar karne laga hai tumhaari mujhe chinta ho rahi hai...kahin itni achi chut maarne wala tum mujhse chin na lo" nagma ne kaha.

"mera koi interest nahi hai Raj mein samjhi kitni baar bataaun main....vaise har kisi ke saath tum chal padti ho phir Raj se itna lagaav kyon hai"

"tum nahi samjhogi uske jaisa premi milega na tabhi samajh paaogi" nagma ne kaha.

"mujhe samajhna bhi nahi hai" padmini ne kaha.

"Raj jis tarah se chut mein ghusaata hai vaise koi aur nahi ghussata. Khaaskar jin aadmiyon se main mili hun vo to Raj ke aage feeke hi hain" nagma ne kaha.

"ye sab ek number ki bakwaas hai" padmini badbadaayi.

"nahi sach kah rahi hun" nagma ne kaha. Nagma ne padmini ke chutdon par haath rakha aur boli, "pata nahi kya karta hai vo...gaanD ko pakad kar jordaar tarike se ghusaata hai chut mein lund"

padmini ne nagma ka haath apne chatado se dur jhatak diya aur boli, "yaha touch mat karo"

"kyon kya hua kuch-kuch hota hai kya....mujhe lag hi raha tha ki tumhaari gaanD bahut sexy hai ab saabit bhi ho gaya. Liya hai na tune bhi gaanD mein"

"aisa kuch nahi hai...main ye ulte kaam nahi karti" padmini ne kaha.

"main hi kaun sa karti hun par ye aadmi log kisi na kisi bahaane se le hi lete hain meri gaanD ab dekho na kaise maari thi bholu ne meri gaanD aaj jabki maine use pahle hi mana kiya tha." nagma ne kaha.

"vo kahaani tum suna chuki ho...so jao ab raat bahut ho gayi hai" padmini ne kaha.

"sach bata kya tumne sach mein nahi liya gaanD mein ab tak" nagma ne pucha.

"ab kya stamp paper pe likhva ke laakar du" padmini jhalla kar boli.

"theek hai theek hai tumhaari gaanD hai tum jyada achche se jaanti ho...vaise tera pati ek number ka chutiya tha jo usne itni sexy gaanD nahi maari" nagma ne kaha.

"dur hato ab...meri neend na kharaab karo" padmini ne nagma ko jhatka diya.

"ok ji main to haal-chaal puchne aayi thi good night" nagma ne kaha.

"uff main apne gale ki chain shayad surinder ke ghar bhul aayi" monika badbadaayi.

Monika apne ghar pahunch gayi hai. Use jara bhi andaaja nahi ki uske surinder ke ghar se jaane ke baad vaha khun ki nadiya bah gayi.

"abhi surinder ko phone karti hun..."

monika surinder ka phone try karti hai.

"kya baat hai...ye phone kyon nahi utha raha" monika badbadaayi.

"shaayad so gaya hoga....main bhi thodi der let leti hun....subah baat karungi surinder se."

monika bistar par pasar jaati hai.

"surinder ke saath kab tak chalega ye sab....kisi din sanjay ko pata chal gaya to....nahi...nahi aisa nahi hoga....par jo bhi ho mujhe jaldi ye sab khatam karna hoga"

"is se pahle ki mere tan ki hawas meri jindaagi barbaad kar de...is kahaani ko yahi khatam kiya jaaye. Par main ye bhi jaanti hun ki ye sab sochna asaan hai aur karna muskil...chalo dekhte hain kismat kaha le jaati hai"

"na main us din shaadi mein jaati aur na hi surinder ke chakkar mein fasti......kambakhat ne pahli hi mulaakat mein fansa liya mujhe" monika sochte-sochte khayalo mein kho jaati hai.......................

Kramashah..............................

rajaarkey
Platinum Member
Posts: 3125
Joined: 10 Oct 2014 04:39

Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 11 Dec 2014 04:01

raj sharma stories

बात एक रात की--24

गतान्क से आगे.................

