कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और compleet

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raj..
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Re: कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और हनीमून

Unread post by raj.. » 12 Nov 2014 04:47

साथ जुड़े किचेन मे थाली रख के बाहर का दरवाजा खोल के जब मैं अंदर आकर फिर से उनके गोद मे बैठी तो मैं तब तक ब्रा पेटिकोट मे हो चुकी थी. मुझे इतना अच्छा लग रहा था कि मैं बता नही सकती.ससुराल मे एक तरह से ये मैं पहली बार लेकिन जिस तरह से इन्होने मेरा साथ दिया सच मे ऐसे पति के लिए मैं कुछ भी कर सकती थी. उनके आँखो पे से पट्टी खोलने के पहले, मेने कस कस के दो चुम्मि ली सीधे उनके होंठो पे. पट्टी खोलने के साथ मेने वो फिल्म भी आन कर दी जो वो देख रहे थे.

वो ब्लू फिल्म थी लेकिन एकदम अलग. एक हनी मून पे गये कपल की और एक दम रीयल लग रहा था होटेल मे किसी हिडेन कैमरे से खींची गयी थी क्यो कि सारे शॉट एक ही एगमल से लिए गये लगते थे. पति उसे छेड़ रहा था तंग कर था, लग रहा था दोनो कुछ देर से चालू थे. वो उसके मम्मे मसलता, लिंग लगा के रगड़ता और वो बहुत कहती तो थोड़ा सा डाल के रुक जाता. वो बेचारी व्याकुल थी, तड़प रही थी, चूतड़ पटक रही थी. वो बोलती करो ना, प्लीज़ और ना तड़पाओ, डाल दो पूरा अंदर तक. वो उसके निपल्स पिंच कर के पूछता क्या डाल दूं. वो बेचारी फिर अरज करती, अरे डाल दो ना अंदर तक वही वही.

वो और छेड़ता. बैठी हो के वो बोली,

"अरे डाल दो ना अपना लंड क्यो तड़पा रहे हो."

"कहाँ" उसने फिर भी नही शुरू किया.

"अरे क्यो तड़पाते हो आग लगा के अरे चोद दो मेरी बुर, पेल दो अपना लंड कस के मेरी चूत मे चोदो कस कस के." (वो मेरी ओर देख के मुस्काराए और कस के मेरी चूंची दबा दी. अब तक हम दोनो भी उसी हालत मे पहुँच गये थे जिस हालत मे पर्दे पर के कपल थे).

"ले ले ले मेरा मोटा मस्त लंड ले अपनी चूत मे, चुदा कस के" और ये कह के कस के उसने लंड पेल दिया.

"दे राजा दे चोद मुझे, चोद चोद कस कस के चोद दे मेरी बुर" मस्ती से अब उसकी भी हालत खराब थी और वो बोल बोल के, चूतड़ उछाल के चुदवा रही थी. इधर इन्होने भी अपनी उंगली मेरी चूत मे डाल उंगली से ही घचघाच चुदाई चालू कर दी थी.

उनका लंड भी कस के मेरे चूतड़ की दरारो के बीच दबा सर पटक रहा था.

मस्ती मे आ के अपनी पत्नी के जोबन उठा के, जैसे चैलेंज करते हुए बोला, ( जैसे कैमरे की ओर दिखा रहा हो) " अरे कितने मस्त मम्मे है मेरे माल के, किसी के हो नही सकते."

"अरे मेरे माल के मम्मो के आगे कुछ भी नही है तेरी वाली के." उसी तरह मेरे मम्मो को उसे दिखाते हुए वो बोले और अपने जोबन की ये तारीफ सुन खुशी से मेने अपनी रसीली चूंची उनकी ओर बढ़ा दी और उन्होने कच कचा के काट लिया. तब तक उधर टीवी पे, वो उपर हो गयी थी और अपने पति के लंड के उपर चढ़ के खचाखच चोद रही थी. और साथ मे बोल भी रही थी, हाँ चोद मुझे और कस के हाँ, पेल दे लंड अपना जड़ तक, और वो बी नीचे से कभी उसके मम्मे पकड़ के कभी कमर पकड़ के, अपने हिप्स उठा के चोद रहा था. कुछ देर बाद लेकिन उसको छेड़ते हुए टी वी मे उसके पति ने धक्के धीमे कर दिए बल्कि बीच बीच मे रोक ही देता था. उस औरत की तो हालत खराब हो रही थी. (और, हालत मेरी ही कौन सी अच्छी थी.

चूंचियो की कस के रगडन मसलन, मेरी कसी मस्त चूत मे घचघाच जाती उनकी उंगलिया और कभी कभी तो उनका अंगूठा मेरे क्लिट को कस के रगड़ देता था).

उतेज़ित हो के वो अपने पति की छाती पे अपनी चूंचिया रगड़ के बोली,

"अरे चोद ने पूरी ताक़त से. क्या बाकी ताक़त अपनी बहनो के लिए बचा रखी है."

इधर मेरी भी उंगलियो ने उनके लंड के टोपे पे से चमड़ा सरका दिया था. उनके सूपदे को भींच के अपने चूतड़ से उनके लंड को कस के दबा के रगड़ के मैं भी बोल उठी,

"अरे ये क्या उंगली से चोद रहे हो. चोदना है तो इससे चोदो. इसे क्या मेरी ननदो के लिए बचा रखा है." फिर क्या था अगले ही पल बाहो मे उठा के उन्होने मुझे पलंग पे लिटा दिया और रिमोट से फिल्म बंद करते बोले,

"बाकी फिल्म बाद मे रात मे. अभी हमारी फिल्म, मंजूर." हंस के मैं बोली मंजूर ,

लेकिन उनके लंड को दो तिहाई पे दबा के मैं बोली, अभी इतने ही, पूरा आज रात मे मंजूर. और हंस के वो बोले मंजूर.

अगले ही पल वो मेरे अंदर थे.

फिर तो मेरी चूंचियो को मसलते हुए, मेरी कमर पकड़ के कस कस के धक्के लगाते, उन्होने जबरदस्त चुदाई चालू कर दी. और नीचे से मैं भी साथ दे रही थी,

पूरे जोश से. जब वो कस के अपने मोटा लंड पेलते तो मैं भी नीचे से पूरी ताक़त से अपने चूतड़ उछालती, उनका लंड मेरी चूत के अंदर रगड़ता हुआ जाता तो मेरी चूत भी उसे कस के भींच लेती. आज मैं भी कस कस के शरम छोड़ उनके साथ बोल रही थी,

हाँ राजा हाँ और ज़ोर से पेलो ने कस के. और मेरी आवाज़ सुन के कस के वो मुझे दबोच लेते,

मेरी चूंचियो को मसल देते कचकचा के काट लेते. थोड़ी ही देर मे वो लंड,

सुपाडे तक निकाल लेते और जब मैं मस्ती से बिलबिलाने लगती तो वो फिर मेरे चूतड़ पकड़ एक बार मे ही पूरा का पूरा पेल देते और मैं दर्द से चीख उठती. कभी मैं चीखती,

कभी मैं सिसकती, कभी कस कस के चूतड़ पटकती. हम दोनो ने कस के एक दूसरे को अपनी बाहो मे बाँध रखा था, बाकी सारी दुनिया से बेख़बर. तभी मुझे याद आया कि किचेन का बाहर का दरवाजा तो मेने खोल दिया था, थाली ले जाने के लिए, लेकिन किचेन से बेड रूम का दरवाजा मेने सिर्फ़ भिड़ाया था. तभी मुझे लगा, शायद दरवाजे की फाँक खुली सी है और कोई झाँक रहा है. मुझे लगा शायद दुलारी है.

थाली उठाने आई होगी और तभी उन्होने मेरा ध्यान अपनी ओर खींचा और बोला, डालु.

