तीन घोड़िया एक घुड़सवार compleet

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rajaarkey
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Re: तीन घोड़िया एक घुड़सवार

Unread post by rajaarkey » 03 Nov 2014 01:26

आरती ने जल्दी से अपनी साडी कमर तक उठा कर बेड के किनारे मूतने के अंदाज मे बैठ गई और अजय बेड के नीचे बैठ कर अपनी भाभी की मस्तानी भोसड़ी का रस जल्दी जल्दी चूसने लगा, दो मिनिट मे ही आरती अपनी गंद हिलाने लगी तब अजय ने अपनी भाभी को टाँगे बेड के नीचे झुलाकर उसे उल्टा कर दिया और अपनी भाभी की मोटी गंद को फैलाकर चाटने लगा, तभी आरती बोली अजय हा भाभी, अजय मेरी गंद तुम अपनी मम्मी की मोटी गंद समझ कर चाट, तुम्हे बहुत मज़ा आएगा, अजय ठीक है भाभी अब अजय ने अपनी भाभी के मोटे चूतादो को दोनो हाथो से पूरी तरह फैला कर कल्पना करने लगा कि वह अपनी मम्मी की मोटी गंद को पूरी नंगी करके फैला फैला कर चाट रहा है, वाकई अजय का मज़ा डॅबल हो गया और वो कस कस कर अपनी भाभी की गंद अपनी मम्मी की मोटी गंद समझ कर चाटने लगा, दो तीन मिनिट मे ही आरती कहने लगी कि वह झड़ने वाली है तो अजय ने अपना लंड निकाल कर अपनी भाभी की चूत मे पीछे से पेल दिया और कस कस कर धक्के मारते हुए कहने लगा ओह मम्मी तेरी चूत मारने मे बड़ा मज़ा आ रहा है आह आह ओ मम्मी आह, उधर आरती भी अपनी चूत की जबरदस्त ठुकाई से कहने लगी और चोद और चोद बेटा अपनी मम्मी को फाड़ दे अपनी मम्मी की मस्तानी चूत को, खूब चोद बेटा अपनी मम्मी को, कस कस के अपनी मम्मी की चूत मार और इसी के साथ आरती झड़ने लगी और अजय भी अपनी भाभी को अपनी मा समझ कर चोद चोद के झाड़ गया. दोनो फटाफट दुरुस्त होकर आरती अपने कमरे मे चली गई

दोपहर को गीता अपने बेड पर पड़े पड़े अजय के लंड से चुदने के लिए तड़पने लगी, सुभह की अजय के मोटे लंड की वो चुभन अपनी गंद और चूत मे उसे रह रह कर महसूस हो रही थी और अब वह किसी भी तरह अपने बेटे का लंड अपनी चूत मे लेने के लिए तरसने लगी और सोचने लगी क्या अजय उसे चोदेगा लेकिन कैसे, फिर उसने सोचा अजय खुद उसे चोदना चाहता है अगर अजय को थोड़ा मोका दिया जाय तो वह ज़रूर अपनी मा की चूत मारने को तैयार हो जाएगा, बस मुझे अजय को अपनी नंगी चूत के दर्शन करवाने का मोका देना होगा, अगर अजय ने उसकी नंगी चूत को करीब से देख लिया तो वह ज़रूर अपनी मा की चूत मारने को तैयार हो जाएगा, गीता ने सोचा वैसे भी वह अपनी मा की पॅंटी को कैसे सूंघ सूंघ के अपना लंड हिला रहा था, मतलब वह अपनी मा की चूत को सूंघना और चाटना भी चाहता है, यह विचार गीता के मन मे आते ही उसकी चूत मे एक भयानक खुजली होने लगी और वह आँखे बंद करके उस सीन की कल्पना करने लगी की कैसे उसका अपना बेटा उसकी नंगी चूत को सूंघ सूंघ के चाट रहा है. गीता इन सब बातो को सोच सोच कर अपने बेटे के नाम की एक जोरदार मूठ मार चुकी थी और फिर अपने बेटे के मोटे लंड से चुदने के ख्वाब देखती सो गई..