"हाइ मोनिका संजय कहा है?"

"यार सोनिया वो किसी काम में बिज़ी थे नही आ पाएँगे"

"चल कोई बात नही इनसे मिलो ये हैं मिस्टर सुरिंदर मेरे बड़े भाई"

सुरिंदर ने मोनिका को उपर से नीचे तक देखा और बोला,"सोनिया तुम्हारी फ़्रेंड तो बहुत सुंदर है"

मोनिका ने सुरिंदर की नज़रो में देखा और शरम से अपनी नज़रे झुका ली.

"भैया आप मोनिका से बात करो मैं अभी आई" सोनिया ने कहा.

"अरे सोनिया सुन तो" मोनिका ने सोनिया को टोका पर वो उसकी बात उनसुनी करके चली गयी.

"आप शादी शुदा हो" सुरिंदर ने पूछा.

"हाँ और आप?" मोनिका ने पूछा.

"अभी कुँवारा हूँ....आप जैसी हसीना मिल जाती तो अब तक शादी हो चुकी होती"

मोनिका फिर से शर्मा उठी.

"क्या बात है आप शरमाती बहुत हैं आओ थोड़ा एकांत में चलते हैं यहा भीड़ बहुत है"

"एकांत! एकांत में क्यों"

"देखो मेरे इरादे तुम्हारे बारे में बिल्कुल नेक नही हैं....मर्ज़ी हो तो चलो वरना रहने दो...मैं घुमा फिरा कर बात नही करता."

"हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी..."

"बिना हिम्मत के चूत नही मिलती मेडम"

"एक्सक्यूस मे! क्या कहा आपने"

"वही जो आपने सुना....मैं उस गार्डेन में जा रहा हूँ....अपनी चूत में मेरा लंड फील करने की इच्छा हो तो चली आना" सुरिंदर ने गार्डेन की ओर इशारा करते हुए कहा.

"तुम्हे क्या लगता है मैं तुम्हारे झाँसे में आउन्गि....आइ आम हॅप्पिली मेरिड....मुझ पे वक्त बर्बाद मत करो"

"मैं तो इनवेस्टमेंट कर रहा हूँ वक्त की....क्या पता रिटर्न मिल जाए"

सुरिंदर ने आस पास देखा और मोनिका की गान्ड पे हाथ रख कर बोला, "आओ ना ऐसा मज़ा दूँगा की अपने पति को भूल जाओगी"

"हाथ हटाओ जनाब कोई देख लेगा...वैसे मेरे पति मुझे बहुत मज़ा देते हैं"

"आज दूसरा लंड ट्राइ करके देखो....यू विल फील बेटर" सुरिंदर ने कहा.

"आइ आम नोट इंट्रेस्टेड"

"एक बार चलो तो......कुछ और ना सही तन्हाई में प्यार की दो बाते ही कर लेंगे"

"ह्म ठीक है पर बातो के अलावा और कुछ नही ओके" मोनिका ने कहा.

"ओक जी....चलो तो सही"

दोनो गार्डेन में आ जाते हैं.

"अच्छा गार्डेन बनाया है पॅलेस वालो ने....शादी के धूम धड़ाके से दूर यहा आराम से बात की जा सकती है"

"आपका शादी में मन नही लगता क्या?"

"अपनी शादी हो तो बात भी हो दूसरो की शादी में क्या मन लगेगा"

"ह्म....बहुत दिल फेंक हो तुम"

"भाई तो चारा डालता हूँ मछली फँस जाए तो ठीक है वरना कही और जुगाड़ लगाता हूँ"

"तो क्या मछली फँस गयी" मोनिका हंस कर बोली.

"वो तो मछली के होंटो को चूम कर ही पता चलेगा" सुरिंदर ने कहते ही अचानक मोनिका को पकड़ कर उसके होंटो को अपने में जाकड़ लिया.