मेने कस के उन्हे अपनी ओर खींचा और बोली हाँ राजा हाँ डाल दो अपने लंड, दो ना पूरा,

बहुत मज़ा आ रहा है और उन्होने कस के, मेरी चूंची पकड़, हचक के चोदना चालू कर दिया. और मैं भी चूतड़ उठा उठा के तभी मेरी कनेखियो ने देखा शायद अंजलि भी है दुलारी के साथ और मेरे पैर कैंची की तरह उनके हिप्स पे बँध गये .मेने कस के उनकी पीठ पे अपने नाख़ून गढ़ा दिए, और उनके कान मे बोली, डार्लिंग तुम बहुत अच्छे हो आई लव यू. उन्होने भी मेरा चेहरा उठा के खूब ज़ोर से कहा डार्लिंग आई लव यू डार्लिंग आई लव यू और सेकडो चुम्मि मेरे चेहरे पे ले डाले. इस दौरान भी उनका लंड अपना काम करता रहा और मैं भी उनका साथ चूतड़ उठा उठा के देती रही. एक पल रुक के कस के मेरी चुचिया मसलते हुए वो बोल रहे थे,

ज़ोर ज़ोर से मेरी जान तुम तुम बहुत अच्छी हो. तुम्हारी हर बात जो तुम कहो, जो तुम चाहो मैं सब करूँगा, डार्लिंग आइ लव यू, सो मच. मेने भी कस के उन्हे चूमते हुए कहा, देन लव मी हार्ड और फिर क्या था उन्होने दूने जोश से चोदना चालू कर दिया. तब तक किचेन से किसी बरतन के गिरने की आवाज़ आई. वो एक पल के लिए ठिठक से गये. मैं उन्हे फिर से अपनी ओर खींच कर नीचे से चूतड़ उचका कर बोली, "जाने दो डार्लीग कोई बिल्ली होगी. हमारी तुम्हारी झूठी थाली चाट रही होगी. करो ना और ओह ओह.." और फिर वो दुबारा. हम दोनो इस तरह गुथम गुथा थे कि अगर शायद कोई बगल मे भी खड़ा होता तो हमारे उपर कोई असर नही होता. कुछ देर बाद उन्होने मुंझे बहो मे बाँधे बाँधे, सेड पॉज़ मे कर लिया. मेरे दोनो पैर फैले हुए और वो तो खुद तो पूरी ताक़त से पेल ही रहे थे, मेरे चूतड़ पकड़ के मुझे भी कस कस के अपनी ओर खींच रहे थे. काफ़ी देर तक इसी तरह चुदाई करते हुए हम दोनो साथ साथ झाड़ गये और उसी पॉज़ मे एक दूसरे की बाहो मे सो भी गये.

क्रमशः……………………………………

शादी सुहागरात और हनीमून--29

gataank se aage…………………………………..

mujhe baad me laga ki, mujhse kitani badi galati ho gayi.

kamare me sirph main aur rajani bache the.

thi tak daravaje pe ye najar aye. subah se do baar jhank gaye the, lekin unki bhabhiya baithi thi isaliye himmat nahi padi. lekin abhi sirph rajani thi isaliye,pahale to unhone bahar se hi ishare kiye ek do baar , mujhe upar kamare me ane ke. aur thodi der baad unki aur himmat badhi to kamare me andar aa gaye. lekin jaise hi wo andar ghusne ko hue meri ek jethani, ( vahi jinhone chalak daroga ki tarah mujhse sab kuch kabul karava liya tha). aa ke mere paas baith gayi. bechare daravaje pe hi raphu chakkar ho gaye. thodi der tak to main baithi rahi phir mene apni un jethani ji se kaha ki mujhe kuch kam yad aa gaya hai, jara upar apne kamare se ho ke ati hu. muskara ke wo boli jao.

main sidhiyo pe chadhi hi thi ki wo samane sidhiyo par hi upar mere paas ate hi unhone mujhe baahoe bhinch liya aur kas ke apne sine se daba ke mere hontho pe ek jabaradst puchchkychpachchak thi tak niche se sidhiyo se rajani ki avaj ayi, " bhabhi" wo to aise jhatake jaise kisi bille ko malai pe muh marate pakad liya gaya ho. mene hi baat banaai aur unhe pakade pakade kaha, ankh me ek phuk aur mariye, abhi nikala nahi. unhone ishara samajh ke meri palako ko khol ke ek baar phuka. ankh ki kirakiri nikalane ke naam peankh me to kuch tha nahi. ha un ke phuk marane se jarur kirakiri hone lagi. wo bechare nirash ho ke upar kamare me chale gaye aur main niche sidhiyo perajani ne ched kar pucha,

"bhabhinikala ki nahi." mene bhi usi tarah dviarthi dhmg se javab diya, " dalane ke to tumane pahale hi tok diya to nikalega kaise." aur use kas ke bhinch liya. usne mera kam bigada tha to main use kaise chodati, mene uske top me sidhe andar hath daal diya aur bra ko uchka ke sidhe uske urojo ko daboch liya. khub mulayam, ruyi ke phahe jaise, choti choti lekin uske kishor ubhar, kas ke ubhar rahe the. masalate huye mene pucha, bol kya baat hai.

niche kuch aurate ayi thi, mujhe muh dikhayi ke liye bulaya tha. lamba ghunghat kadh ke main pahunch gayi.

muh dikhayi ke baad dubara upar jane ka saval hi nahi tha. abhi rasoyi chune ki rasam honi thi. is rasm me dulhan khane baneti hai, balki ban rahe khane me kalchul chala deti hai. is tarah wo ghar ke kam kaj me hissa lena shuru kar deti hai aur dulhan se bahu banane ki disha me ye mahatvapurn kadam hota hai. jo bhi khane wo 'baneti' hai,

use usko apne dulhe ke sath sath khane hota hai, jisase mane jata hai ki unka prem pakka hoga. uski 'banaai' har cheej dulhe ke liye khani jaruri hai.

meri saas ne mujhe kichen me bhija , nanado ke sath. vaha anjali ke sath sath meri majhali nanad bhi thi. mene socha ki shayad ek kadahi me kalchul chalani hogi, par un dono ne to mujhse har bartan me kalchul chalavayi aur anjali ne ankh nachaake kaha bhabhi aaj aap ko bhaiya ko ye sab khilane hoga.

us samay to main nahi samajhi, par jab dulari ek bade se thal me khane nikal ke le ayi aur us ke sath main sidhi pe chadhi to mujhe sara khel samajh me aa gaya. piche piche anjali bhi thi. ye mujhe malum tha ki ye khane ke mamale me thode 'phiniki' hai. lekin jab se main sasural me ayi thi meri har nanad khas taur pe anjali ye batati rahati thi ki bhaiya ko ye nahi achcha lagta wo nahi achcha lagta (pyor vegetarian, aur ti totalar to ghar ka har adami batata rahata tha, mere mayake ki adato se ekdam alag). lekin kuch cheeje ekadam ' no no ' thi unke liye. agar unke khane ki koyi'nigetiv vish list' ho to ye sara khane usi tarah baanaa gaya tha aur wo sari ' no no' cheejem, mujhse chulavayi gayi thi. mere mathe pe to jade me pasine aa gaya. ye sab cheeje unhe khilani hongi aur n khilaya to meri ankho me ansu nech rahe the.thi tak ham daravaje pe pahunch gaye the. daravaja khula to wo tii pe koyi vidiyo dekh rahe the aur unhone use jhat se band kar diya.mene pahale to badi style se apne anchal se,

unke muh pe ek jhoka diya aur dulari se kaha ki thali tebal pe rakh do . khane ke baad main bagal ke kichen me rakh dungi. bahar ka daravaja khula rahega, tum usi or se aa ke le jane. uske nikalate hi mene daravaja band kar diya.

pahale to uneko dikhate hue badi ada se mene ek stripar ki tarah apni sadi utar di.

phir unke paas jake, unki god me baith ke mene kaha ki aaj mene rasoi chui hai.

main aap ko apne hath se khilaungi. lekin meri ek shart hai tum koira matalab hai aap ko sab khane padega. ha main apaki ankh band kar dungi. wo mujhe baaho me baandh ke bole manjur, lekin meri bhi ek shart balki do shart hai. pahali to aaj se tum,

mujhe 'tum' kahogi aur dusari tum mujhe apne hath se hi nahi apne hontho se bhi khilaogi aur mere hath ek dam ajad honge chahe jo bhi kuch karane ke ke liye.

manjur, hans ke mene kaha aur unki bhi ti shart utar di aur unki ankho pe patti baandh di. un ka hath pakad ke main dainig tebal pe le ayi aur kursi pe baitha diya. main bhi unki god me baith gayi aur khane ka thal apni or khinch liya.