अगले दिन विजय तीन दिन के लिए आउट ऑफ सिटी चला गया, अजय के पापा ऑफीस जा चुके थे अजय सोफे पर बैठा बैठा अपनी मम्मी, भाभी और अपनी बहन रश्मि को घर का काम करते हुए देख रहा था, कभी उसकी भाभी आरती अपने मोटे दूध हिलाती हुई इधर से उधर होती, कभी उसकी बहन रश्मि अपने मोटे चुचे और मस्ट गोरी गोरी पिंदलिया को अपने छ्होटे से स्कर्ट जो घुटनो के उपर तक होता था से अपनी बहन की उठती जवानी को निहारता और कभी उसकी मम्मी गीता अपने मोटे मोटे फैले हुए चूतड़ मतकाते हुए घर के काम कर रही थी, अजय सोफे पर न्यूज़ पेपर लेकर बस चोरी चोरी उन तीनो मस्तानी घोड़ियो को देख देख के अपना लंड मसल रहा था, भाभी आरती और बहन रश्मि उसके पास से जब भी गुजरती तो एक छुदास से भरी हुई स्माइल दे देती और अजय भी अपना लंड मसलते हुए मुस्कुरा देता, तभी रश्मि अजय के सामने बैठ कर फर्श पर पोछा लगाने लगी, उसके बैठ कर पोंच्छा लगाने से उसकी मस्त मखमली जंघे और वाइट पॅंटी मे कसी उसकी मस्त फूली हुई बुर का उभार अजय को साफ दिखाई देने लगा और अजय अपना लंड मसल्ते हुए अपनी बहन की जाँघो की गहराई मे अपनी नज़रे गढ़ाए हुए अपनी बहन की उठती हुई जवानी का रस अपनी आँखो से पीने लगा, रश्मि ने जब देखा की अजय उसकी जाँघो की जड़ो मे देख कर अपना लंड मसल रहा है तो रश्मि के चेहरे पर मुस्कान फैल गई, तभी रश्मि को जाने क्या सूझा कि वह उठकर बाथरूम मे गई और थोड़ी देर मे वापस आकर फिर पोंच्छा लगाने लगी अजय ने जैसे ही रश्मि की जाँघो की जड़ो मे देखा उसका लंड बुरी तरह झटके मारने लगा जिसे देख रश्मि ने अजय की तरफ आँख मार कर मुस्कुराने लगी. दरअसल रश्मि बाथरूम मे जाकर अपने चूतादो पर कसी हुई पॅंटी को उतार कर केवल स्कर्ट मे ही बाहर आगाई और अपनी दोनो जाँघो को अजय की ओर करके पोच्छा लगाने लगी जिससे अजय को अपनी बहन का फूला हुआ पूरा भोसड़ा नज़र आने लगा और वह अपनी बहन की गुलाबी चूत और उसकी फूली हुई फांके जो कि अब विपरीत दिशा मे फैल कर पूरे रसीले भोस्डे को खोले हुए थी, अजय का लंड झटके मार रहा था, कुछ देर बाद रश्मि पोच्छा लगाकर हस्ती हुई अजय के सामने से चली गई, और फिर बालकनी मे जाकर अपने हाथ रलिंग पर टिका कर खड़ी हो गई जिससे उसकी मोटी मोटी गंद पीछे की तरफ उठ गई, अजय ने देखा मम्मी बाथरूम मे कपड़े धो रही है वह चुपचाप अपनी दीदी के पास जाकर खड़ा हो गया और अपना हाथ रश्मि की स्कर्ट के अंदर घुसा कर उसकी मोटी मोटी गंद और गंद के बीच की गहराई मे अपना हाथ फैरने लगा, रश्मि मुस्कुराते हुए रोड पर देखती हुई अपने भाई से अपनी गंद मसलवाने का आनंद लेने लगी, कुछ ही देर मे अजय ने पीछे से ही अपनी दीदी की चूत के छेद मे अपनी एक उंगली घुसा कर दबाने लगा, रश्मि का चेहरा लाल शुर्ख हो गया और उसकी चूत से रस रिस्ता हुआ उसकी जाँघो के सहारे बाते हुए उसके घुटनो तक आने लगा, रश्मि ने एक बार अपने भाई के लंड को कस कर दबा दिया और फिर अपनी चूत का पानी अपने हाथो की उंगली से पोंछती हुई अजय को अपनी उंगली दिखाने लगी अजय ने झट से अपनी दीदी की चूत रस से भीगी उंगली को अपने मूह मे लेकर चाट लिया, रश्मि मुस्कुराते हुए अंदर भाग गई, और भाभी के पास किचन मे जा कर बाते करने लगी.

rajaarkey
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Re: तीन घोड़िया एक घुड़सवार