"उम्म्म....च...छोड़ो"

"रसीले होन्ट हैं तुम्हारे"

"मछली अभी फँसी नही थी"

"मेरा यकीन करो फँस चुकी है" सुरिंदर ने कहा और मोनिका के बूब्स मसल्ने लगा.

"आअहह यू आर डर्टी फ्लर्ट" मोनिका बड़बड़ाई.

"और तुम प्यारी मछली हो" सुरिंदर ने कहा.

"किसी ने देख लिया तो" मोनिका ने कहा.

"सब शादी में मगन हैं...फिर भी सेफ्टी के लिए उस पेड़ के पीछे चलते हैं"

सुरिंदर मोनिका का हाथ पकड़ कर पेड़ के पीछे ले आया.

"ज़्यादा वक्त नही है....ये साड़ी उपर उठाओ और झुक जाओ...मैं पीछे से चूत में डालूँगा"

"देखो मुझे डर लग रहा है....मेरी शादी शुदा ज़िंदागी ना ख़तरे में पड़ जाए"

"चिंता मत करो, ऐसा कुछ नही होगा...उठाओ साड़ी उपर"

"नही मुझ से नही होगा...चलो चलते हैं" मोनिका ने कहा.

सुरिंदर ने अपना लंड बाहर निकाला और उसे मोनिका के हाथ में थमा दिया और बोला, "इसे क्या तड़प्ता छ्चोड़ जाओगी"

मोनिका ने सुन्दर के लंड को अच्छे से हाथ में पकड़ा और बोली, "मैने अपने पति के सिवा किसी से नही किया आज तक"

"तो आज कर्लो तुम्हे डिफ़्फरेंट लगेगा...हर लंड अलग मज़ा देता है"

"यहा गार्डेन में कोई देख लेगा समझते क्यों नही"

"तभी तो कह रहा हूँ जल्दी साड़ी उपर खींच कर झुक जाओ" सुरिंदर ने कहा और मोनिका को अपना सामने घुमा दिया और खुद ही उसकी साड़ी उपर करने लगा.

"रूको मैं करती हूँ." मोनिका ने साड़ी उपर सरका ली.

"अब झुको तो सही खड़े खड़े नही घुस्सेगा लंड चूत में" सुरिंदर ने मोनिका के कंधे पर दबाव बनाते हुए कहा.

मोनिका झुक गयी. मोनिका के झुकते ही सुरिंदर ने लंड को मोनिका की चूत पर टीका दिया और बोला, "यकीन नही था की तुम इतनी जल्दी पट जाओगी" सुरिंदर ने ज़ोर का धक्का मारा और उसका लंड पूरा अंदर फिसल गया.

"ह्म ये चूत तो खूब चूड़ी हुई है....सच में तेरा पति तो खूब मज़े लेता है....हे..हे..हा..हा"

"आआहह......बाते कम करो" मोनिका बड़बड़ाई.

सुरिंदर ने ज़ोर ज़ोर से मोनिका की चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिए.

"पर जो भी हो तेरे पति ने स्मूद रास्ता बना रखा है तुम्हारी चूत में....रोज चोद्ता है क्या वो"

"उउउहह......रोज तो नही पर हर 2-3 दिन में" मोनिका ने हाफ्ते हुए कहा.

"कैसा लग रहा है मेरा लंड, चूत में"

"अच्छा लग रहा है....आअहह जल्दी करो कोई आ जाएगा."

"बस होने वाला है...आअहह...वैसे कोई डिफ़्फरेंसे तो बताओ मुझ मे और तुम्हारे पति में" सुरिंदर ने कहा.