pahale to mene apne gulabi honth halke se unke hontho pe rakh diye aur phir kas ke ek chummi le li. phir unke honth khinch kar mene apne galo pe rakhe, phir apni thuddi pe aur phir blouse se bahar chalakate rasile joban pe. jab tak unke honth mere joban ka svad chakhane me biji the, mene, apne hontho me ek kaur bane ke rakha aur unka sar upar kar ke sidhe unke hontho ke beech. pahale unhone hontho ka svad chakha phir khane ka. thodi der me hi unka ling bhi khada ho ke laga raha tha unka shart aur mera petikot phad ke andar ghus jayega. kabhi mere honth unke hontho ko khane thama dete aur kabhi khud unke honth gapak lete. isi beech jab unke honth mere urojo ka svad chakh rahe the mene jor se pucha, kyo kaisa lag raha hai, wo bole bahut achcha. aur svad mene apne joban unke hotho pe pres kar ke pucha, (mere antarman ko lag raha tha ki shayad koyi bahar khada ho ham logo ka haal chal jaanane ke liye aur baad me pata chala ki mera shak sahi tha),

wo khub khush hoke bole bahut achcha, bahut svadishht. unke hath sath mere urojo ka svad lena me vyast the.. isi beech lagta hai koi aisi cheej jo unhe sakht naapasand ho mere hontho se unke muh me pahunch gayi, aur unke chehare pe naapasandagi ka bhav ekadam pal bhar ke liye gujar gaya aur wo thode thithak se gaye (is mamale me wo badeunke man me jo ku ch bhi hota, wo unke chehare pe jhalak jata.). main samajh gayi aur thodi der liye ke khilane rok ke mene kas ke unhe apni baaho me bhar liya aur lagi kas kas ke chumane, unka hath khud pakad ke mene apne bubs pe daba diya. agali baar jab mene kaur liya to mene chalaki ki jyada hissa mene khud khaya aur thoda hissa sirph naam karane ko apne hontho se unke muh me diya. par unke age kiski chalaki chalati. unhone mere muh me jibh daal ke muskarate huye wo bhi nikal liya aur gapak kar gaye. isase mujhe ek aayidiya sujha, nanado ki chal ka mukabala karane ka.

mene tay kiya ki jo mujhe chailemj diya gaya hai, main use imanedari se ne sirph pura karungi balki usase bhi jyada karungi. main 'sab kuch' uneko khilaungi aur adhe se bhi jyada.

main ne unke hontho ko apne gaal ka svad diya aur wo ne sirph chum rahe the balki mera gaal apne hontho se daba ke kas ke chus bhi rahe the, chubhala bhi rahe the aur halke se dant bhi laga dete. main un ka sar pakad ke kan me dhire se kahati, ab dusara gaal lekin unke muh ko apne ras bhare mast kishor uroj ke upar laga deti. wo to bas mare khushi kekabhi chumat, kabhi chusate kabhi kas ke kaat lete.

isi beech main khane ke kaur ko apne dant se katati, kuchati, muh me chubhalati,

apne mukh ras me lisedati aur phir unka chehara utha ke apne hath se kas ke unka gaal dabati jaise hi unke honth khulate, mere honth unke hontho se chipak jate aur main unke hontho ke beech kaur daal deti ya phir kucha, chubhalaya, mere mukh ras se lithada, lisada kaur apne jibh ke sang unke muh mm puri takat se thel deti. phir to wo khane ke sath wo meri jibh ko bhi kas ke chusate. agar kabhi uankhi jibh mere muh ke pakad me aa jati to main bhi vahi karati, jaise meri yoni unke mote sakht ling ko kas ke bhinch leti thi, vahi satakar mera muh unki jibh ka karata. aur khane ke sath jab unka hath mere joban chedate to wo bhi uchak ke unka sath dete aur sath me unke phanaaphanete ling pe main kas ke apne sexy chutad ragad deti. jyadatar khane to unhone hi khaya aur ek baar bhi bina ne nukur ke. yaha tak ki jo kuch bacha khucha tha, katoriyo ke kinere pe laga tha, wo sab bhi ungali se kaanch kunch kar, unke muh me apni ungali daal ke chata diya. khane me unka hath to laga nahi tha ha unke hontho ko mere hontho ne achchi tarah chat chut ke saph kar diya.

sath jude kichen me thali rakh ke bahar ka daravaja khol ke jab main andar akar phir se unke god me baithi to main thi tak bra petikot me ho chuki thi. mujhe itane achcha lag raha tha ki main bata nahi sakati.sasural me ek tarah se ye main pahali baralekin jis tarah se inhone mera sath diya sach me aise pati ke liye main kuch bhi kar sakati thi. unke ankho pe se patti kholane ke pahale, mene kas kas ke do chummi li sidhe unke hontho pe. patti kholane ke sath mene wo film bhi an kar di jo wo dekh rahe the.

wo blu film thi lekin ekdam alag. ek hani mun pe gaye kapul ki aur ek dam riyal lag raha tha hotel me kisi hiden kaimare se khinchi gayi thi kyo ki sare shat ek hi egml se liye gaye lagate the. pati use ched raha tha tang kar tha, lag raha tha dono kuch der se chalu the. wo uske mamme masalata, ling laga ke ragadata aur wo bahut kahati to thoda sa daal ke ruk jata. wo bechari vyakul thi, tadap rahi thi, chutad patak rahi thi. wo bolati karo ne, plij aur ne tadapao, daal do pura andar tak. wo uske nipals pinch kar ke puchata kya daal dum. wo bechari phir araj karati, are daal do ne andar tak vahi vahi.

wo aur chedata. bethi ho ke wo boli,

"are daal do ne apne lund kyo tadapa rahe ho."

"kaha" usne phir bhi nahi shuru kiya.

"are kyo tadapate ho ag laga ke are chod do meri bur, pel do apne lund kas ke meri chut me chodo kas kas ke." (wo meri or dekh ke muskaraye aur kas ke meri chunchi daba di. ab tak ham dono bhi usi halat me pahunch gaye the jis halat me parde par ke kapul the).

"le le le mera mota mast lund le apni chut me, chuda kas ke" aur ye kah ke kas ke usne lund pel diya.

"de raja de chod mujhe, chod chod kas kas ke chod de meri bur" masti se ab usaki bhi halat kharaab thi aur wo bol bol ke, chutad uchal ke chudava rahi thi. idhar inhone bhi apni ungali meri chut me daal ungali se hi ghachaghach chudayi chalu kar di thi.

unka lund bhi kas ke mere chutad ki dararo ke beech daba sar patakh raha tha.

masti me aa ke apni patni ke joban utha ke, jaise chailemj karate huye bola, ( jaise kaimare ki or dikha raha ho) " are kitane mast mamme hai mere mal ke, kisi ke ho nahi sakate."

"are mere mal ke mammo ke age kuch bhi nahi hai teri vali ke." usi tarah mere mammo ko use dikhate huye wo bole aur apne joban ki ye tariph sun khushi se mene apni rasili chunchi unki or badha di aur unhone kach kacha ke kaat liya. thi tak udhar TV pe, wo upar ho gayi thi aur apne pati ke lund ke upar chadh ke khachakhach chod rahi thi. aur sath me bol bhi rahi thi, ha chod mujhe aur kas ke ham, pel de lund apne jad tak, aur wo bi niche se kabhi uske mamme pakad ke kabhi kamar pakad ke, apne hips utha ke chod raha tha. kuch der baad lekin usako chedate hue ti vi me uske pati ne dhakke dhime kar diye balki beech beech me rok hi deta tha. us aurat ki to halat kharaab ho rahi thi. (aur, halat meri hi kaun achchi thi.

chunchiyo ki kas ke ragadan masalan, meri kasi mast chut me ghachaghach jati unki ungaliya aur kabhi kabhi to unka amgutha mere klit ko kas ke ragad deta tha).

utejit ho ke wo apne pati ki chati pe apni chunchiya ragad ke boli,

"are chod ne puri takat se. kya baki takat apni bahano ke liye bacha rakhi hai."

idhar meri bhi ungaliyo ne unke lund ke tope pe se chamada saraka diya tha. unke supade ko bhinch ke apne chutad se unke lund ko kas ke daba ke ragad ke main bhi bol uthi,

"are ye kya ungali se chod rahe ho. chodane hai to isse chodo. ise kya meri nanado ke liye bacha rakha hai." phir kya tha agale hi pal baaho me utha ke unhone mujhe palang pe lita diya aur remote se film band karte bole,

"baki film baad me raat me. abhi hamari film, manjur." hans ke main boli manjur ,

lekin unke lund ko do tihayi pe daba ke main boli, abhi itane hi, pura aaj raat me manjur. aur hans ke wo bole manjur.

agale hi pal wo mere andar the.