Unread post by rajaarkey » 03 Nov 2014 01:26

तभी गीता ने बाथरूम से अजय को आवाज़ दी बेटा ज़रा इधर आओ, अजय बाथरूम मे आकर हाँ मा क्या है, गीता बेटे ये धुले हुए कपड़े छत पर सूखने के लिया डाल देना बस दो चार और धो दू दो मिनिट रूको, गीता अपनी साडी को अपने घुटनो के उपर तक करके कपड़े धो रही थी और उसकी मोटी चुचियो से उसका पल्लू हटा हुआ था और ब्लाउज के दो बटन खुले हुए थे, जिससे गीता की आधी से ज़्यादा मोटी मोटी चुचिया ब्लाउज से बाहर निकली आ रही थी, अजय अपनी मा की मस्तानी जाँघो और मोटी मोटी चुचियो को देख कर वही मा के सामने बैठ गया और अपनी आँखे फाड़ फाड़ के अपनी मा के गदराए बदन को देखने लगा, गीता जब कपड़ो को ब्रश से घिसती तो उसकी मोटी मोटी चुचिया पूरी तरह हिलने लगती थी और अजय के मूह मे पानी आने लगा, गीता अपने बेटे की नज़रो को समझ चुकी थी और वह खड़ी होकर अपनी साडी और ब्लाउज भी निकाल कर बाल्टी मे झुक कर गलाने लगी अजय अपनी मा को वाइट कलर की ब्रा और पेटिकोट मे देख कर उसका लंड झटके देने लगा, फिर गीता ने अपने पेटिकोट को अपनी मोटी जाँघो तक चढ़ा कर अजय के सामने बैठ गई, अजय की नज़र पेटिकोट के अंदर तक का जयजा लेने लगी और उसे अपनी मा की चूत की झलक मिलने लगी, मतलब वह पॅंटी नही पहने थी गीता ने साइड मे पड़ी अपनी पॅंटी उठाई और धो कर अजय के सामने ही बाल्टी मे रख दिया अजय बड़े गोर से अपनी मा के अधनंगे जिस्म का रस अपनी आँखो से पीने लगा, गीता बेटे क्या देख रहा है, अजय मा मैं देख रहा हू मेरी प्यारी मा कितना काम करती है, हा बेटे वो तो है, पर बेटा इन सब कामो से मेरी कमर और हाथ पैरो मे काफ़ी दर्द होने लगता है और अपने और एक अंगड़ाई लेते हुए गीता ने ब्रा मे क़ैद अपनी मोटी मोटी चुचियो को बिल्कुल उभार दिया और अजय की ओर देखने लगी, अजय ने अपनी मा की ब्रा मे क़ैद मादक गोलाईयो की ओर देखते हुए मा तुम मुझसे कह दिया करो मैं तुम्हारा पूरा बदन दबा दूँगा तब तुमहरे बदन का सारा दर्द ख़तम हो जाएगा, गीता बेटा मैं तो कब से अपने बदन को तुझसे दब्वाना चाहती हू लेकिन तू कहाँ अपनी मा का ख्याल करता है, अजय नही मा आज से रोज रात को पहले मैं तुम्हारा पूरा बदन अच्छे से दबाया करूँगा उसके बाद ही तुम सोना, पर बेटे मैं तो चाहती हू कि तू दोनो टाइम मेरे बदन को अच्छे से दबा दिया कर ताकि मेरे बदन मे जो दर्द उठने लगा है वो जल्दी ही ख़तम हो जाए, क्यो नही मा आज से मैं दोनो टाइम तुम्हारे पूरे बदन को अच्छी तरह दबा कर तुम्हारे बदन का सारा दर्द दूर कर दूँगा, और गीता ने कपड़े देते हुए अजय को कहा ले बेटा इनको छत पर डाल आ मैं अब नहा लेती हू, ठीक है मा, अजय जैसे ही खड़ा हुआ उसके खड़े लंड को देख कर गीता सिहर गई, और अजय जल्दी से कपड़े लेकर अपना लंड मसलते हुए छत की ओर चला गया,

क्रमशः......................


rajaarkey
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Re: तीन घोड़िया एक घुड़सवार

Unread post by rajaarkey » 03 Nov 2014 01:28

Teen Ghodiya Ek Ghudsawaar--7

gataank se aage...................

Tabhi Geeta ki aawaj sun kar ajay kichan se bahar aakar sophe par baith gaya aur kitab padhne laga, uski bhabhi kichan me khana banane lagi aur geeta bhi aakar sophe par baith gai. Geeta ne TV on kar ke TV dekhne lagi. Geeta ne pink color ki sadi aur usi rang ki matching wala lo cut sleevless blauj pahna hua tha blauj itna jheena tha ki uske andar ki saphed rang ki bra ke cup aur dori aaram se najar aa rahi thi, geeta ke chatiyo se uska aanchal thoda sarka hone se uske masal mote mote doodh chalak kar uski gulabi choli phadkar bahar aane ko amada the, geeta ki sadi uski nabhi se char angul neeche badhi hone se uski badi si gahari nabhi saph dikhai pad rahi thi, geeta ke pet par thodi charbi hone ke karan uska gora pet nabhi sahit itna uthav mar raha tha ki achche achcho ke land ko khada hone par majboor kar de. Kamar ke neeche uske phaile huye mote mote chutado aur gudaj moti moti janghe dekh kar har koi yah samaj jaye ki is aurat ko trupt karne ke liye iski dono jangho ke beech aakar tabiyat se kutai karna pade.