"आअहह तुम धक्के तेज मारते हो....आअहह"

"हे..हे ऐसा है क्या तो ये बताओ दुबारा भी मर्वाओगि क्या धक्के"

"पहले ये धक्के तो रोको आअहह कोई आ गया तो मैं फँस जाउन्गि"

"ये लो फिर छोड़ने जा रहा हूँ मैं अपना जूस तुम्हारे अंदर सम्भालो"

अगले ही पल मोनिका को अपनी चूत में हॉट हॉट लिक्विड महसूस हुआ.

4-5 तेज धक्के निकाल कर सुरिंदर रुक गया. तभी मोनिका की नज़र उनकी तरफ आते एक साए पर पड़ी.

"निकालो बाहर जल्दी कोई इधर आ रहा है" मोनिका बोली.

सुरिंदर ने तुरंत लंड मोनिका की चूत से बाहर खींच लिया और अपनी पॅंट में डाल कर ज़िप बंद कर ली. मोनिका ने भी तुरंत ही अपनी साड़ी नीचे सर्काई और कपड़े अड्जस्ट किए.

"आओ चलें उसकी चिंता मत करो यू ही घूम रहा होगा कोई" सुरिंदर ने कहा.

"मैं तो डर ही गयी थी"

"शूकर मनाओ काम तो पूरा हो गया....धक्के अधूरे रह जाते तो पछताना पड़ता."

"वो तो मैने ही प्रेशर बनाया वरना तो तुम धक्के पे धक्के मारे जा रहे थे." मोनिका हस्ते हुए बोली.

"क्या करूँ तुम्हारी चूत ही ऐसी है मन करता है धक्के मारे चले जाओ." सुरिंदर ने मोनिका की गान्ड पर हाथ फिराते हुए कहा.

"अच्छा...रहने दो ऐसा कुछ ख़ास नही है मेरी....." मोनिका शर्मा कर बोली.

"अच्छा ये बताओ दुबारा धक्के कब मर्वाओगि"

"मेरा कोई अफेर चलाने का मूड नही है समझे"

"क्यों तुम्हे तेज धक्के पसंद नही आए क्या?"

"ऐसी बात नही है पर मैं अपने पति के साथ खुस हूँ"

"तो क्या हुआ....कभी कभी हम भी धक्के मार लेंगे अपना नंबर दे दो"

"सोनिया के पास है मेरा नंबर" मोनिका ने कहा.

"ह्म ठीक है फिर इसका मतलब दुबारा मुलाकात जल्दी होगी अपनी"

"देखेंगे"

अचानक दरवाजा खड़कने लगा और मोनिका अपने ख़यालो से बाहर आ गयी. उसने घड़ी की और देखा रात के एक बजे थे. "इस वक्त कौन आ गया"

मोनिका ने डरते डरते दरवाजा खोला. "तुम! तुम तो 2 बजे आने वाले थे"

"मुझे देख कर ख़ुसी नही हुई क्या?"

"ऐसी बात नही है मैं तो बस हैरान हूँ कि तुम्हारी ट्रेन तो 2 बजे आनी थी"

"छोड़ो ये सब और गरमा गरम चाय बनाओ बहुत थका हुआ हूँ"

"अच्छा हुआ मैं सुरिंदर के घर से जल्दी आ गयी वरना फँस जाती आज." मोनिका ने किचन की ओर जाते हुए सोचा.

..............................

....................................................

"कहा ले जा रहे हो मुझे"

"आओ ना पद्‍मिनी जी...आपको अच्छा लगेगा आओ"

"वो यही कही आस पास है"

"उसे मैं पकड़ लूँगा चिंता मत करो अब मैं पोलीस में हूँ ज़्यादा देर नही बच्चेगा वो"

"मुझे लगा था कि ये वर्दी किसी से माँग कर लाए हो...तुम पोलीस में कैसे चले गये"

"आपकी खातिर पद्‍मिनी जी आपको इस मुसीबत से जो निकालना था"

"तुम मेरी इतनी परवाह क्यों करते हो"

"पता नही शायद आपसे प्यार हो गया है"