phir to meri chunchiyo ko masalate huye, meri kamar pakad ke kas kas ke dhakke lagate, unhone jabardast chudayi chalu kar di. aur niche se main bhi sath de rahi thi,

pure josh se. jab wo kas ke apne mota lund pelate to main bhi niche se puri takat se apne chutad uchalati, unka lund meri chut ke andar ragadata hua jata to meri chut bhi use kas ke bhinch leti. aaj main bhi kas kas ke saram chod unke sath bol rahi thi,

ha raja ha aur jor sepelo ne kas ke. aur meri avaj sun ke kas ke wo mujhe daboch lete,

meri chunchiyo ko masal dete kachakacha ke kaat lete. thodi hi der me wo lund,

supade tak nikal lete aur jab main masti se bilbilane lagati to wo phir mere chutad pakad ek baar me hi pura ka pura pel det aur main dard se chikh uthati. kabhi main chikhati,

kabhi main sisakati, kabhi kas kas ke chutad patakati. ham dono ne kas ke ek dusare ko apni baaho me baandh rakha tha, baki sari duniya se bekhabar. tabhi mujhe yad aya ki kichen ka bahar ka daravaja to mene khol diya tha, thali le jane ke liye, lekin kichen se bed roo ka daravaja mene sirph uthagamya tha. tabhi mujhe laga, shayad daravaje ki phamk khuli si hai aur koyi jhank raha hai. mujhe laga shayad dulari hai.

thali uthane ayi hogi aur tabhi unhone mera dhyan apni or khincha aur bola, dalu.

mene kas ke unhe apni or khincha aur boli ha raja ha daal do apne lund, do ne pura,

bahut maja aa raha hai aur unhone kas ke, meri chunchi pakad, hachak ke chodane chalu kar diya. aur main bhi chutad utha utha ketabhi meri kanekhiyo ne dekha shayad anjali bhi hai dulari ke sathaaur mere pair kaimchi ki tarah unke hips pe band gaye .mene kas ke unki pith pe apne nekhun gada diye, aur unke kan me boli, darling tum bahut achche ho ai lav yu. unhone bhi mera chehara utha ke khub jor se kaha darling ai lav yu darling ai lav yu aur sekado chummi mere chehare pe le dale. is dauran bhi unka lund apne kam karata raha aur main bhi unka sath chutad utha utha ke deti rahi. ek pal ruk ke kas ke meri chuchiya maslate hue wo bol rahe the,

jor jor se meri jan tum tumabahut achchi ho. tumhari har baat jo tum kaho, jo tum chaho main sab karunga, darling i love you, so much. mene bhi kas ke unhe chumate huye kaha, den lav mi hard aur phir kya tha unhone dune josh se chodane chalu kar diya. thi tak kichen se kisi baratan ke girane ki avaj ayi. wo ek pal ke liye thithak se gaye. main unehe phir se apni or khinch kar niche se chutad uchka kar boli, "jane do darlig koyi billi hogi. hamari tumhari juthi thali chat rahi hogi. karo ne aur oh oh.." aur phir wo dubara. ham dono is tarah gutham gutha the kiagar shayad koyi bagal me bhi khada hota to hamare upar koi asar nahi hota. kuch der baad unhone mumjhe baho me baandhe baandhe, sed poj me kar liya. mere dono pair phaile hue aur wo to khud to puri takat se pel hi rahe the, mere chutad pakad ke mujhe bhi kas kas ke apni or khinch rahe the. kaphi der tak isi tarah chudayi karate hue ham dono sath sath jhad gaye aur usi poj me ek dusare ki baaho me so bhi gaye.

kramashah……………………………………


raj..
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Re: कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और हनीमून

Unread post by raj.. » 12 Nov 2014 04:47

शादी सुहागरात और हनीमून--30

गतान्क से आगे…………………………………..

फोन की घंटी से मेरी नींद खुली. तब मुझ याद आया कि मेने इन्हे कहा था कि भाभी को फोन बुक कर देंगे. मैं उसी तरह उठी. भाभी तो अपनी स्टाइल मे चालू हो गयी, लेकिन मेने उन्हे रोकते हुए अपना काम बताया. कल संजय और सोनू चौथी ले के आने वाले थे, मेने उनसे कहा कि कुछ मेरा 'समान', उन दोनो के साथ भिज दीजिएगा.

उन्होने ये बताया कि रीमा भी मुझसे मिलने की ज़िद कर रही थी तो वो भी कल संजय और सोनू के साथ आएगी. उनसे बात ख़तम कर के मैं कबार्ड के उस दूसरे सीक्रेट खाने की ओर बढ़ी, जिसके खोलने का कोड मेरी बर्थ डेट के साथ मेरी फिगर थी. उसमे जो वीडियो कैसेट हम देख रहे थे वैसे ही दर्जन भर से भी ज़्यादा वो तो मैं समझ गयी कि क्या है लेकिन साथ मे 10*12 आडियो कैसेट भी थे. उन्हे मेने उठाया तो सारे के सारे जेवनार गीत, गारी गीत, लड़की वालो की ओर से गाली मैं समझ गयी तो ये बात है, ये भी जनाब की पसंद है. मेने एक कैसेट निकाला किसी तारो बानो का था और हेडफोन मे लगा के सुनना शुरू किया ये ऐसे वैसे लोक गीत नही थे, एक दम चमेली भाभी और दुलारी के स्टॅंडर्ड के. एक से एक शुद्ध गालिया लेकिन मेरा तो काम बन गया था रात के गाने के लिए. 5*6 गाने मेने सुने फिर उसे रख के कबार्ड बंद कर दिया.

मेने घड़ी की ओर देखा साढ़े पाँच बाज चुके थे. इसका मतलब कि एक घंटे से उपर मैं सो गयी. वो अभी भी सो रहे थे. तभी दरवाजे पे ख़त खाट हुई. झट से कपड़े पहन के मैनें दरवाजा खोला. जेठानी जी थी. मेने उनसे कहा कि अंदर आ जाए लेकिन वो बोली कि नही नीचे कुछ लोग आए है. वो सिर्फ़ बोलने आई थी कि मैं थोड़ी देर मे जब नीचे आउ तो उनके पास किचेन मे आ जाउ. ये कह के वो नीचे चली गयी, और मैं तैयार होने शीशे के सामने गयी तो मेरा सिंदूर काजल सबऔर बिंदी तो दिख ही नही रही थी. गाल और होंठो पे सिर्फ़ उनके काटने और चूसने के निशान नही थे बल्कि निचला होंठ तो हल्का सा सूज भी गया था. उससे ज़्यादा बदतर हालत मेरे उरोजो की थी. लेकिन मेने आज उन्हे ढँकने छिपाने की कोई कोशिश नही की. सिर्फ़ माँग मे भर के सिंदूर लगाया, जो थोड़ा बाहर भी था, काजल कुछ ठीक कर के नई बिंदी माथे पे लगाई, और नीचे चल दी. रास्ते मे सीढ़ियो पे रजनी मिली बोली, भैया को बुलाने जा रही हू. मुझे देख के लग रहा था कि अपने सैया से चुदवा के आ रही है लेकिन अब न तो मुझे उसकी लाज थी और न परवाह.

बरांडे मे मेरी सास कुछ औरतो के साथ बैठी थी. मेने पहले सासू जी के फिर सबके पैर छुए. सास जी ने मुझे अपने पास खींच के बैठा लिया और मेरे माथे की ओर देख के बोली, लग रही हो सुहागन. एक औरत ने बोला, अरे सिर्फ़ माँग से ही नही पूरी देह से. सासू जी ने मुझे अपने पास खींच लिया और बोली हे नज़र मत लगाओ मेरी बहू को.साफ साफ लग रहा था कि दिन मे मेरी ननदो ने जो कुछ भी किया और बाद मे जो हुआ, उसका पता सबको लग गया है. तब तक वो सीढ़ियो से उतरे, और उनेको देखते ही उनकी भाभियो ने चिढ़ा चिढ़ा के उनकी दूरगत बना दी, माथे पे काजल और सिंदूर और पूरे गाल पे जगह जगह गाढ़े लिपस्टिक के निशान और मैं भी अपनी मुस्कान रोक नहीपाई, जब मेने उनके टी शर्त पे अपनी बिंदी देखी. तब तक गुड्डी ने आ के बोला कि किचेन मे मेरी जेठानी मुझे बुला रही है. मैं सास जी से बोल के चल दी.

जेठानियो के चेहरे पे मुस्कान थी और ननदो के चेहरे एक दम बुझे बुझे.

मुझे लगा कि अब उन्हे मान लेना चाहिए कि उनके भैया, अब पूरी तरह मेरे सैया है.

किचेन मे मेरी जेठानी अकेली थी. गुड्डी मुझे किचेन मे छोड़ के चली गई. उन्होने मुस्करा कर बोला,

"मैं चाय बने रही हू पियोगी,"

"अरे नेकी और पूछ पूछ बहुत कस के चायस लग रही है दीदी." हंस के मेने कहा.

"आज तुमसे कुछ खास बात बतानी है, तुम्हारे 'उनके' बारे मे और तुम्हारी ननदो के बारे मे." चाय चढ़ाती हुई वो बोली.

कौन सी बात है क्या है जो वो बताने जा रही है मैं सोच मे पड़ गयी.