ajay apni ma ko kankhiyo se hasrat bhari nigaho se dekhne laga uske jahan me vasna apne shikhar par thi yahi vajah thi ki vah apni ma ko ek gadrai hui mast aurat ki tarah dekhne laga aur apni ma ke gadraye huye mastane badan ko dekh kar sochne laga ki ek bar agar mummy puri nangi hokar mujhse chudwa le to me isko rat bhar nangi kar ke isko humach humach ke chodta rahuga. Ab ajay se raha nahi jar aha tha aur vah apni ma ke gadraye sexy badan ko chune ke liye machalne laga aur apni ma ke bilkul karib aakar uske gale me apna hath dal kar baith gaya, geeta ne bhi useke peeche se hath dal kar apne se chipka liya, ajay ma tum gulabi sadi hi jyadatar pahna karo, geeta bhala vo kyo, ajay ma tum gulabi sadi me bahut sundar lagti ho aur geeta ke gulabi gal ko apne hontho se chum liya, geeta ajay ke gal khichte huye muskurakar bahut badi badi bate karne laga hai, lagta hai mera beta ab bada ho gaya hai, ajay ma me kitna hi bada kyo nah o jau apni ma ke liye to bachcha hi rahunga aur geeta ki moti moti chatiyo me apna muh dal kar unhe apne muh se dabane laga, geeta ke badan se aati khushboo se ajay madhosh hone laga aur geeta ke adhkhule doodh ke katav par apne hoth aur nak ragdne laga, aur uska land bilkul mote dande ki tarah pajame me akad gaya, geeta yah bakhubi janti thi ki ajay bachcha hone ka natak kar ke uske gadraye yovan ka maja le raha hai aur vah khud bahut samay se kisi mast land se chudi nahi thi to use bhi apne bête ki in harkato se ek aseem anand prapt hota tha, aur uski chut jaldi hi apne bête ke sparsh se pani pani hone lagti thi,

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[FONT='Tahoma','sans-serif']ajay apni ma ki nangi peeth aur mote chutado par peeche se hath pherte huye. Ma tumne kya lagaya hai tumhara badan kitna mahak raha hai, geeta bête aurto ke sare sharir se aisi hi khushboo aati hai, ha ma yah khushboo to shungne me bahut achchi lag rahi hai, geeta to bête sungh le na apni ma ke ango ki khushboo, aur ajay ka muh phir apne mote doodh se sata diya, ajay ka land apni ma ki kamar me thokar mar raha tha, geeta bhi ajay ke land ki kathorta ko apni jangho par mehsus kar rahi thi aur uski chut ne uski puri penty ko gila kar diya tha.

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Aarti dopahar ko ajay ke room me jakar kya hua mere dever raja kuch bat bani ya nahi. Ajay apni bhabhi ko apne god me betate huye apni bhabhi ke mote mote gadraye doodh ko dono hatho se masalte huye apni bhabhi ke gore aur gulabi galo ko chumte huye oh bhabhi kya idea diya aap ne aaj to maja aa gaya, kyo dever ji aisa kya ho gaya, are bhabhi agar mummy ne sadi na pahni hoti to aaj mera land khade khade hi uski chut aur gand dono me ghus chukka hota, aur aarti ke doodh ko kas kar daba deta hai, aarti sisiyate huye ajay ke pajame me apna hath dal kar uske land ko masalne lagti hai, matlab dever ji jaisa maine kaha tha tumne vaisa hi kiya, ha bhabhi maina apna khada land seedhe mummy ki moti gand ke chhend me pel diya aur mummy ke age hath lejakar mummy ke mote mote doodh ko apne hatho me bhar liya phir kya hua, phir mummy sisyane lagi aur apni gand ka pressor mere land par dalne lagi phir aage ghum kar usne jaise hi mujhe apne seene se lagaya maine apna land mummy ki me seedhe ada diya mummy mujhe kas kar apne badan se chipkakar mere land ki jubhan apni chut par kaphi der tak mehsus karti rahi phir itne me rashmi aa gai, vah mere raja matlab ek shikari bête ne apni ma ko apne land ke jal me phasa hi liya, ha bhabhi par pata nahi mummy ko chodne ka moka kab milega,