"प्यार और तुम....सब जानती हूँ मैं ये नाटक क्या है...मैं तुम्हारे झाँसे में आने वाली नही हूँ"

"ये कोई झाँसा नही है पद्‍मिनी जी मेरे दिल की सच्चाई है कहो तो अपना दिल चीर कर दिखा दू"

"दीखाओ चीर कर मैं भी तो देखूं कितना पाप छुपा है वाहा"

"जैसी आपकी मर्ज़ी" वो एक चाकू उठाता है और अपनी कमीज़ के बटन खोल कर चाकू से अपना जिगर चीरेने लगता है. खून की कुछ बूंदे उभर आती हैं उसके सीने पर.

"रूको ये क्या कोई मज़ाक है?"

"पद्‍मिनी जी मेरे लिए तो ये हक़ीकत है आप शायद इसे मज़ाक समझ रही हैं"

"ऐसे दिल चीर दोगे तो उस को कौन पकड़ेगा"

"मेरा भूत उसे पकड़ कर जहन्नुम में डाल देगा"

"तुम प्यार कैसे कर सकते हो?"

"प्यार तो प्यार है पद्‍मिनी जी...कभी भी कही भी हो सकता है"

"नगमा को पता चल गया तो वो मुझे नही छोड़ेगी...... काई बार चेतावनी दे चुकी है मुझे की मेरे राज से दूर रहना"

क्रमशः..............................

BAAT EK RAAT KI--24

gataank se aage.................

"hi monika sanjay kaha hai?"

"yaar soniya vo kisi kaam mein busy the nahi aa paayenge"

"chal koi baat nahi inse milo ye hain mr surinder mere bade bhai"

surinder ne monika ko upar se neeche tak dekha aur bola,"soniya tumhaari freind to bahut shunder hai"

monika ne surinder ki nazro mein dekha aur shram se apni nazre jhuka li.

"bhaiya aap monika se baat karo main abhi aayi" soniya ne kaha.

"arey soniya shun to" monika ne soniya ko toka par vo uski baat unshuni karke chali gayi.

"aap shaadi shuda ho" surinder ne pucha.

"haan aur aap?" monika ne pucha.

"abhi kunvaara hun....aap jaisi hasina mil jaati to ab tak shaadi ho chuki hoti"

monika phir se sharma uthi.

"kya baat hai aap sharmaati bahut hain aao thoda ekaant mein chalte hain yaha bheed bahut hai"

"ekaant! Ekaant mein kyon"

"dekho mere iraade tumhaare baare mein bilkul nek nahi hain....marji ho to chalo varna rahne do...main ghuma fira kar baat nahi karta."

"himmat ki daat deni padegi..."

"bina himmat ke chut nahi milti madam"

"excuse me! Kya kaha aapne"

"vahi jo aapne shuna....main us garden mein ja raha hun....apni chut mein mera lund feel karne ki icha ho to chali aana" surinder ne garden ki aur ishaaraa karte hue kaha.

"tumhe kya lagta hai main tumhaare jhaanse mein aaungi....i am happily marreid....mujh pe vakt barbaad mat karo"

"main to investment kar raha hun vakt ki....kya pata return mil jaaye"

surinder ne aas paas dekha aur monika ki gaanD pe haath rakh kar bola, "aao na aisa maja dunga ki apne pati ko bhul jaaogi"

"haath hataao janaab koi dekh lega...vaise mere pati mujhe bahut maja dete hain"

"aaj dusra lund try karke dekho....you will feel better" surinder ne kaha.

"i am not interested"

"ek baar chalo to......kuch aur na sahi tanhaayi mein pyar ki do baate hi kar lenge"

"hmm theek hai par baato ke alaava aur kuch nahi ok" monika ne kaha.

"ok ji....chalo to sahi"

daono garden mein aa jaate hain.

"achcha garden banaaya hai palace waalo ne....shaadi ke dhum dhadaake se door yaha araam se baat ki ja sakti hai"

"aapka shaadi mein man nahi lagta kya?"