बेड रूम के बाद दुल्हन किचन पे ही कब्जा करती है. और एक बात और, बेड रूम के बाद अगर औरतो को कही प्राइवसी मिलती है तो वो किचन ही है और इसलिए कितनी कॉन्स्पिरेसी, प्लॅनिंग या 'बिचिंग' (सास बहू या कोई भी सीरियल देख लीजिए), गप्पे या जिसे हम लोग 'पंचायत' कहते है, यही होती है.

तो किचन मे जब जेठानी जी ने चाय चढ़ाते हुए ये कहा कि मुझे 'उनके' और मेरी ननदो के बारे मे कुछ बताने वाली है तो मैं चौंक गयी. मुझे लगा कि कही इनके और मेरी किसी ननद के बीच कोई 'चक्कर वक्कर' कौन हो सकती है वो कही अंजलि तो नही चिपकी रहती है हरदम या.. कुछ और. उनकी चुप्पी और जी को हलकान किए हुए थी.

"बोलिए ने दीदी क्या बताने वाली थी इनके और" मेने परेशान हो के पूछा.

"मैं सोच रही थी कहाँ से और कैसे शुरू करू, जब मैं शादी के बाद यहाँ आई या जो मेने सुना और देखा है चलो कही से भी शुरू करते है." चाय की पत्ती डालते वो बोली. बात उन्होने आगे बढ़ाई, "तुमको तो मालूम ही है वो कितने पढ़ाई मे तेज है.

बचपन से ही बहुत पढ़ाकू है. वहाँ तक तो कोई बात नही, लेकिन इनकी बहनो ने खास कर जो मझली ननद जी है उन्होने इनको एक दम बच्चा बना के रखा. इसको ये नही अच्छा लगता, वो नही अच्छा लगता और उसके साथ हर दम प्रेशर मे.. अगर किसी इम्तहान मे किसी से भी एक नंबर भी कम आ जाए तो एक दम चिढ़ा कर, ऐसे व्यंग बोल कर वो काफ़ी कुछ बस अपने मे, अपनी दुनिया मे. तो जो मैं शादी के बाद आई तो मुझे लगता था अकेला देवर है मज़ाक करेगा, चिढ़ाएगा, लेकिन वो तो इतने शर्मीले और अपनी दुनिया मे खोए. तो फिर मेने ही पहल की, खूब चिढ़ाया, मज़ाक,

हँसी और फिर कुछ दिनो मे हम लोग दोस्त हो गये. लेकिन तब भी अगर हम लोग हँसते रहते और ननद जी आ जाती तो वो एक दम चुप हो जाते. उस पर भी वो कोई ना कोई ताने,

व्यंग बान. फिर उमर के साथ बच्चा बड़ा होता है, उसके शरीर की मन की ज़रूरते बदलती है, इसको स्वीकार करना चाहिए, लेकिन वो एक दम उसे बच्चे की तरह और वो भी उसी के तरह एकदम"

"बबुआ सिंड्रोम बबुआ की तरह जैसे कोई इमेज हो और दूसरा अपने को उसी इमेज मे कन्फर्म करने की कोशिश करे, एक तरह का पिगमैनलिया एफेक्ट" मैं बोली..

"एक दम सही, तुमने ठीक समझा, लेकिन उसके बड़े नेगेटिव असर भी होते है जो उपर से पता नही चलते," चाय प्याले मे छानति वो बोली. कयि बार वो पढ़ता रहता लेकिन मन कही और, मैं मज़ाक मे ही कहती भी, कि अरे जो सोचना हो सोच लो, फिर पढ़ो, थोड़ा घूम आओ बाहर मिलो जुलो, और एक दिन तो बहुत ही वो मझली ननद जी ने उसके तकिये के नीचे से कोई जासूसी किताब निकली, कोई कर्नल रंजीत है उनकी, किताब के कवर पे बिकिनी पहने एक लड़की बनी थी और इसी से उनका माथा ठनक गया था,

मुझे अभी तक उसका नाम याद है 'नाइट इन लंडन' तो वो किताब ननद जी ने उस तरह रख दी कि ऑफीस से जब लोग आए तो नज़र उस पे पड़े और उन की लाने मैं उस के कमरे मे गयी तो उन की हालत खराब बेचारे घबडाये. मुझे बहुत गुस्सा आया मैं चुपके से गयी और वो किताब मेने हटा दी."

चाय मे मुझे बिस्कट डिप करते हुए देख जेठानी जी खुश होके बोली अरे तुम भी और उन्होने भी चाय मे बिस्कुट डाल दिया. फिर उन्होने बात आगे जारी रखी,

"कुछ दिन बाद जब मझली ननद जी की शादी हो गयी, तो जैसे बंद कमरे मे कोई खिड़की रोशन दान खोल दे, ताजी हवा का झोंका आने लगे और फिर उन्होने बाकी चीज़ो मे भी खुल के इंटरेस्ट लेना शुरू कर दिया, हम लोग हँसते मज़ाक करते,

पिक्चर देखते इसका पढ़ाई पे भी और अच्छा असर ही पड़ा, क्यो कि अब जो वो काम करते थे, ध्यान बँटता नही था. जब मझली ननद जी ससुराल से आई लौट के" हंस के जेठानी जी ने और चाय डाली और बोली, "मेने देखा कि इनके पाजामे पे दाग लगा है.

मैं समझ गयी थी कि अब देवर जी जवान हो गये है लेकिन फिर मेने सोचा कि कही ननद जी इसे देख ले और इसी के लिए उन्हे तो मेने झट से उसे ले जा के खुद धुल दिया तुम सोच नही सकती थी कि ये कितने शर्मीले रहे होंगे, रवि जो है ना उससे भी ज़्यादा पहली होली मे तो मैं तो पहले सोच रही थी कि अकेला देवर है लेकिन मेने ही पहल की और खूब जम के रगड़ा, लेकिन उस दिन से मुझसे तो झिझक ख़तम हो गयी."

हम दोनो की चाय ख़तम हो गयी थी.

"लेकिन तुम्हारे साथ आज जो उन लोगो ने किया ना 'रसोई छूने' के नाम पे, मुझे बहुत बुरा लगा. और तेरे साथ क्या किया तो अपने भाई के साथ ही ना" वो फिर बोली.

"छोड़िए ना जाने दीजिए लेकिन आख़िर शर्त तो मेने ही जीती, उन्होने आख़िर सब कुछ"

"मालूम है मुझे तुम मुझे दीदी कहा करो." हंस के वो बोली, फिर कहने लगी, "अरे तेरी शादी मे भी तो इन लोगो का बस चलता तो कितने भान भच्चर करने वाली थी "लेकिन फिर चुप हो गयी.

"बताइए ना दीदी" उत्सुकता वस मेने पूछा,

"अरे जाने दो छोड़" मेरी कूरीोसिटी जगा के वो चुप हो गयी थी.

"बताइए ना दीदी आप कैसी दीदी है जो छोटी बहन से छुपा रही है."

"नही छुपाने की कोई बात नही है लेकिन..सच बताऊ उस की किस्मत बड़ी अच्छी है अच्छा छोड़ ये बता चाय और बनाऊ, पिएगी."


raj..
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Re: कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और हनीमून

Unread post by raj.. » 12 Nov 2014 04:48

जाड़े की शाम और चाय कौन मना करता मेने कहा,

"हाँ दीदी नेकी और पूछ पूछ. लेकिन किसकी किस्मत बड़ी अच्छी है"

"अरे और किसकी तेरे मर्द की" मेरा नाक पकड़ के वो बोली और चाय चढ़ाते हुए बात बढ़ाई,

"अरे किस्मत अच्छी है मेरे देवर की तभी तो तेरी ऐसी प्यारी, अच्छी बीबी मन पसंद मिली. चल बताती हू. हुआ ये कि जैसे इनका सेलेक्शण हुआ ना ये सबके लिए गिफ्ट लाए और मुझसे कहा, भाभी ये सब आपके आशीर्वाद से हुआ है बताइए आपको क्या चाहिए.