"apni shaadi ho to baat bhi ho dusro ki shaadi mein kya man lagega"

"hmm....bahut dil fenk ho tum"

"bhai to chaara daalta hun machli fans jaaye to theek hai varna kahi aur jagaad lagaata hun"

"to kya machli fans gayi" monika hans kar boli.

"vo to machli ke honto ko chum kar hi pata chalega" surinder ne kahte hi achchaanak monika ko pakad kar uske honto ko apne mein jakad liya.

"ummm....ch...chodo"

"rasile hont hain tumhaare"

"machli abhi fansi nahi thi"

"mera yakin karo fans chuki hai" surinder ne kaha aur monika ke boobs masalne laga.

"aaahhhhh you are dirty flirt" monika badbadaayi.

"aur tum pyari machli ho" surinder ne kaha.

"kisi ne dekh liya to" monika ne kaha.

"sab shaadi mein magan hain...phir bhi safety ke liye us ped ke peeche chalte hain"

surinder monika ka haath pakad kar ped ke peeche le aaya.

"jyada vakt nahi hai....ye shaadi upar uthaao aur jhuk jao...main peeche se chut mein daalunga"

"dekho mujhe dar lag raha hai....meri shaadi shuda jindaagi na khatre mein pad jaaye"

"chinta mat karo, aisa kuch nahi hoga...uthaao saadi upar"

"nahi mujh se nahi hoga...chalo chalte hain" monika ne kaha.

Surinder ne apna lund baahar nikaala aur use monika ke haath mein thama diya aur bola, "ise kya tadapta chhod jaaogi"

monika ne suinder ke lund ko achche se haath mein pakda aur boli, "maine apne pati ke shiva kisi se nahi kiya aaj tak"

"to aaj karlo tumhe diffrent lagega...har lund alag maja deta hai"

"yaha garden mein koi dekh lega samajhte kyon nahi"

"tabhi to kah raha hun jaldi shaadi upar kheench kar jhuk jaao" surinder ne kaha aur monika ko apna saamne ghuma diya aur khud hi uski saadi upar karne laga.

"ruko main karti hun." monika ne saadi upar sarka li.

"ab jhuko to sahi khade khade nahi ghussega lund chut mein" surinder ne monika ke kandhe par dabaav banaate hue kaha.

Monika jhuk gayi. Monika ke jhukte hi surinder ne lund ko monika ki chut par tika diya aur bola, "yakin nahi tha ki tum itni jaldi pat jaaogi" surinder ne jor ka dhakka maara aur uska lund pura ander fisal gaya.

"hmm ye chut to khub chudi huyi hai....sach mein tera pati to khub maje leta hai....he..he..ha..ha"

"aaaahhhhhh......baate kam karo" monika badbadaayi.

Surinder ne jor jor se monika ki chut mein dhakke lagaane shuru kar diye.

"par jo bhi ho tere pati ne smooth raasta bana rakha hai tumhaari chut mein....roj chodta hai kya vo"

"uuuhhhh......roj to nahi par har 2-3 din mein" monika ne haafte hue kaha.

"kaisa lag raha hai mera lund, chut mein"

"achcha lag raha hai....aaahhhhhh jaldi karo koi aa jaayega."

"bas hone wala hai...aaahhhhhh...vaise koi diffrence to bataao mujh me aur tumhaare pati mein" surinder ne kaha.

"aaahhhh tum dhakke tej maarte ho....aaahhhh"

"he..he aisa hai kya to ye bataao dubaara bhi marvaaogi kya dhakke"

"pahle ye dhakke to roko aaahhhh koi aa gaya to main fans jaaungi"

"ye lo phir chodne ja raha hun main apna juice tumhaare ander sambhaalo"

agle hi pal monika ko apni chut mein hot hot liquid mahsus hua.