मेने हंस के कहा एक प्यारी सी देवरानी. वो शरमा गया तो मेने चिढ़ाया, अरे नौकरी तो मिल गयी है, अब छोकरी चाहिए कि नही. और वो तो मिलेगी ही ये बताओ कैसी चाहिए. हम दोनो बहुत खुले थे. देवर जी बोले मेरी बस दो पसंद है, पहली जब वो दीवाल से सत के मूह के बल खड़ी हो तो जो चीज़ सबसे पहले दीवाल छुए वो उसकी नाक ना हो (मेने अपने उन्नत उरोजो की ओर देखा और देख के शरमा गयी),

और मैं चाहता हू 'कॅच देम यंग'. मेने तुरंत बोला एवमस्तु. वो तो सितंबर मे ट्रैनिंग के लिए मसूरी चले गये और जब तुम्हारे यहाँ से फोटो और प्रपोज़ल आया तो मुझे एक दम लग गया कि तुम उसकी ड्रीम गर्ल हो. वो फोटो मेने उसके पास मसूरी भेज दिया. प्रपोसल तो कयि आए थे लेकिन मझली ननद अपने देवर की किसी साली को टिकाने के चक्कर मे पड़ी थी. इनसे शायद दो महीने छोटी थी, डॉक्टरी पढ़ी है,

लेकिन देखने मे एक दम 'मॅनचेस्टर'. अब मैं चक्कर मे क्योंकि मेने तो देवर जी को वचन दे दिया था और किसी हालत मे तो मैं उससे शादी होने नही दे सकती थी. जब मेने बहुत ज़ोर दिया तो ननद जी कहने लगी कि अगर आप इतना कह रही है तो चल के हम सब देख आते है. अब मैं और परेशान, कि देखने तो एक बहाने होगा, वो तो जाएगे नही और फिर सारी ननदे मिल के लौट के सासू जी को क्या पट्टी पढ़ाएँ. क्यो कि मझल ननद ने तो अपने देवर के ससुराल वालो को गॅरेंटी दे दी थी. अब मैं परेशान, फिर मुझे आइडिया आया. मेने तुम्हारी भाभी से मिल के ये सेट किया कि वो तुम्हे लेके मसूरी चली जाए, क्यो कि एक बार अगर उस ने तुम्हे पसंद कर के हाँ कर दी तो फिर किसी की मज़ाल नही थी कि और तुम को एक बार देखने के बाद मेरे देवर की मज़ाल नही थी कि, ना करता. वो तो एक दम दीवाना हो गया था एक दम पक्का करने के लिए,

मेने और तुम्हारी भाभी ने अगले दिन बात कर के रिंग सेरेमनी भी करवा दी. उसकी लड़की पसंद करने की बात और रिंग सेरेमनी दोनो की बात मेने एक साथ सासू जी को बताई और 'तुम्हारे चाहने वाले ने' भी अपनी मा से तुम्हारी इतनी तारीफ की कि..फिर जब ननद जी का फोन आया कि तुम्हे देखने के लिए वो आ रही है तो मेने कहा कि हाँ मैं आपको फोन करने ही वाली थी बुलाने के लिए. जब वो आई तो उन्हे सासू जी ने ही बताया कि शादी ना सिर्फ़ तय हो गयी है बल्कि अब हम लोगो सिर्फ़ रस्म करने जाने है. लेकिन अब वो बिचारी करती तो क्या. " मुस्करा के वो बोली.

तब तक चाय उबलने लगी थी. मेने उतार के निकाला. अब मैं जेठानी जी की 'पंखी' हो गयी थी.

उन्होने बिस्कुट निकाल के मुझे दिए और हम दोनो डिप करने लगे. मैं पूछने से नही रोक सकी, " और दीदी अंजलि ये अंजलि का क्या चक्कर है और ये अपने जीजा से थोड़ा."

गीला बिस्कुट अपने मूह मे डालते हुए वो बोली," अरे बड़ी तेज निगाहे है तेरी. कोई चक्कर नही है, ये थोड़ा बनाती है अपने को और मझली ननद जी की आड़ मे और शह मिली हुई थी. फिर ये अपने को ज़रा अलग समझती है, अगर किसी ने खुल के गाली या मज़ाक कर दिया तो बना लेती है. जहाँ तक देवर जी का सवाल है तो वो उससे थोड़े ही और जस्ट बड़े है इसलिए रोल मॅडेल की तरह लेकिन तुमने ननदोयि जी वाली बात सही पकड़ी. हुआ ये कि वो पहली होली मे आए दो साल पहले की बात है, ये उस समय 8 मे पढ़ती थी. अश्विनी की हालत तो तुम देख ही रही हो. लेकिन उसी को क्यो दोष दू वो तो मर्द है और उपर से जीजा साली का रिश्ता और पहली होली. पहले तो इसी ने चढ़ाया उसे.

उसने छेड़ा, साली जी होली मे डलवाना पड़ेगा तो ये आँख नाचा के बोली, अरे जीजू डालने वाले डाल देते है पूछते नही.और यही नही, शुरुआत भी उसी ने की. अपने जीजा की माँग मे पूरा सिंदूर की तरह गुलाल भर दिया. फिर अश्विनी ने शुरू आत कर दी. पहले तो गाल पे रगड़ा और फिर रंग लगाने के बहाने, ये स्कर्ट ब्लाउस मे थी, तो उसके ब्लाउस मे हाथ डाल दिया और सीधे उसका जोबन कस के मसल दिया. वो छितकती रही लेकिन उसने खूब देर तक उसके जोबन मिंजे. होली मे कौन साली बुरा मनती है, लेकिन ये तो नखड़ा ज़्यादा था और मैं तो कहुगी नेंदोई जी की भी ग़लती थी. उन्होने घायल शेरनी को छोड़ दिया. गुस्सा तो वो हो ही रही थी ज़रा थोड़ा और ज़बरदस्ती कर के पटक के चोद देते. एक बार लंड का स्वाद चख लेती तो जो फनाफनाति फिरती है ना तो वो एक दम दुरुस्त हो जाती. तो उसकी दवा यही है कि उसके लिए बस एक मोटे हथियार का इंतज़ाम होना चाहिए."

मुझे लगा कि मेरी जेठानी जी एकदम मेरी भाभी की तरह है, सोच मे भी, ज़ुबान मे भी और मेरा ख्याल करने मे भी.

"अरे उसकी चिंता मत करिए कल मेरा भाई आ रहा है ना संजय वो इसका इलाज कर देगा. फिर मेने उनको संजय और सोनू का कुहबार के पहले उसको छेड़ने का किस्सा (काफ़ी सेन्सर कर के) सुनाया.

भाभी ने फिर वो किस्सा शुरू कर दिया कि मुझे देखने के बाद उन्होने क्या कहा था.

वो बोली कि तुम्हारे उपर तो वो फिदा था ही, लेकिन जिस तरह से तुम्हारी मम्मी और भाभी का और खास कर तुम्हारी भाभी. वो कहता था कि कितने खुले मिज़ाज की है एकदम दिल खुश हो गया तुम लोगो से मिल के. तब तक हम लोगो ने देखा कि 'वो' किचन के दरवाजे पे खड़े " भाभी चाय वाय मिलेगी." उन्होने हंस के पूछा.

"एकदम चाय भी मिलेगी" और मेरी ओर इशारा करके बोली, "वाय भी मिलेगी."

"अरे अब तक जिस वाय से काम चलाते थे, वही ले लीजिए ना," मेने उनकी भाभी की ओर इशारा करते हुए बोला. वो कुछ बोलते उसके पहले मेने उन्हे खुश खबरी सुनाई,

"आपके लिए एक खुश खबरी.कल आपके लिए 'वाय' आ रही है संजय और सोनू के साथ शाम को भाभी ने बताया था फोन पे."

"अरे रीमा, मेरी साली ये तो तुमने बहुत अच्छी खबर सुनाई." तब तक बाहर से मेरी ननदो की आवाज़ सुनाई पड़ी. मेने जेठानी जी से कहा,दीदी मैं चलती हू.

"ठीक है एक डेढ़ घंटे मे ज़रा अच्छी तरह सज के तैयार हो जाना. पड़ौस की भी औरते रहेगी. आज गाने मे एक दम इन लोगो की ऐसी की तैसी करनी है. छत पे ही होगा,

8 बजे से. तुम अपने कमरे मे ही रहना वही से मैं तुम्हे बुलवा लूँगी."

"ठीक है दीदी." कह के मैं उपर अपने कमरे मे चली आई.

क्रमशः……………………………………
शादी सुहागरात और हनीमून--30

gataank se aage…………………………………..

phone ki ghanti se meri neend khuli. thi mujh yad aya ki mene inhe kaha tha ki bhabhi ko phone buk kar denge. main usi tarah uthi. bhabhi to apni style me chalu ho gayi, lekin mene unhe rokate hue apne kam bataya. kal sanjay aur sonu chauthi le ke ane vale the, mene unse kaha ki kuch mere 'saman', un dono ke sath bhij dijiyega.

unhone ye bataya ki rima bhi mujhse milane ki jid kar rahi thi to wo bhi kal sanjay aur sonu ke sath ayegi. unse baat khatam kar ke main kabard ke us dusare sikret khane ki or badhi, jiske kholane ka kod meri barth det ke sath meri phigar thi. usme jo vidiyo kaiset ham dekh rahe the vaise hi darjan bhar se bhi jyadawo to main samajh gayi ki kya hai lekin sath me 10*12 adiyo kaiset bhi the. unhe mene uthaya to sare ke sare jevaner git, gari git, ladaki valo ki or se galimain samajh gayi to ye baat hai, ye bhi janeb ki pasand hai. mene ek kaiset nikala kisi taro bano ka tha aur hedaphone me laga ke sunene shuru kiyaye aise vaise lok git nahi the, ek dam chameli bhabhi aur dulari ke standard ke. ek se ek shuddh galiya lekin mera to kam ban gaya tha raat ke gane ke liye. 5*6 gane mene sune phir use rakh ke kabard band kar diya.

mene ghadi ki or dekha sadhe panch baj chuke the. isaka matalab ki ek ghmte se upar main so gayi. wo abhi bhi so rahe the. tabhi daravaje pe khat khat huyi. jhat se kapade pahan ke mainen daravaja khola. jethani ji thi. mene unse kaha ki andar aa jaye lekin wo boli ki nahi niche kuch log aye hai. wo sirph bolane ayi thi ki main thodi der me jab niche aum to unke pas kichen me aa jaum. ye kah ke wo niche chali gayi, aur main taiyaar hone shishe ke samane gayi to mera sindur kajal sabaaur bindi to dikh hi nahi rahi thi. gaal aur hontho pe sirph unke katane aur chusne ke nishan nahi the balki nichala honth to halka sa suj bhi gaya tha. usase jyada badatar halat mere urojo ki thi. lekin mene aaj unhe dhankane chipane ki koyi koshish nahi ki. sirph mamg me bhar ke sindur lagaya, jo thoda bahar bhi tha, kajal kuch thik kar ke neyi bindi mathe pe lagayi, aur niche chal di. raste me sidhiyo pe rajani mili boli, bhaiya ko bulane ja rahi hu. mujhe dekh ke lag raha tha ki apne semya se chudava ke aa rahi hai lekin ab n to mujhe usaki laaj thi aur n paravah.

baraande me meri saas kuch aurato ke sath baithi thi. mene pahale sasu ji ke phir sabake pair chuye. saas ji ne mujhe apne paas khinch ke baitha liya aur mere mathe ki or dekh ke boli, lag rahi ho suhagan. ek aurat ne bola, are sirph mamg se hi nahi puri deh se. sasu ji ne mujhe apne paas khinch liya aur boli he najar mat lagao meri bahu ko.saph saph lag rah tha ki din me meri nanado ne jo kuch bhi kiya aur baad me jo hua, usaka pata sabako lag gaya hai. thi tak wo sidhiyo se utare, aur uneko dekhate hi unki bhabhiyo ne chidha chidha ke unki duragat bane di, mathe pe kajal aur sindur aur pure gaal pe jagah jagah gadhe lipstik ke nishanaaur main bhi apni muskan rok nahipaai, jab mene unke ti shart pe apni bindi dekhi. thi tak guddi ne aa ke bola ki kichen me meri jethani mujhe bula rahi hai. main saas ji se bol ke chal di.

jethaniyo ke chehare pe muskan thi aur nanado ke chehare ek dam bujhe bujhe.

mujhe laga ki ab unhe man lena chahiye ki unke bhaiya, ab puri tarah mere semya hai.

kichen me meri jethani akeli thi. guddi mujhe kichen me chod ke chali gai. unhone muskara kar bola,

"main chay bane rahi hu piyogi,"

"are neki aur puch puch bahut kas ke chayas lag rahi hai didi." hans ke mene kaha.

"aaj tumase kuch khas baat batani hai, tumhare 'unke' bare me aur tumhari nanado ke bare me." chay chadhati huyi wo boli.

kaun si baat hai kya hai jo wo batane ja rahi h,m main soch me pad gayi.

to ye rahi dastan 'dusari raat' ki. kya bate batayi meri jethani ne kaise raat me gane hua aur kaisi gujari tisari aur chauthi raat ye jaanane ke liye agale bhag ka intajar karemaur thi tak ise padh ke kaise lagi ye grup me apni ray jarur likhe.

Bed roo ke baad dulhan kitchen pe hi kabja karati hai. aur ek baat aur, bed roo ke baad agar aurato ko kahi privacy milati hai to wo kitchen hi hai aur isaliye kitani conspiracy, planning ya 'bitching' (saas bahu ya koyi bhi siriyal dekh lijiye), gappe ya jise ham log 'panchayat' kahate hai, yahi hoti hai.

to kitchen me jab jethani ji ne chay chadhate huye ye kaha ki mujhe 'unke' aur meri nanado ke bare me kuch batane vali hai to main chaunk gayi. mujhe laga ki kahi ineke aur meri kisi nanad ke bich koyi 'chakkar vakkar' kaun ho sakati hai wo kahi anjali to nahi chipaki rahati hai haradam ya.. kuch aur. unki chuppi aur ji ko halkan kiye huye thi.

"boliye ne didi kya batane vali thi ineke aur" mene pareshan ho ke pucha.

"main soch rahi thi kaha se aur kaise shuru karu, jab main shadi ke baad yaha aayi ya jo mene sune aur dekha hai chalo kahi se bhi shuru karate hai." chay ki patti dalate wo boli. baat unhone aage badhayi, "tumko to malum hi hai wo kitane padhai me tej hai.

bachapan se hi bahut padhaku hai. vaha tak to koyi baat nahi, lekin inki bahano ne khas kar jo majhali nanad ji hai unhone inko ek dam bachcha bane ke rakha. isako ye nahi achcha lagta, wo nahi achcha lagta aur uske sath har dam pressure me.. agar kisi imtahan me kisi se bhi ek number bhi kam aa jaye to ek dam chidha kar, aise vyang bol kar wo kaafi kuch bas apne me, apni duniya me. to jo main shadi ke baad aayi to mujhe lagta tha akela devar hai majak karega, chidhayega, lekin wo to itane sharmile aur apni duniya me khoye. to phir mene hi pahal ki, khub chidhaya, majak,

hansi aur phir kuch dino me ham log dost ho gaye. lekin thi bhi agar ham log hansate rahate aur nanad ji aa jati to wo ek dam chup ho jate. us par bhi wo koyi ne koyi tane,

vyang baan. phir umar ke sath bachcha bada hota hai, uske sharir ki man ki jarurate badalati hai, isako sveekar karane chahiye, lekin wo ek dam use bachche ki tarah aur wo bhi usi ke tarah ekdam"

"babua syndrome babua ki tarah jaise koyi image ho aur dusara apne ko usi image me confirm karna ki koshish kare, ek tarah ka pigmainliya effect" main boli..

"ek dam sahi, tumane thik samajha, lekin uske bade negative asar bhi hote hai jo upar se pata nahi chalate," chay pyale me chaneti wo boli. kayi baar wo padhata rahata lekin man kahi aur, main majak me hi kahati bhi, ki are jo sochane ho soch lo, phir padho, thoda ghum ao bahar milo julo, aur ek din to bahut hi wo majhali nanad ji ne uske takiye ke niche se koyi jasusi kitaab nikali, koyi karnal ranjit hai unki, kitaab ke cover pe bikini pahane ek ladaki bani thi aur isi se unka matha thanek gaya tha,

mujhe abhi tak usaka naam yaad hai 'night in london' to wo kitaab nanad ji ne us tarah rakh di ki office se jab log aye to najar us pe pade aur un ki laneta main us ke kamare me gayi to un ki halat kharaab bechare ghabadaye. mujhe bahut gussa aya main chupake se gayi aur wo kitaab mene hata di."

chay me mujhe biscuit dip karate huye dekh jethani ji khush hoke boli are tum bhi aur unhone bhi chay me biscut daal diya. phir unhone baat age jari rakhi,

"kuch din baad jab majhali nanad ji ki shadi ho gayi, to jaise band kamare me koyi khidaki roshan daan khol de, taaji hava ka jhonka ane lage aur phir unhone baki cheejo me bhi khul ke intrest lena shuru kar diya, ham log hansate majak karate,

picture dekhate isaka padhai pe bhi aur achcha asar hi pada, kyo ki ab jo wo kaam karate the, dhyan bantata nahi tha. jab majhali nanad ji sasural se aayi laut ke" hans ke jethani ji ne aur chay dhali aur boli, "mene dekha ki ineke pajame pe daag laga hai.

main samajh gayi thi ki ab devar ji javan ho gaye hai lekin phir mene socha ki kahi nanad ji ise dekh le aur isi ke liye unhe to mene jhat se use le ja ke khud dhul diya tum soch nahi sakati thi ki ye kitane sharmile rahe honge, ravi jo hai ne usase bhi jyaada pahali holi me to main to pahale soch rahi thi ki akela devar hai lekin mene hi pahal ki aur khub jam ke ragada, lekin us din se mujhse to jhijhak khatam ho gayi."

ham dono ki chay khatam ho gayi thi.