4-5 tej dhakke nikaal kar surinder ruk gaya. Tabhi monika ki nazar unki taraf aate ek saaye par padi.

"nikaalo baahar jaldi koi idhar aa raha hai" monika boli.

Surinder ne turant lund monika ki chut se baahar kheench liya aur apni pant mein daal kar zip band kar li. Monika ne bhi turant hi apni saadi neeche sarkaayi aur kapde adjust kiye.

"aao chalein uski chinta mat karo yu hi ghum raha hoga koi" surinder ne kaha.

"main to dar hi gayi thi"

"shukar manaao kaam to pura ho gaya....dhakke adhure rah jaate to pachtaana padta."

"vo to maine hi pressure bana varna to tum dhakke pe dhakke maare ja rahe the." monika haste hue boli.

"kya karun tumhaari chut hi aisi hai man karta hai dhakke maare chale jao." surinder ne monika ki gaanD par haath phiraate hue kaha.

"achcha...rahne do aisa kuch khaas nahi hai meri....." monika sharma kar boli.

"achcha ye bataao dubaara dhakke kab marvaaogi"

"mera koi affaire chalaane ka mud nahi hai samjhe"

"kyon tumhe tej dhakke pasand nahi aaye kya?"

"aisi baat nahi hai par main apne pati ke saath khus hun"

"to kya hua....kabhi kabhi hum bhi dhakke maar lenge apna number de do"

"soniya ke paas hai mera number" monika ne kaha.

"hmm theek hai phir iska matlab dubaara mulakaat jaldi hogi apni"

"dekhnege"

achchaanak darvaaja khadakne laga aur monika apne khayaalo se baahar aa gayi. Usne ghadi ki aur dekha raat ke ek baje the. "is vakt kaun aa gaya"

monika ne darte darte darvaaja khola. "tum! Tum to 2 baje aane wale the"

"mujhe dekh kar khusi nahi huyi kya?"

"aisi baat nahi hai main to bas hairaan hun ki tumhaari train to 2 baje aani thi"

"chodo ye sab aur garma garam chaaye banaao bahut thaka hua hun"

"achcha hua main surinder ke ghar se jaldi aa gayi varna fans jaati aaj." monika ne kitchen ki aur jaate hue socha.

"kaha le ja rahe ho mujhe"

"aao na padmini ji...aapko achcha lagega aao"

"vo yahi kahi aas paas hai"

"use main pakad lunga chinta mat karo ab main police mein hun jyada der nahi bachchega vo"

"mujhe laga tha ki ye vardi kisi se maang kar laaye ho...tum police mein kaise chale gaye"

"aapki khaatir padmini ji aapko is musibat se jo nikaalna tha"

"tum meri itni parvaah kyon karte ho"

"pata nahi shaayad aapse pyar ho gaya hai"

"pyar aur tum....sab jaanti hun main ye naatak kya hai...main tumhaare jhaanse mein aane waali nahi hun"

"ye koi jhaansa nahi hai padmini ji mere dil ki sachchaayi hai kaho to apna dil cheer kar deekha du"

"deekhaao cheer kar main bhi to dekhun kitna paap chupa hai vaha"

"jaisi aapki marji" vo ek chaaku uthaata hai aur apni kameez ke button khol kar chaku se apna jigar cheerene lagta hai. Khun ki kuch bunde ubhar aati hain uske sheene par.

"ruko ye kya koi mazaak hai?"

"padmini ji mere liye to ye hakeekat hai aap shaayad ise mazaak samajh rahi hain"

"aise dil cheer doge to us ko kaun pakdega"

"mera bhoot use pakad kar jahannum mein daal dega"

"tum pyar kaise kar sakte ho?"

"pyar to pyar hai padmini ji...kabhi bhi kahi bhi ho sakta hai"

"nagma ko pata chal gaya to vo mujhe nahi chodegi...... kayi baar chetaavni de chuki hai mujhe ki mere Raj se dur rahna"

Kramashah..............................