"lekin tumhare sath aaj jo un logo ne kiya ne 'rasoi chune' ke naam pe, mujhe bahut bura laga. aur tere sath kya kiya to apne bhai ke sath hi ne" wo phir boli.

"chodiye ne jane dijiye lekin akhir shart to mene hi jiti, unhone akhir sab kuch"

"malum hai mujhe tum mujhe didi kaha karo." hans ke wo boli, phir kahane lagi, "are teri shadi me bhi to in logo ka bas chalata to kitane bhan bhachchar karane vali thi "lekin phir chup ho gayi.

"bataiye ne didi" utsukata vas mene pucha,

"are jane do chod" meri curiosity jaga ke wo chup ho gayi thi.

"bataiye ne didiap kaisi didi hai jo choti bahan se chupa rahi hai."

"nahi chupane ki koyi baat nahi hai lekin..sach bataum us ki kismat badi achchi haiachcha chod ye bata chay aur baneum, piyegi."

jade ki shaam aur chay kaun mane karata mene kaha,

"ha didi neki aur puch puch. lekin kiski kismat badi achchi hai"

"are aur kiski tere mard ki" mera naak pakad ke wo boli aur chay chadhate huye baat badhayi,

"are kismat achchi hai mere devar ki tabhi to teri aisi pyari, achchi bibi man pasand mili. chal batati hu. hua ye ki jaise inka selekshan hua ne ye sabake liye gift laye aur mujhse kaha, bhabhi ye sab apke ashirvad se hua hai bataiye apako kya chahiye.

mene hans ke kaha ek pyari si devarani. wo sharama gaya to mene chidhaya, are neukari to mil gayi hai, ab chokari chahiye ki nahi. aur wo to milegi hi ye batao kaisi chahiye. ham dono bahut khule the. devar ji bole meri bas do pasand hai, pahali jab wo divaal se sat ke muh ke bal khadi ho to jo cheej sabase pahale divaal chuye wo usaki naak ne ho (mene apne unnet urojo ki or dekha aur dekh ke sharama gayi),

aur main chahata hu 'catch them young'. mene turant bola evamastu. wo to sitambar me training ke liye masuri chale gaye aur jab tumhare yaha se photo aur prapojal aya to mujhe ek dam lag gaya ki tum usaki dream girl ho. wo photo mene uske paas masuri bhij diya. praposal to kayi aye the lekin majhali nanad apne devar ki kisi saali ko tikane ke chakkar me padi thi. inese shayad do mahine choti thi, doctari padhi hai,

lekin dekhane me ek dam 'manchester'. ab main chakkar me kyonki mene to devar ji ko vachan de diya tha aur kisi halat me to main usase shadi hone nahi de sakati thi. jab mene bahut jor diya to nanad ji kahane lagi ki agar aap itane kah rahi hai to chal ke ham sab dekh aate hai. ab main aur pareshan, ki dekhane to ek bahane hoga, wo to jayege nahi aur phir sari nanade mil ke laut ke sasu ji ko kya patti padhayem. kyo ki to majhal nanad ne to apne devar ke sasural valo ko guarantee de di thi. ab main pareshan, phir mujhe idea aya. mene tumhari bhabhi se mil ke ye set kiya ki wo tumhe leke masuri chali jaye, kyo ki ek baar agar us ne tumhe pasand kar ke ha kar di to phir kisi ki majal nahi thi ki aur tum ko ek baar dekhane ke baad mere devar ki majal nahi thi ki, ne karata. wo to ek dam divane ho gaya tha ek dam pakka karane ke liye,

mene aur tumhari bhabhi ne agale din baat kar ke ring ceremony bhi karava di. usaki ladaki pasand karane ki baat aur ring ceremony dono ki baat mene ek sath sasu ji ko batayi aur 'tumhare chahane vale ne' bhi apni ma se tumhari itani tariph ki ki..phir jab nanad ji ka phone aya ki tumhe dekhane ke liye wo aa rahi hai to mene kaha ki ha main apako phone karane hi vali thi bulane ke liye. jab wo ayi to unhe sasu ji ne hi bataya ki shadi ne sirph tay ho gayi hai balki ab ham logo sirph rasm karane jane hai. lekin ab wo bichari karati to kya. " muskara ke wo boli.

thi tak chay ubalane lagi thi. mene utar ke nikala. ab main jethani ji ki 'pankhi' ho gayi thi.

unhone biscute nikal ke mujhe diye aur ham dono dip karane lage. main puchane se nahi rok saki, " aur didi anjali ye anjali ka kya chakkar hai aur ye apne jija se thoda."

gila biskut apne muh me dalate huye wo boli," are badi tej nigahe hai teri. koyi chakkar nahi hai, ye thoda baneti hai apne ko aur majhali nanad ji ki ad me aur shah mili huyi thi. phir ye apne ko jara alag samajhati hai, agar kisi ne khul ke gali ya majak kar diya toh bane leti hai. jaha tak devar ji ka saval hai to wo usase thode hi aur jast bade hai isaliye rol madel ki tarah lekin tumane nanadoyi ji vali baat sahi pakadi. hua ye ki wo pahali holi me aye do sal pahale ki baat hai, ye us samay 8 me padhati thi. ashvini ki halat to tum dekh hi rahi ho. lekin usi ko kyo doshh du wo to mard hai aur upar se jija sali ka rishta aur pahali holi. pahale to isi ne chadhaya use.

usne cheda, sali ji holi me dalavane padega to ye aankh necha ke boli, are jiju dalane vale daal dete hai puchate nahi.aur yahi nahi, shuruatabhi usi ne ki. apne jija ki maang me pura sindur ki tarah gulal bhar diya. phir ashvini ne shuru at kar di. pahale to gaal pe ragada aur phir rang lagane ke bahane, ye skart blouse me thi, to uske blouse me hath daal diya aur sidhe usaka joban kas ke masal diya. wo chitakati rahi lekin usne khub der tak uske joban minje. holi me kaun sali bura maneti hai, lekin ye to nekhada jyaada thaaur main to kahugi nendoyi ji ki bhi galati thi. unhone ghayal sherani ko chod diya. gussa to wo ho hi rahi thi jara thoda aur jabaradsti kar ke patak ke chod dete. ek baar lund ka svad chakh leti to jo phanaaphaneti phirati hai ne to wo ek dam durust ho jati. to usaki dava yahi hai ki uske liye bas ek mote hathiyar ka intajam hone chahiye."

mujhe laga ki meri jethani ji ekdam meri bhabhi ki tarah hai, soch me bhi, juban me bhi aur mera khyal karane me bhi.

"are usaki chinta mat kariye kal mera bhai aa raha hai ne sanjay wo isaka ilaj kar dega. phir mene uneko sanjay aur sonu ka kohabar ke pahale usako chedane ka kissa (kaafi censor kar ke) suneya.

bhabhi ne phir wo kissa shuru kar diya ki mujhe dekhane ke baad unhone kya kaha tha.

wo boli ki tumhare upar to wo phida tha hi, lekin jis tarah se tumhari mummy aur bhabhi ka aur khas kar tumhari bhabhi. wo kahata tha ki kitane khule mijaj ki hai ekdam dil khush ho gaya tum logo se mil ke. thi tak ham logo ne dekha ki 'wo' kitchen ke daravaje pe khade " bhabhi chay vaay milegi." unhone hans ke pucha.

"ekdam chay bhi milegi" aur meri or ishara karake boli, "vaay bhi milegi."

"are ab tak jis vaay se kaam chalate the, vahi le lijiye ne," mene unki bhabhi ki or ishara karate huye bola. wo kuch bolate uske pahale mene unhe khush khabadi suneyi,

"apke liye ek khush khabadi.kal apke liye 'vaay' aa rahi hai sanjay aur sonu ne ke sath sham ko bhabhi ne bataya tha phone pe."

"are rima, meri sali ye to tumane bahut achchi khabar suneyi." thi tak bahar se meri nanado ki avaj suneyi padi. mene jethani ji se kaha,didi main chalati hu.

"thik hai ek dedh ghante me jara achchi tarah saj ke taiyaar ho jane. padaus ki bhi aurate rahegi. aaj gane me ek dam in logo ki aisi ki taisi karani hai. chat pe hi hoga,

8 baje se. tum apne kamare me hi rahane vahi se main tumhe bulava lundgi."

"thik hai didi." kah ke main upar apne kamare me chali aayi.

kramashah……………………………………